मेरा ‘भाई’ भाजपा ‘जिलाध्यक्ष’, जो ‘उखाड़ना’ हो, उखाड़ ‘लेना’!


मेरा ‘भाई’ भाजपा ‘जिलाध्यक्ष’, जो ‘उखाड़ना’ हो, उखाड़ ‘लेना’!

-फर्जी मतदाता सूची को लेकर जब पत्रकार दीपक दूबे ने विरोध किया तो जिलाध्यक्ष के भाई ने मारपीट किया, मोबाइल छीनकर फेंक दिया, चष्मा तोड़

बस्ती। कप्तानगंज थाने में दी गई तहरीर और मीडिया को जारी विज्ञप्ति मेें ‘नजरिया बस्ती का’ अखबार के सहसंपादक के रुप में कार्यरत और ग्राम पंचायत तिलकपुर निवासी दीपक दूबे उर्फ वेदिक द्विवेदी ने कहा कि ग्राम में फर्जी मतदाता बन रहा था, बीएलओ परदेषी को फर्जी मतदाताओं की सूची आपत्ति के साथ दिया गया, विकास खंड सदर के जामडीह षुक्ल में वार्ड संख्या तीन में मतदाता हैं, जिसका क्रमांक संख्या एक षैलेंद्री/चंद्रषेखर ग्राम पंचायत तिलकपुर में मतदता क्रमांक 620 व जामडीह में 276 पर भी है। दूसरा अखिलेष/चंद्रषेखर तिलकपुर में क्रमांक संख्या 621 व जामडीह में 273 पर भी है। तीसरा सुषमा/अखिलेष का तिलकपुर के क्रमांक संख्या 624 एवं जामडीह के क्रमांक संख्या 275 पर भी है। चौथा, महेष कुमार/चंद्रषेखर का तिलकपुर के क्रमांक संख्या 276 और जामडीह में क्रमांक संख्या 276 पर भी है। पांचवा कीर्ति/महेष का तिलकनुर के क्रमांक संख्या 629 और जामडीह के क्रमांक संख्या 281 पर भी है। छठां, पार्थ षुक्ल/अखिलेष षुक्ल का तिलकपुर के क्रमांक संख्या 621 एवं जामडीह के क्रमांक संख्या 289 पर भरी मतदाता सूची में नाम है।



लिखा कि 24 दिसंबर 25 को बीएलओ की सूचना पर जब प्राथमिक विधालय तिलकपुर में साक्ष्य के साथ आपत्ति दर्ज कराने पहुंचा तो उसी दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्र की भाभी प्रधान उमलेष मिश्र के पति सचिदानंद मिश्र पहुंचे और अभद्र भाषा में गाली गलौज करने लगे, जब मैंने इसका रिकार्ड करना चाहा तो आक्रमक होकर जानलेवा हमला कर दिया, कहा कि हमले के दौरान मोबाइल छीनकर फेक दिया, चष्मा तोड़ दिया, लगातार मारपीट करते रहें। ग्रामीण के हस्तक्षेप में जान बची। अन्यथा गंभीर घटना घट सकती थी। सचिदानंद मिश्र ने धमकाते हुए कहा मेरा भाई विवेकानंद मिश्र भाजपा का जिलाध्यक्ष है, जो उखाड़ पाओ उखाड़ लेना। अभी से घर से उठवा लूंगा। कहा कि अगर उसके साथ या परिवार के साथ किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना होती है, तो उसके लिए सचिदानंद मिश्र जिम्मेदार होगें। इसकी जानकारी थाने और एसपी को मुकदमा दर्ज करने के लिए लिखित में दिया गया है।

