भाजपाईयों’ का तो ‘बैंक बैलेंस’ बढ़ रहा, ‘पार्टी’ का ‘वोट बैंक’ कम हो ‘रहा’!

 

‘भाजपाईयों’ का तो ‘बैंक बैलेंस’ बढ़ रहा, ‘पार्टी’ का ‘वोट बैंक’ कम हो ‘रहा’!

बस्ती। भाजपा के भीतर 2027 को लेकर खूब आत्म मंथन चल रहा है। परम्परागत वोट बचाने को लेकर पार्टी के भीतर जिस तरह मंथन हो रहा है, उससे बता चलता है, कि पार्टी के लिए 2027 जीतना आसान नहीं होगा, अगर पार्टी परम्परागत वोट बचाने में नाकाम रही तो उसके हाथ से यूपी निकल भी सकता है। परम्परागत वोट बचाना पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। पार्टी 2027 को लेकर काफी चिंचित नजर आ रही है। कहना गलत नहीं होगा कि भाजपा का जिन-जिन लोगों ने उपयोग/दुरुपयोग किया, चाहें वह जनप्रतिनिधि रहें हो या फिर चाहें वह पार्टी पदाधिकारी रहें हों, सबने अपने-अपने बैंक बैलेंस को बढ़ाया, बैंक बैलेस बढ़ाने के चक्कर में पार्टी का बैलेंस ‘वोट’ डगमगा गया।

पार्टी का दुभार्ग्य यह है, कि हारे या जीते प्रतिनिधियों में सबसे बड़ी समस्या आत्म अहंकार से ग्रसित होना है। जो यह सोच रहे हैं, और कर रहें, उसे यह सही मान रहें है। पार्टी लाइन से इन्हें कोई लेना देना नहीं। अब तो एक चलन और चल गया, यह कथित पार्टी खेवनहार, हर दो माह बाद कभी योगी तो कभी अमित षाह तो कभी मोदी का फोटो गैलरी से फोटो निकालकर सोषल मीडिया को बंाट देते हैं। पार्टी का करो या मरो अभियान एसआईआर चल रहा हैं, पार्टी के अभिमन्यू का वध करने के लिए सभी राजनैतिक पार्टियां बंदूक दाग रही हैं, पर पार्टी के जनप्रतिनिधि औ।र पदाधिकारी उस व्यवस्था के परिचायक हैं, जिसमें ‘जब रोम जल रहा था, तो राजा नीरो बंसी बजा रहा था’। वही हाल भाजपा से कमाने वाले उनके होनहार नेता का है। यह ऐसे होनहार नेता हैं, जिनकी कोई नहीं सुनता, पर, यह घर पर मजमा सभी लगाते है। यह सारे नेता परस्पर संवादहीनता के षिकार है। अगर पार्टी ऐसे लोगों से नहीं चेती तो वही स्थित होगी, जिसमें ‘डूबी नांव तभी हम जाना, बैठा उंट बंदर और आना’। जीते या हारे सभी नेता और पार्टी के पदाधिकारी अपनी सोच और कर्मो से पार्टी की नैया को डूबोने के लिए तैयार है। नेतृत्व ने अभी नहीं सोचा तो काफी देर हो जाएगी। अगर नेतृत्व नहीं सोचती तो माना जाएगा कि जो कुछ भी हो रहा है, वह जानबूझकर हो रहा, पार्टी को किसी की कोई चिंता नहीं। जिले में जो कुछ भी पार्टी के भीतर और बाहर चल रहा है, वह अब किसी से छिपा हुआ नहीं। जिस तरह पार्टी के लोग एक दूसरे को काटने और नीचा दिखाने का खेल चल रहा है, उससे नुकसान पार्टी और जो लोग खेल रहे हैं, उनका होगा। कहा भी जा रहा है, कि इतने उथल-पुथल में पार्टी कैसे 2027 में वोटर्स का सामना करेगी? और किस आधार पर वोट की भीख मांगेगी। जिस तरह के हालात नजर आ रहे हैं, उससे अब जनता नेताओं को भीख भी नहीं देंगी। कहा भी जाता है, कि प्रदेष अध्यक्ष बदलने से पार्टी को न तो कुछ हासिल होने वाला है, और न कुछ बदलने वाला नहीं हैं, जब तक जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत और नगर पंचायत को लूटने वाले भाजपा में रहेगें, तब तक भाजपा जिले में वह मुकाम हासिल नहीं कर पाएगी, जिसका सपना देख रही है। देखा जाए तो जिले को लूटने वालों ने ही भाजपा के परम्परागत वोट को बिखरने दिया। मीडिया बार-बार कहती आ रही है, कि जब तक भाजपा के नाम पर जिले को लूटने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी, तब तक परम्परागत वोट को नहीं बचाया जा सकता। वैसे नाराजगी तो सभी में हैं, लेकिन जो नाराजगी परम्परागत वोटर्स में देखी जा रही है, उसे भाजपा के लिए षुभ संकेत नहीं माना जा रहा है। दिक्कत यह है, कि कोई भाजपा की बेहतरी के लिए नहीं लड़ रहा है, बल्कि भाजपा के नाम पर अधिक से अधिक लूटने के लिए लड़ रहा है। जब भाजपा के लोग ही भाजपा के विरोधी हो जाएगें तो पार्टी की नैया को डूबने से कौन बचा सकता है।

