अपमान ‘हरीश द्विवेदी’ का नहीं ‘संजय चौधरी’ का ‘हुआ’


अपमान ‘हरीश द्विवेदी’ का नहीं ‘संजय चौधरी’ का ‘हुआ’

बस्ती। नवागत भाजपा प्रदेष अध्यक्ष का पहले गोरखपुर के प्रथम आगमन और दूसरा बनारस के प्रथम आगमन पर जो स्वागत हुआ, उसमंे भारी अंतर देखने को मिला। गोरखपुर और बनारस के स्वागत को देखकर कहा जा सकता कि बस्ती वालों ने बाजी मार ली। षानदार और जानदार स्वागत पूर्व सांसद हरीष द्विवेदी की अगुवाई में गोरखपुर में बस्ती के अंसख्य भाजपाईयों ने किया। जितना जिंदाबाद का नारा पंकज चौधरी का लगा, उतना ही हरीष द्विवेदी का भी लगा। पंकज चौधरी ने हरीष द्विवेदी को पूरा सम्मान भी दिया, यह कहना गलत हैं, कि पंकज ने हरीष का माला ठुकराकर उनका अपमान किया। जिस किसी ने भी वीडियो को ध्यान से देखा होगा, और कई बार देखा होगा, वह कभी नहीं कहेगें, कि हरीषजी का अपमान हुआ। जिंदाबाद का नारा लगाकर पंकजजी के वाहन के साथ भीड़ में जब हरीषजी पैदल चल रहे थे, तब पंकजजी ने बाउंसर को हरीषजी को वाहन में बुलाने का ईषारा किया, वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है, कि बाउंसर हरीषजी को पकड़कर उपर खींच रहे हैंे, लेकिन भीड़ इतनी अधिाक थी, कि चाहकर भी बांउसर हरीषजी को पंकजजी के पास नहीं ले जा पाए। माला भी इस लिए नहीं पहना पाए, क्यों कि माला इतना वजनी था, कि अगर वह पंकजजी के गले में चला जाता तो षायद पंकजजी उसके वजन को सहन नहीं कर पाते।



जो लोग अपमान करने की बात कह रहें, उन्हें बनारस के स्वागत का वीडियो अवष्य देखना। इस वीडियो को किसी को बार-बार देखने की भी जरुरत नहीं पड़ेगी, वीडियो देखते ही उन्हें लग जाएगा, कि गोरखपुर में अपमान हरीषजी का नहीं बल्कि बनारस में असल अपमान तो पंकजजी को अपना करीबी बताने वाले जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी का हुआ। वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है, कि जो स्वागत का मंच बना था, उसके नीचे देर तक स्वागत करने वालों को निराष संजय चौधरी खड़े देख रहें। वहां पर पंकजजी के साथ संजय चौधरी का जिंदाबाद का नारा लगाने वाला भी कोई नहीं था, जब कि गोरखपुर जैसी भीड़ भी नहीं थी। मंच से पंकज चौधरी, संजय चौधरी को देख भी रहे है। चाहते तो हरीष द्विवेदी की तरह संजय चौधरी को भी अपने पास बुला सकते थे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, क्यों नहीं हुआ? यह सोचने का विषय संजय चौधरी का है। किसी को अपने आप को पहचानने का इससे बड़ा कोई इवेंट हो ही नहीं सकता। इसके बाद भी अगर कोई यह दावा करें, कि वह प्रदेष अध्यक्ष के सबसे करीबियों में से हैं, तो वह खुद को तो धोखा दे ही रहें हैं, साथ ही उन अपनों को भी धोखा दे रहे हैं, जो यह समझते हैं, कि अध्यक्षजी प्रदेष अध्यक्ष के करीबी है। हरीषजी के अनेक षुभचिंतकों का कहना है, कि हरीष द्विवेदी को स्वागत करने के लिए गोरखपुर नहीं जाना चाहिए था, क्यों कि हरीषजी का स्तर बहुत उंचा है। हां अगर बस्ती में प्रथम आगमन होता तो वह अलग बात थी। यह अलग बात है, कि वह केंद्र में मंत्री और ़प्रदेष अध्यक्ष नहीं बन पाए, लेकिन उनका राजनैतिक स्तर किसी नेषनल लीडर से कम नहीं है। कहते हैं, कि इन्हें किसी के सामने अपनी ताकत दिखाने की भी कोई आवष्यकता नहीं है।

