‘बाबी विलिएम’ और ‘सोहन सिंह’ को मिली ‘धमकी
‘बाबी विलिएम’ और ‘सोहन सिंह’ को मिली ‘धमकी’
बस्ती। चर्च आफ इंडिया ‘सीआईपीबीसी’ के प्रिंसिपल आफिसर एवं यूपी और उत्तराखंड के चर्च के अरबों रुपये की संपत्तियों की देखभाल करने वाले ‘बाबी बिलिएम’ और पत्रकार ‘सोहन सिंह’ को धमकी मिली है। यह धमकी मोबाइल नंबर 6387670066 जो कि किसी ‘टाइगर’ के नाम पंजीकृत हैं, के द्वारा दी गई, कहा गया कि बन रही दुकानों का विरोध करना और लिखना छोड़ दो, नहीं तो इसका अंजाम दोनों को भुगतना पड़ेगा। इसकी षिकायत ‘बाबी विलिएम’ के द्वारा आला अधिकारियों को दर्ज करवा दी गई है। धमकी देने का सीधा सा मतलब यह होता है, कि अवैध कब्जा हो रहा है। षिकायत पर प्रषासन ने निर्माण कार्य के लिए आवष्यक सामग्री को तो रुकवा दिया, लेकिन अंदर ही अंदर दुकान निर्माण की कार्रवाई हो रही है, इसका मतलब यह हुआ कि अवैध कब्जा करने वाले हर हाल में दुकान का निर्माण करना चाहते हैं, ताकि वह उन लोगों को हैंडओवर कर सके, जिनसे एक-एक दुकान के नाम पर लाखों रुपये लिए गए। हालांकि दो-तीन दिन से ठेकेदार के घर विवाह होने के कारण काम रुका हुआ है। धमकी देने वाले को यह नहीं मालूम होगा, कि वह जिस ‘बाबी विलिएम’ को धमकी दे रहें हैं, कितना पावरफुल है। अगर इन्हें कुछ हो गया तो माहौल खराब हो सकता है, क्यों कि मामला दो प्रदेषों के चर्च के मुखिया से जुड़ा है? बाबी विलिएम का कहना है, कि हमारी ओर से धमकी देने वाले का मोबाइल नंबर पुलिस को उपलब्ध करा दिया गया हैं, जोर देकर कहा कि अगर उन्हें कुछ हो जाता है, तो इसकी सारी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
बाबी विलिएम की ओर से इससे पहले प्रमुख सचिव गोपनीय व सतर्कता विभाग को लिखे पत्र में कहा कि चर्च आफ इंडिया ‘सीआईपीबीसी’ के नाम से दो सौ साल पुराने गिरजाघर सेंट जेम्स चर्च हैं, पर चर्च आफ नार्थ इंडिया ‘सीएनआई’ के पदाधिकारियों एवं भूमाफियों के द्वारा किए जा रहे कब्जा करने के मामले में पूरी तरह कमिष्नर और डीएम जिम्मेदार है। कहा कि 50 षिकायत पत्र देने, सारे साक्ष्य एवं अभिलेख देने के बावजूद भूमाफियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। लिखा कि आराजी संख्या-66 रक्बा 6119.19 हे, पर स्थापित सेंट जेम्स चर्च, चर्च आफ इंडिया सीआईपीबीसी की संपत्ति है। भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के पत्र संख्या इसीसीएल.477/डी-26 के 23 मार्च 1948 और भारत सरकार की अधिसूचना संख्या-541ए 21 मार्च 1948 में बस्ती जिले में स्थित ‘सेंट जेम्स चर्च’ की संपत्ति ‘भारतीय चर्च टस्टी’ बताया गया। कहा कि 2013 में सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा अपने आदेष में चर्च आफ नार्थ इंडिया ‘सीएनआई’ के विरोध में एक आदेष पारित किया। जिसमें स्पष्ट रुप से कहा गया कि चर्च आफ इंडिया ‘सीआईपीबीसी’ का कोई भी विलय चर्च आफ नार्थ इंडिया में नहीं हुआ। इसके बावजूद चर्च आफ नार्थ इंडिया ‘सीएनआई’ के विषप/चेयरमैन एवं सेक्रेटरी सहित अन्य पदाधिकारियों के द्वारा सिविल लाइन्स स्थित सेंट जेम्स चर्च के खाली भूखंड पर जबरन दुकानों का निर्माण कराया जा रहा है। कहा कि उक्त लोगों के द्वारा 2016 में भी उक्त भूखंड पर सीएनआई के