एक ‘डाक्टर’ फर्जी ‘रिपोर्ट’ देता, दूसरा ‘रिपोर्ट’ पर ‘हस्ताक्षर’ नहीं ‘करता’!


एक ‘डाक्टर’ फर्जी ‘रिपोर्ट’ देता, दूसरा ‘रिपोर्ट’ पर ‘हस्ताक्षर’ नहीं ‘करता’!

बस्ती। ‘ओझा डायग्नोसिस्ट सेंटर’ के ‘ओझाजी’ और ‘केयर डायग्नोसिस्ट सेंटर’ के डा. आरके पासवान दोनों एक ही नाव पर सवार हैं। पैसा कमाने के लिए दोनों मरीजों को धोखा दे रहे है। एक फर्जी रिपोर्ट देते हैं, तो दूसरा रिपोर्ट पर हस्ताक्षर नहीं करते। इसका मतलब दोनों गलत हैं, जबकि दोनों के पास रेडियोलाजिस्ट की डिग्री हैं। डा. पासवान के बारे में तो यह समझा जा सकता है, कि यह मेडिकल कालेज में नौकरी करते हैं, लेकिन ओझाजी क्यों नहीं रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करते, यह समझ से परें, जबकि सबसे अधिक मरीज इन्ही दोनों पर विष्वास करता है। डा. पासवान पर तो अधिवक्ता अषोक ओझा ने फर्जी रिपोर्ट देने तक का आरोप लगाया है, इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए एसपी को दरखास्त भी दे चुकें हैं। मामला उपभोक्ता फोरम तक पहुंच चुका है। वकील साहब कहते हैं, कि अगर ऐसा कोई अप्रषिक्षत करता तो एक बार सोचा भी जा सकता, लेकिन अगर कोई जाना-माना रेडियोलाजिस्ट ऐसा करता है, तो वह अक्षम है। कहते हैं, कि कोई मरीज डाक्टर के पास इस लिए जाता और सात-आठ सौ रुपया फीस देता है, कि डाक्टर मरीज का सही इलाज करेगें, सही राय देगें और सही जांच रिपोर्ट देगें। ऐसे में अगर कोई डाक्टर फीस लेकर भी गलत रिपोर्ट देता है, तो मरीज क्या करें? कहते हैं, कि हर मरीज क्रास चेकिगं कराने के लिए दूसरे डाक्टर के पास आठ सौ रुपया देकर जांच कराने नहीं जाता, और न आम मरीजों के पास इतना पैसा होता है, कि वह दूसरा-तीसरा जांच कराएं। कहते हैं, कि जब डा. पासवान जैसा डाक्टर गलत रिपोर्ट दे सकते हैं, तो अन्य डाक्टर पर मरीज कैसे विष्वास करें। कहते हैं, फर्जी रिपोर्ट बनाने का जिले में तथाकथित काकस काम कर रहा है, जो कमीषन के लिए पहले फर्जी रिपोर्ट बनाने हैं, और उसके आद इच्छित नसिगं होम को षिफट कर देते है। कहते हैं, कि इसके नोडल डिप्टी सीएमओ डा. एके चैधरी और सीएमओ ने भी कोई कार्रवाई नहीं किया, ऐसा लगता मानो सभी मिले हुएं है। हालांकि 19 मिनट के आडियो में डाक्टर माफी भी मांग रहे हैं, और इसकी कोई भी कीमत देने को भी कह रहे है। इससे पहले भी डाक्टर पासवान पर सरकारी डाक्टर होते हुए प्राइवेट अल्टासाउंड करने का आरोप लग चुका है, हाल ही में इन्होंने एक मरीज को ‘किरन सर्जिकल’ के यहां भेजा था, जहां पर उसकी मौत हो गई, खूब हंगामा हुआ, लेकिन न तो डा. पासवान और न किरन सर्जिकल वाले के खिलाफ कोई कार्रवाई हुआ। वकील साहब कहते भी है, कि जब तक अल्टासाउंड और नर्सिगं होम के सेटिगं का खेल होता रहेगा, तब तक मरीजों की मौत होती रहेगी, और मरीजों को गलत रिपोर्ट मिलता रहेगा।



