गायघाट’ में ‘नेताजी’ के चालक ‘चेयरमैन’ ने बनाया ‘भ्रष्टाचार’ का ‘रिकार्ड’!
‘गायघाट’ में ‘नेताजी’ के चालक ‘चेयरमैन’ ने बनाया ‘भ्रष्टाचार’ का ‘रिकार्ड’!
बस्ती। जो भ्रष्टाचार का खेल बड़े-बड़े भ्रष्टाचारी नहीं खेल सके, उसे कल का चालक से गायघाट नगर पंचायत के चेयरमैन बने ने खेल डाला। इन्होंने षतरंज की ऐसी चाल चली कि अन्य बड़े-बड़े भ्रष्टाचारी चेयरमैन चारों खाने चित्त हो गए। ध्यान देने वाली यह है, कि अगर किसी नगर पंचायत या नगर पालिका में कोई भ्रष्टाचार होता है, तो उसके लिए ईओ और चेयरमैन को ही दोषी माना जाता है, क्यों कि भुगतान पर दोनों के हस्ताक्षर होते है। इन्हीं दोनों के हस्ताक्षर से प्रदेष के 200 नगर पालिका और 545 नगर पंचायतों को राज्य और 15वां वित्त आयोग से हर माह नौ अरब 95 करोड़ 41 लाख से अधिक मिले बजट का भुगतान होता है। इसमें बस्ती नगर पालिका को दो करोड़ 50 लाख 62 हजार और नगर पंचायत बभनान को 35.98 लाख, बनकटी को 46.21 लाख, हर्रैया को 44.34 लाख, भानपुर को सबसे अधिक 65.36 लाख, गायघाट को 49.02 लाख, रुधौली को 40.50 लाख, कप्तानगंज को 46.55 लाख, मुंडेरवा को 40.70 लाख, गनेषपुर को 47.63 लाख और नगर बाजार नगर पंचायत को 42.99 लाख सहित कुल सात करोड़ 90 लाख 90 हजार से अधिक हर माह नगर पंचायतों को विकास के नाम पर मिलता। यानि हर साल 85 करोड़ 18 लाख 80 हजार से अधिक चेयमैन और ईओ को खर्च करने का मौका मिलता। यह अलग बात है, कि इसमें दोनों ने विकास के नाम पर कितना विकास किया और कितना कमीषन खाया। यानि जब यह चेयरमैन की कुर्सी छोड़ते हैं, तो 15 फीसद कमीषन के रुप में इनकी जेबों षुद्व रुप से लगभग 70 करोड़ जाता है। 15 फीसद कमीषन तो न्यूनतम बताया गया, एक-एक नगर पंचायत ऐसी भी हैं, जहां पर 30 फीसद तक कमीषन का खेल होता। यह वह कमीषन है, जिसे उन्हें मिलना ही मिलना होता है, और अगर फर्जी काम पर भुगतान किया तो कमीषन का प्रतिषत 50 के उपर चला जाता है। सवाल उठ रहा हैं, कि जब जिले के एक पालिका और दस नगर पंचायतों को हर साल 85 करोड़ 18 लाख से अधिक का बजट मिलता है, तो फिर विकास क्यों नहीं दिखता?
