सुलग’ रही ‘जातिवाद’ की ‘चिंगारी’, नहीं ‘बुझी’ तो ‘शोला’ बन ‘जाएगा’!
‘सुलग’ रही ‘जातिवाद’ की ‘चिंगारी’, नहीं ‘बुझी’ तो ‘शोला’ बन ‘जाएगा’!
-यह एक ऐसी ‘चिंगारी’ है, जब आग की तरह ‘फैलेगा’ तो कोई नहीं बचेगा, ऐसी नफरत की आंधी चलेगी कि सब कुछ उड़ाकर ले जाएगा, इससे बचकर रहिए
-वैसे भी देष जाति की आग में जलने के कगार पर पहुंच चुका, भाजपा ने यूजीसी लाकर जाति के आग में घी का काम किया,
-अगर इसी तरह जाति की चिंगारी सुलगती रही तो मेरा भारत महान के बजाए लोग मेरी जाति महान का नारा देने लगेगें
-पार्टियां जो जाति का खेल खेल रही है,, उससे उन्हें सत्ता तो मिल सकता, लेकिन समाज बंटकर रह जाएगा,तब हर मोहल्ले में पार्टियां हो जाएगी और घर-घर जातिवाद हो जाएगा
-अब तो धीरे-धीरे लोगों की पहचान उनके कर्म से नहीं बल्कि जाति से होने लगी है। यह जाति का खेल समाज के ‘स्लो प्वाइजन’ की तरह भविष्य में साबित होगा।
बस्ती। राजनीतिक पार्टियां अपनी नाकामी को छिपाने और सत्ता हासिल करने के लिए जो जातिवाद का खेल-खेल रही है, उससे सत्ता तो मिल सकता है, लेकिन देष और समाज जातिवाद में बंट जाएगा। आपसी भाईचारा समाप्त हो जाएगा, और हर तरफ नफरत ही नफरत दिखाई देगा। तब हर मोहल्ले में पार्टियां हो जाएगी और घर-घर जातिवाद हो जाएगा। क्यों कि जातिवाद की ऐसी चिंगारी सुलग रही है, जिसे षोला बनने में दे नहीं लगेगा। अगर कहीं यह षोला बन गया तो कोई नहीं बचेगा, सबकुछ जलकर राख हो जाएगा, ऐसी नफरत की आंधी चलेगी कि सब कुछ उड़ाकर ले जाएगा, इससे बचकर रहिए। वरना इतिहास कभी माफ नहीं करेगा। पुरखों की आत्माएं तड़पे और रोऐंगीं। वैसे भी देष जाति की आग में जलने के कगार पर पहुंच चुका, ऐसे में भाजपा ने यूजीसी लाकर आग में घी डालने का काम किया। अगर इसी तरह जाति की चिंगारी सुलगती रही तो ‘मेरा भारत महान’ के बजाए लोग ‘मेरी जाति महान’ का नारा देने लगेगें। हम सभी को समाज को बांटने और भाईचारा को समाप्त करने वालों से सावधान रहना होगा, और इनके मुंह पर ऐसा जोर का तमाचा मारना होगा, कि इन्हें दिन में भी तारे दिखाई देने लगे। जातिवाद फैलाना भूल जाएं।
भारत के लोकतंत्र की खूबसूरती और इसकी पहचान किसी जाति से नहीं, बल्कि एकजुटता और भाईचारे से है। मगर, सत्ता हासिल करने के लिए जिस तरह राजनेैतिक पार्टियां जाति के नाम पर राजनीति कर रही है, उससे देष की छवि खराब हो रही है। भारत के लोकतंत्र की खूबसूरती पर धब्बा लग रहा है। अगर पार्टियां लोगों को जाति में बांटने में सफल रही तो कोई ‘मेरा भारत महान’ नहीं कहेगा, और न रह जाएगा। अब तो धीरे-धीरे लोगों की पहचान उनके कर्म से नहीं बल्कि जाति से होने लगी है। यह जाति का खेल समाज के ‘स्लो प्वाइजन’ की तरह भविष्य में साबित होगा। व्यक्ति अगर चाहें जितना बड़ा अपराधी, सरकार एवं समाज का दुष्मन क्यों न हो, अगर वह हमारी जाति का हुआ तो उसका साथ देने का नारा लगने लगेगा। देखा जाए तो कुछ पार्टियां समाज में जाति का जहर बो रही है।
