किसने ‘गांजा’ तस्कर ‘दीपक चैहान’ को ‘सभासद’ बनाया?
किसने ‘गांजा’ तस्कर ‘दीपक चैहान’ को ‘सभासद’ बनाया?
बस्ती। सवाल उठ रहा है, कि आखिर हिस्टीषीटर एवं गांजा तस्कर दीपक चैहान का नाम सभासद के लिए मनोनीत करने को किसने भेजा? क्या इसके लिए अकेले भाजपा जिलाध्यक्ष जिम्मेदार हैं? या फिर वह कोर कमेटी भी जिम्मेदार हैं, जिसने गांजा तस्कर के नाम पर मोहर लगाया? मीडिया में आने के बाद सवाल उठ रहा है, कि क्या जिलाध्यक्ष को इस्तीफा दे देना चाहिए, या फिर उस कोर कमेटी जिसमें वर्तमान/निर्वतमान जिलाध्यक्ष, हारे जीते एमपी एमएलए, जिला प्रभारी मंत्री, जिला पंचायत अध्यक्ष और जिला प्रभारी षामिल है, को इस्तीफा देना चाहिए। नैतिकता तो यही कहता है, कि इस मामले में पूरी कोर कमेटी को इस्तीफा देना चाहिए, क्यों कि इन सभी को गांजा तस्कर को सभासद मनोनीत करने के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है? यह अपनी-अपनी जिम्मेदारी से यह कर नहीं बच सकते हैं, कि जब तक अपराध साबित नहीं हो जाता, तब तक किसी को दोषी नहीं कहा जा सकता, यह कर एक तरह से जिलाध्यक्ष गांजा तस्कर का बचाव कर रहे हैं, और उसे क्लीन चिट दे रहे हैं, ऐसे कथित अपराधी को जिलाध्यक्ष क्लीन चिट देने का प्रयास कर रहे हैं, जिसके बारे में सीओ कह चुके हैं, कि इस पर गुंडा एक्ट सहित अन्य गंभीर आरोपों में मुकदमा दर्ज है।
अगर यह लोग जिम्मेदार नहीं हैं, और इन लोगों ने गांजा तस्कर के नाम पर मोहर नहीं लगाया, तो इन्हें सामने आकर बताना चाहिए, कि कोर कमेटी के सदस्य के रुप में उनका हस्ताक्षर नहीं है, अगर इसमें कोई आगे नहीं आता और इसका विरोध नहीं करता तो माना जाएगा, कि पूरी कोर कमेटी गांजा तस्कर को सभासद बनाने के लिए जिम्मेदार है। बहुत बड़ा सवाल यह उठ रहा है, कि अगर इतने जिम्मेदार लोगों के रहते एक गांजा तस्कर सभासद मनोनीत हो जाता है, तो ऐसे लोगों के कोर कमेटी में रहने से भाजपा को और समाज को क्या लाभ? ऐसा लगता है, कि भाजपा में कोर कमेटी का गठन दिखावे का है। क्यों कि जिले में होता वही है, जो दो लोग चाहते हैं, अगर दो लोगों के चाहने और न चाहने पर लोग मनोनीत होते हैं, तो फिर कोर कमेटी के गठन करने का क्या मतलब? पूरा जिला जानता है, कि होता वही है, जो दो लोग चाहते है। इन्हीं दोनों के कारण जिले में भाजपा का कई खेमा बटं चुका है। जिसका नुकसान पार्टी को और लाभ दो लोगों का हो रहा है। गन्ना समिति के चेयरमैन के चयन के मामले में ही यही हुआ, जो सभासद के चयन में हुआ। दो लोगों ने मिलकर गन्ना माफिया के परिवार के सदस्य को चेयरमैन का टिकट दे दिया, कोर कमेटी देखती रह गई, और गन्ना माफिया चेयरमैन की कुर्सी पर काबिज हो गया। सवाल उठ रहा है, कि जब गन्ना माफिया और गांजा तस्कर को ही चेयरमैन और सभासद बनाना है, तो फिर भाजपा और सपा में क्या अंतर रह गया? नाहक ईमानदारी का ढकोसला पीटते है।
