‘थोक’ में बिका ‘सीएमओ’ का ‘जमीर’ और ‘ईमान’!
बस्ती। डा. राजीव निगम प्रदेष के पहले ऐसे सीएमओ होगें, जिन्होंने अपने ही एमओआईसी के बच्चे की मौत का सौदा किया। पैसे के लिए सीएमओ ने अपनी जमीर और ईमान को ही नहीं बेचा, बल्कि जांच में षामिल डा. अषोक चौधरी, डा. रवीेंद्र वर्मा और डा. मौर्या ने भी ईमान, धर्म और जमीर तीनों का सौदा किया। इन लोगों ने अपने पेषे के गददारी तो किया ही साथ में कप्तानगंज सीएचसी के एमओआईसी डा. अनूप चौधरी और उनकी पत्नी का सीना भी छलनी किया। एमओआईसी यह चिल्लाते रह गए, कि अगर उसके बच्चे के मौत के जिम्मेदार पीएमसी के लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकते थे, तो कम से कम अस्पताल को एक दिन के लिए सीज तो कर दीजिए, कम से कम मुझे और मेरी पत्नी को इतना तो सकून मिलेगा, कि उसके विभाग के लोगों ने साथ दिया। लेकिन कार्रवाई करने के बजाए उल्टा एमओआईसी को ही सीएमओ धमकाने लगे कि अगर अधिक बोले तो तबादला कर दूंगा, किसी आरोप में फंसा कर कार्रवाई करवा दूंगा। डा. अनूप चौधरी की किसी ने भी नहीं, अलबत्ता धन उगाही करते रहें, अधिक धन उगाही के लिए खुद सीएमओ ने एमओआईसी से कहा कि आप एक रिपोर्ट बनाकर दीजिए हम जांच कमेटी गठित करते हैं, तब पीएमसी के खिलाफ कार्रवाई करते है। अब जरा अंदाजा लगाइए कि जांच टीम बने लगभग आठ माह हो गए, लेकिन कार्रवाई करने को कौन कहे, जांच रिपोर्ट तक एमओआईसी को नहीं दी गई। जबकि जांच टीम को जांच करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया। डाक्टर साहब तो खुष हो गए, कि चलो अब तो कार्रवाई होगी, लेकिन इन्हें क्या मालूम था, कि जांच टीम गठित करना तो सीएमओ का एक बहाना था, असल में इसी बहाने मोटी रकम ऐंठना था, तभी तो आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब भी कार्रवाई के बारे में पूछा जाता तो सीएमओ यही कहते कि इतने बड़े आदमी के खिलाफ कार्रवाई करुं तो कैसे करुं? अब सीएमओ को कौन समझाने जाए कि हर नर्सिगं होम चलाने वाला व्यक्ति बड़ा आदमी ही होता है, इसका मतलब यह नहीं कि बड़े लोगों को बच्चों को मारने का लाइसेंस मिल गया, यही रर्वैया सीएमओ ने डा. गौड़, डा. राजन षुक्ल, डा. प्रमोद कुमार चौधरी, ओमबीर और किरन सर्जिकल सहित लगभग एक दर्जन मामलों में गैंग के साथ मिलकर किया। इन लोगों ने इस लिए कोई कार्रवाई नहीं किया, क्यों कि सीएमओ की नजर में यह सभी बड़े लोग है। सवाल, उठ रहा है, कि अगर सीएमओ या फिर इनके गैंग के लोगों के साथ डा. अनूप चौधरी जैसी घटना होती तो क्या यह लोग तब भी इस लिए कार्रवाई नहीं करते, क्यों कि यह बड़े लोग है? ऐसा अमानवीय व्यवहार षायद ही किसी सीएमओ ने किसी एमओआईसी के साथ किया होगा। एमओआईसी को कहना पड़ा कि हम ऐसे भ्रष्ट सीएमओ के साथ काम नहीं करुगंा, जो मेरे बच्चे की मौत का सौदा किया हो। अब तक इनके स्थान