अब हम आप को ऐसा पुख्ता जानकारी नगर पंचायत गायघाट के बारे में देने जा रहे हैं, और जिसकी षिकायत भी हुई, को जानकार हैरान ही नहीं होगें बल्कि कुर्सी और पलंग से उठ भी जाएगे। अगर वाकई इसकी उच्च स्तरीय जांच हो जाए तो न जाने कितने लोग जेल में नजर आएगें, इनमें गायघाट नगर पंचायत के चेयरमैन भी दिखाई देगें। यह अलग बात हैं, कि इनके नाम पर मलाई कोई और काट रहा है, लेकिन जेल तो इन्हें ही जाना पड़ेगा। अब जरा अंदाजा लगाइए कि इस नगर पंचायत राजस्व गांव गायघाट, गांवा, पियारेपुर, बनहरा, थन्हवा, मुंडियारी, चकबंजारीजोत, जगदीषपुर, भेड़वा के पिपरा और उमरिया मरवटिया सहित दस राजस्व गांव मिलाया गया। जनसख्यंा 24486 से अधिक दिखाया गया। जबकि कुल वास्तविक जनसंख्या दस हजार के आसपास है। एक राजस्व गांव में अधिकतम एक हजार की जनसंख्या हो सकती है, लेकिन अगर कोई दो हजार से अधिक बता रहा है, तो उसे नहीं माना जा सकता। एक ग्राम पंचायत की जनसंख्या तो दो हजार से अधिक मानी जा सकती है, लेकिन राजस्व गांव की नहीं। इससे साफ लगता है, कि जनसंख्या के आकड़े में हेराफेरी की गई। वहीं कप्तानगंज में सबसे अधिक 33 राजस्व गांव हैं, और जहां की जनसंख्या 20333 और वार्ड 15 है। इसी से आप अंतर लगा लीजिए, कि जिले के सबसे छोटी नगर पंचायत गायघाट में 10 राजस्व गांव और जिसकी जनसंख्या लगभग 25 हजार। यह कैसे संभव? यही जांच का विषय है।
अब जरा खेल की ओर नजर डालिए। अधिक बजट यानि अधिक मलाई काटने के लिए दस हजार की जनसंख्या को 25 हजार कर दिया, यानि जिस नगर पंचायत को दस हजार की जनसंख्या पर दस लाख प्रति माह का बजट मिलना चाहिए, उस नगर पंचायत को हर माह 49 लाख दो हजार से अधिक का बजट मिलने लगा। वहीं 35 गांव वाले कप्तागंज नगर पंचायत को 46.55 लाख का बजट मिल रहा है। जनसंख्या में सबसे छोटी नगर पंचायत होने के बावजूद भी गायघाट नगर पंचायत को भानपुर के बाद सबसे अधिक बजट मिल रहा है। जब कि वार्ड के मामले में गायघाट, भानपुर से आधा है। इस तरह जहां पर जनसंख्या के आधार पर नगर पंचायत गायघाट को सालाना एक करोड़ 20 लाख से अधिक मिलना चाहिए, वहां पर जनसंख्या में धोखाधड़ी करके पांच करोड़ 88 लाख से अधिक का बजट लिया जा रहा है। यानि हर साल वास्तविक बजट से चार करोड़ 68 लाख से अधिक बजट लिया जा रहा है। अगर पांच साल में देखा जाए तो अधिक बजट लेने का आकड़ा 23 करोड़ 40 लाख से अधिक पहुंच जाएगा। सबसे बड़ा सवाल यह है, कि जब इस नगर पंचायत का खर्चा ही पांच साल में छह करोड़ है, तो फिर 23 करोड़ 40 लाख कहां गया? देखा जाए तो नगर पंचायत गायघाट में वास्तविक जनसंख्या के आधार पर दस वार्ड होना चाहिए, और दस वार्ड के हिसाब से ही इस नगर पंचायत को बजट मिलना चाहिए। लेकिन धोखाधड़ी करने वालों ने भ्रष्टाचार करने का ऐसा नायाब फारमूला निकाला, जिससे बिना कुछ किए 23 करोड़ से अधिक की कमाई हो सके। खास बात यह है, कि जिला स्तर पर कोई भी अधिकारी यह नहीं देख रहा है, कि आखिर इतनी छोटी नगर पंचायत में इतना बजट कैसे आ रहा है? और खपत कहां हो रहा? जबकि हर साल आडिट भी होता है। सबसे अधिक सवाल जनसंख्या का आकड़ा रखने वाला और आकड़े का सत्यापन करने वाला डीएसटीओ कार्यालय पर उठ रहा है। डीएसटीओ कार्यालय हर साल नगर पंचायतों से आय और व्यय का हिसाब-किताब भी लेता है, और समरी बनाकर उपर भेजता भी है। जनसंख्या के आधार पर ही सरकार कोई नीति और विकास की योजना बनाती है। अगर जनसंख्या ही सही नहीं होगा तो योजना और सरकार की नीति कैसे सफल होगी? जनसंख्या के सत्यापन करने की पूरी जिम्मेदारी डीएसटीओ कार्यालय की है। इस कार्यालय ने अपनी जिम्मेदारी को नहीं निभाया, अगर निभाया होता तो दस हजार की जनसंख्या वाला नगर पंचायत गायघाट को लगभग 25 हजार की जनसंख्या वाले नगर पंचायत की तरह बजट नहीं मिलता। गनेषपुर जैसी बड़ी नगर पंचायत से अधिक बजट नगर पंचायत गायघाट को बजट मिल रहा, जो कि अपने आप में भ्रष्टाचार को साबित करता है। यह उस नगर पंचायत का सच हैं, जहां पर नेताजी के एससी चालक को चेयरमैन बनाने के लिए भाजपा के स्थानीय नेताओं ने स्थानीय खाटी कार्यकत्र्ताओं की उपेक्षा की। इस नगर पंचायत को भाजपा के बड़े-बड़े नेता सपोर्ट कर रहे है।
‘आखिर’ क्यों नेताओं के चहेतें बन रहें, ‘गांजा’ और ‘स्मैक’ तस्कर?
