ष्यादवोंष् को भी ष्चैधरियोंष् जैसा ष्समझदारष् बनना ष्होगाष्!
ष्यादवोंष् को भी ष्चैधरियोंष् जैसा ष्समझदारष् बनना ष्होगाष्!
बस्ती। यह सही हैए कि अगर प्रदेष का यादव भी चैधरियों जैसा समझदार हो जाएए तो हर जिले में इस वर्ग का एक बड़ा नेता के रुप उभर सकता है। इस लिए अगर यादव को चैधरियों जैसा नेता बनना है। चैधरियों जैसा रुतबा हासिल करना और उनके जैसा सम्मान पाना हैए तो यादवों को भी चैधरियों जैसा समझदार बनना पड़ेगा। यादव के लोगों को यह एहसास कराना होगा कि हम सिर्फ गाय चराने वालेए दूध बेचने वाले और पषुपालक ही नहीं बल्कि देष के निर्माण में अग्रहणी भूमिका निभाने वाले लोग भी है। हमारा भी कोई वजूद है। हम्हें न तो कोई बरगला सकता हैए और न अपने फायदे के लिए राजनीति में ही इस्तेमाल कर सकता है। कहा कि जिस दिन यादव वर्ग अपनी ताकत का एहसास करा दियाए उस दिन नेताओं को भी यादवों की अहमियत का पता चल जाएगा। यह बातें भाजपा जिला पिछड़ा वर्ग के अध्यक्ष ब्रहृमदेव उर्फ देवा ने कही। उन्होंने अखिलेष यादव पर तंज कसते हुए कहा कि क्या उनके परिवार वाले ही सांसद बनेगेंए यह अन्य किसी बाहरी यादव को क्यों नहीं सांसद बनातेघ् क्यों नहीं उन्हें टिकट देतेघ् कहा कि इनका साम्राज्य समाप्त हो गया। लोग इनके परिवारवाद प्रेम को अच्छी तरह समझ चुके हैं।
बहृमदेवा का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। हालांकि यह वीडियो पुराना हैए लेकिन जिस तरह यह मोदी के प्रति वफादारी दिखाते हुए यह कहते नजर आ रहे हैंए कि हम्हें मोदीजी पर गर्व हैंए गर्व हैए गर्व है। अगर उनके लिए जान भी देना पड़ेगा तो पीछे नहीं हटेगें। कहा कि जिस तरह पूरी दुनिया में मोदीजी ने भारत का परचम लहराया हैए उससे पूरी दुनिया में देष का नाम उंचा हुआ। कहा कि कांग्रेस ने देष को गर्त में ढकेलने का काम कियाए देष को लूटाए लेकिन मोदीजी ने देष का नाम उंचा किया। कहा कि हम गाय की पूजा करते हैंए इस लिए हम मोदीजी को मानते है। जिस तरह मोदी के प्रति वायरल वीडियो में वफादारी दिखाई गईए वह किसी यादव में बहुत कम देखी जाती है। जिस अंदाज में इन्होंने यह कहा कि वह मोदीजी के नाम पर कुर्बान हैए और जिस तरह मौजूद भीड़ ने ताली बजाकर समर्थन कियाए उससे इनका मोदी प्रेम झलकता है। इससे इन्हें भविष्य की राजनीति में कितना लाभ मिलेगाए यह तो नहीं मालूमए लेकिन चर्चा में अवष्य आ गएं हैए और ऐसे समय में इन्होंने मोदी के प्रतिवादी वफादारी दिखायाए जब मोदी के निजी जीवन पर विपक्ष चैतरफा हमला कर रहा है। कहा भी जाता हैए कि राजनीति में कोई भी चीज असंभव नहीं है। किसी का सपना वफादारी दिखाकर पूरा होता हैए तो किसी का गाली देकर। अगर ऐसा नहीं होता तो मोदीए षाह और पूर्व सांसद हरीष द्विवेदी को खुले आम मीडिया के सामने गाली वाला कभी जिला पंचायत अध्यक्ष नहीं बन पाते और न कोई नगर पालिका अध्यक्ष का टिकट ही पाता।
ष्एकष् करोड़ लाइएए ष्दसष् करोड़ ले लाइएए ष्छहष् करोड़ ष्कमाइएष्!
