आदर्श नगर पंचायत’ और ‘15वां वित्त’ के ‘करोड़ों’ पर ‘भी’ हाथ ‘फेरा’!


‘आदर्श नगर पंचायत’ और ‘15वां वित्त’ के ‘करोड़ों’ पर ‘भी’ हाथ ‘फेरा’!

बस्ती। जिले के लोगों ने देखा कि किस तरह भाजपा के नेताओं ने नीजि लाभ के लिए ऐसे-ऐसे लोगों को जिला पंचायत अध्यक्ष़्ा, नगर पंचायत का चेयरमैन और ब्लाॅकों का प्रमुख बनाया, जिन्होंने पार्टी, सरकार और जनता तीनों को धोखा दिया। हालांकि इसका खामियाजा कुर्सी पर बैठाने वालों को और पार्टी दोनों को भी भुगतना पड़ा। ऐसा भी नहीं कि यह सबकुछ अंजाने में हुआ, बल्कि सोची समझी रणनीति के तहत हुआ। वरना नेताजी के चालक को चेयरमैन और चपरासी को ब्लाॅक प्रमुख न बनाते। जाहिर सी बात हैं, कि अगर कोई काम नीजि लाभ के लिए किया जाता है, तो उसका खामियाजा सभी को भुगतना पड़ता है।


जिस तरह भाजपा के आकाओं ने पांच साल के लिए खानेपीने का इंतजाम किया, उसी का नतीजा है, कि आज सबसे अधिक भाजपा षासित जिला पंचायत, नगर पंचायतों और क्षेत्र पंचायतों में ही भ्रष्टाचार की गंगा बह रही है। अगर भाजपा के सांसद और विधायकों ने मिलकर जिला पंचायत अध्यक्ष न बनाया होता तो जिले में भ्रष्टाचार की नींव न पड़ती, और न तब किसी का चालक नगर पंचायत का चेयरमैन बन पाता और न कोई चपरासी ही प्रमुख की कुर्सी पर बैठ पाता। जिले की जनता ऐसे लोगों को कभी माफ नहीं करती, जो लुटेरों के हाथों में जिले को सौंप देतें हैं। ऐसे लोग भूल जाते हैं, कि जनता उन्हें फिर सेवा करने का मौका नहीं देगी। अगर दिया भी तो जो कुछ बचा है, वह भी लुट जाएगा। इतिहास भी ऐसे लोगों को कभी माफ नहीं करता।