पदाधिकारियों के द्वारा निर्माण कराया जा रहा था, जिसके विरोध में संस्था के सचिव के द्वारा 28 अक्टूबर 16 और 28 अगस्त 21 को दिया गया, जिस पर कार्रवाई करते हुए दुकानों को सील किया गया था, जो आज भी सील है। कहा गया कि वर्तमान में सीएनआई के पदाधिकारियों के द्वारा पुनः उक्त भूखंड पर दुकानों का निर्माण कराया जा रहा है, जिसके विरोध में मेरे द्वारा 26 जून 25 एवं दो जुलाई 25, तीन जुलाई 25 एवं 21 जनवरी 26 को डीएम और कमिष्नर को हो रहे अवैध निर्माण रोकने को लेकर लिखा, परंतु सीएनआई के पदाधिकारियों के प्रभाव में आकर प्रषासनिक अधिकारियें और कर्मचारियों के द्वारा निर्माण एव कब्जा के बावत कोई कार्रवाई नहीं कर रहे है। कार्रवाई न होने से जहां सरकार की छवि खराब हो रही है, वहीं कब्जा करने वालों का मन बढ़ा हुआ है। मनोबल इतना बढ़ गया कि खुले आम दुकानों का निर्माण कराकर विक्रय कर रहे है। फर्जी अफवाह फैलाकर जनता के पैसे का गबन कर रहे है। जब मौके पर जाकर अवैध निर्माण का विरोध किया गया तो सीएनआई के पदाधिकारी, सहयोगी भूमाफिया फौजदारी पर अमादा हो रहें है। पत्र में विधिवत जांच कराकर गुण-दोष के आधार ‘चर्च आफ इंडिया सीएनआई’ के विषप मारिष एडगर दान, सचिव एलन दान, मनीलाल, अनूप लाल एवं अनिल लाल सहित उनके सहयोगी भूमाफियों को चिन्हिृत कर एफआईआर दर्ज की जाए।
‘प्रभारी’ मंत्री का ‘अन्याय’ः14 लोगों के ‘मौत’ के ‘दोषी’ को दी मात्र ‘नोटिस’ की ‘सजा’.
बस्ती। जिले के प्रभारी मंत्री आषीष पटेल को विकास के लिए जनता याद करे या न करे, लेकिन इन्हें उस अन्याय के लिए अवष्य याद करेगी, जो इन्होंने 14 लोगों के मौत के जिम्मेदार जिला आबकारी अधिकारी को मात्र नोटिस की सजा देकर छोड़ दिया। यह सजा सुनाकर मंत्रीजी बैठक में हंसी का पात्र बनकर रह गए, बैठक के बाद लोग कहने लगे, कि ऐसा प्रभारी मंत्री, पहली बार देखा गया, जो इतने गंभीर मामले को इतने हल्के में लिया। लगता है, कि मानो, मंत्री और अधिकारी को इन मौतों का कोई दुख और अफसोस नहीं हैं, अगर होता तो एफआईआर दर्ज कराने का फरमान सुनाने के साथ निलंबित करवाने की बात करते, न कि नोटिस जारी करने का फरमान सुनाकर छोड़ देते। ऐसा करके मंत्रीजी ने 14 लोगों के मौत के परिवारों के जख्मों पर मरहम लगाने के बजाए नमक लगाने का काम किया। इससे मरे हुए लोगों की आत्मा को षांति भी नहीं मिली होगी। मंत्री और अधिकारी से अधिक विधायक दूधराम के सहयोगी फूलचंद्र श्रीवास्तव और एमएलसी प्रतिनिधि हरीष सिंह को अफसोस और दुख हुआ, अगर न हुआ होता तो मंत्रीजी से सवाल न करते, लेकिन इन्हें क्या मालूम था, सवाल सुनकर मंत्रीजी को गुस्सा आने के बजाए उनका ही मजाक उड़ानेे लगेंगे। ऐसा लगता था, कि मानो, इन्होंने मंत्रीजी से सवाल पूछ कर कोई गुनाह कर दिया हो, कि जब होली के दिन षराब की दुकाने बंद थी तो फिर कैसे षराब पीकर रोड एक्सीडेंट में इतने लोगों की मौतें हुई? मंत्रीजी की बेषर्मी तो देखिए, अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के बजाए, सवाल पूछने वाले विधायक के सहयोगी को ही अपमानित कर दिया, कहा कि फूलचंद्रजी घबड़ाइए नहीं आप की व्यवस्था जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चैधरी कर देंगे, मंत्रीजी का ईषारा दारु और पैसे