‘भूखों’ रह ‘जाना’, मगर ‘सूद’ पर ‘पैसा’ मत ‘लेना’
-सूसाइड करना हो या फिर मानसिक संतुलन खोना हो तो सूदखोरों के पास चले जाइए, सूदखोरों के चक्रबृद्वि ब्याज में पड़कर न जाने कितने कारोबारी और आम आदमी बर्बाद हो चुका, न जाने कितने घर उजड़ गए, पुरखों की जमीनें बिक गई, आषियाना तक बिक गया, फिर भी न तो मूलधन और न ब्याज ही समाप्त होता, पिता के मरने के बाद भी बेटे से मूलधन और ब्याज का पैसा लेने के लिए दबाव बनाया जाता, मुकदमा दर्ज कराया जाता
-सफेदपोष बने सूदखोर न जाने कितनों की जान ले चुके हैं, लोगों की जान लेकर यह लोग सूद के पैसे से करोड़ों में टिकट खरीदते और चुनाव लड़तें, विधायक बनने का सपना देखते
-अगर किसी सूदखोर ने किसी को एक लाख दिया, तो उसे सिर्फ 90 हजार दिया जाता, एडवांस में सूद का 10 फीसद काट लिया जाता, अगर वह दूसरे माह सूद का 10 हजार नहीं दिया तो उसे अगले माह दस हजार के बदले 11 हजार देना, तीसरे माह भी नहीं दिया तो मूलधन 1.21 लाख पर दस फीसदी के दर से 12 हजार 100 रुपया देना पड़ेगा, चौथे माह भी अगर ब्याज का नहीं दिया तो पांचवें माह उसे एक लाख 34 हजार 200 के मूलधन पर 13420 रुपया ब्याज देना पड़ेगा
-सूद देते-देते या तो कारोबारी या फिर आम आदमी का संतुलन खो जाता या फिर वह सूसाइड कर लेता, जमीन, स्कूल और गहने तक बेचना या फिर गिरवी रखना पड़ सकता, जिले में ऐसे भी सफेदपोष सूदखोर हैं, जिन्होंने दूसरे सफेषपोष को तीन-तीन करोड़ सूद पर देकर उनसे हर माह पांच से सात लाख ब्याज कमाते
बस्ती। जिगना, पुरानी बस्ती, गंाधीनगर, बेलाड़ी, पिपरा गौतम और महरीपुर के ‘बाबू साहब’ और ‘पंडितजी’ जैसे सूदखोंरों के चंगुल में फंसकर अब तक न जाने कितने घर बर्बाद हो गए, कितनों ने मानसिक संतुलन खो दिया, और कितने सूसाइड कर चुके, फिर भी न तो मूलधन और न ब्याज ही समाप्त हुआ। पिता के सूसाइड कर लेने के बाद भी जब सूदखोरों का मन नहीं भरा तो मूलधन और सूद का पैसा लेने के लिए बेटे पर दबाव बनाया, उनके खिलाफ मुकदमा तक दर्ज करवाया। ताकि बेटा या तो ब्याज सहित मूलधन वापस कर दे या फिर पिता की तरह सूसाइड कर ले, पिता और बेटे की जान लेने वालों का सिलसिला समाप्त नहीं होता, परिवार में अगर पत्नी है, तो उस पर दबाव बनाएगें, फिर सूसाइड करना पड़ेगा। यह सब किसी कहानी का हिस्सा नहीं बल्कि हकीकत है, जो हुआ और जो होने वाला है, उसका आइना मीडिया दिखाने का प्रयास कर रहा है। मीडिया किसी की जरुरत को तो पूरा नहीं कर सकता, लेकिन सच का आइना दिखाकर आने वाली परेषानी से अवष्य बचा सकता हैं, और सच यह है, कि आज छोटे से लेकर बड़े कहे जाने वाले अधिकांष लोग सूदखोरों के चंगुल से आजाद होने के लिए या तो छटपटा रहे हैं, या फिर दम तोड़ दे रहे हैं, या फिर अपना मानसिक संतुलन खो दे रहे है। दम तोड़ देने और मानसिक संतुलन खोने के बाद भी मूलधन और ब्याज से परिवार को मुक्ति नहीं मिलती। चक्रबृद्धि ब्याज के चलते न जाने कितने कारोबारी पलायन कर चुके और न जाने कितनों की पुस्तैनी जमीनें बिक चुकी, पुस्तैनी मकान और गहने को गिरवी रखना पड़ा।