चूंकि प्रधान का चुनाव होने वाला है, और हर कोई अधिक से अधिक फर्जी मतदाता बनवाकर उसके सहारे प्रधान बनना चाहता है। अब सवाल उठ रहा है, जब भाजपा जिलाध्यक्ष के ग्राम पंचायत में इस तरह का फर्जीवाड़ा होगा तो अन्य ग्राम पंचायतों में क्या होगा, इसे आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है। जिस जिलाध्यक्ष को फर्जी मतदाता बनने का विरोध या फिर रोकना चाहिए, वही खामोष है। पत्रकारों के साथ जिस तरह भ्रष्टाचारी और फर्जी मतदाता बनाने वाले नेता एफआईआर से लेकर उनके साथ मारपीट जैसी घटना को अंजाम दे रहे हैं, उससे चौथे स्तंभ के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया। बार-बार कहा जा रहा है, कि अगर इस तरह की घटना को लेकर पत्रकार एकजुट होकर गलत काम करने वालों को जबाव नहीं देगें, तो पत्रकारों के साथ रोज इस की घटनाएं होगी। अभी भी एकजुटता दिखाने का समय है। जिस तरह पत्रकारों में एक जुटता नहीं हो पा रही है, उससे पत्रकार बिरादरी दिन प्रति कमजोर होती जा रही हैं। पत्रकार चाहें छोटा हो या बड़ा, अगर वह पत्रकार है, तो एक-एक दिन उसे भी कठिन दौर से गुजरना पड़ सकता है। हर पत्रकार को कभी न कभी पत्रकारिता का कीड़ा काटता है। पत्रकार की तहरीर पर अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ, और होगा कैसे, जब आरोपी जिलाध्यक्ष का भाई है। अगर यही तहरीर पत्रकार के खिलाफ दी गई होती तो अब तक मुकदमा दर्ज हो गया होता।

योगीजी, ‘पत्रकार’ कहते, कि बिना ‘विज्ञापन’ के खबर नहीं ‘छपेगी’!

सदन में प्रतिपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडेय ने योगीजी से कहा कि आप तो बड़ा-बड़ा विज्ञापन देकर जो चाहते हैं, वह खबर छपवा लेते हैं, और जो नहीं चाहते उसे रुकवा देते, लेकिन हमारे पास तो खबर छपवाने के लिए पैसा ही नहीं, इस लिए हम लोगों का बजट बढ़ा दीजिए, ताकि हम लोग भी अपनी खबरें छपवा सके

-कहा कि एक बार एक चैनल के पत्रकार ने कहा कि आपका साक्षात्कार लेना हैं, हमने कहा ले लो, तब पत्रकार ने कहा कि नेताजी खबर तभी चलेगी जब विज्ञापन देंगें, हमने कहा कितना देना होगा, कहा कि 13 लाख, मेरा माथा ठनका और कहा कि भाई तेल पानी के लिए हजार दो हजार ले लो, नहीं लिया, खबर भी नहीं चलाया

-कहा कि मुख्यमंत्रीजी इसी तरह जब वह क्षेत्र में कोई कार्यक्रम करते हैं, और खबर छपवाना चाहते हैं, तो उनसे विज्ञापन मांगा जाता, सीधे कहते हैं, कि बिना विज्ञापन के कोई भी खबर नहीं छपेगी, कहा कि आप तो सूचना का बजट बढ़ा दिए, लेकिन माननीयों का भी पांच करोड़ से बढ़ा कर साढ़े पांच करोड़ कर दीजिए, ताकि मेरा जैसा नेता अपनी खबर को छपवा सके


-पहली बार सदन में प्रतिपक्ष के नेता ने भ्रष्टाचार पर योगी पर जोरदार हमला बोला, कहा कि एक आम आदमी का एफआईआर तभी लिखा जाता हैं, जब वह पैसा देता, किसी के खेत की नपाई तभी होती, जब वह लेखपाल को चढ़ावा चढ़ाता, कहा कि तहसीलों और थानों की स्थित बद से बदर होती जा रही