से था। पहले तो फूलचंद्र को समझ में नहीं आया, लेकिन जब हरीष सिंह ने इसे लेकर मंत्रीजी को लथेड़ा, तब फूलचंद्र श्रीवास्तव के समझ में आया, कि मंत्री ने उनका सम्मान नहीं बल्कि एक षीषी बंटी और बबली समझने वाला विधायक का सहयोगी समझा। जिला आबकारी अधिकारी भले ही बाद में मंत्रीजी को और अन्य को चाहें जितना सफाई दें, कि षासन की ओर से ही चार बजे दिन से दुकान खोलने का आदेष था। लेकिन आबकारी अधिकारी को षायद यह नहीं मालूम कि जितने भी रोड एक्सीडेंट में मौतें हुई, वे सभी दिन के चार बजे से पहले हुई। हालांकि आबकारी अधिकारी को इसकी भारी कीमत त्यौहारी के रुप में चुकानी पड़ी, लेकिन वह कीमत उन्होंने वेतन से नहीं बल्कि उन दुकानदारों से वसूलकर चुकाया, जिन दुकानों के खुले रहने से मौतें हुई।
मंत्रीजी भी खुष और विभाग के अधिकारी भी खुष। दुख में वह परिवार रहा, जिसने अपनों को खोया। जिला आबकारी अधिकारी के द्वारा एक भी दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई न करना, यह बताता है, कि 14 लोगों की मौत का और कोई नहीं बल्कि जिला आबकारी अधिकारी ही जिम्मेदार है। कहा जा रहा हैं, जब जिला आबकारी अधिकारी और उनकी टीम प्रत्येक कम्पोजिट दुकानों से पांच-पांच हजार और देषी के दुकानों से दस-दस हजार महीना वसूलेगें, तो दारु की दुकाने होली के दिन खुलेगीं ही। होली की त्यौहारी वसूलने में टीम मस्त रही। यही वसूली मंत्रीजी को त्यौहारी के रुप में देेने का दावा विभाग के लोगों के द्वारा किया गया। अब आप लोग समझ गए होगें कि मंत्रीजी के नजर में मौत की कीमत क्या है? इस मामले में प्रषासन को भी उतना ही दोषी माना जा रहा है, जितना मंत्री और जिला आबकारी अधिकारी को। अगर प्रभारी मंत्री ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं किया, तो प्रषासन ने भी नहीं किया। मीडिया बार-बार उन जनप्रतिनिधियों के सहयोगियों को सलाह देती आ रही है, कि जब भी बैठक में जाएं पूरा होम वर्क करके जाएं, वरना फूलचंद्र श्रीवास्तव जैसा अपमानित होना पड़ेगा। सहयोगी बने इतने साल हो गए, लेकिन इन लोगों को अब तक यह सलीखा नहीं आया कि किस तरह सवालों के जाल में मंत्रियों और अधिकारियों को फंसाया जा सकता। जनप्रतिनिधियों को भी इस बात का पूरा ध्यान रखना होगा, कि वह ऐसे को अपना सहयोगी बनाए, जो हरीष सिंह जैसा हो। गलती, सहयोगियों की नहीं बल्कि उनके आकाओं की है, जो ऐसे लोगों को अपना सहयोगी बना देते हैं, जिनका आवभाव नेताओं जैसा नहीं होता, कहा भी जाता हैं, कि जो सहयोगी डीएम को झुक कर लगाम करें, और तब तक करता रहे, जब तक साहब देख न लें, वह किसी का भी सहयोगी बनने के लायक नहीं होता। जो सहयोगी सवाल-जबाव न कर सके, उसे बैठकों में भाग लेने का कोई अधिकार नही। बीडीए के सदस्यों की तरह इनकी भी भूमिका चाय समोसा तक ही रह जा रही है। जो सहयोगी जनहित और भ्रष्टाचार का मुद्वा नहीं उठा सकता, उसे सहयोगी बनने का कोई अधिकार नहीं है। वैसे भी देखा जाए, हरीष सिंह को छोड़कर अन्य सहयोगी मंत्री और अधिकारियों के कृपा से बैठकों में चाय-समोसा के हकदार हो जातें है। वरना, सरकार ने तो इन पर सरकारी बैठकों में भाग लेने पर प्रतिबंध लगा रखा है।
‘सदर’ तहसील में ‘एसडीएम’ का नहीं, ‘मुंषियों’ का सिक्का ‘चलता’!