‘शिक्षकों’ ने कहा, ‘नेता’ हो तो ‘देवेंद्र प्रताप सिंह’ जैसा!

बस्ती। सड़क से लेकर सदन तक कभी भ्रष्टाचार तो कभी पीड़ितों तो कभी जनहित को लेकर सत्ता में रहकर सत्ता के खिलाफ आवाज उठाने वाले एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह के बारे में उनके विरोधी भी कहते हैं, कि नेता हो तो एमएलसी जैसा। बेसिक के हजारों षिक्षक तो इन्हें अपना मसीहा तक मानने लगे। जिस तरह सदन में इन्होंने हजारों पदोन्नति प्राप्त बेसिक के षिक्षकों के लिए पुनराक्षित वेतन मान देने पर सरकार को अपने तर्को के जरिए मजबूर किया और दस साल पुराने वेतन विसंगतियों को दूर करने का रास्ता साफ करवाया, उससे प्रदेष के 17 हजार से अधिक षिक्षकों को लाभ होगा। सदन में जिस बेसिक विभाग के मंत्री ने मामले को विचार करने से ही इंकार कर दिया था और यहां तक कहा कि इस तरह का कोई भी मामला विचाराधीन नहीं हैं, उसी मंत्री ने न सिर्फ विचार करने को कहा कि बल्कि एमएलसी के दिए गए सुझाव को मानने का भरोसा भी दिया। इस मामले में सदन के सभापति ने भी एमएलसी का पूरा साथ दिया, और मंत्री से कहा भी माननीय सदस्य जो सुझाव दे रहे हैं, उस पर आप विचार करें, और वेतन विसंगतियों को दूर करने का प्रयास करे, ताकि दस साल पुराने मामले का निस्तारण हो सके।

सदन के सभापति ने जैसे ही एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह का नाम लिया, वैसे ही उन्होंने कहा कि महोदय सरकार कोई भी नीति पूरे सवंर्ग के लिए बनाती है, न कि किसी खास के लिए। कहा कि पदोन्नति प्राप्त हजारों षिक्षकों को पुनरीक्षित वेतन मान का लाभ नहीं मिल रहा। कहा कि यह कैसी व्यवस्था हैें, जिसमें पहली दिसंबर 2008 से 21 सितंबर 2015 के मध्य पदोन्नति प्राप्त प्राथमिक षिक्षकों को पुनरीक्षित वेतनमान का लाभ नहीं मिल रहा। कहा कि पहले वाले को मिल रहा है, और बीच वाले को नहीं मिल रहा। उन्होंने सभापति से कहा कि उनके पास वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए एक फारमूला हैं, कहा कि सरकार अगर इस फारमूले पर विचार करती है, तो दस साल पुराने समस्या का समाधान हो सकता है। उन्होंने नौ जून 2016 के षासनादेष का हवाला देते हुए कहा कि इसमें स्पष्ट लिखा हुआ है, कि सरकार अगर चाहे जो पुनरीक्षित वेतन मान की विसंगतियों को दूर कर सकती है। इस पर सभापति ने मंत्री से माननीय सदस्य के सुझाव पर विचार करने और वेतन विसंगतियों को दूर करने को कहा। तब इस मंत्री ने कहा कि सरकार माननीय सदस्य के सुझाव पर न सिर्फ विचार करेगी बल्कि वेतन विसंगतियों को दूर करने का प्रयास भी करेगी। मंत्री के द्वारा सदन के सभापति को दिए गए आष्वासन से वेतन विसंगतियां दूर होने की संभावना बढ़ गई है। यह सही है, कि एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह जितना अपने वोटर्स के लिए और पीड़ितों के लिए लड़ते हैं, उतना अन्य जनप्रतिनिधि लड़ते हुए नहीं दिखाई देते, यही कारण है, कि कोई जीते या न जीते यह जरुर जीतते है। जिस तरह सत्ता में रहकर सत्ता का विरोध करके यह जीतते आ रहे हैं, उससे इनकी लोकप्रियता का पता चलता है। इन्हें इस बात की परवाह नहीं रहती है, कि वह पार्टी के सीएम के खिलाफ धरना-प्रदर्षन कर रहें है। इन्हें जब भी लगा कि सरकार गलत कर रही है, आवाज उठाने से नहीं चूकते। यह जब सपा में थे तब भी सरकार की जनहित विरोधी नीतियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते थे, वही आवाज भाजपा में रहकर भी उठाते है। इनका मानना हैं, हर नेता को गलत नीतियों और गलत कामों का विरोध करना चाहिए, क्यों कि जनता ने उन्हें सरकार की जी हूजूरी करने के लिए नहीं चुना, बल्कि जनहित के मुद्वे को उठाने के लिए चुना। इसी लिए कहा जाता है।