बस्ती। इसे पत्रकारों की मजबूरी कहें या फिर संस्थानों का पत्रकारों पर विज्ञापन का दबाव, विज्ञापन के आगे खबर की वैल्यू न के बराबर होती जा रही है। विज्ञापन आधारित खबर होते जा रहे है। जिन नेताओं के पास अथाह दौलत होती है, वह तो विज्ञापन देकर खबर प्रकाषित/चलवा देते हैं, रुकवा भी देते हैं, लेकिन जिन नेताओं के पास धन का अभाव रहता, उनके लिए अपनी छोटी सी खबर प्रकाषित करवाना मुस्किल हो जाता है। चैनल पर चलवाना तो बहुत दूर की बात है। कुछ इसी तरह का दर्द सदन में एक दिन पहले सिद्धार्थनगर के इटवा के सपा विधायक एवं नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय का योगी के सामने छलक कर आया। यह दर्द उस समय झलका, जब मुख्यमंत्री सूचना विभाग का बजट बढ़वाना चाह रहे थे। तब माता प्रसाद पांडेय ने योगीजी से कहा कि आप तो बड़ा-बड़ा विज्ञापन देकर जो चाहते हैं, वह खबर छपवा लेते हैं, और जो नहीं चाहते उसे रुकवा देते, लेकिन हमारे पास तो खबर छपवाने तक का पैसा ही नहीं, इस लिए हम लोगों का बजट बढ़ा दीजिए, ताकि हम लोग भी अपनी खबरें छपवा सके। इतना कहते हैं, पूरा सदन ठहाका मारने लगा। कहा कि एक बार एक चैनल के पत्रकार ने कहा कि आपका साक्षात्कार लेना हैं, हमने कहा ले लो, जब साक्षात्कार समाप्त हो गया तो तब पत्रकार ने कहा कि नेताजी खबर तभी चलेगी जब विज्ञापन देंगें, हमने कहा भाई कितना देना होगा, कहा कि 13 लाख, सुनकर माथा ठनका और कहा कि भाई तेल पानी के लिए हजार दो हजार ले लो, मेरे पास इतना पैसा नहीं है। कहा कि तब तो खबर भी नहीं चलेगी। पत्रकार महोदय यह कहते हुए चले गए, कि पैसा हो तो बुलवा लीजिए, खबर चल जाएगी। कहा कि मुख्यमंत्रीजी इसी तरह जब वह क्षेत्र में कोई कार्यक्रम करते हैं, और खबर छपवाना चाहते हैं, तो उनसे पहले विज्ञापन मांगा जाता, सीधे कहते हैं, कि बिना विज्ञापन के कोई भी खबर नहीं छपेगी, कहा कि आप ने तो सूचना का बजट बढ़ा दिए, लेकिन माननीयों का भी पांच करोड़ से बढ़ा कर साढ़े पांच करोड़ कर दीजिए, ताकि मेरे जैसा नेता कम से कम कार्यक्रमों का खबर तो छपवा सके। हालांकि इस मामले में मुख्यमंत्री ने कोई आष्वसन नहीं दिया, बस मुस्कराते रहे। पहली बार सदन में प्रतिपक्ष के नेता ने भ्रष्टाचार को लेकर योगीजी को सच का आइना दिखाया। कहा कि एक आम आदमी का एफआईआर तभी लिखा जाता हैं, जब वह पैसा देता, किसी के खेत की नपाई तभी होती, जब वह लेखपाल को चढ़ावा चढ़ाता, बिना पैसा दिए कोई काम नहीं होता, पहले जिस काम के लिए चार-पांच सौ में चल जाता था, अब उसी काम के लिए पांच हजार तक देना पड़ता है। कहा कि तहसीलों और थानों की स्थित दिन प्रति दिन बद से बदर होती जा रही है। जिले के अधिकारी पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ता कि इससे सरकार की बदनामी हो रही हैं, षिकायत पर कार्रवाई करने के बजाए उस पर लीपापोती कर दी जाती है। कोई भी अपनी जिम्मेदारी को नहीं निभा रहा है। जिसका खामियाजा सबसे अधिक गरीब तबकें के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने योगीजी को सलाह दिया कि जाइए और देखिए कि थानों और तहसीलों में क्या हो रहा है? कहा कि माफियाओं पर बुलडोजर चलाने से कुछ नहीं होने वाला, जब तक भ्रष्टाचारियों के खिलाफ चाबुक नहीं चलेगा।

‘बनकटी’ के ‘पत्रकारों’ ने किया ‘संजय चौधरी’ की ‘निंदा’