पर कोई अन्य सीएमओ होता तो नैतिकता के नाते या तो इस्तीफा दे देता, या फिर कार्रवाई करता, लेकिन जब सीएमओ की आत्मा ही मर गई तो वह किसी के साथ क्या न्याय करेगें? ऐसे लोगों की बातों में इतनी मिसरी होती है, कि सामने वाला गलत फहमी का षिकार हो जाता है। डा. एसबी सिंह, डा. एके चौधरी और डा. एके गुप्त, आरसीएस डा. बृजेष षुक्ल, देखने और बातचीत में बाहर से तो खूब अच्छे लगते हैं, लेकिन अंदर से यह लोग किसी के बच्चे और किसी के माता पिता के मौत के सौदागर होते है। इनकी आत्मा मर चुकी होती। जिस तरह बार-बार इन लोगों की जमीर बिक रही है, उसका खामियाजा कभी न कभी और किसी न किसी रुप में इन्हें या फिर इनके परिवार को भुगतना पड़ सकता, क्यों कि किसी दुखी और पीड़ित की आहें और बदुआएं कभी खाली नहीं जाती। डा. अनूप चौधरी के मामले में इनका संगठन पीएमएस सीएमओं की चमचागिरी भी लीपापोती करता रहा, और डा. को ही जिम्मेदार ठहराने लगा। ऐसे संगठन के होने और न होने का क्या फायदा? जो अपने साथियों की ऐसे गंभीर मामले में मदद न कर सकें। संगठन और इसके पदाधिकारी भी उतना ही गुनहगार जितना सीएमओ और गैंग। जांच टीम ने दिखाने और पीएमसी पर दबाव बनाने के लिए पति और पत्नी दोनों का कैमरें के सामने बयान लिया, लेकिन कारवाई सिफर।
60 ‘प्रधानों’ के ‘फर्जी’ सूची की ‘पोल’ खोलेेगें ‘एसडीएम’
बस्ती। अगर एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों ने डीएम का साथ दिया तो पहली बार साढ़े छह लाख से अधिक फर्जी मतदाता वोट नहीं कर पाएगें। डीएम ने सभी से स्पष्ट की दिया है, कि बीएलओ की ओर बनाई गई, पर काफी षिकायतें आ रही है, और यह षिकायतें फर्जी मतदाताओं की सूची के साथ दी जा रही है। जिले के लगभग 60 ऐसी ग्राम पंचायतें हैं, जहां पर फर्जी मतदाता सूची बनाने की षिकायत एक बार नहीं बल्कि तीन चार बार की गई। मैडम, डीएम का कहना है, जब षिकायतकर्त्ता सूची के साथ षिकायत कर रहा है, तो क्यों नहीं उनके नाम काटे गए? आप लोगों को जानकर हैरानी होगी, कि 1226 ग्राम पंचायतों में छह लाख 52 हजार से अधिक डुप्लीकेट/फर्जी मतदाता सामने आए। एक औनर हैरान करने वाली बात हैं, एसआईआर में 16 लाख वोट पाए गए, लेकिन पंचायत में वोटरों की संख्या बढ़कर 19.50 लाख से अधिक हो गई। आयोग इसी असमानता को दूर करने के लिए बार-बार पंचायत की सूची के प्रकाषन के तिथि बढ़ती जा रही है। आयोग का मानना है, कि दोनों के मतदाता सूची में अंतर नहीं होना चाहिए, इसी लिए अब जो पंचायत में नाम बढ़ाए जाने के फार्म-दो दिए, जा रहे हैं, उसमें विधानसभा के मतदाता सूची को भी अंकित करने को कहा गया, कहने का मतलब अब उन्हीं लोगों का नाम बढ़ेगा, जिनका नाम एसआईआर की सूची में नहीं है। जाहिर सी बात हैं, कि बहुत कम लोग होगें, जिनका नाम एसआईआर में नहीं होगा। डीएम को जो अधिकतर जो षिकायतें मिल रही है, उनमें