बस्ती। चैकिंए मत। आज हम आप लोगों को उस फारमूले के बारे में बताने जा रहा हैए जिसे अपनाकर स्वास्थ्य विभाग और षासन के न जाने कितने भ्रष्ट एसआईसीए सीएमओए सीएमएसए ठेकेदार और जेम पोर्ट के लिपिकध्फार्मासिस्ट रातों रात करोड़पति बन गए। इस फारमूले का नाम हैंए ष्एकष् करोड़ लाइएए ष्दसष् करोड़ ले लाइएए और ष्छहष् करोड़ ष्कमाइएष्। यानि अगर किसी को दस करोड़ का बजट लेना हैए तो उसे सबसे पहले षासन में दस फीसद कमीषन के रुप में एक करोड़ जमा करना होगा। जाहिर सी बात हैंए इतनी बड़ी रकम तो एसआईसीए सीएमओए सीएमएसए या फिर जेम पोर्ट के लिपिकध्फार्मासिस्ट तो देगा नहींए बचा कौन ठेकेदार। यही वह ठेकेदार होता हैए जो एक करोड़ लगाकर छह करोड़ का बंदरबांट करता है। दस करोड़ के काम में से ठेकेदार को एसआईसीए सीएमओए सीएमएसए ठेकेदार और जेम पोर्ट के लिपिकध्फार्मासिस्ट को मिलाकर 20 फीसद कमीषन के रुप में दो करोड़ देना होता है। देखा जाए असली बजट सात करोड़ बचाए इनमें से तीन करोड़ से अधिक ठेकेदार मार लेता है। यह समझने वाली बात हैंए कि जब कमीषन और ठेकेदार लाभांष के रुप में दस में से छह करोड़ चला गया तो दस करोड़ का काम कैसे चार करोड़ में होगाघ्
बचे चार करोड़ में अस्पतालों का उच्चीकरण भी होगाए और उपकरणों की आपूर्ति भी होगीए उच्चीकरण और सामानों की गुणवत्ता कैसी होगीघ् इसे बताने की आवष्यकता नहींए क्यों कि अगर किसी को भी गुणवत्ता से मतलब होता तो दस करोड़ में से छह करोड़ कमीषन में न चला जाता। कमीषन मिलने के बाद षासन का कोई भी अधिकारी बजट जारी करने से पहले यह नहीं देखता कि जिन अस्पतालों के उच्चीकरण के नाम पर दो.तीन साल पहले करोड़ों का बजट दिया गयाए उस अस्पताल को क्यों फिर बजट दिया जा रहा हैघ् अगर बजट जारी ही करना हैए तो पांच साल बाद करतेए क्यों दो.तीन साल के भीतर बजट दे रहें हैंघ् इसका सीधा सा मतलब कमीषन दीजिए और बजट ले जाइए। अस्पतालों के उच्चीकरण के नाम पर पुनः पांच साल बाद बजट जारी करने का प्राविधान हैंए लेकिन यहां पर तो दो.तीन साल में बजट जारी कर दिया। बार.बार कहा जा रहा हैए कि अगर किसी अस्पताल के उच्चीकरण और उपकरणों की खरीद फरोख्त के नाम पर दो.तीन साल पहले बजट जारी किया गयाए तो पुनः पांच साल बाद ही उस अस्पताल के लिए उच्चीकरण के नाम पर बजट जारी किया जा सकता है। लेकिन जब षासन और सीएमएस को 10 और 20 मिलाकर कुल 30 फीसद का कमीषन मिल जाता हैए तो उनके सामने कोई भी नियम और कानून नहीं दिखाई देताए उन्हें सिर्फ गांधी ही दिखाई देता है। हर्रैया के 100 बेड वाले अस्पताल के सीएमएस सुषमा जायसवाल और जिला महिला अस्पताल के सीएमएस अनिल कुमारए जेम पोर्टल लिपिकध्फार्मासिस्ट और ठेकेदार षुभम अग्रवाल ने मिलकर उच्चीकरण और सामानों की खरीद फरोख्त के नाम पर लगभग नौ करोड़ का बंदरंबाट करने की साजिष रची। इन लोगों ने सबसे पहले उच्चीकरण और सामानों की खरीद फरोख्त करने का प्रस्ताव यह जानते हुए जानबूझकर भेजा कि प्रस्ताव नियमानुसार मंजूर नहीं हो सकताए लेकिन ठेकेदार ने कहा कि आप दोनों प्रस्ताव भेजिएए मंजूर करवाना और बजट लाना मेरा काम है। चूंकि दोनों सीएमएस