‘संभल’ कर ‘रहिए’, नहीं तो ‘पहुंच’ जाएगें ‘अस्पताल’

बस्ती। जानेमाने चिकित्सक एवं वरिष्ठ समाज सेवी डा. वीके वर्मा ने उन लोंगों का सावधान रहने की चेतावनी/सलाह दी है, जो बदलते मौसम के अनुसार नहीं ढ़लते। कहते हैं, कि ऐसे लोग जो मौसम के अनुसार नहीं चलते, उन्हें अस्पताल तक जाना पड़ सकता है। कहते हैं, कि मौसम बदल रहा है। दिन मे धूप और सुबह शाम और रात मे गलन हो रही है। ऐसे में सर्दी जुकाम होना स्वाभाविक है। इसको हल्के में न लें, क्योंकि यह संक्रमण श्वसन नली को प्रभावित करता है जो बाद में गंभीर रूप ले सकता है। कहा जाता है, यह एक वायरल इन्फेक्शन होता है जो मुख्य रूप से राइनोवायरस या कोरोनावायरस जैसे वायरस के कारण होता है।

जुकाम होने पर नाक से पानी बहना, छींक आना, गले में खुजली या दर्द और नाक बंद होना जैसी समस्याएं होती हैं। ऐसे में पर्याप्त आराम करें, खूब तरल पदार्थ पिएं, गुनगुने पानी के गरारे करें और भाप लें। ठंडी चीजों, दही, चावल और बासी भोजन से परहेज करें। लक्षण बने रहने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

राइनोवायरस, कोरोनावायरस, मौसम परिवर्तन, अचानक ठंडा या गर्म होने, कमजोर इम्युनिटी यानी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने, एलर्जीः धूल, परागकण या प्रदूषण, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से वायरल इन्फेक्शन हो सकता है। नाक से लगातार पानी बहना, बार-बार छींक आना, गले में खराश या दर्द, नाक बंद हो जाना, सिर में भारीपन या दर्द, आँखों में जलन या पानी आना, हल्की खांसी या बुखार, शरीर में थकान महसूस होना सर्दी जुकाम के लक्षण हैं। हाइड्रेशनः शरीर में पानी की कमी न होने दें, खूब सारे तरल पदार्थ (गर्म सूप, जूस, नींबू पानी) पिएं। आरामः रोग प्रतिरोधक क्षमता (प्उनदपजल) को सुधारने के लिए 8-10 घंटे की नींद लें और शारीरिक गतिविधि कम करें। गरारे और भापः नमक वाले गुनगुने पानी से गरारे करने से गले की खराश कम होती है, जबकि भाप लेने से बंद नाक खुलती है। परहेजः ठंडा पानी, आइसक्रीम, कोल्ड्रिंक, बासी भोजन, जंकफूड और तली हुई चीजों से बचें। स्वच्छताः हाथों को बार-बार साबुन से धोएं और संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाएं।