मीडिया आप लोगों को सूदखोरों की दरिंदगी का उदाहरण सामने रख रहा है। अगर किसी सूदखोर ने किसी को एक लाख दिया, तो सूदखोर उसे सिर्फ 90 हजार देगा, एडवांस के रुप सूद का 10 फीसद यानि दस हजार काट लेगा। अगर वह दूसरे माह सूद का 10 हजार नहीं दे पाता तो उसे अगले माह दस हजार के बदले 11 हजार देना पड़ेगा, तीसरे माह भी नहीं दिया तो मूलधन 1.21 लाख हो जाएगा और तब उसे दस फीसदी के दर से 12 हजार 100 रुपया देना पड़ेगा, चौथे माह भी अगर ब्याज का धन नहीं दिया तो पांचवें माह उसे एक लाख 34 हजार 200 के मूलधन पर 13420 रुपया ब्याज देना पड़ेगा। यानि छह माह में ब्याज डेढ़ गुना हो जाता है। बैंक अधिक से अधिक 10-12 फीसद ब्याज लेती है, लेकिन सूदखोर साल का 120 फीसद ब्याज लेते है। दुनिया का कोई भी ऐसा कारोबार नहीं जो एक साल में एक लाख लगाने पर एक लाख 20 हजार का मुनाफा देता हो। इतिहास गवाह है, कि जिसने भी सूद पर पैसा लिया, समझो वह बिना मौत के मर गया। जिले में ऐसे भी सफेदपोष सूदखोर हैं, जिन्होंने दूसरे सफेषपोष को तीन-तीन करोड़ सूद पर देकर उनसे हर माह पांच से सात लाख ब्याज ले रहें हैं। कहा जाता है, कि जिसकी आमदनी ही ब्याज देने पर की न हो, वह कहां से ब्याज देगा, मूल धन को तो भूल जाइए, जाहिर सी बात हैं, कि एक दिन ऐसा आएगा, जब वह सरदारजी तरह इन्हें भी आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाएगा। जब कोई कोई सूद का पैसा नहीं देता तो सूदखोर उसके आवास या फिर प्रतिष्ठान पर गंुडा भेजता, समाज में सरे आम अपमानित करता, तब तंग आकर मजबूरी में कारोबारी या तो अपना मानसिक संतुलन खो देता या फिर आत्महत्या कर लेता। दिक्कत यह है, कि आत्महत्या और फिर दिवालिया हो जाने से कोई सूदखोर के चंगुल से बाहर नहीं आ सकता। हालही में बाराबंकी के एक प्रतिष्ठित कारोबारी ने आत्महत्या कर लिया।
‘नेता’ वही जो ‘शोषितों’, ‘पीड़ितांे’ और ‘वंचितों’ के ‘साथ’ खड़ा ‘रहें’!
-जनता उसे नेता नहीं मानती जो अपनी जाति और बिरादरी के साथ खड़ा रहें, नेता उसे मानती, जो सर्वसमाज के लिए खड़ा रहेें, इसके बाद भी अगर किसी को यह लगता है, कि वह सिर्फ अपनी जाति और बिरादरी के साथ खड़ा रह कर नेता बन सकतें हैं, तो वह गलतफहमी में जी रहें
-बाबूजी भी तभी नेता बने जब वह सर्वसमाज के लिए खड़े हुए, अगर वाकई किसी को बाबूजी जैसा नेता बनना है, तो पहले उसे विषेष जाति के नेता का चांगा उतारकर सर्वसमाज का नेता बनना पड़ेगा, जो लोग चौधरियों का नेता बन, सांसद और विधायक बनने का सपना देखने वाला व्यक्ति विधायक तो प्रधान भी नहीं बन सकता
-जनता उसे नेता नहीं मान सकती, जिसने विकास के नाम पर लूटपाट मचाया, जनता नेता उसे मानेगी जिसने विकास किया, हालांकि जिले में इस तरह का कोई नेता दिखाई नहीं दे रहा, जो हैं, जनता उन्हें नेता कम और अवसरवादी नेता अधिक मान रही
