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Showing posts from December, 2025

आयुक्त साहब’ जांच तो ‘करवाइए’, किसके ‘आदेश’ पर ‘दर्जनों’ सील ‘तोड़े’ गए!

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‘आयुक्त साहब’ जांच तो ‘करवाइए’, किसके ‘आदेश’ पर ‘दर्जनों’ सील ‘तोड़े’ गए! बस्ती। ईमानदार जेई अनिल कुमार त्यागी का तबादला क्या हुआ, जैसे बीडीए के भ्रष्ट लोगों की लाटरी लग गई। जैसे ही जेई ने जिला छोड़ा, उसके दूसरे दिन 20 से 25 सील, भवन को बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेष के तोड़ दिए गए, या फिर पैसा लेकर तोड़वा दिया गया। इतना ही नहीं पैसा लेकर अनगिनत अवैध निर्माण भी करवाए जा रहे है। जेई से एई बने और एक्सईएन का प्रभार लिए हरिओम गुप्ता पर भी वही आरोप लग रहे हैं, जो कभी पंकज पांडेय और संदीप कुमार पर लगा करते थे। इन्हीं के ही कार्यकाल में अवैध निर्माण भी हो रहा है, और सील किए भवन भी खोले जा रहे है। उक्त सभी अवैध निर्माण को जेई की रिपोर्ट पर सील किया गया था। ध्यान देने और जांच का विषय यह है, कि अभी भी कागजों में दर्जनों अवैध भवन सील है। जांच का विषय यह है, कि यह सील किसके आदेष पर तोड़े गए, मान लीजिए कि सील को भवन निर्माणकर्त्ता ने तोड़ा, तो फिर बीडीए ने सील तोड़ने के आरोप में अवैध निर्माण करने वाले भवन स्वामियों के खिलाफ मुकदमा क्यों नहीं दर्ज कराया? और क्यों नहीं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई? सबसे बड़...

ईमानदार’ जेई को ‘चोटें’, ‘भ्रष्ट’ एक्सईएन को ‘नोटें’

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 ‘ईमानदार’ जेई को ‘चोटें’, ‘भ्रष्ट’ एक्सईएन को ‘नोटें’ बस्ती। बीडीए के तत्कालीन जेई अनिल कुमार त्यागी को जहां उनके ईमानदारी के लिए याद किया जाएगा, वहीं तत्कालीन एक्सईएन पंकज पांडेय को उनकी बेईमानी के लिए जाना जाएगा। एक ही विभाग के दो अधिकारी, एक ने ईमानदारी का मिसाल प्रस्तुत किया, तो दूसरे ने भ्रष्टाचार के नए मापदंड स्थापित किया। भ्रष्ट एक्सईएन को जहां नोटें मिली, वहीं ईमानदार जेई को चोटें। ईमानदार जेई जहां अपने साथ चोटों का जख्म लेकर गए, वहीं भ्रष्ट एक्सईएन नोटों के बंडल के साथ गए। ईमानदार जेई की कोई बिदाई नहीं हुई, और भ्रष्ट एक्सइएन को फूल माला पहनाकर बिदाई दी गई। यह है, बीडीए के भ्रष्ट एक्सईएन और ईमानदार जेई के बीच का अंतर। एक भी अवैध निर्माण करने वाले ने जेई की ईमानदारी को नहीं सराहा, वहीें भ्रष्ट एक्सईएन को न सिर्फ पल्कों पर बैठाया, बल्कि नोटों की गडडी से भी नवाजा। जेई को जहां उनकी ईमानदारी की सजा जांच के रुप में मिली, वहीं बेईमान एक्सईएन को प्रमोषन मिला। बीडीए के लोग ईमानदार जेई को नहीं बल्कि बेईमान एक्सइएन को बहुत याद करते। ईमानदार जेई चिल्लाता रहा कि उसके उपर तीन बार कार्या...

बेनकाब’ हो गया ‘बीडीए’ को ‘लूटने’ वाला ‘गैंग’!

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 ‘बेनकाब’ हो गया ‘बीडीए’ को ‘लूटने’ वाला ‘गैंग’! बस्ती। अगर बीडीए का सचिव ही भ्रष्टाचार करने वाले गैंग का लीडर बन जाएगें और उसके संरक्षक उपाध्यक्ष होगें तो बीडीए को भ्रष्टाचार से मुक्त और भवन स्वामियों को भ्रष्टाचारियों से कौन बचाएगा? बीडीए के इतिहास में लिखा जाएगा कि तत्कालीन बीडीए के सचिव एंव एडीएम कमलेष चंद्र, एक्सईएन पंकज पांडेय, एक्सईएन स्ंादीप कुमार, एई अरुण कुमार, जेई आरसी षुक्ल, मुख्य लिपिक महेंद्र सोलकी, कमलेष मिश्र एवं अवनीष सहित अन्य ने मिलकर एक ईमानदार जेई अनिल कुमार त्यागी को अपने रास्ते से हटाने के लिए साजिष रची, ताकि लूटपाट का सिलसिला चलता रहें। काली कमाई के रास्ते में रोड़ा बन चुके इस जेई को इन लोगों ने मिलकर इतना प्रताड़ित किया कि वीआरएस लेेने को मजबूर होना पड़ा। अनेकों बार मारपीट और हमले तक करवाए गए, काली कमाई का भेद न खुल जाए, इस लिए मारपीटकर मोबाइल तक छीन लिया। फर्जी आरोप लगाकर षासन से जांच तक करवा दिया, और यह सब कुछ इस लिए किया, ताकि गैंग को लूटने की खुली आजादी मिल सके। गैंग के लोगों ने कमाया तो करोड़ों, लेकिन यह सब मिलकर भी एक ईमानदार जेई अनिल त्यागी का कुछ नहीं ब...