कहते हैं, कि डॉक्टर के पास तब जाएं, जब बुखार 101 डिग्री से अधिक हो, सांस लेने में तकलीफ हो, या खांसी 10 दिनों से अधिक समय तक खांसी बनी रहे, तो तत्काल डॉक्टर से परामर्श लें। हल्दी में करक्यूमिन नामक तत्व होता है, जो एक शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीवायरल है। यह गले की खराश शांत करता है और नाक की जकड़न खोलता है। एक गिलास गर्म दूध में 1 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर और थोड़ी सी काली मिर्च पाउडर मिलाएं। सोने से पहले पिएं। नाक बहना कम होगा और गले को आराम मिलेगा। तुलसी प्राकृतिक रूप से एंटीवायरल और इम्युनिटी बूस्टर है। अदरक गर्म प्रकृति का होता है और कफ को पिघलाने, सूजन कम करने में मदद करता है। 5-7 ताजा तुलसी के पत्ते और 1 इंच अदरक का टुकड़ा पीसकर रस निकाल लें। इसमें 1 चम्मच शहद मिलाकर दिन में 2-3 बार चाटें। बच्चों को भी यह मिश्रण दिया जा सकता है (मात्रा आधी करें)। बंद नाक खुलने में यह बहुत प्रभावी है।

गर्म भाप नाक के मार्ग को खोलती है, कफ को पतला करती है और साइनस की जकड़न से तुरंत राहत देती है। एक बर्तन में पानी गर्म करें (उबाल आने के बाद आंच बंद कर दें)। इसमें 4-5 बूंद यूकेलिप्टस ऑयल या पुदीने का तेल या सिर्फ अजवाइन डालें। सिर पर तौलिया ढककर इस भाप को 5-10 मिनट तक लें। आँखें बंद रखें। दिन में 2-3 बार करें। गर्म पानी में नमक गले की सूजन कम करता है, खराश से राहत देता है और गले के हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस को दूर करता है। एक गिलास गर्म पानी में 1 छोटा चम्मच सेंधा नमक या सामान्य नमक घोलें। इस घोल से दिन में 3-4 बार गरारे करें। गले की खराश में यह तुरंत आराम देता है। एक गिलास गर्म पानी में 1 छोटा चम्मच सेंधा नमक या सामान्य नमक घोलें। इस घोल से दिन में 3-4 बार गरारे करें। गले की खराश में यह तुरंत आराम देता है। काली मिर्च की चाय दालचीनी शरीर को गर्मी देती है और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है। काली मिर्च बंद नाक खोलने और कफ निकालने में मदद करती है। एक कप पानी में 1 छोटा चम्मच दालचीनी पाउडर (या 1 इंच दालचीनी की छड़ी) और 4-5 काली मिर्च के दाने उबालें। पानी आधा रह जाने पर छान लें। थोड़ा गुड़ या शहद मिलाकर पिएं। यह काढ़ा शरीर को गर्म करेगा और इम्युनिटी बढ़ाएगा। शहद में प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण होते हैं। यह गले को कोट करके आराम देता है। नींबू विटामिन सी से भरपूर है जो इम्युनिटी बढ़ाता है और कफ को पतला करता है। एक कप गुनगुने पानी में 1 चम्मच शहद और आधे नींबू का रस मिलाएं। दिन में 2-3 बार पिएं। खांसी और गले की खराश में विशेष लाभकारी। गर्म तरल पदार्थ गले को आराम पहुंचाते हैं, नाक के मार्ग को खोलते हैं और शरीर को हाइड्रेट रखते हैं। सब्जियों का सूप पोषक तत्वों से भरपूर होता है। ताजा घर का बना हल्दी, अदरक, लहसुन, काली मिर्च डाला हुआ गर्म सब्जी या चिकन सूप पिएं। इसमें नींबू का रस निचोड़ सकते हैं। यह शरीर को ताकत देगा और बंद नाक खोलेगा। लहसुन में एलिसिन नामक यौगिक होता है जो एक शक्तिशाली एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और इम्युनिटी बूस्टर है। 2-3 लहसुन की कलियों को छिलकर थोड़े से देसी घी में हल्का भून लें। हल्का ठंडा होने पर इन्हें चबा-चबाकर खाएं। दिन में एक बार लें। संक्रमण से लड़ने में मदद मिलेगी। आयुर्वेद में ‘नस्य’ क्रिया बहुत प्रभावी मानी जाती है। गाय का शुद्ध घी नाक के मार्ग को चिकनाई देता है, सूखापन दूर करता है और वायरस से लड़ने में मदद करता है। गाय के देशी घी को हल्का गुनगुना करें (बस हाथ को सहने लायक गर्म)। ड्रॉपर की मदद से या साफ उंगली से प्रत्येक नथुने में 1-2 बूंद डालें। सुबह खाली पेट करें। नाक बंद होना और बहना दोनों में लाभ होता है। अजवाइन में थाइमॉल होता है जो बंद नाक खोलने और छाती की जकड़न में बहुत कारगर है। अतिरिक्त तरल पदार्थ को सुखाकर और गले को आराम देकर फेफड़ों और ब्रांकाई से बलगम को साफ करने में मदद करता है। भापः एक कटोरी गर्म पानी में 1 चम्मच अजवाइन डालकर भाप लें। सूखी कढ़ाई में 2 चम्मच अजवाइन को गर्म करें । इसे एक साफ कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। इस गर्म पोटली को सूंघें और साइनस के आसपास सिंकाई करें। तुरंत आराम मिलेगा। एकोनाइट, एन्टिमटार्ट, बेलाडोना, ब्रायोनिया, इपिकाक, आर्सेनिक एलबम, सल्फर, नक्सवोम, इप्यूटोरियम पर्फ, एलियमसेपा, कल्केरियम कार्ब, जेल्सिमियम, पल्सेटिला, रसटाक्स आदि दवायें उचित पावर मे चिकित्सक की देखरेख में ली जा सकती हैं जो सर्दी जुकाम की स्थिति में लाभप्रद हो सकती हैं।