‘दीपक चैहान’ को ‘छोड़िए’, ‘रवि गुप्त’ को ‘देखिए’
बस्ती। कथित गांजा तस्कर दीपक चैहान को नगर पंचायत हर्रैया के लिए सभासद मनोनीत करने का मामला अभी चल ही रहा था कि इसी नगर पंचायत में एक और कथित स्मैक तस्कर रवि गुप्त को सभासद मनोनीत करने का सनसनीखेज मामला सामने आ गया। एक गांजा तस्कर तो दूसरा स्मैक तस्कर, दोनों समाज और सरकार के दुष्मन, और भाजपा वालों ने ऐसे लोगों को सभासद मनोनीत करवा दिया, जिनका न तो कोई राजनैतिक बैक ग्राउंड और न समाज में कोई इज्जत। ऐसे लोगों ने कभी भी भाजपा की मदद भी नहीं की होगी, नेताओं को भले ही आर्थिक मदद कर दी हो, लेकिन वोट से नहीं किया होगा, क्यों कि ऐसे लोगों के पास वोट नहीं होता, बल्कि पैसा होता है, और वह पैसा नवयुवकों को नषे की लत लगाकर बनाया गया। इस तरह के लोगों से जहां समाज का सभ्य वर्ग दूर रहना पसंद करता वहीं भाजपा वाले ऐसे लोगों को गले लगाते हैं, उन्हें फूलों की माला पहनाते। इन दोनों के सभासद मनोनीत करने से यह तो साबित हो चला कि इन दोनों को मनोनीत करने पर मोहर लगाने से पहले किसी ने भी इन दोनों की पृष्टि भूमि को नहीं देखा, यह तक नहीं देखा कि अगर गांजा तस्कर भाजपा के सभासद के रुप में बोर्ड की बैठक में भाग लेगा, तो उस बोर्ड की गरिमा का क्या होगा? समाज और पार्टी के कार्यकत्र्ता क्या कहेंगे? अब आप लोगों को दूसरे मनोनीत सभासद रवि गुप्त के बारे में बताने जा रहे हैं, इनका ‘महाकाल टी सेंटर’ के नाम से हर्रैया में दुकान चलता है। यह वही दुकान है, जिसे गांजा और स्मैक का हेड आफिस कहा जाता है। माल पहले इसी दुकान पर आता है, उसके बाद कहीं और जाता है। कहा तो यहां तक जाता है, कि अयोध्या एअर पोर्ट से जितनी भी इंटरनेषनल हवाई जहाज आती हैं, और जिसके अधिकतर गांजा और स्मैक के तस्कर होते हैं, और जो बिहार तक जाते हैं, उनके टैक्सी का पहला पड़ाव ‘महाकाल टी सेंटर’ पर ही होता है। इसकी जानकारी पुलिस को भी है। इस ‘महाकाल टी सेंटर’ पर इतनी बड़ी मात्रा में गांजा और स्मैक का कारोबार होता है, कि इससे जुड़े लोग कुछ ही दिनों में करोड़ों के मालिक हो जाते हैं, इसी में दीपक चैहान, रवि गुप्त और हुड़वा कुंवर के बाबू साहब जैसे लोगों का नाम षामिल है। अब जरा अंदाजा लगाइए कि भाजपा में जब गांजा और स्मैक तस्कर सभासद रहेगें तो कौन भाजपा को वोट देगा? खासबात यह है, कि दीपक चैहान को भी यहीं का प्रोडक्ट कहा जाता है। भले ही दीपक आज लक्जरी वाहनों का काफिला और आलीषान बगंले का मालिक बना हैं, लेकिन रवि गुप्त भी दीपक चैहान से कम हैसियत नहीं रखते। दोनों का परिवार मुफलिसी में रहा, लेकिन आज दोनों गलत रास्ते पर चलकर बड़े आदमी कहलाते है।
