आयुक्त साहब’ जांच तो ‘करवाइए’, किसके ‘आदेश’ पर ‘दर्जनों’ सील ‘तोड़े’ गए!


‘आयुक्त साहब’ जांच तो ‘करवाइए’, किसके ‘आदेश’ पर ‘दर्जनों’ सील ‘तोड़े’ गए!

बस्ती। ईमानदार जेई अनिल कुमार त्यागी का तबादला क्या हुआ, जैसे बीडीए के भ्रष्ट लोगों की लाटरी लग गई। जैसे ही जेई ने जिला छोड़ा, उसके दूसरे दिन 20 से 25 सील, भवन को बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेष के तोड़ दिए गए, या फिर पैसा लेकर तोड़वा दिया गया। इतना ही नहीं पैसा लेकर अनगिनत अवैध निर्माण भी करवाए जा रहे है। जेई से एई बने और एक्सईएन का प्रभार लिए हरिओम गुप्ता पर भी वही आरोप लग रहे हैं, जो कभी पंकज पांडेय और संदीप कुमार पर लगा करते थे। इन्हीं के ही कार्यकाल में अवैध निर्माण भी हो रहा है, और सील किए भवन भी खोले जा रहे है। उक्त सभी अवैध निर्माण को जेई की रिपोर्ट पर सील किया गया था। ध्यान देने और जांच का विषय यह है, कि अभी भी कागजों में दर्जनों अवैध भवन सील है। जांच का विषय यह है, कि यह सील किसके आदेष पर तोड़े गए, मान लीजिए कि सील को भवन निर्माणकर्त्ता ने तोड़ा, तो फिर बीडीए ने सील तोड़ने के आरोप में अवैध निर्माण करने वाले भवन स्वामियों के खिलाफ मुकदमा क्यों नहीं दर्ज कराया? और क्यों नहीं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई? सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है, कि सील भवन के निर्माण को पूरा किसने होने दिया? यह कुछ ऐसे सवाल हैं, जिसका जबाव जनता और मीडिया को कमिष्नर, डीएम और एडीएम को देना चाहिए। जनता और मीडिया उन बीडीए के सदस्यों से भी जबाव चाहती है, कि आखिर यह लोग क्या कर रहे थे? हैरानी की बात तो यह है, कि एक भी सदस्य ने बैठक में न तो सील किए गए भवनों की सूची मांगी और न सील किए भवन को किसके आदेष पर खोला गया, का ब्यौरा ही मांगा। अब तक बीडीए की 15 बैठक हो गई, लेकिन इसके सदस्य यषंकात सिंह, प्रेमसागर तिवारी और रुपम श्रीवास्तवा के पास कोई खास उपलब्धि बताने को हैं। यहां तक कि जनहित और भ्रष्टाचार से जुड़े सवाल तक ठीक से नहीं उठाते। इसी लिए जनता बार-बार उन सदस्यों को बीडीए के भ्रष्टाचार के लिए दोषी और जिम्मेदार मानती है, जो बैठकों में सिर्फ चाय और समोसा खाने जाते है। अगर वाकई तीनों में से किसी एक ने भी सवाल किया होता और जांच कराने की मांग की होती तो आज सरकार का करोड़ों के राजस्व का नुकसान न होता, और न अवैध निर्माण करने वालों का मनोबल ही बढ़ता है। जिले के जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने इस लिए सवाल नहीं उठाया, क्यों कि अधिकाषं के रिष्तेदार, भाई भतीजा और नाती-पोता तक बीडीए में आउटसांेर्सिंग पर कार्यरत है।