बस्ती। जिस तरह नषे के कारोबारी नेताओं के चहेते बनते जा रहे हैं, उससे गांजा और स्मैक तस्करों पर कम और नेताओं पर अधिक सवाल उठ रहे हैं? पूछा जा रहा है, कि आखिर क्यों गांजा और स्मैक का कारोबार करने वाले तस्कर, नेताओं के चहेते बनते जा रहे है? क्या तस्करों के बिना नेता का खर्चापानी नहीं चल सकता? या फिर भी वह चुनाव नहीं जीत सकते? क्यों ऐसे लोगों के करीबी बनते हैं, जो समाज और युवाओं एवं स्कूली बच्चों का जीवन बर्बाद करते हैं? जिन नेताओं की जिम्मेदारी युवाओं के भविष्य को सवांरने की है, वह क्यों बर्बादी का कारण बनते जा रहे है? नेताओं पर बार-बार सवाल उठ रहा है, कि आखिर हर्रैया विधानसभा क्षेत्र में वह कौन लोग हैं, जो गांजा और स्मैक के तस्करों को बढ़ावा दे रहें हैं? और इन तस्करों से उन्हें क्या लाभ? क्यों यह लोग नौजवानों और बच्चों को नषे की ओर ढ़केलने में तस्करों की मदद कर रहे हैं? क्यों आने वाली नस्लों को बर्बाद कर रहें हैं? यह भी सही है, कि अगर पुलिस और नेता चाह जाए तो एक पूड़िया गांजा तक उनके क्षेत्र में नहीं बिक सकता। बातें तो नेता नषा उन्मुलन की बहुत करते हैं, लेकिन कभी अपने क्षेत्र में अभियान नहीं चलाया, और न पहल ही किया। हर्रैया सहित जिले के लोग सवाल कर रहे हैं, कि आखिर इस अवैध कारोबार के नेक्सस को कौन समाप्त करेगा? यह भी सवाल उठ रहा है, कि क्या नेक्सस पुलिस और प्रषासन से अधिक मजबूत हैं? अगर नहीं हैं, तो कैसे हर्रैया क्षेत्र में खुले आम नषीली चीजों का कारोबार हो रहा है,? क्यों महाकाल टी सेंटर पर ही सबसे अधिक अयोध्या के एअरपोर्ट से निकलने वाली गाड़ियां रुकती है? अभी तो इस टी सेंटर के संचालक का अन्य खुलासा भी होने वाला है।
नषे के कारोबारियों का तो नेताओं के करीब होने की बात तो समझ में आती है, क्यों कि उन्हें अपने अवैध कारोबार को चलाने के लिए किसी न किसी नेता की आवष्यकता पड़ती है, ताकि वह पुलिस की कार्रवाई से बच सकें, लेकिन नेताओं का इनका करीबी होना समझ में नहीं आता, आखिर नेताओं को समाज और सरकार के दुष्मनों से क्या लाभ हो सकता है? देखा जाए तो लाभ सिर्फ आर्थिक ही हो सकता है? अगर आर्थिक हो सकता है, तो फिर यह सवाल उठता है, कि पैसे के लिए क्या कोई नेता इतना भी गिर सकता है, कि उसे गांजा और स्मैक के तस्करों के मदद की आवष्यकता पड़ें? टुटपुजिया नेताओं के बारे में सोचा और समझा जा सकता है, लेकिन माननीय स्तर के लोगों के बारे में नहीं सोचा जा सकता। कहा और माना जाता है, कि जिस दिन नेताओं ने हुड़वा कुवंर के बाबू साहब जैसे लोगों को गोल से बाहर करना षुरु कर दिया, उस दिन नेताओं की छवि भी अच्छी होगी और उन्हें चुनाव जीतने में जनता मदद भी करेगी, अब जरा अंदाजा लगाइए कि जिस दिन पिछले कई दिनों से नेताओं और गांजा एवं स्मैक तस्करों के रिष्तों का खुलासा मीडिया कर रही