यह कहा जा रहा है, कि बीएलओ, प्रधान की इच्छानुसार मतदाता सूची बना रहे है। इसे लेकर मैडम ने सभी एसडीएम से कह दिया है, कि हम्हें हाल में ़20 फरवरी तक त्रुटिरहित मतदाता सूची चाहिए। सभी एसडीएम से कहा कि आप तहसीलदार और नायकतहसीलदार के साथ गांव में जाइए, और वहां पर मतदाताओं की खुली चौपाल लगाइए, और एक-एक फर्जी नामों तो मौके पर ही काटिए। इस कार्रवाई से साढ़े छह लाख फर्जी मतदाता के बाहर होने की संभावना। यह प्रषसान, खासतौर पर डीएम की बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। सबसे अधिक फर्जी वोट गौर में 61304, बस्ती सदर में 60574, सल्टौवा में 59350, हर्रैया में 48121, सांउघाट में 46613, बहादुरपुर में 45856, रामनगर में 44598, कुदरहा में 43124, बनकटी में 42888, रुधौली में 37629 और सबसे कम दुबौलिया में 34890 है। जिस दिन फर्जी मतदाता सूची नामक गंदगी को प्रषासन साफ करने में सफल रहा, उस दिन जिले और डीएम की जयजयकार होगी। फिर कहीं भी विवाद नहीं होगा। इसी बहाने प्रषासन के सामने बीएलओ की भी पोल खुलेगी और कार्रवाई भी हो सकती है। फर्जी वोट के सहारे जिस तरह प्रधानी जीतने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया, उसे बीएलओ को वापस भी करना पड़ सकता है। बार-बार सवाल उठ रहा है, कि एक लाख 90 हजार से अधिक मतदाताओं में से कैसे साढ़े छह लाख से अधिक मतदाता बन गए। इसी सवाल का हल तलाषने के लिए डीएम ने सभी एसडीएम को 60 ग्राम पंचायतों में चौपाल लगाने को कहा है।
‘सदर’ तहसील में ‘फर्जीवाड़ा’ का ‘बोलबाला’
बस्ती। चारों तहसीलों में फर्जी मतदाताओं को तलाषने में सबसे अधिक मेहनत सदर के एसडीएम, तहसीलदार और नायकतहसीलदार को करनी पड़ेगी। क्यों कि 60 में 30 यानि आधा फर्जीवाड़ा सदर तहसीलों के ग्राम पंचायतों में हुआ। हर्रैया में 21, भानपुर में पांच और रुधौली में सबसे कम यानि तीन ग्राम पंचायतों के प्रधानों की मंषा धूमिल होने वाली है। जिन-जिन ग्राम पंचायतों में फर्जीवाड़ा का आरोप लगा, वे सभी नामीगिरामी ग्राम पंचायतें हैं, और इन्हीं ग्राम पंचायतों में सबसे अधिक मनरेगा और ग्राम निधि का दुरुपयोग हुआ। इस बार फिर भी लूटने की योजना बनाई हैं, देखिए कितना सफल होते है। मीडिया बार-बार प्रषासन को आगाह करती आ रही है, कि हर बार की तरह इस बार भी फर्जी वोटर्स बनाए जा रहें हैं, और जिसका प्रभाव चुनाव में पड़ेगा। डीएम ने मीडिया रिपोर्ट और षिकायतों को तो संज्ञान में लेकर जांच करने के आदेष भी दिए हैं, उम्मीद की जा रही है, परिणाम सार्थक होगें। जिन तहसीलों के ग्राम पंचायतों में फर्जी मतदाता बनाने की षिकायतें मिली, उनमें सदर तहसील के बनकटी ब्लॉक के ग्राम खोरिया, भौरा, महथा, बीहुआ, चक मुबारकपुर उर्फ घुघसा, चोलखरी, कराहपिठिया एवं नेवारी। कुदरहा ब्लॉक के ग्राम पंचायत माझाकला, पिरपाती