बनकटी/बस्ती। पंकज चौधरी के प्रदेष अध्यक्ष बनने के बाद हवा में उड़ने वाले जिला पंचायत संजय चौधरी के द्वारा पत्रकार सोहन सिंह के खिलाफ लिखाए गए फर्जी एफआईआर को लेकर कड़ी निंदा की, और कहा कि षासन और सत्ता के बल पर लिखाए जा रहे एफआईआर को लेकर पत्रकार डरने वाले नहीं है। कहा कि एफआईआर या फिर किसी उत्पीड़न के जरिए पत्रकार की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। जिसने भी पत्रकारों की आवाज को दबाने का प्रयास किया, उसे मुंह की खानी पड़ी। कहा गया कि जब पत्रकार से कोई वार्ता ही नहीं हुई, तो कैसे झूठा मुकदमा दर्ज करवा दिया। सवाल करते हैं, कि क्या संजय चौधरी न्यायालय में यह साबित कर पाएगें कि पत्रकार ने उन्हें गाली दिया, राजनैतिक भविष्य बर्बाद करने की धमकी दी, अगर नहीं साबित कर पाएगें तो उनके खिलाफ भी झूठा एफआईआर दर्ज करवाने के आरोप में कानूनी कार्रवाई हो सकती है। एक स्वर में कहा कि जिस व्यक्ति पर खुद इतने आरोप लगे हों, वह दूसरों पर कैसे आरोप लगा सकता है। वरिष्ठ पत्रकार सरवर वारसी ने कहा है कि सच को उजागर करने के लिए ही लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है।


भ्रष्टाचारियों और वोट की राजनीति करने वाले स्वार्थी राजनेताओं का गुलामी करने के लिए चौथे स्तम्भ काम नहीं करता। पुलिस तो सत्तासीनों के इशारे पर शरीफों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर अपराधी बनाने से भी बाज नहीं आती, जब कि पीड़ित के तमाम फरियाद के बावजूद उसका मुकदमा दर्ज करने में हीला हवाली करती। रेप जैसे मामलों में भी पुलिस पीड़िता की नहीं सुनती, पीड़िता को कितना दौड़ाया जाता है, वह किसी से छिपा नहीं है। बनकटी के पत्रकार जिला पंचायत अध्यक्ष द्वारा सोहन सिंह के विरुद्ध दर्ज कराये गये मुकदमे की कड़े शब्दों में निन्दा करता है। इसी क्रम में पत्रकार राजेश शुक्ल, मुरली धर मिश्र, वकील अहमद, लवकुश यादव मोहम्द वसीम सहित अन्य पत्रकारों ने निंदा किया/

‘आरपी सिंह’ को मिली ‘श्री राजपूत करणी सेना’ के ‘जिलाध्यक्ष’ की ‘जिम्मेदारी’

बस्ती। रामप्रताप सिंह के सिर नर श्री राजपूत करणी सेना के जिलाध्यक्ष का ताज सज गया। बस्ती ईकाई की बैठक रमवापुर कैप कार्यालय पर हुई बैठक में सर्वसम्मति से रामप्रताप सिंह को कार्यकारी जिलाध्यक्ष नियुक्त करते हुए जनवरी अंतिम तक ग्राम पंचायत से लेकर तहसील स्तर तक संगठन विस्तार गठन करने का दायित्व सौंपा गया। बैठक में पांचो विधानसभा के प्रभारी व नगर प्रभारी नियुक्त किए गए फरवरी तक राष्ट्रीय अध्यक्ष महीपाल सिंह मकराना जी के द्वारा बस्ती में मंडल स्तर पर महासम्मेलन होना प्रस्तावित है जिसको देखते हुए बस्ती ईकाई सक्रिय भूमिका में आ गई है और हर हाल में बस्ती जिले के कोने तक संगठन मजबूत करने गठन करने की रुप रेखा तैयार किया गया मकर संक्रांति को रमवापुर भीटिया में श्री राजपूत करणी सेना बस्ती के कार्यालय का शिलान्यास भी सुनिश्चित है। बैठक में क्षत्रिय समाज के उपेक्षा और भागीदारी शून्य करने पर विचार किया गया है श्री राजपूत करणी सेना 2027 से पहले उत्तर प्रदेश में सक्रिय राजनीतिक भूमिका में भी आ जाएगी और एक राजनीतिक संगठन का नींव भी रखेगी। पूर्वांचल प्रवक्ता चंद्रेश प्रताप सिंह ने राष्ट्रवाद पर अपने विचार रखते हुए कहा कि राष्ट्रवाद समर्पण बलिदान का पाठ पढ़ना हो तो क्षत्रिय समाज के इतिहास को पढ़ना होगा जिन्होंने राष्ट्रहित में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।


