‘बीडीए’ के भ्रष्टाचारी ‘राजकिशोर सिंह’ को ‘भगवान’ मानते!
बस्ती। सुनने में अजीब लग रहा होगा, लेकिन यह सच हैं, कि ‘बीडीए’ के भ्रष्टाचारी ‘राजकिषोर सिंह’ को अपना भगवान ‘मानते’ है। इन लोगों का कहना और मानना है, कि पूर्व कैबिनेट मंत्री राजकिषोर सिंह हम लोगों के लिए भगवान से कम नहीं हैं, क्यों कि इन्हीें चलते हम लोगों को करोड़पति बननेे का मौका मिला। आप लोगों ने पहली बार सुना होगा कि बीडीए को लूटने वाले भ्रष्टाचारियों ने इसके लिए पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं भाजपा नेता राजकिषोर सिंह को नए साल की बधाई देते हुए यह कहा कि अगर यह न होते तो हम लोग न कभी मालामाल हो पाते और न कभी बीडीए को बर्बाद ही कर पाते। दुनिया का यह पहला नये साल की बधाई होगी, जहां पर भ्रष्टाचारी पूर्व कैबिनेट मंत्री राजकिषोर को इस लिए बधाई दे रहे हैं, क्यों कि इन्होंने भ्रष्टाचारियों को खुलकर लूटने का मौका दिया। बीडीए को बर्बाद करने वाले गलत नहीं कह रहे हैं, कि अगर राजकिषोर सिंह बीडीए को न बनवाते तो उनका खजाना न भर पाता, और न कभी जीवन में कभी नोटों से भरा ब्रीफकेष उनके पास ही होता। जब-जब बीडीए की बात चलेगी, तब-तब पूर्व कैबिनेट मंत्री का जिक्र होगा, यह पहले ऐसे पूर्व कैबिनेट मंत्री होगें, जिन्हें लोग विकास के लिए बल्कि बीडीए के विनाष के लिए जाना जानेगें। इन्होंने जिस तरह अपने लाभ के लिए बीडीए बनवाया, उसका फायदा इन्हें मिला की नहीं, यह तो नहीं मालूम, लेकिन भवन निर्माणकर्त्ताओं को कितना नुकसान हुआ यह अवष्य सभी को मालूम। ऐसे भी भवन स्वामी है, जिन्हें उत्पीड़न के चलते रोते तक देखा गया, न जाने कितनों को सोने के लिए नींद का टेबलेट लेना पड़ा, बीपी तो न जाने कितनों की बढ़ी।
एक तरह से बीडीए बन जाने से पंकज पांडेय एंड टीम की लाटरी निकल गई, इस टीम के मुखिया और गैंग के सदस्यों ने सपने में भी नहीं सोचा था, कि बीडीए एक दिन उन लोगों के लिए राजकिषोर सिंह का दिया हुआ ऐसा वरदान साबित होगा, जिससे उनके बंगला गाडी और जेवरात का सपना पूरा होगा। हालांकि राजकिषोर सिंह को बार-बार हारने की कीमत भी चुकानी पड़ी। जिले के लोगों को आजतक समझ में नहीं आया कि किस लिए राजकिषोर सिंह ने बीडीए का गठन करने के लिए एड़ीचोटी लगाया। जिले के लोगों के लिए बीडीए किसी श्राप से कम नहीं है। भवन निर्माणकर्त्ताओं का बीडीए के लोगों ने जिस तरह सिरींज लगाकर खून निकालने का काम किया, उसके लिए जिले के लोग राजकिषोर सिंह को कभी माफ नहीं कर पाएगें। बीडीए के भ्रष्टाचारियों के आलावा एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं जिसने बीडीए के गठन के लिए पूर्व कैबिनेट मंत्री को थैंक्स कहा हो। लोगों का कहना है, कि पंकज पांडेय, संदीप कुमार और हरिओम गुप्त जैसे लोग तो जिले के लोगों के लिए पराए थे, लेकिन आप तो अपने थे, तो