अरे ‘रेडक्रास सोसायटी’ वाले ‘अब’ तो ‘एकता’ दिखा ‘दीजिए’

बस्ती। रेडक्रास सोसायटी की ओर से भयंकर ठंड के प्रकोप में असहाय एवं गरीबों को तो कंबल बांटे जा रहे हैं, बहुत नेक काम हैं, लेकिन एक नेक काम और कीजिए, इसके बाद जो भी कंबल वितरण का कार्यक्रम हो उसमें कम से कम कार्यकारिणी के सारे सदस्य तो मौजूद रहें। कोई भी संस्था अहम या जिदद से नहीं चलती। संस्था हमेषा भाई चारा और आपसी मेलमिलाप से चलती है। समाज को भी लगता चाहिए कि यह संस्था कुछ लोगों की इच्छा पर नहीं चलनी चाहिए। बहरहाल


, कंबल वितरण करके आप लोग बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, इसे कंबल विताण तक ही सीमित मत रखिए। भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी की बस्ती शाखा लगातार लोगों के बीच में पहुंचकर कंबल व अन्य समाग्रियां बांट रही है। इसी क्रम मे रेडक्रॉस सोसाइटी शुक्रवार को जिले में स्थित इंटीग्रल प्राइवेट आईटीआई हवेली खास में ग्रामीण अंचल के लोगों को इकट्ठा कर कंबल का वितरण किया। सोसाइटी सचिव रंजीत श्रीवास्तव ने बताया कि संस्था द्वारा लगातार गरीब व जरूरतमंदो की पहचान कर ठंड में कंबल व जरूरत की अन्य राहत सामग्री बाटी जा रही है। इसी क्रम में आज यहां लगभग 40 कंबल ठंड से सिकुड़ रहे जरूरतमंदों में बांटा गया है। संस्था का उद्देश्य मानव के जाल-माल की रक्षा करना है, इसके लिए प्रदेश के सभापति रेडक्रॉस सोसाइटी व उप मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार बृजेश पाठक के माध्यम से प्रदेश के प्रत्येक जिलों में राहत सामग्रीयों को पहुंचाने का निर्णय लिया गया। जिससे ठंड की वजह से किसी व्यक्ति की जान ना जाये।

कार्यक्रम संयोजक एवं संस्था के कोषाध्यक्ष राजेश कुमार ओझा ने कहा संस्था ऐसे काम अनवरत रखेगी। उपसभापति एल के पाण्डेय ने कहा कि रेडक्रॉस लगातार अपने उद्देश्यों पर खरा उतर रही है, संस्था ही जरूरतमंदो की मदद हमेशा करती रहती है जो समाज मे दिख रहा। सभापति डॉक्टर प्रमोद चौधरी ने लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सामाजिक हित में संस्था सदैव आगे खड़ी रहेगी। कार्यक्रम के दौरान समाजसेवी रणविजय सिंह, डॉ सूर्यांश ओझा, शिवांगी, कौशल राणा, पार्थ यादव, प्रियंका श्रीवास्तव एवं सुभाष श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।

‘पेंशनर’ ही ‘पेंशनर’ का ‘शोषण’ कर ‘रहा’