जिस तरह नगर पंचायत गायघाट में जनसंख्या और क्षेत्रफल के नाम पर करोड़ों का फ्राड किया गया, सरकार, जनता और पार्टी को धोखा दिया गया, उसने भ्रष्टाचार की सारी हदें पार कर दी। सरकारी धन को डकारने के लिए कोई इतना बड़ा फ्राड कर सकता हैं, अगर इसका सच देखना हो तो उस नगर पंचायत गायघाट के रुप में देख सकते हैं, जहां के चेयरमैन की कुर्सी पर पार्टी का कोई खाटी कार्यकत्र्ता नहीं, बल्कि नेताजी का वाहन चालक बैठें हुएं मिलेगें। अब जरा अंदाजा लगाइए कि अगर किसी चेयरमैन की कुर्सी पर वाहन चालक बैठेंगे और जिसकी बागडोर किसी और के हाथ में होगी तो उस नगर पंचायत से जनता क्या उम्मीद कर सकती हैं? इस नगर पंचायत के नाम पर ऐसी लूट मची कि सभी लोग दंग रह गए, वे लोग भी दंग रह गए, जिनसे नगर पंचायत से कोई लेना नहीं, और कहने लगे कि इतना बड़ा खेल भाजपा के लोग ही खेल सकते हैं। पर्दे के आड़ में जो लोग खेल-खेल रहे हैं, उन्हें अच्छी तरह मालूम हैं, कि जब तक उनके आका रहेगें, तब तक न तो उनका और न चेयरमैन का मीडिया कुछ बिगाड़ पाएगी। जिले भर के लोग चाहतें हैं, कि ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो और मानकविहीन नगर पंचायत गायघाट को समाप्त किया जाए। अगर कोई नगर पंचायत सरकार के साथ फ्राड करके अन्य नगर पंचायतों के सापेक्ष राज्य वित्त आयोग, 15वां वित्त आयोग और आदर्ष नगर पंचायत के नाम पर करोड़ों का अधिक बजट अनियमित रुप से ले रहा हैं, तो उस नगर पंचायत को अस्तित्व में रहने का कोई अधिकार नहीं है। मीडिया में सच्चाई आने के बाद लोग चेयरमैन एवं नेताजी के चालक को कम और उन भाजपा के आकाओं को अधिक जिम्मेदार मान रहें हैं, जिन्होंने खाटी कार्यकत्र्ता का हक मारकर ऐसे को कुर्सी पर बेैठा दिया, जिसने सभी को धोखा दिया। अंदर-अंदर तो अन्य नगर पंचायतों के चेयरमैन भी मान रहे थे, कि जनसंख्या का गलत आकड़ा प्रस्तुत कर करोड़ों की हेराफेरी की जा रही है, लेकिन कोई खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं था, क्यों कि खुद यह लोग भ्रष्टाचार में लिप्त है। कहा भी जाता है, कि वही भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा सकता है, जो भ्रष्टाचार न करता हो। इस नगर पंचायत को लूटने वालों ने न सिर्फ राज्य वित्त के धन को लूटा, बल्कि 15वां वित्त आयोग और आदर्ष नगर पंचायत के नाम पर मिलने वाले करोड़ों डकारा भी। अगर कोई नया नगर पंचायत 20 हजार से अधिक की जनसंख्या वाली होती है, तो उसे आदर्ष नगर पंचायत के रुप में विकसित करने के लिए सरकार चार करोड़ का बजट देती। यह बजट दो किष्तों में मिलता है। इसी चार करोड़ को हथियाने के लिए नगर पंचायत गायघाट की बागडोर संभालने वालों ने फ्राड करके 10 हजार की जनसंख्या को लगभग 25 हजार बता दिया। ऐसे फ्राड को देख, लोग यह सोचने को मजबूर हो रहे हैं, कि क्या कोई भाजपा का नेता इतना बड़ा फ्राड भी कर सकता है, लोगों को यकीन ही नहीं हो रहा है, कि यह सबकुछ ऐसे नगर पंचायत में हुआ, जिस पर भाजपा के बड़े-बड़े नेताओं की कृपा है, और रही। इसी तरह 15वां वित्त आयोग के बजट को भी लूटा गया। इस साल इन्हें इस लिए बजट नहीं मिला, क्यों िकइस नगर पंचायत ने हाउस और वाटर टैक्स नहीं लगाया। जानकार बताते हैं, कि इस तरह की लूट 2014 के बाद षुरु हुई, 2014 के पहले जनसंख्या और क्षेत्रफल में फर्जीवाड़ा नहीं चलता था, क्यों तब ग्राम पंचायतों की सहमति आवष्यक होती थी, लेकिन 2014 के बाद जब से सरकार ने डीएम की संस्तुति करने का अधिकार दे दिया, तब से गड़बड़ी षुरु हुई, अब कोई भी नगर पंचायत राजस्व और प्रषासन से मिलकर फर्जी जनसंख्या की संस्तुति कराकर करोड़ों का अनियमित रुप से बजट हासिल कर सकता है। जैसा कि नगर पंचायत गायघाट में हुआ। जिले में दस नगर पंचायतें हैं, लेकिन गायघाट को छोड़कर अन्य ने जनसंख्या में फर्जीवाड़ा नहीं किया। कुछ लोग इस मामले को लेकर पीआईएल भी दाखिल करने की रणनीति बना रहें, ताकि मानक के विपरीत बनाए गए नगर पंचायत गायघाट को समाप्त करने की चुनौती दी जा सके।