बस्ती। मंडल मुख्यालय के सदर तहसील में अगर एसडीएम और तहसीलदार का नहीं बल्कि प्राइवेट मंुषियों का सिक्का चलता है, तो भ्रष्टाचार चरम पर होगा ही, तब न्याय बिकेगा, पत्रावलियां गायब होगा, ग्राम समाज की जमीनें बिकेगी और मनचाहे फैसले होगें। सवाल उठ रहा है, कि आखिर इसके लिए कौन जिम्मेदार? सरकार या फिर वह अधिकारी जो प्राइवेट मुंषियों के भरोसे कोर्ट छोड़ देते हैं। अगर सदर तहसील में अन्य तहसीलों की अपेक्षा सबसे अधिक भ्रष्टाचार व्याप्त हैं, तो उसका सबसे बड़ा कारण तहसील का मुंषियों के हवाले करना। भ्रष्टाचार के खिलाफ निरंतर आवाज उठाने वाले अधिवक्ता दिलषाद हसन खान ने इसकी षिकायत डीएम से करते हुए प्राइवेट मुंषियों के खिलाफ अभियान चलाकर उनके विरुद्व कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। कहा कि सदर तहसील में कार्यालयों और न्यायालयों में अवैध रुप से प्राइवेट मुंषी कार्य कर रहे हैं, जिसके कारण व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार व्याप्त है। हालत यह है, कि कई ऐसे मामले होते हैं, जिसका निस्तारण करने के लिए साहब की आवष्यकता ही नहीं पड़ती, और मुंषी उसे अपने स्तर से निस्तारित कर देते है। अब जरा अंदाजा लगाइए, कि जिसका निस्तारण एसडीएम और तहसीलदार स्तर से होना है, और अगर उसका निस्तारण मुंषी स्तर से होता है, तो निस्तारण की गुणवत्ता कैसी होगी? इसे आसानी से समझा जा सकता है। फरियादियों को साहबों से अधिक मुंषियों से खतरा रहता है, यह मुंषी कब विपक्षी से मिलकर उसके प़क्ष में फैसला कर या करवा दें, पता ही नहीं चलता। प्राइवेट मंुषी से वह अधिवक्ता सबसे अधिकर परेषान होते हैं, जो अपना काम ईमानदारी से करते हैं, जो अपने मुवक्किल के प्रति ईमानदार होते है। ऐसे अधिवक्ताओं का कहना है, कि जिस तरह सदर तहसील में मुंषियों के जरिए न्याय बिकता हैं, उसने सारी हदें पार कर दी है। खुले आम इच्छित फैसले के लिए बोली लगाई जाती है, जिसने अधिक बोली लगाई, उसके पक्ष में ठीक उसी तरह फैसला होता है, जिस तरह चकबंदी न्यायालयों में होता है। यह भी सही है, कि अगर मुंषी न रहें तो कोई न्यायालय चल ही नहीं सकता, अधिकारीगण मुंषियों पर इतना निर्भर हो गए हैं, कि वह बिना मुंषी के कुछ कर ही नहीं पाते। सदर तहसील के भ्रष्टाचार का मुद्वा उठाने वाले दिलषाद हसन पहले अधिवक्ता नहीं हैं, इनसे पहले न जाने कितने अधिवक्ता प्राइवेट मुंषियों के विरुद्व आवाज बुंलंद कर चुके हैं, लेकिन भ्रष्टाचार के आगे उनकी आवाज दबकर रह गई। सवाल उठ रहा है, कि कमिष्नर, डीएम, एडीएम और एसडीएम मिलकर मंडल मुख्यालय के तहसील को भ्रष्टाचारमुक्त नहीं कर सकते, तो फिर कौन करेगा? यह सवाल उन लोगों के लिए जो पीड़ित हैं, और जो यह सोचकर भाजपा को सत्ता में लाए कि अब उन्हें भ्रष्टाचार से मुक्ति मिल जाएगी, लेकिन उन्हें क्या मालूम था, जो विष्वास उन्होंने