बस्ती। जितने भी पेंषनर्स होगें उन लोगों को जानकर हैरानी होगी, एक पेंषनर दूसरे पेंषनर का षोषण कर रहा है। रमेश शुक्ल नामक पेंषनर बाकायदा कार्यालय में और अधिकारियों की मौजूदगी में खुले आम हजार दो हजार नहीं बल्कि पेंषन स्वीकृति के नाम पर 20 से 30 हजार लेता है। यह व्यक्ति अपर निदेशक कोषागार एवं पेंशन कार्यालय बस्ती मंडल से रिटायर हुआ, और उसी कार्यालय में बैठकर पूर्व की भांति पेंषनर्स का किसी न किसी बहाने षोषण कर रहा, अधिकारियों से कहा तो सुनकर रह जाते है। इसकी षिकायत षिक्षक संघ के मंत्री बालकृष्ण ओझा ने सीएम, कमिष्नर, डीएम और सीडीओ से करते हुए कार्रवाई करने की मांग की है। कहिा कि बस्ती में घोर अनियमितता व्याप्त है। यहां पर सेवानिवृत हो चुके रमेश शुक्ल नाम के व्यक्ति द्वारा कार्यालय में बैठकर सेवानिवृत शिक्षकों व अन्य कार्मिकों से धन वसूली का कार्य करते हैं।


यह व्यक्ति दो वर्ष पूर्व ही सेवानिवृत हो चुके है। परंतु उसके बावजूद विभाग के उच्च अधिकारियों की मिली भगत से प्रतिदिन कार्यालय आते है और संपूर्ण समय तक कार्यालय के पटल सहायकों के मध्य बैठकर पेंशन की पत्रावलियों पर आपत्ति व कागज कमी के नाम पर सेवा निवृत्त शिक्षको व अन्य विभाग के कर्मचारियों का शोषण करते है। कागज पूर्ण न होने पर व आपत्ति लगाकर पेंशन पत्रावली लटकाए रखते है। और उनसे 20000 से 30000 धन लेते ही पेंशन स्वीकृत करवा देते है। विभाग में लगे सीसीटीवी कैमरे वह अन्य कर्मचारियों से इसकी जानकारी कभी भी ली जा सकती है। पत्र में संबंधित सेवा निवृत्त कर्मी के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई करने का कष्ट करें जिनके संरक्षण में यह कार्य विगत कई वर्षों से चल रहा है। जिससे सेवा निवृत्त शिक्षकांे व अन्य कर्मचारियों को बुढ़ापे में धनादोहन से छुटकारा मिल सके।

‘नेताजी’ के ‘डायग्नोस्टिक’ सेन्टर पर हो रहा ‘भ्रूण हत्या’

बस्ती। भानपुर के कुछ नेताओं की छवि इतनी खराब हो गई है। उन्हें पैसे के आगे अपनी खराब हो रही छवि की कोई चिंता नही। ऐसे लोगों पर कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनके पैसा कमाने के चक्कर में अनेक दुनिया में आने से पहले ही न जाने कितने बच्चों की मौत हो जा रही है। ऐसे लोगों को समझ में ही नहीं आता कि इनके लिए क्या महत्वपूर्ण हैं, पैसा या बच्चे की मौत। रही बात सीएमओ औनर उनके गैंग की तो यह लोग और भी संवेदनहीन हो गए, इन्हें अपने बखरे से मतलब रहता हैं, कोई जिए या मरे कोई फर्क नहीं पड़ता। कहना गलत नहीं होगा कि स्वास्थ्य व्यवस्था ऐसे लोगों के हाथों में चली गई, जिससे समाज सेवा से कोई मतलब नहीं। कहा भी जाता है, कि जब नेता ही गलत काम करने लगेगा तो मरीजों और बच्चों को बचाएगा कौन?