वैभव यादव लिखते हैं, कि 2014 तक पहले साथ रहते थे?, एक ही थाली में खाना खाते थे, एक साथ घूमते थे, कभी ऐसा नहीं लगा कि कौन किस जाति का था, किस जाति का है। अचानक एक महामावन की पार्टी आई, फिर अचानक हिंदु खतरे में आ गया, अब हिंदु को खतरे से निकालते-निकालते, जाति खतरे में आ गई। एक बाबा 2019 में आए, अचानक 100-200 करोड़ की संपत्ति बनाकर हिंदु नेषन बनाने की बात करने लगे। बंसत चौधरी लिखते हैं, कि जो विकास नहीं कर सकता, वह जाति-पाति करेगा, अपनी कमी छिपाने की आड़ में एमपी-एमएलए बनकर करप्षन करते। इस पर सुधाकर सिंह ने लिखा कि चौधरी साहब पैसा और ज्ञान अलग हैं, आप के पास है, तभी तो नहीं जान पाए। आषुतोष त्रिपाठी कहते हैं, कि कटअरता ऐसे ही अपने आप को बिखेरता चलता है, पहले लोग कटटर हिंदु बने, तब मुसलमानों के खिलाफ पूरा समाज नफरत बो रहा था, तब ब्राहृमण, ठाकुर, बनिया, यादव, चौधरी और दलित सब मिलकर कटटर हिंदु हो रहे थे, और सारे गलत कामों का ठीकरा मुसलमानों पर भोड़ते थे, फिर मामला और गहराया, लोग और कटटर हुए और फिरकों में बंट गए, और उनको अपनी जाति की महानता याद आ गई, तब ब्राहृमण के लिए बाकी बिरादरी दुष्मन हो गई। राम कृष्णा का कुछ अलग ही कहना है, कहते हैं, कि राजनैतिक दलों से पत्रकार जिम्मेदार है, जब चुनावी समीक्षा दिखाते या बताते हैं, तो किस विधानसभा या लोकसभा में किस जाति के कितने वोटर्स हैं, का आकड़ा बताते हैं, तथ किस राजनैतिक दल के करीब किस धर्म और जाति के कितने वाटर्स है, मजबूती से बताते है। विजय सेन यादव कहते हैं, कि जिस दिन कुछ लोग जाविादी पत्रकारिता करना छोड़ देगें, उस दिन जातिवाद की राजनीति समाप्त हो जाएगी। आदित्य मिश्र कहते हैं, कि आजकल राजनैतिक दल एक दम अंग्रेजो के पैटर्न पर चल रहें हैं, बांटो और राज करो। बिनय षुक्ल लिखते हैं, कि जनता भी बीजेपी को वोट देकर जिम्मेदार है। संतोष यादव लिखते हैं, कि जब से बीजेपी की सरकार आई, तब से जातिवाद अधिक पनपा। रविंद्र कुमार पटेल लिखते हैं, कि राजनैतिक दलों ने जातिवाद बो दिया है, ऐसा नहीं कि जातिवाद पहले नहीं था, जातिवाद पहले भी था, और समय-समय पर राजनैतिक दले इसका फायदा उठाती रही है।
‘मैडम’ ने ‘उमेष गोस्वामी’ से कहा, ‘रुधौली’ भी आ ‘गए’!