एसपी को लिखे पत्र में पीड़ित अधिवक्ता अषोक ओझा ने लिखा कि वह रोडवेज के करीब डा. आरके पासवान, जो मेडिकल कालेज में नौकरी करते हैं, के केयर डायग्नोसिस्ट सेंटर गया, सात सौ रुपया फीस दिया, और अल्टासाउंड करवाया, जिसमें पथरी के होने की रिपोर्ट दी गई, डाक्टर ने अधिवक्ता को आपरेषन करने वाले नर्सिगं होम और डाक्टर का नाम भी सुझाया। डा. पासवान की रिपोर्ट देख डाक्टर ने गाल ब्लाडर में पथरी बताया, और कहा कि पैसे की बात नहीं हैं, आपरेषन के बाद दे दीजिएगा। आपरेषन का 21 हजार का खर्चा बताया गया। लिखा कि संयोगवष उन्हें पीजीआई लखनउ जाना हुआ, जब वहां जांच करवाया तो गाल ब्लाडर में कोई भी पथरी नहीं पाई गई। कहा कि वह दो-तीन अन्य जनपदों में जांच करवाया, लेकिन एक भी रिपोर्ट में पथरी का होना नहीं पाया गया, सिवाय डा. पासवान के। लिखा कि डा. पासवान ने फर्जी अल्टासाउंड फिल्म व कूटरचना कर एक रिपोर्ट बेईमानी और धोखाधड़ी करने की नीयत और अनुचित तरीके धनाहोहन करने के उद्वेष्य से आपरेषन के लिए दूसरे डाक्टर के पास भेजा। लिखा कि डा. पासवान ने व्यवसायिक कदाचार कर धोखाधोड़ी व बेईमानी पूर्वक कूट रचना कर फर्जी रिपोर्ट तैयार किया। षिकायत करने पर डा. पासवान नाराज थे, और रंजीत चैराहा पर स्थित ‘मौर्या एक्सरे सेंटर’ से एक व्यक्ति व उनके साथ अन्य जो अपने आप को अस्पताल का कर्मचारी बता रहा था, ने षिकायत वापस लेने का दबाव बनाने लगे। जब वापस नहीं लिया तो दूसरे दिन उक्त लोगों के द्वारा फल विभाग में मार्निगं वाक करते समय रोक लिया और कहा कि अगर षिकायत वापस नहीं लिया तो जान से हाथ धोना पड़ेगा। थाने पर इसकी जानकारी दी लेकिन डाक्टर ने धनवान होने का लाभ उठा लिया। पत्र में एफआईआर दर्ज करने की अपील की गई।

...तो क्या ‘डीएम’ ने दिया ‘चर्च’ के दुकानों को ‘बेचने’ की ‘अनुमति?