‘मनोनीत’ सभासद ‘रवि गुप्त’ निकले ‘बहुरुपिया’

बस्ती। सभासदों को मनोनीत कराने में सहयोग करने वाले भाजपा के नेता फंसते जा रहे हैं, पहले यह लोग गांजा और स्मैक तस्कर एवं कार्यकत्र्ता का हक मारने वाले को मनोनीत कराने में फंसे और अब एक ऐसे बहुरुपिया को सभासद मनोतीन कराने के मामले में फंसते नजर आ रहे हैं, जिसका नाम वोटर लिस्ट में अलग-अलग है। कहीं षनि कुमार है, तो कहीं रवि कुमार। असली कौन है, इसका पता नहीं चला। नगर पंचायत हर्रैया के वोटर लिस्ट में वार्ड नंबर दो मनोरमा नगर के वोटर लिस्ट के क्रम संख्या 998 पर रवि कुमार पुत्र आषाराम उम्र 19 साल और वार्ड नंबर सात के हनुमानगढ़ी नगर के मतदाता सूची के क्रम संख्या 629 पर षनि कुमार पुत्र आषाराम उम्र 31 साल का नाम दर्ज है।


दोनों वार्डो के बीच की दूरी मात्र 100 मीटर है। भाजपा ने एक ऐसे समर्पित कार्यकत्र्ता को सभासद मनोनीत कर दिया, जो भाजपा प्रत्याषी धमेंद्र कुमार के खिलाफ 2017 में सभासदी का चुनाव लड़ा, और जिसके चलते भाजपा प्रत्याषी को हार का मुंह देखना पड़ा। पूर्व सांसद हरीष द्विवेदी, जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्र और वरुण सिंह ने मिलकर अगर एक ऐसे व्यक्ति को सभासद मनोनीत करवाने में सहयोग किया, जो पार्टी का विरोधी रहा, और जिसके चलते पार्टी का प्रत्याषी हार गया, अगर इन लोगों को वाकई पार्टी के प्रति वफादारी दिखानी थी, तो हारे हुए और कर्मठी कार्यकत्र्ता धमेंद्र कुमार को मनोनीत कराते, तब पार्टी और कार्यकत्र्ता के प्रति इन लोगों की ईमानदारी दिखाई देती, लेकिन यहां पर तो किसी ने भी कार्यकत्र्ता के प्रति ईमानदारी ही नहीं दिखाया, बल्कि ऐसे के प्रति ईमानदारी दिखाया, जिसका नाम गांजा और स्मैक के कारोबार में जुड़ रहा है। भाजपा के लोगों ने ऐसे को सभासद मनोनीत कराने में उर्जा लगा दिया, जो बहुरुपिया हैं, और जिसने नाम बदल कर मतदाता सूची में कभी रवि कुमार तो कभी षनि कुमार दर्ज करवाया। अब तो इनके पास दो-दो आधार कार्ड के होने की संभावना जताई जा रही है, क्यों कि अगर इनके पास दो आधार कार्ड नहीं होता तो इनका नाम अलग-अलग पते से दो स्थानों पर दर्ज नहीं होता। सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है, कि क्या भाजपा जिलाध्यक्ष पत्रकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाएगें कि बहुरुपिया के खिलाफ? एक बात और हैरान करने वाली हैं, 2017 के चुनाव में मनोनीत सभासद रवि कुमार मनोरमा नगर से षनि कुमार के नाम से चुनाव लड़े थे, और इन्हें 63 एवं भाजपा प्रत्याषी धमेंद्र कुमार को 87 वोट मिला था, यानि धमेंद्र कुमार को षनि कुमार से 24 वोट अधिक मिले, फिर भी रवि कुमार/षनि कुमार के आकाओं ने अधिक वोट पाने वाले और स्नातक प्रत्याषी धमेंद्र कुमार को सभासद न मनोनीत करवाकर कम वोट पाने और जूनियर हाई तक की षैक्षिक योग्यता रखने वाले रवि गुप्त को सभासद मनोनीत करवा दिया। अब सवाल उठ रहा है, कि नगर पंचायत हर्रैया जब इनके यात्रा भत्ता के नाम पर मिलने वाला एक हजार रुपया, किसके खाते में भेजेगा, रवि कुमार या फिर षनि कुमार? जाहिर सी बात हैं, कि अगर दो नाम हैं, तो खाता भी अलग-अलग नाम से होगा। पार्टी को धोखा देने वाले ऐसे लोगों के खिलाफ तो पार्टी को मुकदमा दर्ज करवाना चाहिए। मनोनीत हुए रवि कुमार के नाम से और पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़े षनि कुमार के नाम से।