बस्ती। सीएमओ और उनके लूट गैंग के रातों की नींद हराम करने वाले उमेष गोस्वामी बस्ती से रुधौली तहसील दिवस इस लिए सीएमओ की षिकायत करने पहुंच गया, क्यों कि यहां की अध्यक्षता डीएम कर रही थी। उमेष को देखते ही डीएम मैडम कहने लगी कि यहां भी आ गए, इस पर उमेष ने कहा कि मैडम, जहां भी आप जाएगी वहां पर सीएमओ की षिकायत करने आउंगा। उमेष को रुधौली तहसील दिवस में देकर सीएमओ असहज हो गए। डीएम को दिए गए षिकायत में कहा कि मैडम, हमने सात अगस्त 25 को पीएचसी कुदरहा में तैनात संविदा स्टाफ नर्स सुमन चौधरी और सुनीता चौधरी दोनों ननद-भौजाई के अनियमित कार्यो को लेकर सीएमओ को षपथ-पत्र के साथ जांच करने के लिए दिया था, लेकिन इन्होंने मेरे षपथ प़त्र को ननद-भौजाई के हाथों बेच दिया। कहा कि सीएमओ ने सबसे अधिक बेईमान डिप्टी सीएमओ डा. अषोक चौधरी को जांच अधिकारी बना दिया। जांच के तीन दिन बाद जांच अधिकारी दोनों को कार्यालय बुलाते हैं, और धनादोहण कर बिना कोई कार्रवाई को छोड़ देते है। कह दिया कि षपथ-पत्र और षिकायत दोनों फर्जी हैं, जबकि साक्ष्य के रुप में दोनों का बाहर की दवा लिखने का पर्चा भी दिया गया था। पहली नवंबर 25 को सदर तहसील दिवस में जब सीडीओ ने सीएमओ ने फोन से सीएमओ से पूछा कि क्या आप ने जांच किया और अगर नहीं किया तो कैसे बिना जांच के फर्जी बता दिया? तब सीडीओ ने जांचकर रिपोर्ट देने को कहा, आज तक सीएमओ ने सीडीओ को जांच रिपोर्ट नहीं दिया, अलबत्ता सीएमओ और जांच अधिकारी जांच और कार्रवाई के नाम पर ननद-भौजाई का धनादोहन करते रहे। डीएम को लिखित में दिया कि जिले में अब तक जितने भी सीएमओ आए उनमें सबसे अधिक भ्रष्ट सीएमओ डा. राजीव निगम ही रहे। लिखा कि सीएमओ और डिप्टी सीएमओ हर सप्ताह कार्यालय में ननद-भौजाई को बुलाते और हफता वसूलते। डीएम ने पूछा कि चाहते क्या हो, कहा कि इसकी जांच सीएमओ और उनके लूटेरे टीम से न कराकर बाहर से करवाई जाए। एडी हेल्थ की अध्यक्षता में महिला और टीबी अस्पताल के सीएमएस से कराने की अपील की। साथ ही षपथ-पत्र को बेचकर खाने वाले सीएमओ और उनकी टीम को निलंबित करने के लिए षासन को लिखने की मांग की, साथ ही ननद-भौजाई दोनों की संविदा समाप्त करने को भी लिखा। एनएचएम के बाबू संदीप राय के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई को लिखा।
‘सिकटा’ के ‘मेधावी’ बच्चे हुए ‘सम्मानित’
बस्ती। राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिकटा कप्तानगंज में वार्षिकोत्सव एवं सम्मान समारोह कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैरियर गाइडेंस के जनपदीय नोडल उदयभान सिंह और संतोष कुमार गौड़ जी उपस्थि कार्यक्रम की अध्यक्षता रामचंद्र यादव प्रधानाचार्य राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिकटा ने किया। कार्यक्रम में बोर्ड परीक्षा में सर्वाधिक अंक पाने वाले सर्वाधिक उपस्थिति वाले बच्चों एवं विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रथम द्वितीय तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों को सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से सुधीर सिंह प्रमोद कुमार यादव, सत्येंद्र कुमार पांडे शशिकांत पांडे, सुभाष यादव, धीरेंद्र वर्मा और अमित कुमार सिंह मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
वास्तव में, निर्गुण ही सगुण का आधारःआचार्य
बनकटी/बस्ती। स्थानीय विकास क्षेत्र के बघाड़ी गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दितीय दिवस पर काशी धाम से पधारे आचार्य पंडित कैलाश जी महाराज ने निर्गुण और सगुण ब्रह्म के गूढ़ रहस्य का वर्णन करते हुए श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। आचार्य जी ने स्पष्ट किया कि परमात्मा एक ही हैकृजब भक्तों को आवश्यकता होती है, तो वही अव्यक्त (निर्गुण) शक्ति व्यक्त (सगुण) रूप धारण कर लेती है। उन्होंने कहा, वास्तव में, निर्गुण ही सगुण का आधार है, ठीक वैसे ही जैसे निराकार ब्रह्म ही साकार रूप में प्रकट होते हैं। ऊं नाम जप की महिमा और नारद जी का दृष्टांत कथा को आगे बढ़ाते हुए आचार्य जी ने नाम जप के असाधारण महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने देवर्षि नारद जी के पूर्व जन्म का प्रेरक दृष्टांत प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार नारद जी अपने पूर्व जन्म में एक दासी पुत्र थे, किंतु निरंतर नाम-संकीर्तन और साधु-सेवा के बल पर उन्हें अगले जन्म में स्वयं ब्रह्मा जी के मानस पुत्र बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