बस्ती। जिले में एक बहस छिड़ी हुई हैं, कि नेता कैसा हो? एक विषेष जाति का हो या फिर सर्वसमाज का। अधिकांष लोगों का कहना है, कि उनका नेता ऐसा हो जो षोषितों, पीड़ितों एवं वंचितों के हित के लिए खड़ा हो। यह भी कहते हैं, कि किसी विषेष जाति और बिरादरी को साथ में लेकर चलने वाला कभी सर्वसमाज का नेता नहीं हो सकता। अगर किसी को यह गलतफहमी है, कि वह विषेष जाति और बिरादरी को साथ में लेकर चलकर नेता बन सकते हैं, तो उन्हें अपनी सोच बदलनी होगी। थाना या कोतवाली से छुड़ाकर कोई नेता नहीं बन सकता। कुछ लोगों की हमदर्दी तो ली जा सकती है, लेकिन नेता नहीं बना जा सकता और न कोई सरकारी धन का लूटपाट करने वाला व्यक्ति ही कभी नेता बन सकता। ऐसे लोग विधायक तो क्या प्रधान तक नहीं बन सकते? अगर जनता का प्रतिनिधि किसी को बनना हैं, तो उसे जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना होगा। जनता के बीच एक अच्छी छवि बनानी होगी। सरकारी धन का लूटपाट करने वाला न कभी जनप्रतिनिधि और न कभी नेता बन सकता है। नेता बनना हैं, तो नेताओं जैसा व्यवहार और चाल-चलन भी रखना होगा। किसी की मदद या फिर सहायता करके कुछ समय के लिए मदद करने वाला का हमदर्द तो बना जा सकता है, लेकिन नेता नही।
आज कल जिस तरह चौधरियों का नेता और मसीहा बनने के लिए होड़ लगी हुई, उससे समाज में एक गलत संदेष जा रहा है। इस होड़ में भाजपा और सपा के नेता षामिल है। बाबूजी का सफल राजनैतिक कैरियर देख कर तमाम लोग उन्हीं जैसा बनना चाहते हैं। ऐसे लोगों को यह नहीं मालूम कि बाबूजी किसी विषेष वर्ग का नेता नहीं बल्कि सर्वसमाज के नेता है। भले ही उनकी पहचान कुर्मी नेेता के रुप में हो, लेकिन वह सभी वर्ग को साथ में लेकर चले हैं, अगर न चले होते तो इतनी बार विधायक और सांसद न बनते। जो लोग चौधरियों का नेता बनने का प्रयास कर रहे हैं, वे लोग चौधरियों को गुमराह कर रहे हैं। एक तरह से जातिगत समीकरण सेट करने में होड़ लगी हुई है। देखना यह है, कि नवागत प्रदेष अध्यक्ष पंकज चौधरी इसे किस रुप में देखते हैं, क्यों कि अब लोगों को यह लगने लगा कि अगर वे चौधरी का नेता बनने में सफल हुए तो 27 में टिकट मिल सकता है, क्यों कि उनकी जाति का प्रदेष अध्यक्ष जो है। यह भी सही है, कि किसी भी चुनाव में चौधरी वर्ग एक निर्णायक भूमिका में रहता है। अधिकांष मतदाता भी जाति को देखकर वोट करते है। यही कारण है, कि लोग जाति की राजनीति में अपने आपको स्थापित करना चाहते है। बिरादरी के नाम पर नेता कभी-कभी गलत लोगों का साथ दे देतें है। जिससे छवि बनने के बजाए और बिगड़ जाती है। नेताओं को इस बात का विषेष ध्यान रखना चाहिए, कि किसी गलत व्यक्ति का साथ न दें। लोगों को यह गलतफहमी भी दूर कर लेनी चाहिए कि वह एक जाति या बिरादरी का नेता बन गएं है। चंद्रेष प्रताप सिंह कहते हैं, कि जिले की राजनीति का ध्रुवीकरण जिले के प्रथम नागरिक, जाति-जाति और एफआईआर-एफआईआर का खेल खेल रहें है। ईश्वर ही बस्ती जिले का बेड़ा पार करें यहां तो बेड़ा गर्त हो रहा है। कहते हैं, कि जातिवाद की एक गहरी खाई जो बस्ती में खोदी गई और उसे समुंदर बनाया जा रहा है यह न बस्ती के विकास अपितु आम जनमानस के लिए ठीक नहीं है।
एक ‘दूसरे’ को ‘पटकनी’ देने ‘को’ कसी ‘कमर’