आज राष्ट्रवादी विचारधारा की सरकार ने क्षत्रिय समाज को हंसिए पर रख दिया है हमें मजबूरन अपने हक अधिकारों के लिए यदि अब हथियार भी उठाना पड़े तो हम अब आर-पार करने में तनिक भी देर नहीं करेंगे। पूर्वांचल अध्यक्ष यशवंत सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल की टीम महती भूमिका व नये अंदाज में दिखेंगी हम किसी भी कीमत पर क्षत्रिय समाज का उत्पीड़न उपेक्षा बर्दाश्त नहीं करेंगे। बैठक में अमित सिंह, राहुल सिंह, अरविंद सिंह नगेंद्र सिंह प्रमोद सिंह विनय सिंह अनूप सिंह अमितेश प्रताप सिंह सचिन सिंह अंकुर सिंह प्रमोद सिंह चौहान, अंकित सिंह, सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

‘उदय शंकर शुक्ल’ के ‘सिर’ पर ‘11वीं’ बार सजा ‘जिलाध्यक्ष’ का ‘ताज’

-टेट समस्या का शीघ्र होगा समाधानःजगदम्बिका पाल

-शिक्षक हितों के लिये होगा निर्णायक संघर्षःसुशील कुमार

बस्ती। आखिरकार ‘उदय षंकर षुक्ल’ के ‘सिर’ पर सज ही गया ‘जिलाध्यक्ष’ का ‘ताज’। इनके सिर पर यह ताज लगातार 11वीं सज रहा है। देखा जाए तो यह इस ताज के हकदार भी है। उम्र और बीमारी के इस पड़ाव में भी संगठन के कार्यो को लेकर इनकी सक्रियता देखने लायक रही। चुनाव जीतने के बाद जिस तरहसांसद राम प्रसाद चौधरी में काम करने की जो नई उर्जा पैदा हुई, वही उर्जा उदयषंकर षुक्ल में दिखाई दिया। संगठन चलाने का इनका अनुभव ही इनके लगातार जीत का कारण बनता रहा।



शुक्रवार को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक का जनपदीय अधिवेशन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पाण्डेय, सांसद जगदम्बिका पाल, विधायक अंकुर राज तिवारी, गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ल सहित अनेक विशिष्टजनों की उपस्थिति में बीएसए कार्यालय के परिसर में सम्पन्न हुआ। संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पाण्डेय ने कहा कि देश का शिक्षक इस समय सर्वाधिक संकट से गुजर रहा हैै। टेट की अनिवार्यता, पुरानी पेंशन बहाली के सवाल को लेकर शिक्षकों को संघर्ष तेज करना होगा। सांसद जगदम्बिका पाल ने कहा कि शिक्षक हितों के लिये उनका संघर्ष सदैव जारी रहेगा। कहा कि टेट को लेकर वे निरन्तर प्रयत्नशील हैं और प्रकरण केन्द्र सरकार के संज्ञान में हैं, अति शीघ्र इसका समाधान आ जायेगा। विधायक अंकुर राज तिवारी ने कहा कि शिक्षक हितों के लिये वे हर मोर्चे पर संघर्ष को तैयार हैं। दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री महेश शुक्ल ने कहा कि शिक्षक ही सच्चे अर्थो में राष्ट्र निर्माता है। अधिवेशन में शिक्षक समस्याओं के विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अनूप तिवारी ने कहा कि शिक्षक समस्याओं की स्थानीय समस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण कराया जाय। निर्वाचन अधिकारी शिव कुमार तिवारी, पर्यवेक्षक माण्डलिक मंत्री बस्ती मण्डल मार्कण्डेय राय, देवेन्द्र यादव ने चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न कराया।

