बाप’ ने ‘बेटी’ से मांगा ‘दस’ फीसद ‘बखरा’


‘बाप’ ने ‘बेटी’ से मांगा ‘दस’ फीसद ‘बखरा’

बस्ती। योगीजी सुन और देख लीजिए, भ्रष्टाचार इतना बढ़ गया कि बाप अपने सगी बेटी से कमीषन मांग रहा है, कह रहा है, कि जब तक दस फीसद यानि 3.60 लाख कमीषन नहीं दोगी, तब तक पेंषन की फाइल नहीं भेजूंगा। बेटी, छह साल से पेंषन के लिए बाप/मैनेजर के पास दौड़ती रही, गरीबी का हवाला दिया, हाथ जोड़े, कई बार बाप के सामने रोई भी, लेकिन कलयुगी बाप का दिल अपनी बेटी के लिए नहीं पिघला, बखरा पर अड़ा रहा।। कहा कि चाहें जितना रोओ और चाहें जहां जाओ जब तक बखरा नहीं दोगी, तब तक पेंषन नहीं मिलेगा। थकहारकर बेटी हाईकोर्ट गई, वहां से मैनेजर को दो माह में पेंषन निस्तारण करने का आदेष हुआ। बेटी, कोर्ट का आदेष लेकर खुषी-खुषी यह सोचकर पिता के पास गई कि अब तो पेंषन की फाइल भेजवा देगें। लेकिन पिता ठहरे कलयुगी बाप, उन्होंने हाईकोर्ट का आदेष और बेटी का प्रत्यावेदन दोनों लेने से ही इंकार कर दिया, मजबूरी में बेटी को पंजीकृत डाक से भेजना पड़ा। क्या आप लोग ऐसे बेरहम पिता/मैनेजर देखा होगा, जिसने बेटी को छह साल तक पारिवारिक पेंषन के लिए इस लिए दौड़ाता रहा, क्यों कि बेटी बखरा नहीं दे रही थी। सवाल उठ रहा है, कि जब एक बाप अपनी बेटी के पेंषन के लिए बखरा मांग सकता है, तो अगर सीटीओ और अपर निदेषक पेंषन ने मांग लिया तो कौन सा गुनाह कर दिया।