आचार्य श्री ने बताया कि नाम जप की इसी शक्ति से नारद जी ने महर्षि वेदव्यास जी की मनोशांति भंग होने पर उन्हें चार श्लोकों वाली मूल भागवत का उपदेश दिया। इसी उपदेश के फलस्वरूप, व्यास जी ने श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना कर ज्ञान का वह अक्षय भंडार मानव मात्र को प्रदान किया, जो आज भी जीवन को दिशा दे रहा है। शुकदेव जी का वैराग्य और पर्यावरण संरक्षण का संदेश तृतीय दिवस की कथा का महत्वपूर्ण अंग श्री शुकदेव जी के जीवन चरित्र का वर्णन रहा। आचार्यजी ने शुकदेव जी के परम वैराग्यपूर्ण जीवन और वनवास में उनके तपस्वी जीवन-यापन का मार्मिक चित्रण किया। इसी प्रसंग में, आचार्य जी ने आधुनिक समाज को एक अत्यंत प्रासंगिक संदेश दिया। उन्होंने वन रक्षा और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए उद्घोष किया प्रकृति ही साक्षात भगवान का स्वरूप है।ष् उन्होंने समझाया कि वनों, नदियों और समस्त प्राकृतिक संपदा की रक्षा करना हमारी केवल सामाजिक नहीं, अपितु आध्यात्मिक जिम्मेदारी भी है। हमें प्रकृति का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि इसमें ही हमें परमात्मा की झलक मिलती है। कथा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने आचार्य जी के आध्यात्मिक विवेचन और सामाजिक संदेश को सुनकर भाव विभोर होकर जयकारे लगाए।मुख्य आयोजक योगेश जी महाराज बलराम प्रसाद शुक्ल ने कथा में पहुंचने वाले भक्तों का आभार व्यक्त किया। इस मौके ओकार, राजेश शुक्ल, बृजेश, राम सूरत, धनश्याम शुक्ल सहित गाव व क्षेत्र के श्रदालु उपस्थित रहें।
‘कटटे’ की ‘नांेक’ पर फ्री ‘हजारों’ का ‘डिनर’ किया, ‘होटल’ को ‘जला’ भी ‘दिया’
बस्ती। रुधौली के दबंगों का मन इतना बढ़ गया, कि कटटे की नांकर पर हजारों रुपया का फ्री खाना भी खाया, और होटल को आग भी लगा दिया। रूधौली थाना क्षेत्र के कथकपुरवा निवासी अबुसमा पुत्र मो. अमीन ने पुलिस अधीक्षक को पत्र देकर होटल मंें जबरिया खाना खाने, धमकी देने, दुकान में आग लगा देने के मामले में दोषियों के विरूद्ध मुकदमा पंजीकृत कर कार्रवाई और अपने परिवार के जान माल के रक्षा की गुहार लगाया है। एसपी को दिये पत्र में अबुसमा ने कहा है कि वह कथकपुरवा चौराहे पर वह पिछले चार वर्षो से के.जी.एम. नाम से एक होटल चलाता है। गत 15 फरवरी को मोबाइल नम्बर 6393031096 से शाम को खाने के लिये फोन आया लेकिन फोन पर गाली गुप्ता बदतमीजी किया। उसके बाद लगभग 8.30 बजे रक्साकलॉ से चार लोग परबेज, मुसीर, मझौआ के शुभम एवं दानोकुईया के रिजवान अहमद आदि आये। होटल पर खाना खाया उसके बाद हाथापाई व गाली गुप्ता देने लगे। उसी में से एक ने कट्टा निकालकर धमकी दिया की हट जा नहीं तो जान से मार दूँगा और होटल में आग लगा दूँगा, कह कर चले गये। अबुसमा ने 112 पर घटना की सूचना दिया। पुलिस आई, पूछताछ किया, उसने लिखित तहरीर थाने पर दिया और होटल एवं जानमाल की सुरक्षा दोषियों खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग किया। 17 फरवरी की रात में लगभग 3.30 बजे के करीब दुकान में आग लगा दिया गया। इसकी भी सूचना 112 नम्बर पर दिया गया। इसके बाद रुधौली पुलिस ने अज्ञात लोगों के नाम से मुकदमा पंजीकृत किया जबकि उसने नाम के साथ तहरीर दिया था। पुलिस ने कोई गिरफ्तारी भी नहीं किया। अबुसमा ने मामले में दोषियों के विरूद्ध मुकदमा पंजीकृत कर कार्रवाई और अपने परिवार के जान माल के रक्षा की मांग किया है।
Comments
Post a Comment