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Showing posts from April, 2026

बंटू पांडेय’ को ‘चाचा-भतीजा’ ने किया ‘बर्बाद’!

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‘बंटू पांडेय’ को ‘चाचा-भतीजा’ ने किया ‘बर्बाद’! बस्ती। अगर चाचा-भतीजा किसी के बर्बादी का कारण बनते हैं, और जिनके चलते किसी को हार्ट अटैक होता है, तो समाज को चाचा-भतीजा के बारे में गहन अध्ययन करना चाहिए, ताकि फिर कोई चाचा-भतीजा के कारण बर्बाद न होने पाए और न हार्ट अटैक ही हो। केडीसी के सामने स्थित पषुपति मार्बल एंड बिल्डिगं मैटेरिएल के ‘बंटी पांडेय’ का कहना है, कि चाचा यानि ‘अनूप खरे’ भतीजा यानि ‘दिव्याषुं खरे’ के कारण उसका कारोबार एवं परिवार बर्बाद हो गया, बैंक का कर्ज तो पत्नी का जेवर बेचकर चुकता कर दिया, लेकिन अभी तक व्यापारियों का कर्ज नहीं चुकता कर पाया। जिसके चलते कारोबार प्रभावित हो रहा है। कहते है, कि जब हम और हम्हारी पत्नी बकाए का सात लाख मांगने अनूप खरे के स्कूल गए, तो उन लोगों ने पैसा तो नहीं दिया, अलबत्ता इतना अपमानित किया कि हार्ट अटैक आ गया। पहला अटैक था, इस लिए जान बच गई। इलाज के दौरान डाक्टरों ने कहा कि अगर दूसरा अटैक हुआ तो जान भी जा सकती है, इसी डर के नाते बकाए का पैसा मांगना छोड़ दिया, कि कहीं अगर दूसरी अटैक हुआ तो जान भी चली जाएगी। कहते हैं, कि पैसा मांगने से अच्छा के...

अनूप खरे’ और ‘दिप्ती खरे’ के खिलाफ ‘एनबीडब्लू’

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  ‘अनूप खरे’ और ‘दिप्ती खरे’ के खिलाफ ‘एनबीडब्लू’ बस्ती। सीजेएम न्यायालय से अनूप खरे बनाम केके सिंह मामले में अनूप खरे और दिप्ती खरे के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुआ। यह एनबीडब्लू अदालत में गैर हाजिर होने के कारण जारी हुआ, हालांकि उस दिन दोनों की ओर से हाजीरी माफी की दरखास्त दी गई, थी, चूंकि उस दिन न्यायालय के द्वारा आरोप पत्र बनना था, इस लिए सीजेएम ने हाजरी माफी के दरखास्त को रिजेक्ट करते हुए एनबीडब्लूडी जारी कर दिया। इसी मामले में दिव्याषुं खरे भी मुजरिम हैं, चूंकि यह हाजिर हो गए, और इनका आरोप पत्र तय हो गया, इस लिए इनके खिलाफ एनबीडब्लूडी जारी नहीं हुआ। सवाल उठ रहा है, कि जब एक ही तारीख को तीनों को उपस्थित होना था, और उस दिन तीनों के खिलाफ आरोप पत्र बनना था, तो क्यों सिर्फ दिव्याषुं खरे तारीख पर आए, और क्यों नहीं अनूप खरे और दिप्ती खरे आए। ‘कृष्ण कुमार सिंह’ ने चाचा-भतीजा पर नौकरी के नाम पर 38 लाख की ठगी करने का आरोप लगाकर न्यायालय से न्याय की गुहार लगाई है। सीजेएम के यहां से दोनों को समन भी जारी हुआ, जिस पर दोनों को जमानत भी करानी पड़ी। इसी मामले में नौ अप्रैल 26 को तारीख थी, औ...

ऐसा ‘कोई’ सगा ‘नही’ं, जिसे ‘खरे’ ने ठगा ‘नहीं’!

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ऐसा ‘कोई’ सगा ‘नही’ं, जिसे ‘खरे’ ने ठगा ‘नहीं’! बस्ती। अगर ‘सुभाष षुक्ल’ जैसा जिम्मेदार, संभ्रात और बड़ा कारोबारी एवं पदाधिकारी सोषल मीडिया पर अनूप खरे के बारे में यह लिखे कि कोई ‘ऐसा सगा नहीं जिसे इन्होंने ठगा नहीं’, तो ‘अनूप खरे’ के बारे में लोगों को जान और समझ लेना चाहिए, कि समाज में इनकी छवि कैसी है? सुभाष षुक्ल उस ‘संकटा प्रसाद षुक्ल’ के भतीजे हैं, जिन्होंने अनूप खरे पर उनका फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेज के जरिए करोड़ों के लोन का गारंटर बनाने की षिकायत करते हुए जांच करने की मांग कर चुके है। श्रीषुक्ल ने जो बात अनूप खरे के बारे में कही, वह इन्होंने दूसरे के अनुभव के आधार पर नहीं, खुद को ठगे जाने के अनुभव के आधार पर कही। इन्होंने अनूप खरे की आज से 24 साल पहले तब चार लाख का कर्ज गांरटर बनकर दिलाया, जब इन्हें कोई सौ रुपया भी उधार देना पसंद नहीं करता था। गारंटी के रुप में श्रीषुक्ल को एडवांस चेक देना पड़ा। षुक्लजी की दरियादिली तो देखिए यह सूद का 12 हजार रुपया हर महीने खुद चुकाते थे। इन्हांेने न सिर्फ पैसे से मदद करवाया, बल्कि दुकान से सामान भी दिया। 2008 तक रकम बढ़कर लगभग नौ लाख हो गई, सूद क...