भाजपा पर किया, वह कितना गलत साबित हुआ। समाज के विभिन्न वर्गो के द्वारा जिस तरह योगीजी को थानों और तहसीलों को भ्रष्टाचारमुक्त बनाने के लिए पत्र लिखे जा रहे हैं, उसे देखते हुए कहा जा सकता है, 2027 भाजपा का सत्ता में आना आसान नहीं होगा, क्यों कि योगीजी थानों और तहसीलों से भ्रष्टाचार को समाप्त करने में बुरी तरह से नाकाम साबित हुए है। इसका खामियाजा प्रदेष की जनता तो भुगत चुकी है, लेकिन भाजपा को भी भुगतना होगा। ऐसा जानकारों का कहना और मानना है।
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केडीसी में हुआ सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंध जागरूकता कार्यक्रम
बस्ती। राष्ट्रीय सेवा योजना शिवहर्ष किसान पी जी कॉलेज, बस्ती के विशेष शिविर के दूसरे दिन आज दिनांक 11 मार्च 2026 को विशेष शिविर स्थल किसान प्रशिक्षण संस्थान बस्ती में राष्ट्रीय सेवा योजना की दोनों इकाइयों रानी लक्ष्मीबाई और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के संयुक्त तत्वावधान में सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंध पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं स्वागत गीत से किया गया
आज के मुख्य अतिथि रहे डॉ शरद चंद्र (प्राचार्य, किसान प्रशिक्षण संस्थान) के समाज में भूमिक तथा सिंगल यूज प्लास्टिक पर एक व्याख्यान दिया तथा बताया कि यह पर्यावरण और जीवन के लिए कितना हानिकारक है। कार्यक्रम के दूसरे चरण में डॉ रंजन कुमार बसाक जी राष्ट्रीय सेवा योजना लक्ष्य एवं इसके उद्देश्य पर विस्तार से चर्चा किया। कार्यक्रम अधिकारी डॉ त्रिलोकी नाथ एवं दिनेश कुमार जी ने बताया कि आज के समय में प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है लेकिन इसके प्रति जागरूकता ही प्रकृति और मानव जीवन को सुरक्षित रखने का कार्य करती है। स्वयंसेवक सेविकाओं को बताया गया कि स्वच्छ पर्यावरण अनमोल है और इसे सुरक्षित रखने के लिए सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग बंद करना और उसके प्रति जागरूकता फैलाना आवश्यक है। कार्यक्रम का संचालन प्रणव सिंह और नित्या दुबे के द्वारा किया गया। इस दौरान डॉ धर्मेन्द्र सिंह, डॉ अमित कुमार, डॉ विशाल प्रकाश, डॉ सूर्य प्रताप वर्मा, डॉ प्रमोद रावत, डॉ सिद्धार्थ कुमार, अभिषेक मिश्रा, श्री अक्षय कुमार, संदीप कन्नौजिया, डॉ मोहम्मद सोहेल इत्यादि शिक्षक मौजूद रहे।
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‘मुख्यालय’ से ‘शिक्षक’ निकालेंगे ‘मशाल-जुलूस’ःशुक्ल
बस्ती। टेट की अनिवार्यता समाप्त किये जाने की मांग को लेकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक संघ के आवाहन पर शिक्षकों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री (उ.प्र.), नेता प्रतिपक्ष भारत और यूपी को शिक्षकों की पाती भेजेने का सिलसिला गुरूवार को भी जारी रहा। शिक्षकों ने पाती भेजकर मांग किया कि टेट की अनिवार्यता को तत्काल प्रभाव से समाप्त कराया जाय।