को एक करोड़ 80 लाख का कमीषन दिखाई दे रहा थाए इस लिए अंांख होते हुए भी अंधा बनकर प्रस्ताव भेज दियाए बाकी काम ठेकेदार षुभम अग्रवाल ने पूरा कर दिया। अब दोनों सीएमएस को एक करोड़ 80 लाख के कमीषन से हाथ तो थोना पड़ाए साथ ही दोनों के निलंबन की तलवार अलग से लटक रही है। रही बात ठेकेदार षुभम अग्रवाल की तो इनका एक करोड़ कमीषन का डूबा ही साथ ही इनकी फर्म ब्लैक लिस्टेड अलग से होगी। इस पूरे गोलमाल के एपिसोड में दो चीज सामने आयाए पहला दोनों सीएमएस ने बजट जारी होने से पहले कैसे टेंडर निकाला और उसे फाइनल कर दियाघ् और कैसे दो.तीन साल के भीतर ही उच्चीकरण का प्रस्ताव दियाघ् खास बात यह हैए कि नौ करोड़ का टेंडर किस तिथि और किस अखबार में निकला और कब अनुबंध हुआए इसकी जानकारी सिर्फ दोनों सीएमएसए जेम पार्टल लिपिक और ठेकेदार को ही है।
ष्षुभम अग्रवालष् के ष्सोनेष् की ष्लंकाष् में ष्मनीष मल्होत्राष् ने लगाई ष्आगष्!
बस्ती। जो ठेकेदार हर साल स्वास्थ्य विभाम में सिर्फ अस्पतालों के उच्चीकरण के नाम पर पांच सौ करोड़ से अधिक का कारोबार करता होए और जिसे डिप्टी सीएम एवं हेल्थ मंत्री का सबसे करीबी और चहेता माना जाता हैए अगर उसके कारोबार में षुभम अग्रवाल जैसा बस्ती का ठेकेदार रोड़ा बनेगा और वर्चस्व को समाप्त करने की हिम्मत करेगा तो दस मिनट में कार्रवाई भी होगीए टेंडर निरस्त कभी निरस्त होगा और भुगतान पर रोक भी लगेगी। इतना ही नहीं षुभम अग्रवाल का साथ देने वाले सीएमएस और अन्य को निलंबित भी होना पड़ेगा। जिस तरह षिकायत करने के दस मिनट के भीतर डिप्टी सीएम के द्वारा आनन.फानन में कार्रवाई की गईए अगर यही कार्रवाई इससे पहले भी अन्य षिकायतों पर मंत्रीजी किए होते तो आज उनके विभाग का 100 बेड वाले हर्रैया और महिला अस्पताल बस्ती के सीएमएस फर्जीवाड़ा करने की हिम्मत न करते। जो लोग यह जानना और समझना चाहते हैंए कि दोनों अस्पतालों को बजट जारी होने के कुछ ही घंटों में कैसेघ् डिप्टी सीएम ने इतनी बड़ी कार्रवाई कर दीए उन लोगों को बताना चाहता हूंए कि यह कार्रवाई कोई भ्रष्टाचार मिटाने या भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाने के लिए नहींए बल्कि इस लिए की गईए क्यों कि बस्ती के षुभम अग्रवाल नामक ठेकेदार ने डिप्टी सीएम के सबसे खास सिपहसलार मनीष मल्होत्रा के कारोबार में सेंध मारने की हिम्मत की।
बता दें कि यह वही लखनउ आप्टिकल के मनीष मल्होत्रा हैंए जिन्होंने दो साल पहले जिला महिला अस्पताल के छह करोड़ का भुगतान कोषागार में चार फीसद यानि 24 लाख कमीषन देकर मार्च के अंतिम दिन यानि 31 मार्च 23 को अनियमित रुप भुगतान ले लिया था। एक तरह से मनीष मल्होत्रा को स्वास्थ्य विभाग का किगं माना जाता है। सीएमओ की तैनाती में भी इनकी दखंदाजी रहती है। यह ठेका पटटी पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैंए आजकल भाजपा के जो नेताओं को चाहिएए वह यह सब उपलब्ध करा देतें है। पूरे प्रदेष में यह अकेला ऐसे ठेकेदार हैंए जिन्हें अस्पतालों के उच्चीकरण के नाम पर फर्जीवाड़ा करने में मास्टर माइंड कहा जाता है। इन्हें उच्चीकरण करने के