यह वही बाप हैं, जो कप्तानंगज स्थित मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत फैजुन्नबी के मैनेजर हैं, इनका नाम हाजी मुनीर है। इनकी बेटी का नाम सायरा खातून पत्नी स्व. मोहम्मद बहार षाह है। यह वही हैं, इन्होंने अपने छठें दामाद की नियुक्ति करने के लिए षिक्षक गुलाम को जबरिया बर्खास्त कर दिया। बेटी सायरा खातून ने पिता/मैनेजर को हाईकोर्ट का आदेष की प्रति देते हुए लिखा कि मेरे द्वारा आपके कार्यालय में दो नंवबर 25 को लिपिक को दस्तीतौर पर फ्रेष प्रत्यावेदन प्राप्त करा दिया, लेकिन आप के द्वारा जब एक माह तक प्रत्यावेदन निस्तारित नहीें किया गया तो तब मजबूरी में हाईकोर्ट चली गई, जहां से पांच दिसंबर 25 को एक आदेष जारी हुआ, जिसमें कहा गया कि मैनेजमेंट कमेटी के समक्ष फ्रेष प्रत्यावेदन किया जाए। दो माह के भीतर मैनेजमेंट कमेटी को फेमिली पेंषन मंजूर कर लेती है, तब मैनेजमेंट कमेटी जिला अल्प संख्यक कल्याण अधिकारी को भुगतान की सूचना देगी। इसके पहले बेटी ने प्रधानाचार्य को जो दो नवंबर 25 को प्रत्यावेदन दिया था, उसमें प्रधानाचार्य के द्वारा कहा गया कि मेरे द्वारा कोई आवेदन ही नहीं किया गया, जिसके चलते पेंषन की पत्रावली तैयार करके नहीं भेजी जा रही है। जब कि बेटी का कहना है, उसके द्वारा कई बार प्रत्यावेदन दिया जा चुका। यहां तक खुद मदरसा में जाकर लिपिक अषरफ रजा बेलाल को पेंषन संबधी सारे दस्तावेज दी गई, बावजूद यह कहना कि बेटी के द्वारा प्रत्यावेदन न देना किसी साजिष की ओर इषारा करता है। बेटी ने अपने ही पिता से मानवीय अपील करते हुए कहा कि मेरे पेंषन की पत्रावली षीघ्र निस्तारित की जाए ताकि आपकी प्यारी बेटी/अबला नारी का जीवन निर्वाह हो सके। इसे देखते हुए कहा जा सकता है, कि हाजी मुनीर अली दुनिया के पहले ऐसे पिता होगें, जो अपनी ही बेटी के गुजर बसर का सहारा नहीं बने, बल्कि इन्होंने अपनी बिरादरी और समाज में ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसकी कोई कल्पना तक नहीं कर सकता है। पिता अपने औलाद के लिए न जाने क्या-क्या करते हैं, लेकिन एक पिता हाजी मुनीर भी है, जो अपनी बेटी को पेंषन के लिए छह साल से भटका रहे है। आज बेटी के सामने जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया। बेटी को पेंषन के रुप में लगभग एक मुष्त 36 लाख मिलना। बेटी को इसी 36 लाख में से बखरा के रुप में तीन लाख से अधिक देना है। सवाल, बखरे का नहीं हैं, बल्कि सवाल इस बात हैं, कि दुनिया में ऐसे कितने पिता/मैनेजर होगें जो अपनी बेटी से बखरे कर डिमांड करेगें। अगर यह कमीषन किसी सीटीओ या फिर अपर निदेषक पेंषन के बाबू के द्वारा मांगा जाता तो समझ में आता, लेकिन यहां पर तो बाप ने बेटी से मांगा। हाजी मुनीर अली के बारे में मीडिया पहले भी बहुत कुछ लिख चुकी है। चर्चा का केंद्र भी यह कई बार रहें। पांच दामाद के मामले में इनके खिलाफ आज नहीं तो कल नए षासनादेष के तहत कार्रवाई होनी ही है। समाज इस बात को स्वीकार ही नहीं कर पा रहा है, कि क्या कोई बाप इतना कठोर और लालची भी हो सकता है? हाजी साहब मौका मिले तो अवष्य समाज और अपनी बेटी के बारे में सोचिएगा।

‘फर्जी’ वोटर्स के ‘कटने’ से बढ़ी ‘प्रधानों’ में ‘बेचैनी’