बताते हैं, कि इन दोनों के गुरु ‘हुड़रा कुंवर के एक बाबू साहब’ है। कहते हैं, कि इन्होंने ही इन्हीं दोनों सभासदों को मनोनीत करवाया। बाबू साहब, बड़े माननीय के खास माने जाते हैं, और यह कभी अपने कार पर ‘सांसद’ प्रतिनिधि नहीं बल्कि सांसद लिखवाकर चलते थे, इससे पहले यह छोटे माननीय के साथ रहे हैं, और यह तब भी ‘विधायक’ लिखवाकर गाड़ी से चलते है। इन्हें नकली प्रतिनिधि कहलाना या वाहनों पर लिखवाना पसंद नहीं है। इन्हें अगला ब्लाॅक प्रमुख का चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहने को भी कहा गया है। छोटे माननीय को जब यह पता चला कि यह गांजा तस्करों के सरगना है, तो इन्हें अपनी गोल से अलग कर दिया। एक खास बात और है, पहले दीपक चैहान, बाबू साहब के लिए कैरियर का काम करता था, लेकिन जब इसने देखा कि इस धंधें में माल बहुत हैं, तो खुद ‘बास’ बन गया। यह दोनों गांजा तस्कर कब भाजपा में षामिल हो गए, क्षेत्र के बड़े-बड़े भाजपा नेताओं को भी पता नहीं चला, यह दोनों भाजपा के सदस्य हैं भी कि नहीं इस पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्यों कि भाजपा ऐसे गांजा और स्मैक तस्करों को पार्टी का हिस्सा नहीं बनाती। अगर दोनों गांजा तस्कर नगर पंचायत हर्रैया के लिए सभासद मनोनीत किए गए हैं, तो कोर कमेटी के सदस्य के रुप में स्थानीय विधायक पर भी सवाल उठ रहे है। कहा जाता हैं, कि स्थानीय विधायक से इस मामले में कोई भी राय नहीं ली गई, अगर ली गई होती तो असहमति होती। अगर कोर कमेटी ने बायोडाटा का ही सत्यापन करा लिया होता तो दोनों गांजा तस्करों की सच्चाई का पता चल जाता। हर्रैया का बच्चा-बच्चा जानता है, कि दोनों का असली कारोबार गांजा और स्मैक है। यह भी लोग अच्छी तरह जानते हैं, कि इसका सरगना कौन बाबू साहब है। यह पहली बार देखा गया है, कि भाजपा ने ऐसे दो सभासदों को मनोनीत किया, और जिनका संबध गांजा और स्मैक के कारोबार से है। गांजा और स्मैक के तस्करों को भाजपा के जिम्मेदारों ने सभासद मनोनीत करवाकर एक बार फिर साबित कर दिया, कि पार्टी के खाटी कार्यकत्र्ताओं की कोई आवष्यकता नहीं, चाहंे तो वह पाला बदल सकते है। कोर कमेटी के लोगों ने जिस तरह गांजा और स्मैक का कारोबार करने वाले बड़े लोगों को सम्मान दिया, और कार्यकत्र्ताओं को हर बार की तरह इस बार भी दरकिनार किया, उससे 2027 में पार्टी को ढूढ़े कार्यकत्र्ता नहीं मिलेगें। आखिर कार्यकत्र्ता कब तक उपेक्षा बर्दास्त करता रहेगा।
‘विधानसभा पंचायती राज समिति’ के ‘नाम’ पर ‘वसूले’ गए ‘छह लाख’!