आलावा और कोई काम नहीं आता। चूंकि उच्चीकरण में सबसे अधिक लाभ यानि अगर दस करोड़ का बजट मिला तो पांच करोड़ का लाभ होता है। जब इन्हें पता चला कि बस्ती के ठेकेदार षुभम अग्रवाल नामक व्यक्ति उनका विरोधी बनने का प्रयास कर रहा हैए और उनके कारोबार में सेंधमारी कर रहा हैए तो इन्होंने इसे सबक सिखाने और अपने रास्ते से हटाने के लिए अपने आका यानि डिप्टी सीएम का सहयोग लिया। उसके बाद जो डिप्टी सीएम ने मिनटों में कियाए उसे सीएम महीनों में नहीं कर पाएगें। इस कार्रवाई के बहाने मनीष अग्रवाल ने उन लोगों को एक संदेष देने का प्रयास किया जो लोग अस्पतालों के उच्चीकरण के नाम पर रातों.रात करोड़पति बनने की साजिष सीएमएस के साथ मिलकर कर रहे है। इन्होंने एक ही झटके में दो सीएमएसए दो जेम पोर्टल लिपिकध्फार्मासिस्ट और ठेकेदार को धूल चटा दिया। रही बात बस्ती के ठेकेदार षुभम अग्रवाल की तो यह कभी लखनउ में एक मेडिकल की एजेंसी पर सेल्स मैन का काम करते थेए सेल्समैनी करते.करते इन्होंने कैसे करोड़पति बना जाता हैए सारे गुण.अवगण सीख लियाए और एक दिन सेल्समैन की नौकरी छोड़ दीए और ठेकेदार बन गए। बताते हैंए कि ठेकेदारी के धंधे में यह काफी माल कमा चुके हैए माल कमाने के लिए इन्होंने वह सबकुछ किया जो मनीष मल्होत्रा ने कियाए फर्क इतना हैए कि मनीष मल्होत्रा बड़े.बड़े भाजपा नेताओं की इच्छा की पूर्ति करते हैए और षुभम अग्रवाल जिले के छोटे.छोटे अधिकारियों और नेताओं का ख्याल रखते है। जिस तरह आजकल महिलाओं को लेकर सोषल मीडिया पर भुक्तभोगी महिलांए यह कहती नजर आ रही हैए कि महिलाओं की तरक्की की सीढ़ी नेताओं के विस्तर से होकर गुजरती है। ठीक उसी तरह ठेकेदारों की तरक्की भी मंत्रियों की इच्छाओं की पूर्ति पर निर्भर है। कहने का मतलब सबसे अधिक नेताओं के चरित्र का ही आजकल हनन हो रहा है। अब तो महिला नेत्रियों को षक की निगाह से देखा जाने लगा।
ष्बीएसएष् साहब ष्क्योंष् अक्षम ष्षिक्षकष् को ष्प्रबंधष् कमेटी से ष्पंगाष् ले ष्रहेंष्घ्
बस्ती। अगर बीएसए साहब अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर एक ऐसे अक्षम षिक्षक के लिए प्रबंध कमेटी से पंगा लेगेंए जो न तो ठीक से खड़ा हो सकता हैए और न बोल ही सकता हैए तो आरोप तो लगेगा ही। प्रबंध कमेटी आप से सिफारिष कर रही हैए कि षिक्षक का मेडिकल बोर्ड और षैक्षिक कमेटी से जांच करा लीजिएए लेकिन आप जांच नहीं करवा रहे हैंए बल्कि पूरे प्रबंध कमेटी पर वेतन देने का दबाव बना रहे हैंए न देते पर कमेटी को भंग करने और एकल व्यवस्था लागू करने की धमकी दे रहे हैंए और जब आप के नियम विरुद्व बात को नहीं माना तो आपने प्रधानाचार्य सहित पूरे स्टाफ का वेतन रोक दियाए और एकल खाता संचालित करने का फरमान जारी कर दिया। सवाल उठ रहा हैंए कि जिस षिक्षक को स्कूल के प्रबंध कमेटी अक्षम मान रही हैए और नो वर्क नो पे के आधार पर वेतन नहीं दे रही हैए उसे आप वेतन दिलाने के लिए अधिकार से बाहर क्यों जा रहे हैघ् सवाल उठ रहा हैए कि आखिर आप ऐसा क्यों कर रहे हैंए और किस लालच में कर रहे हैघ् बीएसए साहब आपकी हठधर्मिता के कारण मामला हाईकोर्ट में चला गया।