बस्ती। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ जिला इकाई का अधिवेशन 26 दिसम्बर को बीएसए कार्यालय परिसर में आयोजित होगा, इसी दिन 438 डेलीगेट जिलाध्यक्ष सहित कुल 63 पदाधिकारियों का चुनाव करेगें। इसे लेकर पिछले कई दिनों से जिलाध्यक्ष के दावेदार उदय षंकर षुक्ल और अभिषेक उपाध्याय अपने-अपने समर्थकों के साथ जिले भर का तूफानी दौरा कर रहे है। जीताने की अपील कर रहे है। चुनाव को लेकर दोनों प्रत्याषियों और उनके समर्थकों का उत्साह देख चुनाव के रोचक होने की संभावना जताई जा रही है। उधर अधिवेषन और राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पाण्डेय का घघौआ पुल से कार्यक्रम स्थल तक अनेक स्थानों पर शिक्षकों द्वारा भव्य स्वागत किए जाने की रणनीति बनाई गई। अधिवेशन के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। बुधवार को बीआरसी बहादुरपुर, कुदरहा और बस्ती सदर में जिला अध्यक्ष उदय शंकर शुक्ला, जिला मंत्री राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने साऊंघाट और जिला कोषाध्यक्ष अभय सिंह यादव ने बनकटी के बीआरसी केन्द्र और क्षेत्रीय इकाईयो के अध्यक्ष, मंत्रियों ने अपने-अपने बीआरसी केन्द्रों पर बैठक कर शिक्षकों से अधिवेशन में अनिवार्य रूप से हिस्सा लेने का आवाहन किया। संघ जिला अध्यक्ष उदय शंकर शुक्ला ने कहा कि अधिवेशन राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पाण्डेय, संघ के संरक्षक सांसद जगदम्बिका पाल, एम.एल.सी. देवेन्द्र प्रताप सिंह,पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अभिमन्यु तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी, गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ल, विधायक अंकुर तिवारी, भाजपा नेता अंकुर श्रीवास्तव के साथ ही अनेक जन प्रतिनिधि अधिवेशन में हिस्सा लंेंगे।
बताया कि अधिवेशन की तैयारियां पूरी की जा चुकी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पाण्डेय का घघौआ पुल से कार्यक्रम स्थल तक अनेक स्थानों पर शिक्षकों द्वारा फूल मालाओं के साथ भव्य स्वागत किया जायेगा। घघौआ, विक्रमजोत, हर्रैया, कप्तानगंज, फुटहिया पर शिक्षकों द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत किया जायेगा। इसके लिये पदाधिकारियों को दायित्व साैंप दिया गया है। अधिवेशन में ही पदाधिकारियों का निर्वाचन होगा। सघन बैठकों का सिलसिला जारी है। बुधवार को आयोजित विभिन्न बैठकों में रीता शुक्ला, संदीप यादव, सूर्य प्रकाश शुक्ल, जय प्रकाश शुक्ल, आनन्द दूबे, चन्द्रभान चौरसिया, ओम प्रकाश पाण्डेय, चन्द्रिका प्रसाद सिंह, गुड्डू चौधरी, ओंकार चौधरी, भैयाराम राव, शैल शुक्ल, विजय प्रकाश वर्मा, आशुतोष शुक्ल, शिवम शुक्ल, मो. याकूब, अखिलेश चौधरी, शिवाकान्त पाण्डेय, सोनिल श्रीवास्तव, अखिलेश मिश्र, वृजेश त्रिपाठी, पूजा पाण्डेय, अनीता सैनी, उपमा वर्मा, शमा खातून, अनीता, फरीदा खातून, तरन्नुम नाज, सौम्या गुप्ता, रंजना, नन्दकिशोर चौधरी, अमनदीप, प्रसून पाठक, नितीश उपाध्याय, धु्रव चौधरी, विकास पटेल, उत्कर्ष मिश्र, जया मिश्र, नम्रता राय के साथ ही अनेक शिक्षक शामिल रहे।
आखिर ‘कब’ तक ‘गन्ना’ घटतौली का ‘शिकार’ होतें रहेगें ‘किसान’?