‘आउटसोर्सिगं’ के ‘नाम’ पर ‘जेडीई’ में हुए ‘खेल’ को ‘कमिष्नर’ ने ‘बिगाड़ा’!

बस्ती। संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय में आउंटसोर्सिगं के नाम पर बहुत बड़ा खेल का खुलासा हुआ। जब इस बात का पता चला तो कमिष्नर ने आदेष को निरस्त करते हुए जांच कमेटी का गठन किया। जांच कमेटी ने भी इसके लिए जेडीई को ही जिम्मेदार माना। जांच टीम द्वारा दिनांक 18 फरवरी को मुख्य कोषाधिकारी बस्ती संयुक्त निदेशक माध्यमिक शिक्षा बस्ती मंडल के साथ शिकायतकर्ता की शिकायत को सुनते हुए जांच की गई है। इस संबंध में जांच समिति द्वारा पत्र संख्या 825 दिनांक 19 मार्च 2026 के माध्यम से उपलब्ध कराई गई। जांच टीम ने पहली नजर में गड़बड़ी निकाली। स्पष्ट कहा गया कि बिड में शिकायत करता के साथ-साथ अन्य फर्म अंतिम रूप से प्रचलित बिड के शर्तों के अनुसार तकनीकी रूप से योग्य नहीं पाई गई। निविदा में कई बिंदुओं पर अनियमितता किये जाने की पुष्टि हुई। जिससे स्पष्ट पता चल रहा है कि जो निविदा विभाग द्वारा आमंत्रित की गई थी उसमें पारदर्षिता नहीं बरती गई है। इसलिए कमिष्नर ने संयुक्त शिक्षा निदेशक बस्ती मंडल को यह निर्देशित किया है कि पूर्व में की गई निविदा को निरस्त करते हुए दोबारा फिर नियमानुसार निविदा आमंत्रित करते हुए अग्रिम कार्रवाई सुनिश्चित कराये और इसके साथ ही उन्होंने निर्देश दिए हैं कि दोषी के विरुद्ध उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए कृत कार्रवाई से उन्हें भी अवगत कराया जाए।गौरतलब है कि अग्रिम निविदा कार्रवाई पूर्ण होने तक जो मानदेय को लेकर लड़ाई चल रही थी उन बच्चों को मानदेय नियमानुसार दिए जाने का भी निर्देश आयुक्त ने दिया है। इसके अलावा जांच आख्या में जो रिपोर्ट दी गई है, उसमें फर्म द्वारा धरोहर राशि की मूल प्रति कार्यालय में जमा नहीं की गई। इस दौरान जांच में पता चला कि फर्म द्वारा चेक संख्या 001571 दिनांक 19 नवंबर 2025 के द्वारा 536000 516 रुपए का डीडी बैंक द्वारा प्रिंटेड स्कैन कॉपी पोर्टल पर अपलोड किया गया है। इसके अलावा तीन अन्य सेवा प्रदाता फॉर्म का भी डीडी बैंक द्वारा प्रिंटेड स्कैन कॉपी को समिति ने जांच करते हुए उसे भी तकनीकी निविदा फाइनेंशियल निविदा में ऑटो रन हेतु योग्य पाया। मूल पत्रावली के अवलोकन में पाया गया कि विभागीय बीट ने जेम पोर्टल बी 6869901 की एकाउंट के अनुसार अर्नेस्ट मनी की धनराशि मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक के पक्ष में एफडीआर अथवा डीडी के रूप में होनी चाहिए परंतु संबंधित फार्म द्वारा चेक संख्या 001571 दिनांक 19 नवंबर 2025 के माध्यम से अर्नेस्ट मनी की स्कैन कॉपी बेड के साथ अपलोड की गई थी। परंतु हार्ट कॉपी बिड में निर्धारित समय अंतर्गत प्रस्तुत नहीं कार्य किया गया। इसलिए विभाग की की शर्तों के अनुसार उक्त फॉर्म तकनीकी रूप से फर्म यानी महिष इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ तकनीकी रूप से योग्य नहीं पाई गई। इसके अलावा जांच बिंदु संख्या तीन में फर्म का टर्नओवर भी फर्जी पाया गया।