अब उसके बाद आवाज उठाने और सवाल करने वाला बचा ही कौन? बीडीए वाले अच्छी तरह जानते हैं, कि अगर उन लोगों ने तीनों सदस्यों को खुष कर दिया तो समझो मैदान साफ हो गया, रही बात मीडिया की तो इनकी सुनता ही कौन हैं, मीडिया जिम्मेदार अधिकारियों और बीडीए के सदस्यों से चिल्लाती रहती है, भ्रष्टाचार का साक्ष्य भी देती, लेकिन भ्रष्टाचार के आगे सब बेकार है। किसी को योगीजी के जीरो टालरेंस नीति से भी कोई मतलब नही। जिन सदस्यों से जनता और सरकार की सबसे अधिक उम्मीदें थी, वह भी अपेक्षित खरा नहीं उतरें, क्यों नहीं उतरे? और क्यों नहीं इन लोगों का जमीर जाग रहा? यह तो यही लोग जाने, लेकिन जबावदेही तो बनती ही है। इन सदस्यों को बताना चाहिए कि बीडीए को क्यों मेट चला रहे हैं? और क्यों मेट पर बार-बार अवैध निर्माण करवाने के आरोप लग रहे है? क्यों मेट पर ईमादार जेई पर हमला करने और करवाने का आरोप लग रहा है? क्यों जांच अधिकारी को एक मेट को बर्खास्त करने की सिफारिष करनी पड़ी? अब जरा अंदाजा लगाइए कि बीडीए के जेई केडी चौधरी खुद दो अवैध निर्माण करते हैं, एक सील होता है, लेकिन उसे भी खोल दिया जाता है। एफआईआर तक दर्ज होता। दूसरा टोल प्लाजा के पास हो रहा, उसे अभी तक सील नहीं किया गया। एक और हैरानी बात हैं, जिस एनएच 28 हीरो होंडा के सामने नरसिंह गुप्त के अवैध निर्माण को जेई ने सील किया, उसी भवन स्वामी से बीडीए वालों ने जेई को सरेआम पिटवाया, मोबाइल तोड़ दिया, भवन स्वामी चिल्ला-चिल्ला कर कह रहा है, कि जेई साहब आपके नाम पर एक मेट 50 हजार ले गया। बीडीए वालों ने न सिर्फ उसका सील तोड़ा बल्कि जेई को पिटने का पुरस्कार देते हुए उसका दूसरा अवैध निर्माण भी करवा दिया। जिन लोगों के सील प्रतिष्ठान और आवास को पैसे लेकर खोले गए या फिर खोलवाया गया, उनमें जेई केडी चौधरी और नरसिंह गुप्त के आलावा मुख्य रुप से सूर्या हास्पिटल के पास त्रिपाठी, बालक राम ज्वेलर्स के सामने गांधी नगर रमेष गुप्त, बी-मार्ट, कंपनीबाग के पास वैभव गुप्त, पटखौली में पवन मिश्र एवं गांधीनगर में राम चंद्र ज्वेलर्स, जिला अस्पताल से कैली रोड पर डा. प्रमोद चौधरी, स्टेषन रोड प्रभात सोनी, तुलस्यान के सामने रजनीष अग्रवाल सहित अन्य का नाम षामिल है।

‘डाक्टर’ साहब ‘डेढ़ लाख’ दीजिए ‘नहीं’ तो ‘रेप’ में ‘फंसाकर’ जेल भेजवा ‘दूंगी’

-एक महिला डा. वीके वर्मा के चेंबर में एक पत्रकार के साथ आती है, और कहती है, डेढ़ लाख नौकरी के नाम पर लिया, अगर उसे वापस नहीं करोगें तो रेप में फंसा कर जेल भेजवा दूंगी, क्यों कि मेरे साथ गैंग

-सबूत के तौर पर महिला घूस के रुप में लिए गए 15 हजार की दो रसीद भी दिखाती है, बाद में पता चला कि यह वह रसीद हैं, जो महिला ने डीएचपी दाखिला के समय गोटवा कालेज में जमा किया था

-महिला, डाक्टर साहब को पहले तिलकपुर मंदिर में मिलने और समझौता करने के लिए बुलाती, जब डाक्टर साहब नहीं जाते, वह गोटवा पत्रकार के साथ टपक पड़ती, डाक्टर साहब के सामने इस तरह की ब्लैकमेल की पहली घटना सामने आया, इन्होंने इसकी जानकारी एसपी को देते हुए जानमाल और सम्मान की रक्षा करने की गुहार लगाई

-महिला का कहना है, कि डाक्टर वीके वर्मा पिछले तीन साल से पैसा वापस करने के नाम पर टरका रहे, महिला इस बात का जबाव नहीं दे पाई कि कोई व्यक्ति घूस का रसीद क्यों देगा?