क्यों आप ने पराए लोगों को बीडीए को लूटने का मौका दिया। वैसे भी नेता कोई काम बिना लाभ के ेनहीं करतें, इसमें पूर्व मंत्रीजी को क्या लाभ हुआ? और कितना लाभ हुआ? यह तो वही जाने। बीडीए का गठन तो करवा दिया, लेकिन बीडीए को बर्बाद करने और लूटने वालों के खिलाफ इन्होंने आज तक न कुछ भी बोले और न बीडीए को समाप्त करने के साथ भ्रष्टाचार की जांच के लिए पत्र लिखा। सच पूछिए तो बीडीए की आवष्यकता ही नहीं थी, यहां की जनता विनियमित क्षेत्र से ही खुष थी, कम से कम षोषण और उत्पीड़न तो नहीं होता था। बीडीए का मतलब विकास से है। कहने की आवष्यकता नहीं कि कितना विकास हुआ। यह भी नहीं कि विकास नहीं हुआ, देखा जाए तो सबसे अधिक विकास अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, एक्सईएन, एई, जेई और मेटों का हुआ। रही बात बीडीए के तीनों सदस्यों के विकास होने की बात तो यही जाने, लेकिन इनकी चुप्पी ने बीडीए को अवष्य भ्रष्टाचार की आग में झोंक दिया। यह लोग माने या न माने लेकिन सच यही है, कि बीडीए के भ्रष्टाचार के लिए यह तीनों अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते। बीडीए की 15 बैठक हो गई, लेकिन एक भी विज्ञप्ति में बीडीए के किसी भी सदस्य का नाम तक नहीं आया, मुद्वा उठाना तो दूर की बात। भले ही पूछने पर यह लोग बहुत कुछ कहनें की बातें मीडिया से करते, लेकिन बीडीए वाले इनका नाम तक देना मुनासिब नहीं समझते। अगर किसी सदस्य को अपनी हैसियत का पता लगाना है, तो वह विज्ञप्ति उठाकर देख लें, जिसमें इनका नाम तक नहीं। इसी लिए इन लोगों को चाय-समोसा वाला सदस्य कहा जाता है। इन्हीं के सामने तीन दर्जन से अधिक अवैध कालोनियों का निर्माण हो गया, चुप रहे, सौ से अधिक सील किए गए भवनों की सील इन्हीं के ही जानकारी में तोड़ी गई, फिर भी यह लोग खामोष रहे। तीन हजार से अधिक अवैध निर्माण हो गया, लेकिन इन लोगों को दिखाई ही नहीं दिया। एक्सईएन की षह पर मेटों के द्वारा कार्यालय एवं बाहर जेई अनिल कुमार त्यागी पर जानलेवा हमला किया और करवाया गया। तब भी यह तीनों चुप रहे। बीडीए प्रदेष का पहला ऐसा विकास प्राधिकरण होगा, जहां पर ‘बीडीए’ के ‘जिम्मेदारों’ को ‘थाली’ में ‘सजा’ सजाया ‘भ्रष्टाचार’ का ‘भोजन’ मिलता है। हर जाने वाला एक्सईएन तोहफे में आने वाले एक्सईएन को भ्रष्टाचार सौंप कर जाता, कहने का मतलब पंकज पांडेय के बोए भ्रष्टाचार के बीज की फसल, एक्सईएन संदीप कुमार और अब हरिओम गुप्त काट रहे है। एक तरह से बीडीए के जिम्मेदारों को विरासत में भ्रष्टाचार और नोटों का बंडल मिलता। बीडीए के लोग कभी न भ्रष्टाचार की फसल काट पाते अगर राजकिषोर सिंह बीडीए न बनवाते। जनता भले ही इनसे नाराज है, और बुरा भला कहती है, लेकिन बीडीए के लोगों इन्हें किसी भगवान से कम नहीं मानते।
‘नेता’ वही ‘जिसके’ पास ‘फारचूनर’ और ‘डिफंेडर’ का ‘काफिला’ हो!