बस्ती। जिन असली/नकली प्रधानों ने फर्जी वोटर्स के सहारे चुनाव जीतने की रणनीति बनाई, उनकी रणनीति फेल होने वाली है। फर्जीवाड़ा करने वाले प्रधानों ने साढ़े छह लाख से अधिक फर्जी मतदाता बना डाले। एक अनुमान के अनुसार फर्जी वोट बनाने के लिए चुनाव जीतने वाले प्रधानों ने बीएलओ और तहसीलों पर लगभग 20 करोड़ खर्च किया। प्रधानों ने यह पैसा जमीन और घर बेचकर नहीं लगाया, बल्कि मनरेगा और ग्राम निधि से कमाए गए, धन को खर्च किया। एक तरह से यह लोग गांव बेचकर इस लिए फर्जी वोट बनाए, ताकि अगली बार फिर गांव को बेचा जा सके। गांव बेचकर असली/नकली प्रधानों ने तो पैसा खूब कमाया, लेकिन इज्जत गंवाया। 1226 में से षायद ही कोई ग्राम पंचायत होगा, जहां के प्रधानों ने वाकई मुखिया जैसी भूमिका निभाया हो। इसके लिए काफी हद तक क्षेत्र पंचायत अध्यक्षों और असली/नकली ब्लॉक प्रधान संघ के अध्यक्षों को जिम्मेदार माना जा रहा है। न प्रधान आईडिएल बन सके और न प्रधान। रही बात असली/नकली प्रधान संघ के अध्यक्षों की तो इनका जिन प्रमुखों से नहीं बना, उसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जिन अध्यक्षों ने आवाज उठाया, वह आवाज अधिक दिन तक नहीं सुनाई दी। प्रधानों ने तो क्षेत्र पंचायतों के खिलाफ एकाध बार आवाज भी उठाया, लेकिन बीडीसी ने तो मानो पांच साल तक मौन ही रहें। हम बात कर रहे थे, फर्जी वोटर्स की। निर्वाचन आयोग और प्रषासन तो चाह रहा है, कि पंचायत चुनाव एसआईआर मतदाता सूची से हो। निर्वाचन आयोग पूरी तरह चाहता है, कि विधानसभा और पंचायत मतदाताओं के बीच जो लगभग साढ़े छह लाख वोटर्स का अंतर हैं, उसे किसी तरह समाप्त किया जाए। इसी लिए बार-बार मतदाता सूची का अंतिम प्रकाषन की तिथि बढ़ाई जा रही है। जानकारों का दावा है, कि निर्वाचन आयोग और प्रषासन भले ही चाहें जितना भारी अंतर को समाप्त करने का प्रयास कर ले, लेकिन 30 फीसद का अंतर तो रहेगा ही, यानि साढ़े चार लाख वोटांे का अंतर रहेगा, यानि साढ़े चार लाख फर्जी वोट होगा ही। इसकी असली तष्वीर छह मार्च और 28 मार्च को सामने आएगा। जब छह मार्च को एसआईआर और 28 मार्च को पंचायत के मतदाता सूची का अंतिम प्रकाषन होगा। निर्वाचन आयोग भी उसी समय निर्णय लेगा कि पंचायत चुनाव किस मतदाता सूची के आधार पर कराया जाए। चुनाव अप्रैल और मई 26 में निर्धारित है। इसी लिए एसआईआर में बढ़ाने और पंचायत में मतदाताओं को घटाने का काम एक साथ पूरे जिले में हो रहा है। देखने वाली बात यह होगी कि इसमें फर्जीवाड़ा करने वाले कितने प्रधान अपने मकसद में सफल होते है। चुनाव चाहें विधानसभा/लोकसभा को हो, चाहे त्रिस्तरीय चुनाव हो, फायदे में हमेषा बीएलओ और तहसील वाले रहते है। जिस तरह फर्जी वोट बनाने का टारगेट प्रधानों का होता है, उसी तरह बीएलओ और तहसील वालों का भी पैसा कमाने का होता। अब तक जो देखा गया, उसमें दोनों अपने मकसद में सफल रहे। पूरी चुनाव व्यवस्था फर्जी वोटर्स के चलते तहस नहस हो जाती है। लोकसभा चुनाव में पूर्व सांसद तक चिल्लाने लगे कि भारी संख्या में फर्जी वोटर्स ने वोट डाले, जिसके चलते चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ। कोई यह न माने कि फर्जी वोट बनाने में सत्ता के लोग ही माहिर होते है। इनसे अधिक विपक्ष के लोग फर्जी वोट बनवाने में सफल होते है।    

‘मेडीवर्ल्ड’ हास्पिटल की जांच ‘सतर्कता’ से कराने की उठी ‘मांग’

बस्ती। पूर्वांचल प्रवक्ता श्रीराजपूत करणी सेना के चंद्रेश प्रताप सिंह ने निदेशक

डब्ल्यू एण्ड पीजी को पत्र लिखकर मेडीवर्ल्ड हास्पिटल की जांच सतर्कता से कराने की मांग की है। लिखे पत्र में कहा गया है, कि रफिउद्दीन पुत्र मोइनुद्दीन खान की एक्स-रे टेक्नीशियन की डिग्री कूटरचित तरीके से रजिस्ट्रेशन कराते समय प्रबंधक संचालक मेडी वर्ल्ड हास्पिटल मनहनडीह निकट टीवी अस्पताल बस्ती ने लगाया था जिसके पत्रों साक्ष्यों के आधार पर निदेशक डब्ल्यू एण्ड पीजी स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार को भी समस्त साक्ष्यों सहित पत्र लिखा गया था। साक्ष्यों को दर किनार करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी बस्ती व उनके अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा कूट रचना करने वाले डॉ प्रमोद कुमार चौधरी को पूर्णतः बचाने का प्रयास किया जा रहा है जो नैसर्गिक न्याय व सुचिता निष्पक्षता के विरुद्ध है।