बस्ती। किसान नेता चिल्लाते रह जाते हैं, लेकिन उनकी आवाज सुनने को कौन कहे, दबा दिया जाता। यह लोग धान/गेहूं खरीद में चिल्लाए, खरीफ एवं रबी फसल में खाद के लिए चिल्लाए और अब गन्ना घटतौली सहित अन्य उत्पीड़न को लेकर चिल्ला रहे है। डीएम सहित आयुक्त गन्ना, आयुक्त बस्ती मंडल, जिला गन्ना अधिकारी एवं बांट पाप विधि निरीक्षक
को लिखे पत्र में भाकियू भानु गुट के मंडल प्रवक्ता चंद्रेष प्रताप सिंह ने कहा कि वर्तमान में जनपद बस्ती सहित पूरे पूर्वांचल क्षेत्र में कड़ाके की ठंड एवं शीतलहर का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसी विषम परिस्थितियों में जनपद के विभिन्न बाह्य गन्ना क्रय केंद्रों पर रात-दिन डटे रहने वाले किसान, गन्ना आपूर्ति से जुड़े मजदूर, ट्रैक्टर चालक एवं अन्य कर्मियों को अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। गन्ना क्रय केंद्रों पर किसानों को अपनी उपज लेकर कई-कई घंटे, कभी-कभी पूरी रात भी प्रतीक्षा करनी पड़ती है। ठंड से बचाव के लिए अधिकांश केंद्रों पर अलाव अथवा अन्य किसी प्रकार की ताप व्यवस्था नहीं है, जिससे ठिठुरन, बीमारियों और दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है। यह स्थिति न केवल अमानवीय है, बल्कि शासन द्वारा निर्धारित श्रमिक एवं जनहित मानकों के भी प्रतिकूल प्रतीत होती है। कहा कि सभी क्रय केंद्रों पर गन्ना खरीद अधिनियम के तहत दंड तुला जंजीर नहीं लगा है।
यार्ड रजिस्टर सभी गन्ना क्रय केंद्रों पर उपलब्ध होना चाहिए नहीं है। नल नाद की व्यवस्था भी नगण्य है। मानक के अनुसार बांट होना सूचना पट होना कहीं नहीं दिखता। जबकि जांच अधिकारी ज्येष्ठ गन्ना निरीक्षक सचिव सहित सभी जांच अधिकारी अपने निरीक्षक पुस्तिका में सभी सही दर्शाते हैं जो उनके कदाचार को साबित होता है। जिला कृषि अधिकारी, बांट माप विधि विज्ञान निरीक्षक खंड विकास अधिकारी क्रय केंद्रों का कभी दौड़ा नहीं करते हैं। आनलाइन गन्ना खरीद में किसानों द्वारा भारी घटतौली की शिकायत मिलती रहती है इसका जांच टेक्निकल टीम मजिस्ट्रेट व बांट पाप की कमेटी बनाकर कराया जाए। कहा कि सर्वाधिक शिकायतें बभनान, मसौदा व बजाज हिन्दुस्थान चीनी मिलों द्वारा संचालित क्रय केंद्रों पर है जहां किसानों का भारी घटतौली होता है। चीनी मिलों द्वारा गन्ना खरीद अधिनियम व टैंगिग आदेशों का घोर उलंघन किया जाता है जिस पर प्रशासन सख्त नहीं है। किसानों के साथ अन्याय किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
‘डिजाइनर’ स्ट्रीट लाइट ‘पोल’ से जगमेगा ‘शहर’
बस्ती। नगर पालिका चेयरपर्सन नेहा वर्मा ने कम्पनीबाग से बड़ेवन तक लगे 54 डिजाइनर स्ट्रीट लाइट पोल का निरीक्षण अंकुर वर्मा और ईओ अंगद गुप्त सहित अन्य के साथ किया। कहा कि नगर वासियों को अब स्ट्रीट लाइट पोल के साथ रोशनी तो मिलेगी ही, मार्ग का आकर्षण भी बढ जायेगा।
बताया कि डिजाइनर पोल लगाने का कार्य 30 दिसम्बर तक पूरा हो जायेगा। निरीक्षण के दौरान नपा अध्यक्ष नेहा वर्मा ने निर्देश दिया कि सभी डिजाइनर स्ट्रीट लाइट पोल पूरी मजबूती से लगवाया जाय। कहा कि चरणबद्ध ढंग से पालिका क्षेत्र मंें नागरिकों को बेहतर सेवा देने का निरन्तर प्रयास जारी है। इस दौरान कर निर्धारण अधिकारी उदयभान और अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।