बस्ती। छह मई 2016 की जांच रिपोर्ट में टस्ट एसोसिएषन की भूमि को कानूनी तरीके से हासिल करने का उल्लेख किया गया हैं, कहा गया है, कि टस्ट को उससे संबधित संपत्ति को मार्गेज, लीज, एक्चेंज एवं डिस्पोज आफ करने का अधिकार हैं, तथा टस्ट एसोसिएषन के चर्च समिति को विक्रय, तबादला, बटवारा पटटा आदि करने का भी अधिकार दिया गया, मगर इसके लिए डीएम की अनुमति आवष्यक है। बिना डीएम के अनुमति के न तो विक्रय और न तबादला ही किया जा सकता है। इसी लिए लखनउ डाइयोसिएन टस्ट एसोसिएषन लखनउ कैंप के सचिव ‘लियाकत मारक्यूज खान’ ने ग्राम सिविल लाइन तप्पा हवेली स्थित गिरजाघर की भूमि को आधा प्रसाद चैधरी पुत्र बुद्वु चैधरी एवं विजयपाल चैधरी पुत्र राम लखन चैधरी के पक्ष में विक्रय करने की अनुमति मांगी थी, जिसे नहीं दी गई। अगर दे दी गई होती तो आज गिरजाघर की जमीन का मालिकाना हक आधा प्रसाद चैधरी पुत्र बुद्वु चैधरी एवं विजयपाल चैधरी पुत्र राम लखन चैधरी के पास होता। इसका मतलब यह हुआ, कि गिरजाघर की जमीन बेचने का कुचर्क पहले भी रचा गया। अब सवाल उठ रहा है, कि जब डीएम ने कोई अनुमति ही नहीं दी तो कौन चर्च की जमीन पर दुकान बनवाकर बेच रहा है? और क्यों बेच रहा है? सवाल यह भी उठ रहा है, कि क्या यह चर्च के विकास के लिए किया जा रहा है, या फिर नीजि लाभ के लिए? अगर चर्च के विकास के लिए किया जा रहा है, तो उसका खाता भी होना चाहिए, जिसमें दुकानों से हुई विक्री का धन जमा हो? स्कूल से होने वाली आय जमा हो, चर्च से होने वाले लाभ का पैसा जमा होना चाहिए, सबका हिसाब किताब हो, लेकिन जब तत्कालीन एसडीएम से यह सब मांगा तो उन्हें नहीं दिया गया। अगर यह सब कुछ नहीं है, तो यह माना जा सकता है, कि कुछ लोग दंगबगई से चर्च की जमीन पर दुकानें बनवाकर अनधिकृत रुप से धन कमाने की मंषा रखते है। यह कुछ ऐसे सवाल हैं, जो चर्च के उन लोगों पर उठ रहें हैं, जो चर्च की संपत्ति का नीजि तरीके से इस्तेमाल करके उससे लाभ पाना चाह रहे हैं। अगर इस जांच रिपोर्ट को अधिकारी पढ़ ले तो मिनटों में सालों की समस्या का निस्तारण हो सकता है, दिक्कत यह है, कि कोई अभिलेख को देखना ही चाहते हैं, अगर देखे होते तो कब का निस्तारण हो गया होता और चर्च की संपत्ति दुरुपयोग होने से बच जाती। देखा जाए तो वर्तमान में चर्च की संपत्ति का लाभ दो लोगों की जेबों में जा रहा, पहला अनिल लाल और दूसरा दुकानों का निर्माण कराने वाला ठेकेदार। 2016 में भी लाभ अनिल लाल और ठेकेदारों ने मिलकर लाभ कमाया था, और 2026 में भी दोनों मिलकर लाभ कमा रहे है।


2016 में जिस तरह गरीब दुकानदारों का लाखों रुपया डूब गया, ठीक इसी तरह 2026 में भी डूबने वाला है। इसी लिए बार-बार कहा जा रहा है, कि दुकानदार 2016 वाली गलती न करें, ओैर किसी को भी दुकान के लिए पैसा न दें। नहीं तो रोना पड़ेगा। कोई दुकानदार यह न समझे कि उन्होने जो 2016 में अनिल लाल को एक-एक दुकान के दो-दो लाख दिया था, वह इस बार के दुकान में एडजस्ट हो जाएगा। जैसा कि भोला चाय वाले ने 2016 में अनिल लाल को दो लाख दिया, दुकान और पैसा दोनों हाथ से चला गया। पूछने पर अनिल लाल कहते हैं, कि इस बार के दुकान में एडजस्ट हो जाएगा। चाय वाला पान वाला न जाने कितने ऐसे गरीब दुकानदार हैं, जिनसे पैसा तो ले लिया गया, लेकिन न तो उन्हें रसीद दी गई, और न पैसा ही वापस किया गया। सोमवार को मीडिया जब कमिष्नर से मिला तो उनसे एक ही बात कहा कि किसी तरह दो सौ साल पुराने चर्च की संपत्ति को बचा लीजिए, क्यों कि कुछ अनधिकृत लोग चर्च की जमीन पर दुकान का निर्माण करवाकर क्षति पहुंचा रहे है। यह भी कहा कि चर्च के विकास के लिए जो भी करना पड़े कीजिए, लेकिन चर्च की संपत्ति का दुरुपयोग मत होने दीजिए। कहा गया, कि जो पैसा चर्च के खाते में जाना चाहिए, वह करोड़ो रुपया ठेकेदार और अनिल लाल के खाते में जा रहा है। एक-एक दुकान की कीमत सात से आठ लाख वसूली जा रही है। उन्होंने कहा भी हम और मैडम डीएम चाहती है, कि चर्च की संपत्ति का दुरुपयोग न हो, कहा कि मेरे निर्देष पर ही निर्माण रुकवाया गया, लेकिन जब उन्हें बताया गया, कि निर्माण तो अंदर-अंदर जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई पक्षकार उनके सामने सारे अभिलेख लेकर आ ही नहीं रहा है।