बस्ती। अगर कोई महिला तीन साल बाद आती है, और यह कहती है, कि डाक्टर वीके वर्मा ने उनसे नौकरी दिलाने के नाम पर डेढ़ लाख लिया, लेकिन न तो उन्होंने नौकरी दिलाया और न पैसा ही वापस कर रहे है। महिला यह भी कहती है, कि डाक्टर ने उसे घूस का लिया हुआ 15 हजार का रसीद भी दिया। बकौल महिला डाक्टर वीके वर्मा दुनिया के पहले ऐसे व्यक्ति होगें जिन्होंने लिए गए घूस की रसीद महिला को दिया, घूस के मामले में ऐसी ईमानदारी पहली बार किसी डाक्टर के भीतर देखी जा रही है। इस पूरे मामले में एक पत्रकार की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। पत्रकार का महिला को समझौते के लिए डाक्टर को तिलकपुर मंदिर बुलाना और न आने पर महिला को डाक्टर के अस्पताल गोटवा ले जाना, डाक्टर के खिलाफ किसी साजिष की ओर ईषारा करता है। बकौल, डाक्टर महिला का यह कहना कि अगर डेढ़ लाख वापस नहीं किया तो रेप में फंसाकर जेल भेजवा दूंगी, क्यों कि मैं अकेली नहीं हूं, मेरे साथ पूरा गैंग है, से पता चलता है, कि जिले में रेप के आरोप में फंसा कर ब्लैकमेल करने वाला गैंग सक्रिय है। हालांकि डाक्टर साहब ने इसकी लिखित में जानकारी देते हुए एसपी से कहा कि वह और उनके परिवार को जिले के लोग बहुत ही सम्मानित नजर से देखते हैं। कहा कि इस तरह महिला और उसके गैंग के खिलाफ कार्रवाई हो जिससे उनका और उनके परिवार का मान-सम्मान रह सके। यह भी लिखा कि जब महिला के बारे में और छानबीन की गई तो पता चला कि वह गलत किस्म की महिला है, और वह न जाने कितने लोगों को ब्लैकमेल कर चुकी है, लोग लोकलाज के डर से सामने नहीं आ रहे है।

एसपी को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि वह चिकित्सक हैं, और पटेल एसएमएच हास्पिटल एंड पैरामेडिकल कालेज गोटवा का संस्थापक/प्रबंधक है। कहा कि यहां पर डीएचपी की पढ़ाई होती है। रिकार्ड के अनुसार महिला का काल्पनिक नाम नीरा हैं। इसका एडमिषन 2020-21 में हुआ। उस समय अस्पताल के बाबू ने नियमानुसार फीस जमा करके रसीद दे दिया, यह वही रसीद है, जिसे महिला अब यह कहती है, कि वह रसीद घूस का है। कहा कि परीक्षा के लिए लखनउ से प्रवेष पत्र भी जारी हुआ, लेकिन बुलाने के बाद भी महिला न तो परीक्षा देने आई और न ही एक दिन भी पढ़ने आई। कहा कि 29 दिसंबर 25 को सांय लगभग चार बजे एकाएक महिला आई और रसीद दिखाकर पैसा मांगने लगी। तब उससे कहा कि जब तुम परीक्षा देने नहीं आई तो हमारी क्या गलती है, वैसे भी हमने 45 हजार फीस के स्थान पर 10 और पांच हजार सहित कुल 15 हजार लिया। तब महिला ने कहा कि अगर नौकरी के नाम पर लिए गए डेढ़ लाख वापस नहीं किया तो आपको छेड़खानी और रेप में फंसाकर जेल भेजवा दूंगी, तब आप पैसा दोगें, कहा कि मुझे अकेली न समझिए मेरे पास गैंग है। इस मामले में जब महिला से बात की गई, और यह पूछा गया कि एक तरफ यह कह रही हो कि पढ़ाई के लिए मेरे पास पैसा नहीं और दूसरी तरफ डेढ़ लाख घूस कहां से देने की बात कह रही हो, कहा कि उसने एक मुष्त नहीं बल्कि 15 किष्तों में डेढ़ लाख दिया, जब उससे तीन साल बाद पैसा मांगने के बारे में पूछा गया तो कहने लगी कि डाक्टर साहब आज दे देगें, कल दे देगें कहकर तीन साल से टरकाते रहे। डाक्टर के द्वारा एसपी को उपलब्ध कराए साक्ष्य से पता चलता है, कि कहीं न कहीं महिला झूठ बोल रही है, और इसके पीछे गैंग के हाथ होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता। अगर महिला वाकई झूठ बोल रही है, तो इसे सभ्य समाज के लिए खतरा माना जा रहा हैं, पुलिस को डाक्टर साहब की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर जांच पड़ताल करके कार्रवाई करनीे चाहिए। ताकि अन्य लोगों को ब्लैकमेल होने से बचाया जा सके।