बस्ती। अगर किसी कार्यक्रमों में भीड़ जुटानी हो या फिर नेताओं का जोरदार स्वागत करना हो तो वह पूर्व सांसद हरीष द्विवेदी से सीख सकता है। भले ही यह किसी संवैधानिक पद पर रहें या न रहें, लेकिन भीड़ जुटाने और स्वागत कराने में आज भी इनका कोई सानी नही। देष के बड़े-बड़े नेता इनके सफल कार्यक्रम और भीड़ जुटाने मंत्र ले जा चुके है। अमित षाह तक इनके कायल है। एक दिन पहले इन्होंने पूर्व की भांति अपनी ताकत का एहसास नवागत भाजपा प्रदेष अध्यक्ष पंकज चौधरी के गोरखपुर प्रथम आगमन पर करा चुकें है। इनके अगुवाई में लक्जरी वाहनों का जो काफिला स्वागत में गया, उसे देख अन्य जिलों के नेता दंग रह गए। यह इस बात का सबूत हैं, कि आज भी इनमें उतना ही दम खम हैं, जितना सांसद रहते हुए था। यह सही है, कि भीड़ जुटाने में यह सफल रहे, लेकिन यह भी सही है, कि जितने लोग भीड़ का हिस्सा बने उनमें अगर 50 फीसद भी दिल से चाह लिए होते तो हरीष द्विवेदी पूर्व सांसद न कहलाते। इस सच से भी इंकार नहीं किया जा सकता है, कि अधिकांष लोग हरीष प्रेमी के रुप में नहीं बल्कि अपनी लालच में कड़ाके की ठंड में गोरखपुर गए थे। कहने को भले ही भीड़ में जाने वाले न जाने कितने फारचूनर और डिफेंडर के मालिक ही क्यों न रहें हो, लेकिन इनमें बहुत कम ऐसे होगें जो भाजपा को दस वोट भी अपने दम पर दिला सके, घर और गांव का वोट दिला दे, वही बड़ी बात। अगर किसी नेता की पहचान वाहनों से होने लगे तो जिले में न जाने कितने नेता होगें जो अकेले वाहनों का काफिला लें ला सकते है। इनमें मोदू चौधरी का नाम पहले स्थान पर आता है, क्यों कि जब भी कभी इस तरह का कार्यक्रम हुआ, इन्हीं के नाम का सबसे अधिक वाहन दिखाई दिया। इन्हें भी संजय चौधरी के साथ 27 के लिए भाजपा के टिकट का दावेदार माना जा रहा है। जितने लोग वाहनों का काफिला लेकर गए उनमें कोई विधायक तो कोई जिला पंचायत अध्यक्ष तो कोई क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष की दौड़ में षामिल होने वाले चेहरा रहें, यह हरीष द्विवेदी के लिए नहीं गए, बल्कि अपने लालच में गए। इन्हें आल भी पूरा विष्वास हैं, कि पूर्व की भांति इस बार भी उन्हंे पूर्व सांसद के सहयोग से मलाई खाने का मौका मिलेगा। इस बार जो लोग खुद या परिवार के लोगों को मलाई खाने/खिलाने का सपना देख रहे हैं, उनका सपना अवष्य पूरा होता, अगर यह लोग पूर्व सांसद को हरवाने में मदद न किए होते। मीडिया बार-बार कहती आ रही है, कि किसी भी नेता या व्यक्ति को हरीषजी को बेवकूफ समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। क्यों कि हार के बाद इन्हें अच्छी तरह एहसास हो गया कि कौन पराया और कौन सच्चा हमदर्द है। पीठ में छुरा भोकनें वालों की इनके पास एक लंबी फेहरिष्त है, और यह गोपनीय फेहष्ति पंचायत और विधानसभा चुनाव में सामने आएगा। वाहनों के काफिला के सहारे टिकट तो हासिल किया जा सकता है, लेकिन वह चुनाव नहीं जीता जा सकता, जो सीधे होता है। भारी दामों में टिकट खरीद कर जिला पंचायत अध्यक्ष और क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष तो बना जा सकता, लेकिन सांसद और विधायक नहीं। देखा जाए वर्तमान समय में भाजपा का एक भी ऐसा नेता नहीं जो अपनी छवि और काम के बल पर विधायक बन सकें। जो भी बनेगा, वह पार्टी के जनाधार पर बनेगा। यह एक ऐसा सच हैं, जिसे सभी स्वीकार कर रहे है। आज का हालात ऐसा है, कि जिसके पास जिनती बड़ी गाड़ी वह उतना बड़ा नेता। गाड़ियां तो बहुत से लोगों के पास मगर वोटर्स किसके पास है? यह टिकट देने वाली पार्टियों को विचार करना है। बिडंबना यह है, कि आज का नेता गाड़ी के बहाने ताकत दिखाना चाहता है। गाड़ी तो ठेकेदारों के पास भी सबसे अधिक हैं, तो क्या वह नेता हो गए? प्रमुखी हासिल करने का प्रयास तो कर रहे हैं, लेकिन क्या वह हासिल कर पाएगें?