‘ननद-फौजाई’ हो तो ‘सुनीता’ और ‘सुमन’ जैसा

बस्ती। पूरे जिले में ननद-भौजाई के रुप में जितनी चर्चा सुमन चैधरी और सुनीता चैधरी की हो रही है, उतना अन्य किसी की नहीं, कारण इन दोनों के प्रति सीएमओ डा. राजीव निगम और डिप्टी सीएमओ डा. एके चैधरी का लगाव, यह लगाव ही सीएमओ और डिप्टी सीएमओ के गले की फंास बन गई। ननद-भौजाई के लिए सीएमओ और डिप्टी सीएमओ किसी भी हद तक जा सकते हैं, दोनों स्टाफ नर्स के प्रति आघात प्रेम देख लोग कहने लगे कि ननद-भौजाई हो तो सुनीता चैधरी और सुमन चैधरी जैसा। यह दोनों सविंदा पर स्टाफ नर्स हैं, और कुदरहा पीएचसी पर तैनात है। इन दोनों की खासियत यह है, कि यह दोनों खुले आम गरीब महिला मरीजों को 70-80 फीसद कमीषन वाली बाहर दवांऐ लिखती है। इन दोनों की एक दिन की आमदनी 10 से 15 हजार बताई जा रही है। इतनी आमदनी तो सीएमओ और डिप्टी सीएमओ की भी नहीं होगी। जब भी इनकी षिकायत भाकियू के उमेष गोस्वामी करते, दोनों सीएमओ और डिप्टी सीएमओ के दरबार में पहुंच जाते है। जाहिर सी बात हैं, उसके बाद षिकायतों का क्या होता होगा, कहने की बात नहीं, अगर ननद-भौजाई का गरीब मरीज कमाई का जरिया बन गई, तो सीएमओ और डिप्टी सीएमओ का भी ननद-भौजाई सोने का अंडा देने वाली मुर्गी की तरह है। बिडंबना यह है, कि न तो ननद-भौजाई मरीजों का उत्पीड़न बंद करने को तैयार है, और न उमेष गोस्वामी समझौता करने को तैयार है। अब तो सीएमओ और डिप्टी सीएमओ के अतिरिक्त एनएचएम के बाबू संदीप राय भी ननद-भौजाई के कमाई का हिस्सेदार बन गएं है। इन दोनों के खिलाफ उमेष गोस्वामी इतना साक्ष्य दे चुके हैं, कि बर्खास्त करने के लिए प्र्याप्त हैं, लेकिन ननद-भौजाई प्रेम ने अधिकारियों को बांध रखा है। अब तो ननद-भौजाई के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए उमेष गोस्वामी ने आमरण-अनषन करने का नोटिस डीएम को दिया है। डीएम ने एक सप्ताह का समय मांगा है। अगर वाकई उमेष को आमरण-अनषन पर बैठना पड़ा तो यह पूरे सरकारी तंत्र पर हमला होगा। जिस ननद-भौजाई के लिए सीएमओ आला अधिकारी से झूठ बोल सकते हैं, उस ननद-भौजाई के लिए वह कुठ भी कर सकते है।  

‘स्लिम’ और ‘स्मार्ट’ रहना तो ‘खूब’ पिए ‘पानी’

