14’ का ‘44’ लाख ‘दिया’, फिर भी ‘सूदखोंरों’ से ‘नहीं’ बची ‘जान’
‘14’ का ‘44’ लाख ‘दिया’, फिर भी ‘सूदखोंरों’ से ‘नहीं’ बची ‘जान’ बस्ती। कहना गलत नहीं होगा, कि सूदखोंरों का अगर कोई ईमान-धरम हैं, तो वह है, पैसा। यह पैसे के लिए इस हद तक जा सकते हैं, कि जिसे कोई सोच भी नहीं सकता, किसी की जान जाने तक का यह कारण बनते जा रहे है। बार-बार सवाल उठ रहा है, कि आखिर बाबू साहब के कारण ही लोग आत्महत्या क्यों करते जा रहे हैं? आखिर यह इतने बेरम क्यों होते जा रहे है। ब्याज पर पैसा लेने वाले अगर यह जान जाए कि यही पैसा उनके मौत का कारण बनेगा तो षायद ब्याज पर पैसा कभी न ले। ब्याज पर पैसा देने वालों का कोई वसूल नहीं होता है, वरना अगर कोई 14 लाख के स्थान पर 44 लाख चुकाता है, तो उसे जिंदा रहना चाहिए, यानि तीन साल में तीन सौ फीसद से अधिक ब्याज देकर भी मुंडेरवा के व्यापारी उमेषचंद्र अग्रहरि को अपनी जान सूदखोरों के चलते गवानी पड़ी। मृतक के पुत्र राहुल अग्रहरि की ओर से मुंडेरवा में दर्ज कराए एफआईआर में कहा गया है, कि उसके पिता ने 2023 में रामपुर रेवती निवासी गंगा सिंह उर्फ लोटन सिंह पुत्र चंद्रप्रकाष से कारोबार के लिए 14 लाख ब्याज पर लिया, कितने फीसद ब्याज पर लिया, सह नहीं बता...