यह जानकारी देेते हुये उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष एवं अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक संघ के संयोजक उदयशंकर शुक्ल ने बताया कि गुरूवार को जनपद के परसुरामपुर, बनकटी, रामनगर, गौर, हर्रैया, कप्तानगंज, बहादुरपुर, दुबौलिया, विक्रमजोत, बस्ती सदर, साऊंघाट, कुदरहा, नगर क्षेत्र, रूधौली और सल्टौआ गोपालपुर में पदाधिकारियों ने विद्यालयवार भ्रमण कर शिक्षकों से पाती पर हस्ताक्षर कराकर सम्बंधित को डाक और ई मेल से भेजा गया। संघ जिलाध्यक्ष उदयशंकर शुक्ल ने कहा कि पदाधिकारी हस्ताक्षर कराने के साथ ही आगामी 13 अप्रैल को जनपद स्तर पर मशाल जुलूस और 3 मई को लखनऊ मंें आयोजित महारैली में हिस्सा लेेने के लिये प्रेरित कर रहे हैं।
यह जानकारी देते हुये उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला प्रवक्ता सूर्य प्रकाश शुक्ल ने बताया कि परसुरामपुर के कार्यवाहक अध्यक्ष नरेन्द्र कुमार दूबे, मंत्री राजीव पाण्डेय, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुनील पाण्डेय, कोषाध्यक्ष सुखराज गुप्ता, रवीन्द्र नाथ, विजय कनौजिया, वैभव प्रसाद कनौजिया देवेन्द्र तिवारी, अरविंद मिश्रा, सुशीला कुमारी, कमलेश पाण्डेय, धीरेन्ंद्र कुमार, पूनम चैबे, अर्जुन भारती, बस्ती सदर शैल शुक्ल, कन्हैयालाल भारती, विजय वर्मा, रामनगर में इन्द्रसेन मिश्र, राहुल उपाध्याय, निशान्त पाण्डेय, अनिल कुमार मौर्य, गीताधर, शैलेन्द्र यादव, वीरेन्द्र कुमार, सत्यम वर्मा, ,कुदरहा विकास खण्ड में ब्लाक अध्यक्ष चन्द्रभान चैरसिया, बुधिराम यादव, ओम प्रकाश पाण्डेय, कृष्ण कुमार चैधरी, रविन्द्रनाथ वर्मा, बनकटी में अभय सिंह यादव, नवीन कुमार, गौर में राजकुमार सिंह, विनोद यादव, हर्रैया में विकास पाण्डेय, कप्तानगंज में स्कन्द मिश्र, बहादुरपुर मंें रीता शुक्ला, आशुतोष पाण्डेय, अखिलेश मिश्र, दुबौलिया में रामपाल चैधरी, त्रिलोकीनाथ, दिवाकर सिंह, राजेश कुमार, विक्रमजोत मे सन्तोष शुक्ल, नरेन्द्र पाण्डेय, मुक्तिनाथ वमा, साऊंघाट में अभिषेक उपाध्याय, राघवेन्द्र प्रताप सिंह, ओम प्रकाश, अखिलेश चैधरी, नगर क्षेत्र में आनन्द सिंह, फैजान अहमद, रूधौली में राजेश चैधरी, योगेश्वर शुक्ल, सल्टौआ गोपालपुर में राम प्रकाश शुक्ल, रमेश विश्वकर्मा, प्रमोद कुमार आदि के नेतृत्व में विद्यालयवार भ्रमण कर शिक्षकों को टेट समस्या से उत्पन्न स्थितियों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही शिक्षकों की पाती पर हस्ताक्षर कराकर सम्बंधित को डाक और ई मेल से भेजा गया। इसके साथ ही अनेक हिस्सों में शिक्षकांेद्वारा पाती भेजी जा रही है।



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