‘आपदा मित्र योजना’ एक महत्त्वपूर्ण ‘पहल’ः डा. वी.के. वर्मा

बस्ती। पटेल एमएमएच हॉस्पिटल एण्ड पैरा मेडिकल काजेल गोटवा के प्रबंधक होम्योपैथ के वरिष्ठ चिकित्सक डा.वी.के. वर्मा ने एस.डी.आर.एफ. मुख्यालय, लखनऊ से 12 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटे आपदा मित्र प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र, स्मृति चिन्ह भेटकर उनका उत्साहवर्धन किया।

डा. वी.के. वर्मा इंस्ट्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस बसुआपार के जीएनएम आपदा प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटी की छात्राओं रूपा मौर्या, लक्ष्मी यादव, महिमा यादव, काजल कुमारी, शिवांगी चौधरी, प्रियंका चौधरी, ज्योति वर्मा, खुशबू गौतम, वर्षा भारती, संजनी वर्मा से आपदा प्रशिक्षण के बारे में मिले जानकारी के बारे में प्रबंधक डा. वी.के. वर्मा विस्तार से पूंछा। कहा कि उन्हें जो प्रशिक्षण मिला है इसकी जानकारी अन्य छात्रों को भी दें जिससे संकट की घड़ी में वे लोगों का जीवन बचाने के साथ ही बाढ, सूखा, आपदा की स्थिति में योगदान दे सके।

एस.डी.आर.एफ. मुख्यालय, लखनऊ में 12 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत आपदा मित्र प्रतिभागियों का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस प्रशिक्षण में विभिन्न जनपदों से आए प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा आपदा प्रबंधन से संबंधित सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक ज्ञान अर्जित किया। सभी प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूर्ण किया।

जिला चिकित्सालय में आयुष चिकित्साधिकारी डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि आपदा मित्र योजना भारत सरकार की एक महत्त्वपूर्ण पहल है, जिसे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, द्वारा संचालित किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य सामुदायिक स्तर पर प्रशिक्षित स्वयंसेवकों का एक सशक्त समूह तैयार करना है, जो आपदा के समय प्रारंभिक प्रतिक्रिया प्रदान कर सके। डा. वर्मा और प्राचार्य डा. हिमांशी वर्मा ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को खोज एवं बचाव , प्राथमिक उपचार, सीपीआर, अग्नि सुरक्षा, बाढ़ एवं भूकंप जैसी आपदाओं में राहत कार्य, तथा आपातकालीन संचार प्रणाली की जानकारी दी गई। आपदा मित्र जिले के लिए एक सशक्त संसाधन के रूप में कार्य कर सकते हैं। आपदा की स्थिति में ये प्रशिक्षित स्वयंसेवक त्वरित सहायता प्रदान कर जन-धन की हानि को कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। साथ ही, ये अपने-अपने क्षेत्रों में जागरूकता फैलाकर आपदा न्यूनीकरण एवं तैयारी को बढ़ावा देंगे।