बस्ती। ग्राम पंचायतों के विकास कार्यो की जांच करने के लिए आने वाले वाले विधानसभा पंचायती राज समिति के आवभगत और उपहार देने के नाम पर जिले के एक-एक सचिव से ब्लाकों के एनआरपी के जरिए तीन-तीन हजार के दर से लगभग छह लाख वसूले गए, यह पैसा पंचायती विभाग को दिया गया। समिति के 25 सदस्यों की टोली को 18 और 19 मार्च को विभिन्न ग्राम पंचायतों में जाकर निर्माण कार्यो का स्थलीय निरीक्षण करना था, ताकि जिले के विकास कार्यो का सच समिति के 25 सदस्यों को पता चल सके। समिति के आने से पहले उनके स्वागत और उन्हें कोई दिक्क्त न हो तो इस लिए उन लोगों के लिए बड़े और मंगिे होटल का इंजाम किया गया, सारी व्यवस्था हो गई, होटल और उपहार के लिए पैसा कहां से आएगा, इसके लिए सचिवों को निषाना बनाया गया, सचिवों ने प्रधानों को निषाना बनाया, इस तरह सचिवों और प्रधानों ने मिलकर छह लाख दिया, पैसा पंचायती विभाग को पहुंच भी गया, इंतजाम भी हो गया, लेकिन अचानक समिति के आने का कार्यक्रम स्थगित हो गया। होना तो यह चाहिए था, कि जो पैसा सचिवों से लिया गया, ईमानदारी से उसे वापस कर देना चाहिए, चूंकि पंचायत विभाग में वापसी की परम्परा नहीं है। जाहिर सी बात हैं, कि कार्यक्रम स्थगित होने का लाभ सबसे अधिक पंचायत विभाग के अधिकारियों को मिला होगा। अगर किसी विभाग के अधिकारी को बिना कुछ किए छह लाख मिल जाता है, तो यह तो उनके लिए लाटरी लगने जैसी होती है। हालांकि विभाग अगर चाहता तो समिति के सदस्यों का इंतजाम सरकारी गेस्ट हाउस में भी करवा सकता था, लेकिन ठहरे माननीय, इस लिए अधिकारियों ने सोचा होगा कि कोई कमी न रह जाए, इस लिए इनकी होटल में व्यवस्था की जाए, और फिर कौन अधिकारियों को वेतन से व्यवस्था करना था। अधिकारियों ने इन्हें एक अवसर माना। यह पहली बार नहीं हैं, जब समिति और जांच के नाम पर धन की उगाही की गई, चूंकि इसके लिए कोई सरकारी बजट होता नहीं हैं, इस लिए वसूली ही एक मात्र जरिया जा सकता है। यह भी कई बार देखा गया, कि खर्चा को कम था, लेकिन वसूला अधिक गया। जाहिर सी बात हैं, कि जिन सचिवों/प्रधानों ने छह लाख दिया होगा, वह भी कोई गेहूं बेचकर तो दिया नहीं होगा, उसमें भी उस विकास के नाम पर भ्रष्टाचार किया होगा, जिसकी जांच के लिए समिति आने वाली थी। जब इस मामले में कई प्रधानों और सचिवों से बात की गई, और उनसे पूछा गया कि आखिर क्यों आप लोग आवभगत और उपहार के नाम पर इतना पैसा देते हैं, और कहां से देते हैं? जानकार हैरानी होगी कि एक ने भी यह उगाही का विरोध नहीं किया, और न यह बयान दिया कि जबरिया वसूली की जा रही है। विधानसभा पंचायती राज समिति के माननीयों को भी यह सोचना और सवाल करना होगा, कि आखिर विभाग इतना षानदार आवभगत और उपहार कहां से दे रहा हैं? सदस्यों को होटल में ठहरने से सीधा इंकार कर देना चाहिए, और कहना चाहिए कि हम तो सर्किट हाउस में रहेगें। समिति के माननीय सदस्यों को भी आइडिएल बनने की आवष्यकता है।
‘कुलवेन्द्र सिंह’ को ‘योगीजी’ ने किया ‘सम्मानित’
बस्ती। कैलाश मान सरोवर यात्रा करने वाले देष के एक मात्र सिख एवं से बादशाही अखाड़ा के सरदार कुलवेन्द्र सिंह को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सार्वजनिक रुप से सम्मानित किया। एक लाख रूपये का चेक भी भेंट किया। यह सम्मान न सिर्फ देष के सिखों के लिए बल्कि बस्ती के लोगों के लिए भी है। बादषाही अखाड़ा के सरदार कुलविंद्र सिंह मजहबी सिख समाज के हीरो बन गए है। देष के यह पहले सिख हैं, जिन्होंने मानसरोवर की यात्रा की। सरकार ने इन्हें एक दिन पहले लोकभवन सम्मानित किया। इन्हें सम्मान के साथ एक लाख की धनराषि भी दी गई।