यह मामला हीरालाल कृषि पूर्व माध्यमिक विधालय फरदापुर महुआपार हर्रैया का है। यहां पर एक सहायक अध्यापक अरविंद कुमार उपाध्याय है। यह षैक्षिक कार्य करने में अक्षम क्यों कि यह लकवाग्रस्त है। षिक्षण कार्य न करने के कारण इनका वेतन सितंबर 25 से फरवरी 26 तक नो वर्क नो पे के आधार पर प्रबंध कमेटी ने बाधित कर दिया। बीएसए ने अपने अधिकारों का प्रयोगध्दुरुपयोग करते हुएए बिना प्रबंध कमेटी के प्रबंधक और प्रधानाचार्य के द्वारा बिल प्रस्तुत किए माह सितंबर का वेतन भुगतान कर दिया। अक्टूबर 25 से फरवरी 26 तक वेतन बाधित है। बताया जाता हैए कि इस वेतन को देने के लिए बीएसए ने प्रधानाचार्य और प्रबंधक पर दबाव बनायाए और कहा कि अगर वेतन नहीं दिया तो कमेटी को भंग कर दूंगाए एकल खाता की व्यवस्था कर दूंगा। बीएसए ने जो कहा उसे नियम विरुद्व किया भीए एकल खाता व्यवस्था कर दियाए बस कमेटी को भंग नहीं किया। अलबत्ता जिद में आकर प्रधानाचार्य सहित पूरे स्टाफ का वेतन रोकने का आदेष भी जारी कर दिया। कमेटी बार.बार बीएसए से लिखित में षिक्षक का मेडिकल बोर्ड और षैक्षिक कमेटी से जांच करवाने की मांग कर रही हैए लेकिन न जाने क्यों बीएसए साहब अड़े हुए हैघ् बीएसए साहब के अड़ियल रुख के चलते प्रबंध कमेटी को हाईकोर्ट की षरण में जाना पड़ा। जाहिर सी बात हैए कि हाईकोर्ट का निर्णय प्रबंध कमेटी के पक्ष में होने की संभावना है। कोर्ट से बीएसए के आदेष को स्थगित करने और जांच पूरी होने तक कार्रवाई को स्थगित रखने की अपील की गई है। प्रबंधक गोमती प्रसाद पांडेय कहते हैंए कि बीएसए को जो अधिकार नहीं हैंए उसका भी वह दुरुपयोग कर रहे हैंए क्यों कर रहें हैंघ् पता नहीं। कहते हैंए कि जिस तरह बीएसए प्रबंध कमेटी के अधिकार क्षेत्र और कामकाज में हड़गां डाल रहे हैंए उसे मनमानी कहा जाता है। यह भी कहते हैंए कि एक अधिकारी को मनमानी करना षोभा नहीं देता। क्यों कि यह मामला पूरी तरह प्रबंध कमेटी और अक्षम षिक्षक के बीच का है।
ष्गौ संरक्षणष् में ष्प्रषासनष् का कार्य ष्उल्लेखनीयष्ःमहेष
बस्ती। गोसेवा आयोग उपाध्यक्ष महेष शुक्ला ने प्रेसवार्ता में कहा कि गौ.सेवा ही सुशासन का आधारः निराश्रित गोवंश के संरक्षण में उत्तर प्रदेश सरकार की संवेदनशील पहलए उत्तर प्रदेश के यशस्वी एवं लोकप्रिय माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के दूरदर्शी एवं कुशल नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार गौ.सेवा को केवल एक प्रशासनिक दायित्व नहींए बल्कि मानवीयए सामाजिक एवं आध्यात्मिक उत्तरदायित्व के रूप में स्वीकार करते हुए सतत कार्य कर रही है। उन्होने कहा कि राज्य सरकार द्वारा निराश्रित एवं असहाय गोवंश के संरक्षणए संवर्धन एवं समुचित देखभाल के लिए व्यापक एवं बहुआयामी योजनाएं संचालित की जा रही हैंए जिनके सकारात्मक परिणाम प्रदेशभर में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उत्तर प्रदेष देष का पहला ऐसा राज्य है जहा निराश्रित गोवंष के भरण पोषण के लिये सरकार द्वारा 50 रुपया की दर से भरण पोषण की धनराषि उपलब्ध करायी जा रही है|