‘एकजुट’ होकर ‘सौहार्द’, ‘गंगा जमुनी’ तहजीब को बचाना ‘होगा’

बस्ती। जनपद में सामाजिक सौहार्द बिगड़ने ,आपसी वैमनस्यता और घृणा फैलाने, कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले अराजक व्यक्तियों व समूह के खिलाफ जनपद के सामाजिक और प्रबुद्ध वर्ग चिंतित और आक्रोशित है। इसे लेकर सदर विधायक महेन्द्र नाथ यादव, एवं का. के.के. तिवारी की पहल पर डीएम कृत्तिका ज्योत्सना ने कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक आहूत किया। तीन सूत्रीय ज्ञापन उन्हें सौंपा गया। बैठक में एक स्वर से जनपद में शांति व्यवस्था बनाए रखने, सामाजिक सौहार्द बनाए जाने पर जोर देते हुए सभी तरह के घृणास्पद विभाजनकारी तत्वों पर निष्पक्षता के साथ और कड़ी कार्यवाही करने और गंगा जमुनी तहजीब को बचाये, बनाये रखने पर जोर दिया गया। पत्रकार प्रदीप पांडेय ने बैठक में पुलिस अधीक्षक की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए। इस पर डीएम ने उनकी तबियत खराब होने का कारण बताया। ज्ञापन में सामाजिक सौहार्द ,आपसी भाई चारा ,विविधता में एकता के स्वरूप को बचाए रखने ,संवैधानिक सीमाओं की इज्जत किए जाते हुए साम्प्रदायिक,सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वालों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्यवाही किए जाने, संवेदनशील स्थानों पर पुलिस सुरक्षा बढ़ाए जाने। मात्र शिकायत के आधार पर देश के किसी भी हिस्से के नागरिक को बिना जांच पड़ताल किए मुकदमे में न फंसाए जाने की मांग शामिल है।