इन्होंने कैलाष मानसरोवर की यात्रा 28 जून से 19 जुलाई 25 तक की। इनके साथ उत्तर प्रदेश के छह सदस्य और भी थे, कहा कि यह यात्रा विपरीत परिस्थितियों में भी सुखद रही। सिक्किम के नाथूला दर्रा मार्ग से यात्रा करने वाले सरदार कुलवेन्द्र सिंह जब अपने जिले में आए तो इनका स्वागत समाज के विभिन्न संगठनों और इनके षुभचिंतकों के जरिए किया गया। सम्मानित होने पर डा. वीके वर्मा ने कहा कि कहा कि प्रथम सरदार कैलाशी सरदार कुलवेन्द्र सिंह ने साबित कर दिया कि यदि दृढ इच्छा शक्ति हो तो कुछ भी असंभव नहीं हैं और उम्र मायने नहीं रखती। हरीष सिंह, डा. वीके वर्मा, डा. प्रमोद चैधरी, चंद्रेष प्रताप सिंह, लाडले हैदर रिजवी, डा. अरुण लारेंस, विष्णु प्रसाद भटट, पूर्व एडीजीसी प्रेम प्रकाष श्रीवास्तव, इंतजार अहमद, षंषाक रजगड़िया, प्रहृलाद मोदी, मजोज दूबे, राजेंद्र तिवारी और प्रदीप चंद्र पांडेय, केसरी नरायण त्रिपाठी, जगदीष षुक्ल, अर्जन उपाध्याय, किषन गोयल, खादिम हुसैन, भगवान सिंह मामा, डाक्टर सिद्वीकी, बिन्नू, अभिषेक वर्मा, जसबीर सिंह, विक्की बाब किरतू,, इंदर पाल सिंह षैकी, विनीत दूबे, षुभांसु पांडेय पुलक, राजेंद्र सिंह राजावत, विमल पांडेय, संदीप गोयल, बबलू गौड़, गणेष गौड़ एवं अर्जुन जायसवाल सहित अन्य ने बधाई दी है। सरदार कुवेंद्र सिंह ने युवा पीढी का आवाहन किया कि वे युवा अवस्था में धार्मिक स्थानों की यात्रा करें इससे उनके जीवन में रचनात्मक बदलाव आयेगा। बताया कि लोक भवन में कैलाश मान सरोवर सेवा समिति के अध्यक्ष के.के. सिंह और आनन्द पाल निवेडिया, डा. आर.एस. भदौरिया ने उत्तर प्रदेश से कैलाश मान सरोवर की यात्रा करने वाले 555 यात्रियांें का स्वागत कर उत्साह बढाया।
‘मोदीजी’ पत्रकारों की भी ‘सुनिए’, सुरक्षा कानून ‘बनाइए’!
बस्ती। लोकतंत्र के चैथे स्तंभ यानी पत्रकारों पर बढ़ते शारीरिक व मानसिक हमलों और फर्जी मुकदमों के खिलाफ जनपद बस्ती के पत्रकारों ने आवाज बुलंद की है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब, बस्ती के बैनर तले पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन मंडलायुक्त को सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से देश में तत्काल पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने और पत्रकारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की पुरजोर वकालत की गई है।
मंडलायुक्त कार्यालय पर ज्ञापन सौंपने के बाद इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब के जिला अध्यक्ष सतीश श्रीवास्तव ने कहा कि आज के दौर में निष्पक्ष पत्रकारिता करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। फील्ड में रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों को न केवल असामाजिक तत्वों के कोपभाजन का शिकार होना पड़ता है, बल्कि उन पर जानलेवा हमले भी हो रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ष्पत्रकारों की सुरक्षा ही वास्तव में लोकतंत्र की सुरक्षा है, और यदि चैथा स्तंभ ही सुरक्षित नहीं रहेगा, तो समाज और राष्ट्र को जागरूक करने का कार्य बाधित होगा।
...न जाने ‘बीडीओ’ कुदरहा ‘भ्रष्टाचारियों’ पर ‘क्यों’ मेहरबान ‘रहतें’!