अप्रषिक्षित लोग जब अल्ट्रासाउंड और सिजेरियन आपरेशन करेगें तो मौत होगी ही। मरीजों के जान से खेलने वाले राजनैतिक रसूख रखने वाले अधिकारियों को धमकाने मे अपनी शान समझते हैं। जिस तरह बार-बार भानपुर सीएचसी पास स्थित पब्लिक डायग्नोस्टिक सेन्टर और पब्लिक हास्पिटल का नाम सामने आ रहा है, उससे सीएमओ पर सवाल खड़ा हो रहा है। भानपुर सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ0 सचिन ने सीएमओ को पब्लिक डायग्नोस्टिक सेन्टर और पब्लिक हास्पिटल के नाजायज गतिविधियों के विरूद्व कार्यवाही के लिए अनेकों पत्र लिखा। लेकिन राजनैतिक रसूख के चलते कोई कार्यवाही संभव नही हो पाया। यहां भ्रण परीक्षण से लेकर भ्रूण हत्या करने की सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। बस मुंहमांगा रकम मिलना चाहिए। यह स्थिति किसी को भी चिन्ता में डालने का गंभीर विषय हैं। यहां तो कितने मरीजों का आर्थिक व शारीरिक क्षति हो चुका होगा लेकिन राजनैतिक हनक के आगे मरीजों की चीख दब गयी। स्वास्थ्य महकमा तमाशा देख रहा है। विभाग के अधिकारी आये दिन निरीक्षण भी करते हैं लेकिन साहब लोगों को यह गंभीर मामले क्यों नही दिखाई देते ? बताते चलें कि भानपुर सीएचसी पास स्थित पब्लिक डायग्नोस्टिक सेन्टर और पब्लिक हास्पिटल संचालित है जिसमें काई प्रशिक्षित चिकित्सक मौजूद नही होता। यहां अल्ट्रासाउंड और सिजेरियन आपरेशन मुन्नाभाई लोग कर रहे हैं। इतना ही यदि भरोसेमंद सूत्रों की मानें तो यहां भ्रूण परीक्षण से लेकर भ्रूण हत्याएं तक के होने की गंभीर खबरे आ रही है। विभाग मरीजों की बर्बादी और होने वाली मौतों का तमाशा देख रहा है। हैरान करने वाली बात तो यह है कि पब्लिक डायग्नोस्टिक सेन्टर का पीसीपीएनडीटी काफी समय पहले ही निलम्बित किया जा चुका हैं। यह सेन्टर क्यों और किसके प्रभाव मे संचालित हो रहा है ? इसका जबाब देने वाला कोई नही है। सीएमओ डॉ0 राजीव निगम का कहना हैं, कि प्रकरण गंभीर है एमओआईसी भानपुर द्वारा प्रेषित किया गया पत्र कहां है जांच कराकर पब्लिक डायग्नोस्टिक सेन्टर और पब्लिक हास्पिटल के विरूद्व कड़ी कार्यवाही अमल मे लाई जायेगी। किसी भी दशा मे दोषी को बख्शा नही जायेगा। वैसे यह पहला सेंटर और हास्पिटल नहीं हैं, जहां पर अप्रषिक्षित आपरेषन कर रहें और अल्टासाउंड चला रहे है। डेली न जाने कितने बच्चों की हत्या हो रही है, और न जाने कितनी गर्भवती की मौत हो रही है। इसे रोकने की जिसकी जिम्मेदारी हैं, वह भी इस गोरखधंधे में लिप्त है। जाहिर सी बात नेताओं की हिम्मत तो बढ़ेगी हा

‘आज’ से ‘50 साल’ पहले हुआ ‘विश्व हिन्दी दिवस’ःडा. वीके वर्मा

बस्ती। वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति द्वारा कलेक्टेªट परिसर स्थित शिविर कार्यालय पर विश्व हिन्दी दिवस मनाया गया। समिति के महामंत्री वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम प्रकाश शर्मा के संयोजन में आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने विश्व हिन्दी दिवस के महत्व को रेखांकित किया। मुख्य अतिथि वरिष्ठ चिकित्सक, साहित्यकार डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि हिंदी भाषा को सम्मान देने और उसे वैश्विक पहचान दिलाने के लिए हर साल विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। अक्सर लोग राष्ट्रीय हिंदी दिवस के बारे में जानते हैं, लेकिन विश्व हिंदी दिवस को लेकर अब भी कई लोगों में उत्सुकता रहती है। यह दिन खास तौर पर हिंदी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती देने का संदेश देता है। दरअसल, 10 जनवरी 1975 को नागपुर में पहला विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित हुआ था। इस सम्मेलन का उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था। कहा कि हिन्दी अब सिर्फ साहित्य या बातचीत तक सीमित नहीं, बल्कि तकनीक, कोडिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में भी अपनी जगह बना रही है।


वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम प्रकाश शर्मा ने कहा कि हिंदी केवल बोलने या लिखने की भाषा नहीं है, बल्कि यह वह माध्यम है जिससे देश के करोड़ों लोग खुद को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। भारत में सैकड़ों भाषाएं और बोलियां हैं, लेकिन अगर सबसे ज्यादा बोली और समझी जाने वाली भाषा की बात करें, तो हिंदी सबसे आगे नजर आती है। खासकर उन देशों में, जहां बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं, वहां हिंदी एक सांस्कृतिक सेतु की तरह काम करती है। इस साल 2026 में विश्व हिंदी दिवस की थीम है-‘हिंदी पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक’।

गोष्ठी को वरिष्ठ कवि डा. राम कृष्ण ‘जगमग’, बी.के. मिश्र, बटुक नाथ शुक्ल, रामदत्त जोशी, जगदम्बा प्रसाद ‘भावुक’ तौव्वाब अली, सुशील सिंह पथिक, पेशकार मिश्र आदि ने सम्बोधित करते हुये कहा कि विश्व हिंदी दिवस को आधिकारिक रूप से मनाने की शुरुआत साल 2006 में हुई। तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसके बाद से विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों और सांस्कृतिक केंद्रों में भी इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाने लगे। गोष्ठी में मुख्य रूप से सामईन फारूकी, नेबूलाल, प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, ओम प्रकाश धर द्विवेदी, कृष्णचन्द्र पाण्डेय, अफजल हुसेन अफजल, गणेश प्रसाद, दीननाथ यादव आदि उपस्थित रहे। 

‘भाजपा’ ने ‘मनरेगा ग्रामीण आजीविका’ की ‘रीढ़’ को ही तोड़ ‘दिया’ःडा. आलोक रंजन

बस्ती। काम के अधिकार की रक्षा के लिये कांग्रेस ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ का राष्ट्रव्यापी अभियान चला रही है। 10 से 25 फरवरी तक कांग्रेस जमीनी स्तर पर यह संदेश लेकर जायेगी कि मनरेगा का नाम बदलकर भाजपा की सरकार ने जो नया कानून वीबीजीआरएएमजी कानून लागू किया है उसने काम के अधिकार की वैधानिक गारंटी समाप्त कर दिया है। शनिवार को कांग्रेस कार्यालय पर उपाध्यक्ष डा. वाहिद अली सिद्दीकी, संदीप श्रीवास्तव, अलीम अख्तर, मनरेगा समन्वयक साधू शरन आर्य, कांग्रेस नेता डा. आलोक रंजन वर्मा ने पत्रकारों से वार्ता करते हुये कहा कि मनरेगा ग्रामीण आजीविका का महत्वपूर्ण रीढ था किन्तु भाजपा ने उसके मूल चेतना पर हमला कर नये कानून में काम के अधिकार को समाप्त कर दिया है। इससे मनरेगा मजदूरों के अस्तित्व के साथ ही उनके कार्य करने के अधिकार पर खतरा मड़रा रहा है। कांग्रेस इस जन विरोधी निर्णय के मामले में चुप नहीं रहेगी और 25 फरवरी तक चरणबद्ध ढंग से आन्दोलन कर इसे आम जनता तक ले जाया जायेगा।


कांग्रेस नेताओं ने पत्रकारो के प्रश्नों का उत्तर देते हुये बताया कि 11 जनवरी को एक दिवसीय उपवास, 12 को पंचायत स्तर पर सम्पर्क, 30 जनवरी को वार्ड और ब्लाक स्तर पर शांति पूर्वक धरना, 31 जनवरी को जिला स्तरीय मनरेगा बचाओ धरना, 7 फरवरी को राज्य स्तरीय विधानसभा घेराव के बाद 16 से 25 फरवरी तक एआईसीसी रैलियों का आयोजन किया जायेगा। कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को जन-जन तक ले जायेगी कि किस तरह से मनरेगा की जगह नया कानून लाकर भाजपा ग्रामीण अर्थ व्यवस्था की रीढ पर हमला कर रही है। प्रेस वार्ता में चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डा. सुरेन्द्र चौधरी, अनिल तिवारी, बसन्त कुमार चौधरी आदि शामिल रहे। 

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