‘भोलू सिंह’ के पत्र को ‘योगीजी’ ने लिया ‘संज्ञान’
बस्ती। सिपाही भर्ती-2026 को लेकर भाजपा नेता भोलू सिंह के पत्र को योगीजी ने संज्ञान में लेते हुए एक विज्ञप्ति जारी की गई है। जिसमें कहा गया है, कि आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती के तहत अभ्यर्थियों से आनलाइन आवेदन आमंत्रित किया गया। इसके तहत पांच जनवरी 26 के द्वारा आरक्षी पुरुष/महिला, आरक्षी पीएसी/सषक्त्र पुलिस पुरुष, आरक्षी विषेष सुरक्षा बल पुरुष, महिला बटालियन के लिए महिला आरक्षी, आरक्षी घुड़सवार पुलिस पुरुष,
जेल वार्डर पुरुष एवं जेल वार्डर महिला के कुल 32679 रिक्त पदों को भरने के लिए कार्मिक अनुभाग-2 उ.प्र. लोक सेवा भर्ती के लिए आयु सीमा का षिथिलीकरण के तहत निर्धारित अधिकतम आयु सीमा में सभी वर्गो के लिए अपवाद स्वरुप एक बार के लिए तीन वर्ष की षिथिलीकरण करने का निर्णय लिया गया। इसी षिथिलीकरण की मांग सुरक्षा सिपाही भर्ती-2026 में जहां आरक्षित वर्ग की आयु सीमा 18 से 27 वर्ष निर्धारित है उस सापेक्ष सामान्य वर्ग को 18 से 22 वर्ष आयु सीमा ( आरक्षण नियमावली के तहत् ) निर्धारित है परन्तु सिपाही भर्ती अंतर्गत आने वाले कुछ पदों पर भर्ती कोरोना व अन्य कारणों से पिछले कई साल से लंबित है, जिसके मद्देनजर सामान्य वर्ग को भी आयु सीमा में रियायत मिलनी चाहिए।
‘डा. वीके वर्मा’ कार में ‘लेकर’ चलते ‘कंबल’, गरीब मिला ओढ़ा ‘दिया’!
बस्ती। श्रीमती मुराली देवी मानव सेवा एवं शिक्षण संस्थान द्वारा संचालित पटेल एस.एम.एच. हास्पिटल एवं पैरा मेडिकल कालेज गोटवा एवं अन्य सहयोगी संस्थानों के सौजन्य से प्रबन्धक डा. वी.के. वर्मा ने डा. वी.के. वर्मा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सांइस बसुआपार, मुराली देवी बालिका इण्टर कालेज जिला अस्पताल के आयुष विंग में जरूरतमंदों में कम्बल का वितरण किया गया।
डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि समाज के सम्पन्न लोग गरीबों की हर संभव मदद करे तो लोगों को कडाके की ठंड का सामना नहीं करना पड़ेगा। बताया कि उनके द्वारा निरन्तर जरूरतमंदों में कम्बल का वितरण जारी है। अपने कार में वे कम्बल रखते हैं और जैसे ही कोई पात्र मिलता है उसे कम्बल देते हैं। कहा कि ठंड पड़ने तक यह सिलसिला जारी रहेगा। ज्ञात रहे कि डा. वर्मा पिछले कई वर्षो से कडाके की ठंड में जरूरतमंदों में कम्बल वितरण का सिलसिला जारी रखे हुये हैं। निदेशक आलोक रंजन ने कहा कि जरूरतमंदों में कम्बल वितरण के साथ ही पात्र लोगों का शिविर लगाकर हास्पिटल की ओर से उपचार भी किया जाता है। गरीबों की सेवा सबसे बडा धर्म है। कम्बल वितरण में डा. मनोज मिश्र, मनीष चौधरी, शिव प्रसाद, लालजी यादव, दीनबंधु उपाध्याय, विकास चौधरी आदि के द्वारा योगदान दिया जा रहा है।
‘छह’ मार्च को होगा ‘मतदाता’ सूची का अंतिम ‘प्रकाशन’