इस बार ‘छह करोड’़ के ‘लोन’ में फंसे ‘अनूप खरे’

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  इस बार ‘छह करोड’़ के ‘लोन’ में फंसे ‘अनूप खरे’ बस्ती। अक्सर विवादों में रहने वाले चित्रांष भारती के मंत्री एवं दी सीएमएस विधालय के प्रबंधक अनूप खरे इस बार छह करोड़ के लोन के मामले में फंसते नजर आ रहें है। इतने बड़े लोन के मामले में एचडीएफसी के प्रबंधक अभय प्रताप सिंह की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। जतब मैनेजर की चोरी पकड़ी गई, तो उन्हें बचाने के लिए बैंक की ओर से पूरी कोषिष की जा रही है। जब इनके मोबाइल नंबर 7607967747 में कई बार फोन किया गया, तो इन्होंने कोई रिस्पांस नहीं दिया। अब हम आप को उस ओर लेकर चलते हैं, जहां पर छह करोड़ के लोन का खुलासा हुआ। 83 साल के षिकायतकत्र्ता संकटा प्रसाद षुक्ल पुत्र आचार्य नाथ षुक्ल निवासी ब्लाॅक रोड भालचंद्र भटटा, बस्ती ने एसपी को एक पत्र 11 जनवरी 26 को लिखा, जिसमें कहा गया कि चित्रांष भारती के मंत्री एवं दी सीएमएस विधालय के प्रबंधक अनूप खरे ने सुनियोजित रुप से गंभीर आर्थिक अपराध, धोखाधडी़, जालसाजी, एवं आपराधिक षडंयत्र किया। कहा कि सीएमएस स्कूल बस्ती के पंजीकरण के समय मुझे औपचारिक रुप से समिति का अध्यक्ष/सदस्य नामित किया गया। लिखा कि जब से स्कूल खुला त...

रिजेंट’ घोटाले में ‘कारपोरेषन’ के ‘एमडी’ की भूमिका ‘संदिग्ध’!

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‘रिजेंट’ घोटाले में ‘कारपोरेषन’ के ‘एमडी’ की भूमिका ‘संदिग्ध’! -गोरखपुर/बस्ती मंडल के एक भाजपा के कदावर नेता को मुंह बंद रखने को हर तीसरे महीना दो करोड़ जाता -जब हमारा मंत्री हिस्सा लेता है, तो अगर हमने ले लिया तो कौन सा गुनाह कर दिया -पीओ सिटी कंपनी एक पावरफुल रिटायर प्रमुख सचिव की कंपनी, इसे लाभ पहुंचाने के लिए सरकार का सैकड़ों करोड़ का नुकसान पहुंचाया जा रहा -बिना टेंडर से डायरेक्ट 163 रिजेंट की आपूर्ति करने का आर्डर दे दिया, कारपोरेषन ने 778 टेंडर किया, लेकिन रिजेंट कर नहीं किया? -योगी सरकार के अधिकारियों ने नौकरी में भी भ्रष्टाचार किया और नौकरी के बाद भी सुरक्षित भ्रष्टाचार कर रहें बस्ती। लगभग पांच सौ करोड़ के रिजेंट घोटाले में सबसे अधिक सवालों के घेरे में उत्तर प्रदेष मेडिकल सप्लाई कारपोरेषन लि. के एमडी और उनकी टीम आ रही है। पूछा जा रहा है, कि जब दवाओं सहित अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले सामानों का 778 टेंडर निकाल सकते हैं, तो क्यों नहीं रिजेंट का टेंडर निकाला? और क्यों बिना टेंडर के पीओ सिटी सर्विसेज कानपुर को रिजेंट आपूर्ति करने का डायरेक्ट आर्डर दे दिया? वह भी 2033 तक। सबसे बड़ा ...

रिजेंट’ खरीद ‘में’ हुआ ‘500’ करोड़ का ‘घोटाला’

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  ‘रिजेंट’ खरीद ‘में’ हुआ ‘500’ करोड़ का ‘घोटाला’ बस्ती। योगीजी के नाक के नीचे हर साल पांच सौ करोड़ से अधिक का घोटाला ‘रिजेंट’ की खरीद में हो रहा है, और योगीजी घूम-घूमकर जीरो टालरेंस का ढोलक बजा रहे है। इस रिजेंट का इस्तेमाल मरीजों के खून की जांच के लिए होता है। हर साल लगभग पांच सौ करोड़ के रिजेंट की खरीद प्रदेष के विभिन्न जनपदों के उन अस्पतालों के सीएमएस और एसआईसी करते हैं, जहां पर पीओ सिटी का लैब संचालित हो रहा है। इस फर्म का लैब बस्ती के जिला महिला अस्पताल, जिला अस्पताल, टीबी अस्पताल और 100 बेड एमजीएच हर्रैया अस्पताल में स्थापित है। यही लोग मिलकर पीओ सिटी से रिजेंट की खरीद और भुगतान करते है। इसे घोटाला कहिए या फिर सरकार को चूना लगाना मानिए, यूपीएमएससीएल यानि उत्तर प्रदेष मेडिकल सप्लाई कारपोषन लि. के एमडी और पीओ सिटी सर्विसेज कानपुर मिलकर कर रहे है। एक साजिष के तहत जेम पर पीओ सिटी को लैब में इस्तेमाल होने वाले रिजेंट आपूर्ति का अनुबंध किया गया। आप लोगों को जानकर हैरानी होगी कि लगभग पांच हजार करोड़ की खरीद खरीद का अनुबंध 10 साल के लिए किया, जबकि नियमानुसार हर साल टेंडर निकलना और अनुबं...