बैठक में कुलवेन्द्र सिंह, शिक्षा संवर्ग से डॉ. रघुवंशमणि, राज किशोर वर्मा, डा. महेंद्र कुमार सोनी अनिरुद्ध त्रिपाठी मार्कण्डेय, अनिल त्रिपाठी, उदय शंकर शुक्ल, चन्द्रिका सिंह, डॉ. अजय कुमार यादव, चिकित्सक संवर्ग आईएमए से डा. अनिल कुमार श्रीवास्तव, डा. नईम खान, डा. प्रमोद चौधरी(रेड क्रॉस), डा. सरफराज, डा. वी के वर्मा, डा. एस के अरोरा, डा. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, अधिवक्ता संवर्ग से मारुत कुमार शुक्ला, दिलशाद हसन खान, रामानुज भास्कर, राम नरेश चौहान, हरे श्याम विश्वकर्र्मा, केशव राम यादव, कृष्ण कुमार उपाध्याय एडवोकेट, राजेश यादव, राम कृपाल चौधरी, बुद्धि प्रकाश, किसान संगठन से दीवानचन्द पटेल, जय राम चौधरी, साहित्यकार डॉ. राम कृष्ण लाल जगमग, अजीत कुमार श्रीवास्तव रोटरी क्लब से मयंक श्रीवास्तव, कर्मचारी और पेंशनर संगठनों से नरेन्द्र देव मिश्रा, नरेंद्र बहादुर उपाध्याय, अशोक कुमार मिश्रा, उदय प्रताप पाल, राम अधार पाल, अजय कुमार आर्या, मस्त राम वर्मा, अशोक सिंह, मनसाराम, ट्रेड यूनियन से के.के श्रीवास्तव, अशर्फी लाल गुप्ता, राकेश कुमार उपाध्याय, धु्रव चंद, संतोष कुमार यादव,वसीम अहमद, शिवा जी शुक्ला, दुर्गेश नंदिनी,अबेडकर पुस्तकालय के शिव राम कन्नौजिया, पत्रकार संवर्ग से सरदार जगवीर सिंह,जयंत मिश्रा ,विनोद उपाध्याय, अवधेश त्रिपाठी, पुनीत ओझा, संदीप गोयल, राघवेंद्र मिश्र, बशिष्ठ पाण्डेय, जीशान हैदर रिजवी, अनुराग श्रीवास्तव, अशरफ हुसैन,विवेक मिश्रा ,बबुन्दर यादव, मो.शादाब, वैदिक द्विवेदी, एस.के. शुक्ला, समाज सेवी कौशल कुमार त्रिपाठी, व्यवसाई अमृत पाल सिंह, काजी फरजान अहमद, सैयद जफर अहमद, सैयद अशरफ हुसैन, विनोद कुमार तथा राजनैतिक दलों से कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विश्वनाथ चौधरी, संदीप श्रीवास्तव, अशोक कुमार चौहान, डा. वाहिद अली सिद्दीकी, साधुशरण आर्य, धर्मेन्द्र चौहान, आम आदमी पार्टी से कुलदीप जायसवाल ,माकपा सचिव शेषमणि, भाकपा माले के राम लौट ,संत कबीर आश्रम के संत राम लखन दास, जन संसद के कुलदीप नाथ शुक्ल और अनिल सिंह ,समाज वादी पार्टी के जावेद पिण्डारी, अरविन्द सोनकर, जमील अहमद, सुरेन्द्र सिंह छोटे, मुरलीधर पाण्डेय, हरीश, भोला पाण्डेय, युनूस आलम, गौरीशंकर यादव सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