बस्ती। जनपद में निर्वाचक नामावली के शुद्धिकरण एवं पारदर्षिता सुनिष्चित करने के उद्देष्य से अद्यतन आलेख्य मतदाता सूची को मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों को जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी कृत्तिका ज्योत्स्ना ने कलेक्टेªट सभागार में उपलब्ध करा दिया है। उन्होने कहा कि उक्त मतदाता सूची उपलब्ध कराये जाने का उद्देष्य यह है कि राजनैतिक दल मतदाता सूची का अवलोकन कर सके तथा किसी प्रकार की त्रुटि, विलोपन या संषोधन से संबंधित कोई आपत्ति हो तो निर्धारित समयसीमा के भीतर उपलब्ध करा दें। उन्होने बताया कि दावे और आपत्तियॉ प्राप्त करने की अवधि दिनॉक 06 जनवरी 2026 से 06 फरवरी 2026 शुक्रवार, नोटिस चरण (जारी करना, सुनवाई और सत्यापन) गणना प्रपत्रों पर निर्णय और दावे और आपत्तियों का निस्तारण दिनॉक 06 जनवरी 2026 से 06 फरवरी 2026 तक, स्वास्थ्य मापदण्डों की जॉच करना और अन्तिम प्रकाषन के लिए आयोग की अनुमति प्राप्त 03 मार्च 2026 मंगलवार एवं निर्वाचक नामावलियों का अन्तिम
प्रकाषन दिनॉक 06. मार्च 2026 शुक्रवार को आयोग द्वारा निर्धारित किया गया है। बताया कि कि 1900430 मतदाताओं के गणना प्रपत्र वितरित किए गये थे, जिसके सापेक्ष 1602143 मतदाताओं के गणना प्रपत्रों को डिजिटाइज्ड किया गया है, जिसमें 6,73,060 मतदाताओं को सेल्फ कैटेगरी (35.42प्रतिषत) में, 8,17,411 मतदाता प्रोजेनी (43.01 प्रतिषत) में, 1,49,0471 मतदाताओं को वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मैप किया गया, 1,13,363 (5.86 प्रतिषत) मतदाता 2003 की मतदाता सूची से मैप नही हुए है, जिनको नोटिस जारी किया जायेगा और ऐसे सभी मतदाताओं को आयोग द्वारा निर्धारित अभिलेखो में से कतिपय अभिलेखों को प्रस्तुत किया जाना होगा। 1900430 मतदाताओं में से 2,98,287 (15.70 प्रतिषत) मतदाताओं को अनकलेक्टेबल श्रेणी में रखा गया है, जिनमें डेथ कैटेगरी 57,467 (3.02 प्रतिषत), अनट्रेसेबल 57,404 (2.86 प्रतिषत), स्थायी रूप से स्थानांतरित 1,48,055 (7.79 प्रतिषत), पहले से नामांकित 37,277 (1.96 प्रतिषत), अन्य 1,084 (0.06 प्रतिषत) मतदाता शामिल हैं। बैठक में एडीएम/उप जिला निर्वाचन अधिकारी प्रतिपाल सिंह चौहान, उप जिलाधिकारी शत्रुध्न पाठक, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी सुभाष सिंह, संबंधित राजनैतिक दलों के पदाधिकारीगण उपस्थित रहें।
‘बस्ती’ वालों ‘ने’ किया एतिहासिक ‘स्वागत’, ‘गदगद’ हुए ‘पंकज चौधरी’
बस्ती। भाजपा के नवागत प्रदेष अध्यक्ष पंकज चौधरी पे कभी सोचा भी नहीं होगा कि प्रदेष अध्यक्ष के रेस में षामिल रहे बस्ती के पूर्व सांसद हरीष द्विवेदी की अगुवाई में गोरखपुर में इतना बड़ा स्वागत होगा कि वह ऐतिहासिक बन जाए। भीड़ देख पंकजजी इतने गदगए हुए कि उन्होंने श्रीद्विवेदी और उनकी टीम को तहे दिल से धन्यवाद दिया। स्वागत करने वालों की टीम में प्रदेष अध्यक्ष के सबसे करीबी और बस्ती के जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी का ना न होना चर्चा का विषय बना हुआप है। बहरहाल, ऐसे मौके पर भाजपाईयों ने इतने कड़ाके की ठंड में जो एकता दिखाई, उसे एक षुभ संकेत माना जा रहा है। पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी के नेतृत्व में भारी संख्या में गाड़ियों का विशाल काफिला प्रातः 