एहतमाली, मिश्रौलिया, चकिया एवं तुरकौलिया। बहादुरपुर के ग्राम नरायनपुर, बेनीपुर, हथिया प्रथम, भोयर, अरवापुर, पिपराखास यह ग्राम पंचायत जिले के प्रधान संघ के नकली अध्यक्ष का है, मीतनजोत, नगहरा एवं कम्हरिया-2। बस्ती सदर के ग्राम बेलहरा, चंदोखा, रेवली, संडा एवं चिलवनिया यह वही ग्राम पंचायत हैं, जहां के फर्जी मतदाता का मामला हाईकोर्ट पहुंचा था, तत्कालीन डीएम अनिल दमेले को व्यक्तिगत प्रस्तुत होना पड़ा था, और तत्कालीन एसडीएम राम प्रसाद निलंबित होते-होते बचे, बीएलओ और सुपरवाइजर को बर्खास्त होना पड़ा, साउंघाट के ग्राम लखनौरा, हड़िया एवं बिल्लौर। हर्रैया तहसील के हर्रैया ब्लॉक के ग्राम भरकरी एवं महादेवा। दुबौलिया के ग्राम चकोही, बगही, मरवटिया, रानीपुर, रानीपुर लाद, सेमरा, आराजीडूही धर्मपुर मुस्तकहम, सर्रैया बक्षी, खुषहालगंज, साड़पुर एवं लक्ष्मनपुर। विक्रमजोत के ग्राम इमलिया, डड़हा मिश्र, रिखीपुर, तालागांव एवं बस्थनवा। गौर के ग्राम धंधरिया एवं इमिलिया। परसरामपुर के ग्राम इटवा एवं डुहवा पांडेय। भानपुर तहसील के रामनगर ब्लॉक के ग्राम धौरहरा, अमारीडीहा एवं बड़ौगी। सल्टौआ ब्लॉक के ग्राम आमा द्वितीय एवं तेनुआ और रुधौली तहसील के रुधौली ब्लॉक के ग्राम पंचायत हनुमानगंज एवं रौहनिया। नामी गिरामी और चर्चित ग्राम पंचायतों का नाम पढ़कर आप लोगों को खुद पता चल गया होगा, यह ग्राम पंचायतें क्यों इतना हर चुनाव में फर्जी मतदाता को लेकर चर्चित रही है। जिले के लगभग 60 से 70 फीसद प्रधान और बीडीसी का चुनाव फर्जी वोटर्स के सहारे ही अभी तक जीतते आ रहे है। क्यों कि मलाई तो इन्हीं दोनों पदों में है। प्रधान बन गए तो चांदी ही चांदी, बीडीसी बन गए, प्रमुख की कुर्सी पर बैठने का चांजेस अधिक रहता है। हो सकता है, कि इस कुछ लोगों का प्रधान और प्रमुख बनने का सपना अधूरा रह जाए। चंद लोग अपने लाभ के लिए पूरी चुनावी प्रकिया को ही दूषित करते आ रहे है।
‘आगंतुकों’ की ‘सेवा’ और ‘सुरक्षा’ हमारी ‘प्राथमिकता’ेःनेहा वर्मा
नगर पालिका अध्यक्ष नेहा वर्मा ने किया रैन बसेरों, अलाव व्यवस्था का औचक निरीक्षण
बस्ती। कड़ाके की ठंड और शीतलहर को देखते हुए नगर पालिका अध्यक्ष नेहा वर्मा ने गुरूवार को देर रात नगर क्षेत्र का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नगर पालिका द्वारा संचालित स्थाई व अस्थाई रैन बसेरों की स्थिति जांची और प्रमुख चौराहों पर जल रहे अलावों का जायजा लिया।