‘मिल’ के ‘राख’ से ‘नष्ट’ हो रही ‘वन विहार’ की ‘हरियाली’

बस्ती। एक तरफ पूरे विष्व में पर्यावरण और हरियाली की सुरक्षा को लेकर अभियान चल रहा है, और वहीं दूसरी ओर सरकारी वन विहार की हरियाली को मिल के राख के जरिए समाप्त की जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है, कि जब चोरी छिपे मिल वाले सरकारी बाग में राख गिराकर हरियाली को नष्ट कर रहे हैं, तो पर्यावरण और हरे भरे बाग की सुरक्षा कैसे होगी? हरियाली की सुरक्षा रखने की जिम्मेदारी न सिर्फ सरकार की नहीं बल्कि उन मिलों और समाज की है, जिनके चलते पर्यावरण का खतरा उत्पन्न हो रहा है।


इसे लेकर नामित सदस्य जिला पर्यावरण समिति उ.प्र. सुधीर पटेल उर्फ राहुल ने डीएम/अध्यक्ष पर्यावरण समिति को पत्र लिखकर बिना अनुमति और बिना वैज्ञानिक परीक्षण के सरकारी बाग को प्राइवेट मिल के द्वारा राख डालने की जानकारी देते हुए, तत्काल प्रभाव से रोकने और दोषी व्यक्तियों/संस्थाओं के खिलाफ विधिक कार्रवाई करने की मांग की है। लिखा कि उक्त राख का अब तक कोई वैज्ञानिक परीक्षण नहीं करवाया गया, जिससे यह पता चल सके कि इसमें हानिकारक रसायनिक तत्व है, या भारी धातुएं मौजूद है। कहा कि औधोगिक अपविष्ट का निस्तारण मानकों के अनुसार होना चाहिए, न कि किसी सरकारी बाग में। लिखा कि इतना घना एवं सुंदर सरकारी बाग जिले की हरित संपत्ति है। जहां इस पगकार की राख डालना मिटटी की उर्वरता, पेड़ की हरियाली, पेड़ पौधों तथा जैव विधिता के लिए खतरा बन सकता है। कहा कि यह जांच का विषय हैं, कि किसके संरक्षण में इतनी मात्रा में मिल की राख सरकारी बाग में डाली जा रही है। लिखा कि रा,ा के चलते आसपास के क्षेत्र में मिटटी, जल एवं वायु प्रदूषण फैलने की संभावना रहती है। इससे स्थानीय लोगों के सेहत पर भी प्रभाव पड़ रहा है, आंख में राख जाने से आंख के खराब होने की संभावना बनी रहती है। कहा कि इसकी तत्काल उच्च स्तरीय जांच करवाकर कार्रवाई की जाए, ताकि हरियाली को मिल के राख से बचाया जा सके।

‘डिप्टी सीएमओ’ साहब बताइए, ‘कैसे’ चल रहा ‘जेपी डायग्नॉस्टिक सेंटर’?

