आखिर ‘प्रषासनिक’ अमला ‘क्यों’ एक ईमानदार ‘बाबू’ से डर ‘रहा’?
आखिर ‘प्रषासनिक’ अमला ‘क्यों’ एक ईमानदार ‘बाबू’ से डर ‘रहा’? बस्ती। वैसे भी आजकल ईमानदार बाबूओं का अकाल पड़ा हैं, ऐसे में अगर कोई बाबू ईमानदारी से अपना काम करना चाहता है, तो उससे यह कहकर काम नहीं लिया जाता कि तुम जैसे ईमानदार बाबू की जरुरत नहीं है। तुम, हम लोगों के अवैध कमाई के रास्ते में बाधक हो, अगर तुम रहोगे तो हम लोग नगर पंचायत को नहीं लूट पाएगें, इस लिए हम लोगों को तुम्हारे जैसे ईमानदार बाबू की आवष्यकता नहीं हैं, तुम आराम से घूमो-टहलो, जहां जाना चाहो जाओ, चाहे जितने दिन के लिए जाओ, तुम्हें कोई नहीं रोकेगा और न कुछ कहेगा, और न तुम्हारा वेतन ही कटेगा, अलबत्ता, तुमको हर माह वेतन भी मिलता रहेगा। एक बाबू बाबू चार साल से ईओ, चेयरमैन, कमिष्नर, डीएम और एडीएम को लिखकर देता आ रहा, कि साहब हम्हंे कोई काम तो दिलवा दीजिए, हम हराम का वेतन नहीं लेना चाहते, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं, काम देना और दिलाना तो बहुत दूर की बात है। सजातीय होने के नाते बाबू, सदर विधायक के पास भी यह फरियाद लेकर गया कि मुझे नगर पंचायत में कोई काम नहीं दे रहे हैं, काम दिलवा दीजिए, आप की बड़ी मेहरबानी होगी। इस पर विधायकजी ...