भाजपा के वरिष्ठ नेता अंकुर वर्मा के साथ नगर पालिका अध्यक्ष नेहा वर्मा ने रैन बसेरों में रुकने वाले यात्रियों और निराश्रितों के लिए बिस्तर, कंबल और साफ-सफाई की व्यवस्था देखी। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों को निर्देश दिए कि भीषण ठंड में किसी भी व्यक्ति को खुले में सोने की मजबूरी न हो। शहर के प्रमुख स्थानों और सार्वजनिक चौराहों पर जल रहे अलावों का निरीक्षण करते हुए उन्होंने लकड़ी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए ताकि राहगीरों और जरूरतमंदों को राहत मिल सके। निरीक्षण के दौरान नेहा वर्मा ने आम जनमानस से सीधी बात की और दी जा रही सुविधाओं के बारे में फीडबैक लिया। कहा कि नगरवासियों और बाहर से आने वाले यात्रियों की सेवा और सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। कड़ाके की इस ठंड में किसी को भी असुविधा न हो, इसके लिए नगर पालिका प्रशासन पूरी तरह सजग है। अलाव और रैन बसेरों की व्यवस्था में कोई भी कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी इस दौरान अश्विनी श्रीवास्तव, पार्थ श्रीवास्तव, मनीष श्रीवास्तव आदि कर्मचारी मौजूद रहे।
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‘ईश्वर’ की इच्छा ‘मानकर’ मन में ‘तृप्ति’ का ‘भाव’ रखना ही संतोष ‘कहलाता’:डॉ नवीन सिंह
बस्ती। एक कार्यक्रम में योगाचार्य डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि इच्छाओं को नियंत्रित रखते हुए, अपने ज्ञान बल और शक्ति बल का पूर्ण प्रयोग करने के पश्चात प्राप्त परिणाम को ईश्वर की इच्छा मानकर मन में तृप्ति का भाव रखना ही संतोष कहलाता है। उन्होंने अष्टांग योग के द्वितीय अंग ‘नियम’ के अंतर्गत योग साधकों एवं योग प्रेमियों को विस्तार से जानकारी दी। डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया कि संतोष का अर्थ कदापि यह नहीं है कि व्यक्ति ज्ञान और सामर्थ्य होते हुए भी निष्क्रिय होकर बैठ जाए। ऐसा करना आलस्य और प्रमाद की श्रेणी में आता है, जो योग मार्ग के विपरीत है। महर्षि पतंजलि का संदेश है कि मनुष्य को अपनी पूरी शक्ति लगाकर कर्म करना चाहिए और उसके बाद जो परिणाम प्राप्त हो, उसे सहर्ष स्वीकार करते हुए मन को संतुलित रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संतोष के साथ-साथ अपने सामर्थ्य को निरंतर बढ़ाते रहना और आत्मोन्नति के लिए सतत प्रयास करते रहना आवश्यक है। यही संतोष का वास्तविक स्वरूप है, जो व्यक्ति को निराशा से बचाकर सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करता है। संतोष के अनुष्ठान से आत्मबल अनंत गुना बढ़ता है, ईश्वर पर विश्वास दृढ़ होता है और अंततः साधक को परमानंद की अनुभूति होती है। योगाचार्य ने ऋषि वचन “संतोषम् परमं सुखम्” का उल्लेख करते हुए कहा कि संतोष ही परम सुख का आधार है, जो जीवन में शांति, स्थिरता और आनंद प्रदान करता है। यह नियम व्यक्ति को भौतिक और आध्यात्मिक दोनों स्तरों पर संतुलन सिखाता है।कार्यक्रम के अंत में डॉ. नवीन सिंह ने बताया कि अष्टांग योग के नियम विभाग के अंतर्गत आगामी सत्र में तीसरे विभाग ‘तप’ पर विस्तार से चर्चा की जाएगी, जिसके लिए योग साधकों से पुनः जुड़ने का आह्वान किया गया।