बस्ती। सवाल उठ रहा है, कि कैसे सीएमओ और डिप्टी सीएमओ डा. एके चैधरी के संरक्षण में रुधौली सीएचसी के सामने आधा दर्जन अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हो रहे हैं? इसके लिए इन दोनों को हर माह कितना धन मिलता हैं, यह भी बड़ा सवाल हैं, क्यों कि बिना महीना लिए जिले में कोई भी वैध/अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हो ही नहीं सकता। ऐसे-ऐसे अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हो रहे हैं, जिन पर डाक्टर नहीं टेक्नीशियन रिपोर्ट लगाते है। जे पी डायग्नॉस्टिक समेत आधा दर्जन अल्ट्रासाउंड सेंटर, नर्सिग होम व पैथोलॉजी हैं, जिसे डॉ. अशोक चैधरी अपने रिश्तेदारों के जरिए संचालित करवा रहे है। डा. अशोक चैधरी का रुधौली में खुद बिना पंजीकृत हॉस्पिटल चलता है। जेपी डायग्नॉस्टिक सेंटर का झोलाछाप संचालक जेपी चैधरी भू्रण लिंग परीक्षण जैसे गैर कानूनी कार्यो को अंजाम देने की षिकायत की गई है। जिलाधिकारी व सीएमओ के आंखों में धूल झोक कर पैसा कमा रहें डॉ अशोक कुमार चैधरी। खुद को स्पेशलिस्ट बता गरीब मरीजों को गुमराह कर रहे नौसिखिया।


सावधान हो जाइए, तस्वीर में दिख रहा फर्जी अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञ जे पी चैधरी। जरा बचकर कहीं आप भी ना हो जाए शिकार? रुधौली में जेपी डायग्नॉस्टिक नाम से चल रहे अवैध सेंटर व डाक्टर की डिग्री को लेकर शिकायत से कइयों पर रहे उठ सवालिया निशान? शिकायत के बाद भी अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटरों हॉस्पिटलों लैबो पर नहीं होती कारवाई, यदि कारवाई करेंगे तो महिनों का रुक जाएगा, लाखों लाख का हो रहा अवैध वसूली। अपनी संपूर्ण नौकरी डॉ अशोक कुमार चैधरी बस्ती में ही किए 25-26 वर्षों से बस्ती में बीता दिया। डॉ अशोक कुमार चैधरी के आगे शासनादेश स्थानांतरण नीति का कोई माने नहीं। सीएमओ कार्यालय में खूब फल फूल रहा है चैधरी वाद सीएमओ के स्टेनो भी लगभग 10 वर्षों से बस्ती में है। सीएमओ के अवैध वसूली का लेखा जोखा रखते हैं। सबके अपने अपने वसूली एजेंट डाक्टर एके चैधरी के अंगद वर्मा, डॉ एसबी सिंह के अभिषेक पाल, सीएमओ के अनिल चैधरी, प्रेम बहादुर है खासमखास। सीएमओ कार्यालय में तैनात सीएमएसडी के पुत्र भी है, स्वास्थ्य विभाग बस्ती सीएमओ आफिस के ठेकेदार। भ्रष्टाचार की गंगोत्री बस्ती सीएमओ कार्यालय से निकलता है भ्रष्टाचार का उद्गम स्थल बना सीएमओ कार्यालय। स्वास्थ्य विभाग में बड़ा भ्रष्टाचार तत्कालीन सीएमओ डॉ दूबे से बड़े भ्रष्टाचारी साबित होंगे डॉ निगम।

‘दुनिया’ का आठवां ‘अजूबा’ः ‘एसपी’ आफिस के सामने ‘बिक’ रहा था, ‘स्मैक’