बस्ती। बार-बार सवाल उठ रहा है, कि आखिर कुदरहा के बीडीओ साहब क्यों इतना भ्रष्टाचारियों पर मेहरबान रहते हैं? आखिर यह भ्रष्टाचारी क्यों बीडीओ साहब को इतना प्रिय लगते हैं? अकेला कुबेरपुर के लोगों ने डीएम और सीडीओ से कहा कि आप लोग जरा इस गांव में में हो रहे भ्रष्टाचार को भी देख लें। यहां प्रधान और सचिव किस कदर सरकारी योजनों का धन ढकार रहे है, बताने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। गांव के सिवान में बने बकरी सेड ही इस बात को बताने के लिए काफी है। पशुचरन, सामुदायिक शौचालय और पंचायत भवन का तो हाल मत पूछिए। यहां कुछ ही फोटो से पूरे वर्ष मनरेगा का काम होता रहा और हाजरी लगती रही ।क्योंकि यहां का रोजगार सेवक बाबू राम, ब्लाक मनरेगा आपरेटर अरविंद यादव की तरह मास्टर माइंड है। जो कमी थी उसे सचिव धनश्याम यादव और सेक्टर प्रभारी देवेंद्र यादव पूरा कर दिया हैं। तभी तो यहां शिकायत के बाद भी कागजों में मनरेगा मजदूरों की बस हाजरी लगती रही। जब मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचता तो वर्क आईडी शून्य कर मामले को निपटा दिया जाता है। इस खेल में कुदरहा बीडीओ का भरपूर सहयोग रहता है। क्योंकि यहां का रोजगार सेवक गलत कराने के लिए फाईलों के साथ केवल लिफाफा ही नहीं देता है। देशी मुर्गा और कुआनो नदी के मच्छली का स्वाद भी चखाता है। तभी तो शिकायतकर्ता कुछ भी नहीं उखाड़ पा रहे है
यहां तो बकरी सेड तक को नहीं छोड़ा गया है। बड़े पैमाने पर पहले लोगों के खाते में बकरी सेड का धन भेजवाया। इसके बाद लाभार्थी से झूठ बोलकर ले लिया। यदि किसी ने शिकायत करनी शुरू की तो आधा अधूरा बनवा कर छोड़ दिया। यह बात कोई और नहीं लाभार्थी खुद कह रहे है कि रोजगार सेवक बाबूराम मनरेगा का पैसा बताकर बकरी सेड का धन ले लिया है। उन्हें यह नहीं पता था कि उनके नाम पर योजना स्वीकृत करा कर इतना बड़ा फ्राड करेगा। जब इस बात की उन्हें जानकारी हुई तो वह शिकायत तो किए लेकिन वह लिफाफे और देशी मुर्गे के लेग पीस के आगे दब गया। गांव के लोगों ने शपथ पत्र के साथ शिकायत करके थक गए है। उनकी कोई नहीं सुन रहा है। एक ही फोटो सौ से अधिक मस्टर रोल पर दर्ज होने का सशपथ साक्ष्य भी दे चुके हैं। फिर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। यहां दो दर्जन से अधिक बकरी सेड पर धन की निकासी हुई है, लेकिन इसका बस बंदर बाट किया गया है। सामुदायिक शौचालय तक निष्क्रिय बना हुआ है। उसे तक संचालित नहीं किया जा रहा है। पंचायत भवन पर तो शायद ही कभी सचिव साहब आते हों। शिकायत करने पर उल्टा ही धमकी देते है। सचिव घनश्याम यादव और सेक्टर प्रभारी देवेंद्र कुमार यादव के कारनामें की बार मंझरिया में भी सामने आ चुका है। कागजों में चलवा रहे थे मनरेगा की हाजिरी, जब जांच टीम पहुंची तो एक भी नहीं मिले। यह खेला कई बार पकड़ में आ चुका है। फिर भी बीडीओ कुदरहा इनपर मेहरबान है।
‘एमओआईसी’ को ‘मारने’ वाले का हॉस्पिटल ‘सीज’