‘समायोजन’ में ‘अनियमितता’ दूर नहीं ‘हुई’ तो होगा ‘आन्दोलन’ः चन्द्रिका सिंह

बस्ती। शासन के निर्देश पर परिषदीय विद्यालयों में जिले के अन्दर हो रहे समायोजन को लेकर शिक्षकों में भारी आक्रोश है। बुधवार को बड़ी संख्या में शिक्षकों ने उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष चन्द्रिका सिंह के नेतृत्व में जिलाधिकारी और बीएसए को ज्ञापन सौंपा। जिलाधिकारी और बीएसए ने शिक्षकों को आश्वासन दिया कि मामले में उचित कार्यवाही की जाएगी। शिक्षकों का कहना है कि जो शिक्षक सरप्लस हैं उनको बंद और एकल विद्यालयों में भेजने के लिए नियम संगत तरीके से काउंसलिंग कराई जाए, ताकि शिक्षक मनचाहे विद्यालय में जा सकें। जिलाध्यक्ष ने कहा कि विभाग द्वारा मनमानी तरीके से बंद और एकल विद्यालयों तथा सरप्लस शिक्षकों की सूची जारी की गई है, जबकि उन सभी विद्यालयों को प्रदर्शित नहीं किया गया जो वास्तव में एकल और बंद हैं। कम छात्र संख्या दिखाकर बड़ी संख्या में शिक्षकों को सरप्लस दिखाया गया है। कहा कि यदि शिक्षकों की मांगे नहीं मानी गई तो शिक्षक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। जिला मंत्री बालकृष्ण ओझा ने कहा कि मृतक हो चुके और स्थानांतरित हो चुके शिक्षकों का नाम भी अभी तक विद्यालय की सूची में प्रदर्शित हो रहा है, जिससे समायोजन में भारी अनियमितता देखने को मिल रही है। कहा कि ऐसे तमाम विद्यालयों का नाम सूची से गायब है जिनमें वास्तव में शिक्षकों की आवश्यकता है। उन्होंने तत्काल सूची सही करने की बात कही। जिला कोषाध्यक्ष दुर्गेश यादव और जिला उपाध्यक्ष रवीश कुमार मिश्र ने कहा कि वास्तविक छात्र संख्या के आधार पर बंद, एकल विद्यालय और सरप्लस शिक्षकों की सूची जारी की जाए, उसके बाद काउंसलिंग के माध्यम से ही उन विद्यालयों में शिक्षक भेजे जाए ताकि शिक्षकों के साथ न्याय हो सके। ज्ञापन देने वालो में मुख्य रूप से अर्चना सेन, विजया यादव, बिन्दुमती, कमला यादव, अजय श्रीवास्तव, अशोक यादव, राजीव सिंह, रुकनुद्दीन, संजय यादव, सनद पटेल, रामजीत यादव, विवेककांत पाण्डेय, रामपियारे कन्नौजिया, अभिषेक मौर्य, सुरेश गौड़, उमाकांत शुक्ल, प्रमोद सिंह, संतोष पाण्डेय, रामस्वरूप, शिव प्रकाश सिंह, आशीष दूबे, विवेक सिंह, सुधीर तिवारी, हरेंद्र यादव, वंदना तिवारी, वीरेंद्र उपाध्याय, शैल कुमारी, विनोद चौधरी, परमानंद यादव, वेद प्रकाश उपाध्याय, रजनीश यादव, मंगला प्रसाद मौर्या सहित बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल रहे।

फिर ‘नगर पंचायत रुधौली अध्यक्ष’ पर लगा ‘भ्रष्टाचार’ का ‘आरोप’

बस्ती। नगर पंचायत रुधौली बाजार वार्ड नम्बर 1 अम्बेडकरनगर के निवासी सचिन चौधरी ने मण्डलायुक्त को पत्र देकर नगर पंचायत अध्यक्ष धीरसेन निषाद द्वारा कराये गये निर्माण कार्यो में भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुये मामलो की जांच और प्रभावी कार्यवाही की मांग किया है। मण्डलायुक्त को दिये पत्र में सचिन चौधरी ने कहा है कि नगर पंचायत अध्यक्ष धीरसेन निषाद द्वारा निर्माण कार्यों के ठेकेदारों के साथ दुरभि संधि करते हुये वित्तीय अनियमितता कर भ्रष्टाचार को बढावा दिया जा रहा है। तहसील के पास नहर से नगर पंचायत कार्यालय तक निर्माणाधीन इन्टरलाकिंग रोड में प्रयुक्त किये गये इन्टरलाकिंग ईट की आपूर्ति मेसर्स सत्यम् इन्फ्रा कानस्ट्राकन, अन्देवरी, रूद्रनगर द्वारा किया गया था, जिसकी प्राप्ति ठेकेदार के साझेदार के धीरसेन निषाद द्वारा अपना हस्ताक्षर करके प्राप्त किया गया है। जिससे प्रमाणित होता है कि वे प्रत्यक्ष रूप से धन अर्जित करके नगर पालिका अधिनियम के प्राविधानो का उल्लघन कर रहे हैं। पत्र में कहा गया है कि तत्कालीन जिलाधिकारी, मुख्य राजस्व अधिकारी, द्वारा जाँचोरापरान्त 73 श्रमिको के अनियमित भुगतान के सम्बन्ध में तत्कालीन लिपिक तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी सहित धीरसेन निषाद, अध्यक्ष, नगर पंचायत रूघौली बाजार से रूपया 6,10,740.00 समानुपातिक रूप से जिम्मेदार मानते हुये वसूली किये जाने की संस्तुति की गयी थी। जिस पर अभी तक कोई वसूली के साथ कोई कार्यवाही नहीं की गयी। सचिन चौधरी ने समूचे मामलों की उच्च स्तरीय जांच और प्रभावी कार्यवाही की मांग किया है। 

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