बस्ती। आज हम आपको दुनिया का आठवां अजूबा के बारे में बताने जा रहे है। क्या कोई यकीन कर सकता है, कि एसपी आफिस के ठीक सामने स्मैक का कारोबार भी हो सकता हैं। यह कारोबार हर्रैया से चलकर बस्ती पुलिस अधीक्षक कार्यालय के ठीक सामने दीपक फोटो कापी टाइपिंग की दुकान पर पहुंच गया। जिस दुकान पर स्मैक का कारोबार होते बपकड़ा गया, उस दुकान पर हमेषा पुलिस वालों की भीड़ रहती है। बताते हैं, कि युवाओं को और आने वाली नस्लों को बर्बाद करने वाला यह कारोबार आज से नहीं बल्कि सालों से हो रहा था, और किसी पुलिस वालों को इसकी भनक तक नहीं लगी।


इस कारोबार में मां’बाप और बेटा सभी षामिल रहे। बताते हैं, कि जनता दीपक के पिता बड़े गांजा सप्लायर रहे। पिता की राहो पर चल रहा पूरा परिवार चल निकला। बस्ती के युवाओं को स्मैक जैसे नशें का लत लगवा रहा था दीपप फोटो कापी की दुकान तो मात्र दिखावा था। स्मैक का कारोबार करते-करते यह परिवार करोड़पति बन गया। दीपक का परिवार कईयों वर्षों से पुलिस अधीक्षक बस्ती के कार्यालय के सामने चल रहे स्मैक बिक्री केंद्र का पुलिस को नहीं था भनक पास पड़ोस की जनता दबी जुबान कह रही है कि पुलिस के संरक्षण में ही चल रहा था फल फूल पनप रहा था स्मैक का कारोबार बड़ी संख्या में युवा हुए स्मैक हिरोइन के आदी बहुत वर्षों बाद खुली पुलिस की आंख। प्रभारी निरीक्षक कोतवाली मोतीचंद सिविल लाइन चैकी प्रभारी अजय सिंह की कार्रवाई का जिले के संभ्रांत लोग कर रहे बखान। सिविल लाइन चैकी इंचार्ज अजय सिंह ने स्मैक कारोबारी को दबोचा। जिन लोगों को पुलिस ने दबोचा उसमें दीपक गुप्ता, शिवांग गुप्ता, राजकुमारी देवी को किया गिरफ्तार। इन लोगों के पास से 99.49 ग्राम सफेद पाउडर (स्मैक) 59 पुड़िया नशीला पाउडर किया बरामद।

‘सिटी पब्लिक स्कूल’ के ‘छात्र’ सभी विषयों में अच्छा ‘ज्ञान’ अर्जित ‘करंेःश्रीषुक्ल

बस्ती। सिटी पब्लिक स्कूल गनेशपुर के बच्चों में लेखन प्रतियोगिता और गणित ओलंपियाड की प्रतियोगिता कराई गई। इसमें प्रथम द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वालों को प्रमाण पत्र वितरण किया गया। विद्यालय की प्रधानाचार्य प्रिया शुक्ला डायरेक्टर अमित शुक्ला प्रबंधक उदय शंकर शुक्ला ने प्रमाण पत्र वितरण किया। उन्होने छात्रों का उत्साहवर्धन करते हुये कहा कि सिटी पब्लिक स्कूल के छात्र सभी विषयों में अच्छा ज्ञान अर्जित करें इसका पूरा प्रबन्ध किया गया है।


साथ ही उनके बीच रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया जाता है जिससे वे किताबी ज्ञान के साथ ही व्यवहारिक में भी दक्ष होकर देश के सुयोग्य नागरिक बने। एलकेजी और यूकेजी के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों को लेखन प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया। वहीं कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को गणित ओलंपियाड में शानदार उपलब्धि के लिए पुरस्कृत कर हौसला बढाया गया। प्रतियोगिता में करण, वीर, नैना, अफजल, सैफुद्दीन, शिवांश, श्रेया, खुशी, मनीषा, विपिन, प्रिंस, आर्यन, आकांक्षा, आराध्या, वीर, एवं अन्य बच्चों ने अपनी विशेष जगह बनाकर विद्यालय का नाम गौरवान्वित किया।


 


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