हैं, यकीन मानिए उससे नेताओं का बहुत ही नुकसान हुआ। नेताओं और गांजा एवं स्मैक तस्करों को मीडिया पर गुस्सा उतारने या फिर मुकदमा दर्ज करवाने से कुछ नहीं होने वाला नहीं हैं, मीडिया तो अपना काम करेगी ही, जो लोग यह समझते हैं, कि मीडिया के खिलाफ अगर मुकदमा दर्ज करवा दिया, तो वह डर जाएगी, उनका सोचना बिलकुल ही गलत हैं, कहा भी जाता है, कि जिस पत्रकार के खिलाफ जितना अधिक मुकदमा होता है, उस पत्रकार को उसका संपादक और समाज उतना ही ईमानदार समझता हैं। कहा भी जाता है, कि जो पत्रकार मुकदमे से डर जाए वह पत्रकार बनने और कहलाने लायक नहीें हैं, इस लिए पत्रकारों को सुधारने या धमकाने के बजाए खुद में सुधार लाइए, क्यों कि हो सकता है, कि कल को आपको भी पत्रकार की जरुरत पड़ जाए। जो नेता पत्रकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवातें हैं,, या फिर उन्हंे अखबार से निकलवा देता है, उस नेता को मीडिया और समाज कमजोर मानता है। चूंकि हर्रैया के नेताओं में पत्रकारों को निकलवाने, मुकदमा दर्ज करवाने और अखबारों की प्रतियां जलाने का बहुत षौक है। इस लिए इस तरह के नेता कभी भी एक ईमानदार पत्रकार के हीरो नहीं बन सकते। अगर छावनी और हर्रैया थाने की पुलिस मिलकर भी गांता और स्मैक के तस्करों का नेक्सस नहीं तोड़ पाती तो, इसे समाज पुलिस का नाकामी औी मिलीभगत मानती है। छावनी थाना क्षेत्र के टोल प्लाजा से छावनी की तरफ जो बबुरहवा पुल हैं, उसके नीचे अंडरपास में गुमटी की दुकानों पर 24 घंटे गांजा और स्मैक की सेवा मिलती है। दोनों थानों की पुलिस और नेता सभी जानते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं करतें, क्यों नहीं करते? यही सवाल बना हुआ है। आखिर इन्हें कार्रवाई करने से कौन रोकता है, जैसे ही पुलिस ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करती है, वैसे ही हुड़वा कुंवर के बाबू साहब जैसे लोग आका को फोन कर देते हैं, उसके बाद पुलिस खर्चापानी लेकर चली जाती है।
‘अस्पताल’ के ‘हीरो’ डा. ‘वीके’ वर्मा को ‘ग्रामीणों’ ने किया ‘सम्मानित’
बस्ती। डा. वीके वर्मा जिला अस्पताल के पहले ऐसे डाक्टर हैं, जिसे गांव वालों ने अस्पताल में आकर आकर सम्मानित। इससे पहले स्टेट की टीम इन्हें जिला अस्पताल का हीरो घोषित कर चुकी है। यह पहला ऐसा सम्मान हैं, जिसे गांव वालों ने अखबार की कटिगं को फ्रेम बनवाकर डाक्टर वीके वर्मा को माला और मिठाई खिलाकर सम्मानित किया। यह सम्मान किसी एतिहासिक सम्मान से कम नहीं था, इस तरह का सम्मान पाने का सपना सरकारी और गैर सरकारी अपने जीवन में अवष्य देखता है। आज के दौर में जहां मरीज सरकारी और प्राइवेट डाक्टरों पर तरह-तरह के आरोप लगाते हैं, ऐसे में अगर कोई सरकारी डाक्टर को इस तरह का सम्मान मिलता है, तो उसे उसके जीवन का सबसे बड़ी पूंजी माना जाता है।