क्हा कि मेडी वर्ल्ड हास्पिटल मनहनडीह निकट टीवी अस्पताल बस्ती के डाक्टर प्रमोद कुमार चौधरी द्वारा मेरे पत्र लिखने पर मुझपर ही धन दोहन का आरोप लगाया जा रहा हैं, जिससे समाजिक प्रतिष्ठा पर चोट पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। डॉ प्रमोद कुमार चौधरी द्वारा अपने कृत्य को छिपाने की नियत से 16 बिंदुओं का जो जवाब लगाया है। वह पूर्णतः असत्य व निराधार है। डॉ प्रमोद कुमार चौधरी के नाम से जब मेडी वर्ल्ड हास्पिटल मनहनडीह निकट टीवी अस्पताल बस्ती का रजिस्ट्रेशन कराया गया था, तब भी रफीउद्दीन खान की डिग्री का कूटरचना कर लगाया गया। जब मेडीवर्ल्ड हास्पिटल मनहनडीह निकट टीवी अस्पताल का रजिस्ट्रेशन डॉ प्रमोद कुमार चौधरी के भाई प्रवीण चौधरी के नाम था, तब भी रफीउद्दीन खान एक्स-रे टेक्नीशियन की डिग्री कूटरचना कर लगाया गया। रफीउद्दीन खान के नाम का बिना रफीउद्दीन खान के हस्ताक्षर का शपथपत्र भी लगाया गया। जिसकी वैधता दिनांक 27 अक्टूबर 2030 तक है। इसके पहले उक्त हास्पिटल का दो बार रजिस्ट्रेशन हो चुका है। सवाल किया कि डॉ प्रमोद कुमार चौधरी यह क्यों नहीं स्पष्ट करते की उक्त दोनों रजिस्ट्रेशन क्यों और किस कारण निरस्त हुआ?ं काि कि नोडल अधिकारी द्वारा डॉ प्रमोद कुमार चौधरी को हर संभव बचाने का प्रयास किया गया। यह पिछले 15 साल से बस्ती में कार्यरत हैं व विपक्षी दल के सांसद व विधायक के अति करीबी हैं। रफीउद्दीन खान पुत्र मैनुद्दीन खान एक्स-रे टेक्नीशियन के डिग्री का कूटरचना कर लगाए जाने का जांच किसी अन्य संस्था से व गोपनीय जांच कराया जाए। कहा कि डॉ प्रमोद कुमार चौधरी क्रमांक एक पर यह कहना पूर्णतः गलत व निराधार है, कि मेरे द्वारा द्वेष भावना से धन उगाही करने तथा प्रतिष्ठा धूमिल करने के उद्देश्य से पत्र लिखा गया। इनके इस कथन से मेरे सामाजिक जीवन व्यक्तिगत जीवन पर गहरा आघात लगा है। क्रमांक दो पर भी डाक्टर प्रमोद कुमार चौधरी ने लिखा कि पत्र तथ्यों साक्ष्यों के विपरीत बिना असलियत जाने व अर्थोदोहन करने के लिए लिखा गया। डॉ प्रमोद कुमार चौधरी स्वंय बताए रफीउद्दीन खान ने क्यों थाना पुरानी बस्ती में इनके व इनके सहयोगी सहकर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया? सवाल के लहजे में कहा कि नोडल अधिकारी अस्पताल ने मेडी वर्ल्ड हास्पिटल मनहनडीह निकट टीवी अस्पताल बस्ती को विभिन्न तिथियों में तीन बार क्यों नोटिस क्यों दिया? रफीउद्दीन खान पुत्र मैनुद्दीन खान ने मय शपथपत्र इनके विरुद्ध डीएम एवं पुलिस अधीक्षक व मुख्य चिकित्सा अधिकारी बस्ती को प्रार्थना पत्र क्यों दिया?