अधिवेशन के बाद संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पाण्डेय ने निर्वाचित पदाधिकारियों अध्यक्ष उदयशकर शुक्ल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेश कुमार, आनन्द दूबे, सरिता पाण्डेय, नरेन्द्र दूबे, पटेश्वरी प्रसाद निषाद, नरेन्द्र कुमार पाण्डेय, सन्तोष कुमार शुक्ल, सुनील कुमार पाण्डेय, दिवाकर सिंह, प्रमोद त्रिपाठी, रजनीश मिश्र, शिवम शुक्ल, आनन्द सिंह, ओंकारनाथ चौधरी, गौरव कुमार त्रिपाठी, ओंकार उपाध्याय, मारूफ खान, आशुतोष कुमार पाण्डेय उपाध्यक्ष, राघवेन्द्र प्रताप सिंह मंत्री, अभय सिंह यादव कोषाध्यक्ष, राजकुमार सिंह संयुक्त मंत्री, सूर्य प्रकाश शुक्ल जिला प्रवक्ता, उमाशंकर मणि, रविन्द्रनाथ, वीरेन्द्र कुमार पाण्डेय, आशुतोष शुक्ल, विनय कुमार वरूण उप मंत्री, रीता शुक्ला, आरती गौतम, अजय कुमार, अमित कुमार पाण्डेय, चन्द्रपाल सिंह, कन्हैयालाल भारती, विवेक कुमार गौतम, उदयशंकर पाण्डेय, अवनीश कुमार त्रिपाठी संगठन मंत्री, प्रणव मिश्र, विवेक कुमार वर्मा, सूरज गुप्ता, वैभव प्रसाद, लालेन्द्र कन्नौजिया, अरविन्द कुमार पाण्डेय, भरत राम, नन्द किशोर चौधरी, हरीश चौधरी प्रचार मंत्री, सन्तोष शुक्ल एकाउन्टेन्ट, रमेश विश्वकर्मा आडीटर, राम भरत वर्मा मीडिया प्रभारी, ऋचा त्रिपाठी, स्नेहा मिश्रा कार्यकारणी सदस्य की शपथ दिलाया। इसी क्रम में अरूण देव शुक्ल, राम बहोर मिश्र, शिव कुमार तिवारी, राम कृष्ण सिंह संरक्षक घोषित किये गये।

कडाके की ठंड के बावजूद सबेेरे से ही शिक्षकों की जुटान बीएसए कार्यालय में होती रही। संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पाण्डेय का शिक्षकों ने अनेक स्थानों पर फूल मालाओं के साथ स्वागत किया। 11 वीं बार अध्यक्ष चुने जाने पर उदयशंकर शुक्ल ने कहा कि शिक्षक हितों के लिये संघर्ष जारी रहेगा। उन्होने शिक्षकों के प्रति आभार जताया। अधिवेशन में मुख्य रूप से गन्ना समिति बभनान के चेयरमैन विनोद सिंह, शिक्षक संघ अध्यक्ष गोरखपुर प्रभाकर मिश्र, अयोध्या अवधेश यादव, विपिन शुक्ल, शम्भूनाथ मिश्र, राधेश्याम पाण्डेय, सुनील त्रिपाठी, सुशीला तिवारी, राम प्रकाश शुक्ल, चन्द्रभान चौरसिया, इन्द्रसेन मिश्र, शैल शुक्ल, रामपाल वर्मा, सतीश शंकर शुक्ल, ओम प्रकाश पाण्डेय, त्रिलोकीनाथ, विनोद यादव, राजीव पाण्डेय, राजेश चाौधरी, योगेश्वर शुक्ल, प्रमोद पासवान, अभिषेक जायसवाल, चन्द्रशेखर शर्मा, रामचन्द्र शुल, सुदर्शन त्रिपाठी, विनोद, मुक्तिनाथ वर्मा, सन्तोष वरूण, के साथ ही हजारों की संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।

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