बस्ती। ‘एक तो चोरी उपर से सीना जोरी’ के कहावत को अगर सच में देखना हो तो सल्टौआ के अमित हॉस्पिटल एंड अल्ट्रासाउंड सेंटर के रुप में देख सकते। इस हास्पिटल को बुद्ववार को इस लिए सीज कर दिया गया, इसके मालिक पिता और पुत्र दोनों मिलकर पिछले आठ सालों को बिना कोई प्रमाण-पत्र के अवैध रुप से संचालित कर रहे हैं, और जब एमओआईसी अमित कन्नौजिया जांच करने गए तो इन्हें मारा-पिटा गया। हालांकि गलती इनकी नहीं बल्कि नोडल एवं डिप्टी सीएमओ डा. एसबी सिंह की थी, अगर यह भाग न गए होते तो एमओआईसी के साथ मार’पीट की घटना न होती।
बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई से पहले संबंधित अस्पताल में तैनात एमओआईसी डॉ. अमित कन्नौजिया के साथ मारपीट की घटना भी सामने आई थी। इस घटना के बाद मामला तूल पकड़ने लगा, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और कार्रवाई की गई।
अधिकारियों के अनुसार, अस्पताल लंबे समय से बिना वैध अनुमति के संचालित हो रहा था। दस्तावेजों की जांच में अनियमितताएं मिलने पर अस्पताल को सीज किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध रूप से संचालित अस्पतालों, अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी केंद्रों के खिलाफ आगे भी सख्त अभियान जारी रहेगा।
‘टेट’ को लेकर ‘लखनऊ’ में होगी ‘महारैली’ः उदयशंकर शुक्ल
बस्ती। टेट की अनिवार्यता समाप्त किये जाने की मांग को लेकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक संघ के आवाहन पर शिक्षकों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री (उ.प्र.), नेता प्रतिपक्ष भारत और यूपी को शिक्षकों की पाती भेजेने का सिलसिला बुधवार को भी जारी रहा। शिक्षकों ने पाती भेजकर मांग किया कि टेट की अनिवार्यता को तत्काल प्रभाव से समाप्त कराया जाय।
यह जानकारी देेते हुये उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष एवं अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक संघ के संयोजक उदयशंकर शुक्ल ने बताया कि बुधवार को परशुरामपुर कार्यवाहक अध्यक्ष नरेन्द्र दुबे, कुदरहा अध्यक्ष चंद्रभान चैरसिया, रामनगर अध्यक्ष इंद्रसेन मिश्रा के नेतृत्व में टेट अनिवार्यता के विरोध हस्ताक्षर अभियान चलाया गया और प्रधानमंत्री को भेजा गया। बताया कि जनपद के सभी विकास खण्डों में चरणबद्ध ढंग से शिक्षकों की पाती भेजने का सिलसिला अनवरत जारी है।
संघ जिलाध्यक्ष उदयशंकर शुक्ल ने कहा कि पदाधिकारी हस्ताक्षर कराने के साथ ही आगामी 13 अप्रैल को जनपद स्तर पर मशाल जुलूस और 3 मई को लखनऊ मंें आयोजित महारैली में हिस्सा लेेने के लिये प्रेरित कर रहे हैं। शिक्षकों की पाती पर हस्ताक्षर कराकर सम्बंधित को डाक और ई मेल से भेजा जा रहा है। इसके साथ ही जनपद के अनेक अनेक हिस्सों में शिक्षकांे द्वारा पाती भेजी जा रही है। सफलता मिलने तक आन्दोलन जारी रहेगा ।
यह जानकारी देते हुये जिला प्रवक्ता सूर्य प्रकाश शुक्ल ने बताया कि शिक्षकों की पाती भेजने के दौरान लालेन्द्र कनौजिया, राजेन्द्र श्रीवास्तव, गौरव त्रिपाठी, राजीव पाण्डेय मंत्री रजनीश शुक्ल, सुनील पाण्डेय, शोभावती, किरण पाण्डेय, राघवेंद्र सिंह, आरती यादव, कमलेश वर्मा, सुनीता देवी, आरती यादव, अनिल गुप्ता, विनय सिंह आदि शामिल रहे।







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