मंत्री’ ने कहा कि ‘खाद’ की ‘कालाबाजारी’ हो रही, ‘सांसद’ ने कहा नहीं हो ‘रही’!

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 ‘मंत्री’ ने कहा कि ‘खाद’ की ‘कालाबाजारी’ हो रही, ‘सांसद’ ने कहा नहीं हो ‘रही’! बस्ती। जनप्रतिनिधियों को धान और खाद के घोटालेबाज इतना प्रिय होते हैं, कि सांसद से लेकर विधायक तक इनके पक्ष में खड़े नजर आते है। भले ही किसान चाहें जितना चिल्लाता और रोता रहे, लेकिन माननीयों के सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता, मानो इन्हें किसानों ने नहीं बल्कि घोटालेबाजों ने सांसद और विधायक बनाया हो। मंडल का किसान एक-एक बोरी खाद के लिए घंटों लाइन में लगा रहता, एक-एक बोरी के लिए रोता है, फिर भी उसे खाद नहीं मिलता, खाद की कालाबाजारी करने वाले खुले आम गोरखधंधा कर रहे हैं, लेकिन न जाने क्यों माननीयों को गांरखधंधा दिखाई नहीं देता, डेली हजारों बोरी खाद बार्डर पार होती है, लेकिन न तो सांसद और न विधायक ही बोलते नजर आते। यह लोग किसानों के प्रति इतना संवेदनहीन और खाद की कालाबाजारी करने वालों के संवेदनषील हो गए हैं, कि यह मंत्री तक को झूठा साबित करने में लगें रहते हैं। कृषि मंत्री कह रहे हैं, कि जनपद सिद्धार्थनगर में खाद की कालाबाजारी हो रही, खाद बार्डर पार नेपाल जा रहा हैं, लेकिन सांसदजी का बयान आता है, कि कोई कालाबाजार...

मेरा ‘भाई’ भाजपा ‘जिलाध्यक्ष’, जो ‘उखाड़ना’ हो, उखाड़ ‘लेना’!

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मेरा ‘भाई’ भाजपा ‘जिलाध्यक्ष’, जो ‘उखाड़ना’ हो, उखाड़ ‘लेना’! -फर्जी मतदाता सूची को लेकर जब पत्रकार दीपक दूबे ने विरोध किया तो जिलाध्यक्ष के भाई ने मारपीट किया, मोबाइल छीनकर फेंक दिया, चष्मा तोड़ बस्ती। कप्तानगंज थाने में दी गई तहरीर और मीडिया को जारी विज्ञप्ति मेें ‘नजरिया बस्ती का’ अखबार के सहसंपादक के रुप में कार्यरत और ग्राम पंचायत तिलकपुर निवासी दीपक दूबे उर्फ वेदिक द्विवेदी ने कहा कि ग्राम में फर्जी मतदाता बन रहा था, बीएलओ परदेषी को फर्जी मतदाताओं की सूची आपत्ति के साथ दिया गया, विकास खंड सदर के जामडीह षुक्ल में वार्ड संख्या तीन में मतदाता हैं, जिसका क्रमांक संख्या एक षैलेंद्री/चंद्रषेखर ग्राम पंचायत तिलकपुर में मतदता क्रमांक 620 व जामडीह में 276 पर भी है। दूसरा अखिलेष/चंद्रषेखर तिलकपुर में क्रमांक संख्या 621 व जामडीह में 273 पर भी है। तीसरा सुषमा/अखिलेष का तिलकपुर के क्रमांक संख्या 624 एवं जामडीह के क्रमांक संख्या 275 पर भी है। चौथा, महेष कुमार/चंद्रषेखर का तिलकपुर के क्रमांक संख्या 276 और जामडीह में क्रमांक संख्या 276 पर भी है। पांचवा कीर्ति/महेष का तिलकनुर के क्रमांक संख्या 629 औ...

भूखों’ रह ‘जाना’, मगर ‘सूद’ पर ‘पैसा’ मत ‘लेना’

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 ‘भूखों’ रह ‘जाना’, मगर ‘सूद’ पर ‘पैसा’ मत ‘लेना’ -सूसाइड करना हो या फिर मानसिक संतुलन खोना हो तो सूदखोरों के पास चले जाइए, सूदखोरों के चक्रबृद्वि ब्याज में पड़कर न जाने कितने कारोबारी और आम आदमी बर्बाद हो चुका, न जाने कितने घर उजड़ गए, पुरखों की जमीनें बिक गई, आषियाना तक बिक गया, फिर भी न तो मूलधन और न ब्याज ही समाप्त होता, पिता के मरने के बाद भी बेटे से मूलधन और ब्याज का पैसा लेने के लिए दबाव बनाया जाता, मुकदमा दर्ज कराया जाता -सफेदपोष बने सूदखोर न जाने कितनों की जान ले चुके हैं, लोगों की जान लेकर यह लोग सूद के पैसे से करोड़ों में टिकट खरीदते और चुनाव लड़तें, विधायक बनने का सपना देखते -अगर किसी सूदखोर ने किसी को एक लाख दिया, तो उसे सिर्फ 90 हजार दिया जाता, एडवांस में सूद का 10 फीसद काट लिया जाता, अगर वह दूसरे माह सूद का 10 हजार नहीं दिया तो उसे अगले माह दस हजार के बदले 11 हजार देना, तीसरे माह भी नहीं दिया तो मूलधन 1.21 लाख पर दस फीसदी के दर से 12 हजार 100 रुपया देना पड़ेगा, चौथे माह भी अगर ब्याज का नहीं दिया तो पांचवें माह उसे एक लाख 34 हजार 200 के मूलधन पर 13420 रुपया ब्याज देना पड़ेग...