क्रमांक तीन पर डाक्टर प्रमोद कुमार चौधरी ने लिखा कि मेरा द्वारा इनके विरुद्ध शिकायत करने का अधिकार नहीं है, चूंकि मैं सामाजिक व्यक्ति हूं वर्ष 2003 से 2012 तक हिन्दू युवा वाहिनी बस्ती का महामंत्री संगठन 2012 से 2018 तक भाजपा युवा मोर्चा का उपाध्यक्ष वर्ष 2018 से 2021 तक भाजपा किसान मोर्चा का उपाध्यक्ष व वर्तमान में श्री राजपूत करणी सेना उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल प्रवक्ता व भारतीय किसान यूनियन भानु का बस्ती मंडल प्रवक्ता हूं एक जिम्मेदार नागरिक व सामाजसेवी होने के नाते किसी भी पीड़ित उपेक्षित जिसे न्याय न मिल रहा हो उसको न्याय दिलाना हमारा धर्म व कर्तव्य है। डॉ प्रमोद कुमार चौधरी अपने कुकृत्य कूटरचना को छिपाने की नियत से मुझ पर आरोप लगा रहे हैं, जो कि अन्याय पूर्ण है और हमारे सामाजिक प्रतिष्ठा पर प्रहार है।डॉ प्रमोद कुमार चौधरी द्वारा लगातार हर विंदुओं पर जो धनादोहन धन उगाही का आरोप पीड़ित उपेक्षित रफीउद्दीन खान पर व मुझ पर लगाया जा रहा है डॉ प्रमोद कुमार चौधरी इसका पुख्ता प्रमाण साक्ष्य प्रस्तुत करें। डॉ प्रमोद कुमार चौधरी स्वंय भारतीय रेडक्रास सोसायटी बस्ती के सभापति है और इनके कृत्यों कदाचारों से आहत हो कर 10 में से 07 कार्यकारणी सदस्यों ने इनके विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित किया है।

डॉ प्रमोद कुमार चौधरी के मेडी वर्ल्ड हास्पिटल मनहनडीह निकट टीवी अस्पताल बस्ती में एक्स-रे टेक्नीशियन रफीउद्दीन खान की डिग्री कूटरचना कर लगाए जाने का सीएमओ नोडल हास्पिटल व नोडल प्ळत्ै के कदाचार का उच्च स्तरीय गोपनीय जांच व सतर्कता जांच करायी जाए जिससे न्याय के लिए भटक रहे रफीउद्दीन खान को न्याय मिल सके तथा डॉ प्रमोद कुमार चौधरी यह साबित करें की इनसे किसने शिकायत कर धन मांगा तथा धना दोहन के उद्देश्यो से पत्र लिखा गया इनका जवाब अत्यंत खेदप्रद व एक सामाजिक व्यक्ति के मान सम्मान प्रतिष्ठा पर प्रहार व आघात करने वाला है।

‘यूंही’ जिले का नाम ‘रोशन’ करती रहो ‘शीतल चतुर्वेदी’

बस्ती। पुलिस लाइन बस्ती में तैनात महिला आरक्षी शीतल चतुर्वेदी ने अपनी असाधारण प्रतिभा, कठिन परिश्रम और समर्पण के बल पर राष्ट्रीय स्तर की पुलिस जूडो क्लस्टर प्रतियोगिताओं में लगातार दो स्वर्ण पदक जीतकर बस्ती पुलिस का नाम रोशन किया है। पुलिस अधीक्षक अभिनन्दन ने शीतल चतुर्वेदी की सफलता पर उनका उत्साहवर्धन किया। कहा कि यह जीत उनके अनुशासन व खेल के प्रति जुनून का प्रतीक है। 2019 बैच की महिला पुलिस कर्मी शीतल चतुर्वेदी लखीमपुर खीरी जनपद की निवासिनी हैं, उन्होंने अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया है।


महिला आरक्षी शीतल चतुर्वेदी ने असम में आयोजित नौवीं अखिल भारतीय पुलिस जूडो क्लस्टर प्रतियोगिता 2024-25 में पहला स्वर्ण पदक जीता था। 45 किलोग्राम भारवर्ग में उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अर्जित किया था। इसके बाद 10वीं अखिल भारतीय पुलिस जूडो क्लस्टर प्रतियोगिता 2025-26 में, जो आठ से 16 स्वर्ण पदक के साथ बस्ती की महिला आरक्षी शीतल चतुर्वेदी अक्टूबर 2025 तक शेर-ए-कश्मीर इंडोर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में आयोजित की गई थी, उसमें उन्होंने आंध्र प्रदेश की खिलाड़ी कल्पना कुमारी को हराकर 45 किग्रा भारवर्ग में फिर स्वर्ण पदक प्रप्त किया। उनकी जीत पर पुलिस अधिकारियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह जीत उनके अनुशासन व खेल के प्रति जुनून का प्रतीक है। गोरखपुर जोन के प्रभारी उपनिरीक्षक कोलाहल यादव के साथ ही अनेक पुलिस कर्मियों ने महिला आरक्षी शीतल चतुर्वेदी की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त किया है। 

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