9 बजे बस्ती से गोरखपुर के लिए रवाना हुआ। इसके लिए सुबह सात बजे से ही जिले भर के कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों से एकत्रीकरण स्थलों पर पहुंचने लगे थे। कार्यक्रम को व्यवस्थित एवं अनुशासित ढंग से संचालित करने हेतु जिले में तीन प्रमुख एकत्रीकरण बिंदु बनाए गए थे। हर्रैया, कप्तानगंज एवं बस्ती क्षेत्र से आने वाली गाड़ियों का एकत्रीकरण बस्ती टोल प्लाजा पर किया गया। वहीं रुधौली क्षेत्र की गाड़ियाँ पॉलिटेक्निक चौराहे पर तथा बनकटी, मुंडेरवा और कुदरहा से आने वाली गाड़ियों के लिए कांटे चौराहे को एकत्रीकरण स्थल बनाया गया था। गोरखपुर पहुंचने पर रेल म्यूजियम के सामने बस्ती जनपद की ओर से भव्य पंडाल लगाया गया था, जहां पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी एवं भाजपा जिलाध्यक्ष विवेकानन्द मिश्र के नेतृत्व में प्रदेष अध्यक्ष का जोरदार, ऐतिहासिक और भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी जी ने कहा कि बस्ती जनपद से सुबह-सुबह हजारों की संख्या में गोरखपुर पहुंचकर प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत हेतु कार्यकर्ताओं द्वारा दिखाया गया उत्साह, समर्पण और अनुशासन अत्यंत प्रशंसनीय है। यह सहभागिता संगठन की एकजुटता, मजबूती और कार्यकर्ताओं की प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
उन्होंने समस्त कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष विवेकानन्द मिश्र ने कहा कि बस्ती जनपद से उमड़ा यह विशाल काफिला भारतीय जनता पार्टी की संगठनात्मक शक्ति और कार्यकर्ताओं के अटूट विश्वास का प्रतीक है। यह उत्साह आने वाले समय में संगठन को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करेगा। कार्यक्रम में प्रेम सागर त्रिपाठी, राकेश कुमार श्रीवास्तव, योगेन्द्र सिंह, अनिल दुबे, अरविन्द पाल, प्रमोद पाण्डेय, हरिद्वार मिश्र, उमाशंकर पटवा, विनय सिंह सोनू, पुष्करदित्य सिंह, अभिषेक कुमार, तेजा, ब्रम्हदेव यादव, बालकृष्ण पिंटू तिवारी, वरुण सिंह, अरविन्द सिंह, चन्द्र मणि पाण्डेय सुदामा, वैभव पाण्डेय, प्रबल मालानी, जटाशंकर शुक्ला, भानु प्रकाश मिश्र, दुष्यंत विक्रम सिंह, सोनू सिंह, अमित सिंह आर बी एस, अरविन्द सिंह विक्रमजोत, भानु प्रताप सिंह, राम सिंह, ई० वीरेन्द्र मिश्र, अंकुर वर्मा, प्रमोद चौधरी गिल्लम, अमृत कुमार वर्मा, रघुनाथ सिंह, सुरेन्द्र तिवारी, विनोद चौधरी, सतेन्द्र सिंह, केके दुबे, देवेन्द्र सिंह, नरेन्द्र त्रिपाठी “चंचल“,राजेंद्र प्रसाद गुप्ता उर्फ रज्जू, कुंवर आनन्द सिंह, पिंटू सोनकर, विनोद सिंह सुमही, अभिनव उपाध्याय, दिलीप पाण्डेय, सच्चिदानन्द पाण्डेय, सुनील सिंह, महेंद्र चौधरी, परमेश्वर शुक्ल पप्पू, राजकुमार शुक्ल, धर्मेन्द्र जायसवाल, दिलीप भट्ट, अलोक पाण्डेय, शिव चरन जायसवाल, ओंकार सिंह, वरुण पाण्डेय, अंकित पाण्डेय, सर्वजीत भारती, कामेंद्र चौहान, सुजीत सोनी, सुधाकर सिंह, गौरव मणि त्रिपाठी, राजेश कमलापुरी, लवकुश शुक्ल, दिव्यांशु दुबे सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।