बस्ती। जिला चिकित्सालय मे तैनात आयुष चिकित्साधिकारी डाक्टर वी.के. वर्मा का कहना है, कि अगर किसी को स्लिम और स्मार्ट रहना है, तो दिन भर खूब पानी पिए। कहते हैं, कि मोटापा अपने साथ कई समस्याओं को लेकर आता है। वजन और शरीर का आकार बढ़ने के साथ ही गंभीर रोगों का होना भी स्वाभाविक है। ऐसे मे मोटामा कम करने के लिए फाइबर और प्रोटीन से युक्त संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और जीवनशैली में बदलाव जरूरी हैं। मीठे पेय, प्रोसेस्ड फूड और तली-भुनी चीजों से दूरी बनायें।


कहते हैं, कि वजन और फैट नियंत्रित रखने के लिये घरेलू उपायों और होम्योपैथिक औषधियों के बारे मे जानकारी लेनी चाहिए। वजन और फैट नियंत्रित रखने के लिये दिन भर में पर्याप्त पानी पिएं। रोजाना सुबह तेज चलना और सुबह खाली पेट पानी के साथ जीरा, अजवाइन का सेवन मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है जिससे वजन कम करने और फैट नियंत्रित रखने मे मदद मिलती है। इसके साथ ही हमे अपनी लाइफस्टाइल मे भी बदलाव लाना होगा। उच्च फाइबर और प्रोटीनः आहार में दालें, अंकुरित अनाज, हरी सब्जियां और फल शामिल करें, जो पेट को भरा रखते हैं। शुगर और प्रोसेस्ड फूड से बचेंः चीनी, मिठाई, पेस्ट्री, कोल्ड ड्रिंक्स और जंक फूड का सेवन न करें, सुबह गुनगुना पानी पिएं और दिन भर हाइड्रेटेड रहें, इससे वजन कंट्रोल में रहता है, जीरा, सौंफ, मेथी और अजवाइन का पानी सुबह खाली पेट पीने से मेटाबॉलिज्म बढ़ता है। हर दिन कम से कम 30-60 मिनट तेज गति से चलें 05. कार्डियो, योग और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को रूटीन में शामिल करें। हफ्ते में 150 मिनट की एक्सरसाइज करने का लक्ष्य रखें। 06. लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें 07. रोजाना 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें, क्योंकि नींद की कमी मोटापे का कारण बनती है 08. मानसिक तनाव कम करने के लिए ध्यान करें 09. रात का भोजन सूर्यास्त के आसपास या सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले करें 10. खाना चबा चबा कर खायें, खाने के तुरंत बाद न सोएं 11. एक बार में ज्यादा न खाएं 11. लंबे समय तक एक जगह बैठकर काम न करें। डाक्टर वी.के. वर्मा का कहना है, कि अचानक वजन या मोटापा घटाने की न सोचें, यह एक प्रक्रिया के तहत घटाया जा सकता है। डायटिंग से वजन घटाने की न सोचें। खाद्य पदार्थों का भण्डारण न करें। बासी भोजन न खायें। जल्दी-जल्दी न खाएं। यदि समस्या अधिक हो, तो डॉक्टर या डायटीशियन से सलाह ले सकते हैं। लाइको लेकेसिस, कल्केरिया कार्व, कल्केरिया फास, सीपिया, फाइटोलक्का, चाइना, बीमसपकवदपनउ, मर्कसोल, पल्सेटिला आदि औषधियां उचित क्षमता व मात्रा मे डाक्टर के परामर्श से लक्षणानुसार ली जा सकती हैं।  


Comments

Popular posts from this blog

कूट-कूटकर भरी हुई है। पैसा कमाने का यह लोग कोई भी मौका हाथ से जाने नहीं देते, भले ही चाहें इन्हें कोई कितना बुरा क्यों न ही कहें?

Basti News ; रिटेलर्स किसानों से 25-30 रुपया अधिक लेकर तीन करोड़ से अधिक कमाता

Basti daily news