‘शिक्षकों’ की ‘एकजुटता’ से ही मिलेगी ‘सफलता’ःचन्द्रिका सिंह

बस्ती। टीईटी अनिवार्यता के विरोध में प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर शिक्षकों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष चन्द्रिका सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को शिक्षकों ने प्रेस क्लब सभागार में बैठक कर विस्तृत रणनीति बनाई। साथ ही ब्लाक अधिवेशन की तिथियों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष ने कहा कि टीईटी अनिवार्यता के विरोध में पूरे देश में आन्दोलन के लिए टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया का गठन किया गया है। जिसमें चरणबद्ध आन्दोलन की तिथियों का निर्धारण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में शिक्षकों के अस्तित्व पर संकट है। इस संकट की घड़ी में यदि हम सभी एकजुट होकर लड़ाई लड़ेंगे तो निश्चित है सफलता मिलेगी। चरणबद्ध आन्दोलन की तिथियों की जानकारी देते हुए जिला मंत्री बालकृष्ण ओझा ने कहा कि 22 फरवरी को अपराह्न 2 बजे से 4 बजे तक ट्विटर पर हैशटैग अभियान, 23 फरवरी से 25 फरवरी तक काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य, 26 फरवरी को बीएसए कार्यालय पर धरना प्रदर्शन करके जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल मार्च करते हुए प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन, मार्च के तीसरे सप्ताह में दिल्ली के जंतर मंतर पर विशाल धरना प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने शिक्षकों से उक्त कार्यक्रमों में अधिक से अधिक संख्या में प्रतिभाग करने का आह्वान किया। पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष विष्णु दत्त शुक्ल ने कहा कि टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले हम सभी को एकजुट होकर लड़ाई लड़नी है। यदि हम सभी एकजुट होकर पूरे मन से लड़ाई लड़े तो निश्चित रूप से सफलता मिलेगी। जिला कोषाध्यक्ष दुर्गेश यादव ने कहा कि प्रदेश नेतृत्व के निर्देश के क्रम में ब्लॉक स्तरीय अधिवेशन को सम्पन्न कराना है। उन्होंने कहा कि सभी ब्लॉक कार्यकारिणी तत्काल सदस्यता सूची और शुल्क जमा कर दें। कहा कि जिन ब्लॉकों की सदस्यता 30ः से कम है अथवा संघर्ष शुल्क नहीं जमा किया है उन्हें स्पष्टीकरण जारी किया जाएगा। उन्होंने ब्लाकों के पदाधिकारियों से अधिवेशन की तिथि निर्धारित करके सूचित करने की बात कही।

बैठक में मुख्य रूप से उमाकान्त शुक्ल, प्रताप नारायण, राजकुमार तिवारी, रवीश कुमार मिश्र, प्रवीन श्रीवास्तव, शिल्पी पाण्डेय, रीना कन्नौजिया, रेहाना परवीन, सविता पाण्डेय, राजकुमारी, शशि सिंह, सुरेश गौड़, अशोक यादव, अनिल पाठक, अनीश अहमद, मंगला मौर्य, मनीष मिश्र, गिरजेश सिंह, अविनाश दुबे, सुशील गहलोत, सुधीर तिवारी, शिवप्रकाश सिंह, हरेंद्र यादव, प्रताप नारायण, उमाकांत शुक्ल, राजीव सिंह, राजेश गिरी, संतोष मिश्र, अखिलेश पाण्डेय, संजय चौधरी, बृजेश त्रिपाठी, प्रमोद सिंह, अटल उपाध्याय, शत्रुजीत यादव, विनोद यादव, विवेक सिंह, नवीन सिंह, रामभवन यादव, अमित सिंह, रमेश चौधरी, शेषनारायण, मुस्तकीम, धर्मराज यादव, अशोक पाण्डेय, अजय पाल, माखनलाल , रवि सिंह, सत्य प्रकाश कन्नौजिया, देवेंद्र सिंह, रंजन सिंह, दिनेश सिंह, हरीओम यादव, आनंद, जूनियर शिक्षक संघ के सच्चिदानंद शुक्ल, गौरव द्विवेदी ,रुद्र प्रताप चौधरी आदि शामिल रहे।

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