यह पहला ऐसा सम्मान था, जिसे पहले से बताया नहीं गया था। जिला अस्पताल के लोगों ने ऐसा सम्मान देखकर गदगद हो गए, और कहने लगे कि डाक्टर हो तो डा. वीके वर्मा जैसा। कुछ देर के लिए डाक्टर साहब का चेंबर किसी सम्मान समारोह में बदल गया। हर किसी ने डा. वीके वर्मा को बधाई। यह सम्मान गिदही गांव के एसएटी न्यूटिक्ल के चेयरमैन अलोक त्रिपाठी की अगुवाईं में गांव वालों ने किया। इस मौके पर डाक्टर साहब के टीम के अभिषेक षुक्ल, राजन, मनीष राना, अनुपम, अनमोल पांडेय, धीरु सिंह, विकास चैधरी, मुलायम, डा ष्याम नरायन चैधरी, राम रक्षा पाल सहित अन्य मौजूद रहे। डाक्टर वीके वर्मा ने इस सम्मान के लिए सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया, और कहा कि यह सम्मान मैं जीवनभर नहीं भूल सकता, कहा कि वैसे तो उन्हें बहुत सम्मान और जनता एवं मरीजों का प्यार मिला, लेकिन जो सम्मान आज गांव के लोगों की ओर से और जिस तरह अखबार के खबर को फे्रम करवा कर किया वैसा सम्मान इससे पहले कभी नहीं मिला।
‘क्या’ कभी ‘पीडब्लूडी’ गुणवत्तापरक सड़क ‘बनाएगी’?
बस्ती। जिले की जनता पिछले कई सालों से एक अच्छी सड़क पर चलने को तरस रही है। ऐसा लगता है, कि मानो कमीषन बाजी के चलते विभाग और ठेकेदारों ने गुणवत्तापरक सड़क का निर्माण करना ही बंद कर दिया, इसे देखते हुए जनता भी टूटीफूटी सड़कों पर चलने की आदी हो चुकी है। फिर सवाल तो उठ ही रहें हैं, कि क्या कभी पीडब्लूडी एक अदद गुणवत्तापरक सड़क बना पाएगी? जबाव न में ही मिलेगा। इसी तरह का एक और गुणवत्ताविहीन सड़क का निर्माण सामने आया। गांव वालों ने सड़क निर्माण को रोकवा दिया है। यह गुणवत्ताविहीन सड़क मिर्जापुर सुअरहा पिच मार्ग के निर्माण को ग्रामीणों के विरोध के बाद रोका गया। मामला विकास खंड कुदरहा के मिर्जापुर सुअरहा पिच मार्ग का है, जो पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा रिपेयर कराया जा रहा था, जिसमें बिना डामर डाले और बिना सड़क की सफाई किये ही गिट्टी डाल दिया जा रहा था, और गिट्टी भी मानक विहीन डाली जा रही थी। जिसको लेकर स्थानीय लोगों ने समाजसेवी एवं क्षेत्र पंचायत सदस्य रवि पांडेय से शिकायत किया बीडीसी रवि पांडेय ने मामले को संज्ञान में लेते हुए विभाग को अवगत कराया और विभाग ने जेई को भेजकर काम दिखवाया मामला सही पाए जाने पर विभाग द्वारा काम रोक दिया गया है, और स्थानीय गांव वालों का कहना है कि गुणवत्ता विहीन काम नहीं होने दिया जाएगा क्योंकि, सुअरहा, वहडिला, जितुआपुर, चरकैला, माझाकला, भगवन्तपुर, मिर्जापुर मुरादपुर, सहित तमाम गांवों का यह मुख्य मार्ग है। गांव के रवि पांडेय, रामभजन, मस्तराम राजभर, जगन्नाथ यादव, इंदल, अवनीश, रमाशंकर पांडेय आदि ने गुणवत्तापूर्ण और मानक के अनुसार सड़क निर्माण कराये जाने की मांग की है।


Comments
Post a Comment