प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी गौ संरक्षण नीति के अंतर्गत वर्तमान में राज्य के विभिन्न जनपदों में 7ए700 से अधिक गौ.आश्रय स्थल सक्रिय रूप से संचालित हो रहे है। इन आश्रय स्थलों में 16 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आवासए नियमित आहारए स्वच्छ पेयजल तथा आवश्यक पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह व्यवस्था न केवल गोवंश के संरक्षण को सुनिश्चित कर रही हैए बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं सामाजिक संतुलन की भी सुदृढ़ कर रही है। उन्होने कहा कि गौशालाओं के प्रभावी संचालन एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा 5ए446 गौशालाओं में 7ए592 सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं। यह अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली 24×7 कार्यरत रहकर गोवंश की सुरक्षाए देखभाल की गुणवत्ता तथा प्रशासनिक जवाबदेही को सुनिश्चित कर रही है। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के माध्यम से सरकार ने गौ.संरक्षण को जनआंदोलन का रूप प्रदान किया है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 1ए67ए065 गोवंश इच्छुक एवं जिम्मेदार पशुपालकों को सुपुर्द किए गए हैं। सरकार द्वारा प्रत्येक गोवंश के लिए 50 प्रतिदिन की दर से पोषण भत्ता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से प्रेषित किया जा रहा है। यह पहल न केवल गोवंश के संरक्षण में सहायक हैए बल्कि पशुपालकों की आय वृद्धि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होने कहा कि जनपद बस्ती में जिला प्रशासन द्वारा गौ संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में जनपद में 63 गौ.आश्रय स्थल क्रियाशील हैंए जिनमें 5ए888 गोवंश का संरक्षण एवं पालन.पोषण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्तए171 प्रगतिशील पशुपालकों ने सहभागिता योजना के अंतर्गत 252 गोवंश को अपनाकर सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।
उत्तर प्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश गौवध निवारण अधिनियम 1955 के अंतर्गत गोवंश की सुरक्षा के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। जीरो टॉलरेंस नीतिः गोवंश संरक्षण से संबंधित नियमों के उल्लंघन पर त्वरित एवं कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है तथा कुछ असामाजिक एवं निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार का खण्डन करते हुये उपाध्यक्ष गोसेवा आयोग श्री महेश शुक्ल जी के द्वारा बताया गया कि गोसेवा के पदाधिकारियो के द्वारा गौआश्रय स्थलो का नियमित भ्रणण करते हुये निरन्तर पैनी निगाह रखी जा रही है और कोई भी अनियमितता प्राप्त होने पर तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। उन्होने यह भी बताया कि इस समय कतिपय सन्त वेस धारी छदमधर्म प्रचारको के द्वारा भ्रमक सूचनाये फैलाकर जनमानस को भ्रमित करने का कुतसित प्रयास किया जा रहा है।


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