इस बार ‘छह करोड’़ के ‘लोन’ में फंसे ‘अनूप खरे’
इस बार ‘छह करोड’़ के ‘लोन’ में फंसे ‘अनूप खरे’
बस्ती। अक्सर विवादों में रहने वाले चित्रांष भारती के मंत्री एवं दी सीएमएस विधालय के प्रबंधक अनूप खरे इस बार छह करोड़ के लोन के मामले में फंसते नजर आ रहें है। इतने बड़े लोन के मामले में एचडीएफसी के प्रबंधक अभय प्रताप सिंह की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। जतब मैनेजर की चोरी पकड़ी गई, तो उन्हें बचाने के लिए बैंक की ओर से पूरी कोषिष की जा रही है। जब इनके मोबाइल नंबर 7607967747 में कई बार फोन किया गया, तो इन्होंने कोई रिस्पांस नहीं दिया।
अब हम आप को उस ओर लेकर चलते हैं, जहां पर छह करोड़ के लोन का खुलासा हुआ। 83 साल के षिकायतकत्र्ता संकटा प्रसाद षुक्ल पुत्र आचार्य नाथ षुक्ल निवासी ब्लाॅक रोड भालचंद्र भटटा, बस्ती ने एसपी को एक पत्र 11 जनवरी 26 को लिखा, जिसमें कहा गया कि चित्रांष भारती के मंत्री एवं दी सीएमएस विधालय के प्रबंधक अनूप खरे ने सुनियोजित रुप से गंभीर आर्थिक अपराध, धोखाधडी़, जालसाजी, एवं आपराधिक षडंयत्र किया। कहा कि सीएमएस स्कूल बस्ती के पंजीकरण के समय मुझे औपचारिक रुप से समिति का अध्यक्ष/सदस्य नामित किया गया। लिखा कि जब से स्कूल खुला तब से उनकी किसी भी वित्तीय लेन-देन से कोई वास्ता नहीं रहा। कहा कि इस समय में मेरी उम्र 83 साल हैं, जिसके चलते मैं बराबर अस्वस्थ रहता हूं, और तबियत खराब रहने के कारण पिछले 6-7 सालों से विधालय के किसी भी मीटिगं में षामिल भी नहीं हुआ, जिसके चलते 22 सितंबर 23 को अपने पद से लिखित इस्तीफा दे दिया, और इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया गया। कहा कि इसके बाद मेरा विधालय के संचालन, वित्तीय लेन-देन या बैंक खातों के संचालन से कोई संबध न पहले था, और न अब है। इसके बावजूद विधालय प्रबंधन एवं अन्य संबधित व्यक्तियों द्वारा एचडीएफसी बैंक में एक खाता संचालित किया जा रहा है, जिसमें मेरा नाम अनधिकृत रुप से दर्षाया गया। लिखा कि उक्त खाते से मेरे कूटरचित जाली हस्ताक्षर कर चेकों का दुरुपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर लेन-देन किया जा रहा है। लिखा गया कि मेरे संज्ञान में यह भी आया कि एचडीएफसी बैंक खाता संख्या 5020004492473 और आईएफसी कोड-एचडीएफसी0001888 से जुड़े ऋण मामलों में मेरा नाम गारंटर दर्षाते हुए पैन कार्ड, दस्तावेजों एवं फर्जी हस्ताक्षर का दुरुपयोग किया गया। कईबार ऋण लिया जा चुका है, तथा विगत दिनों एचडीएफसी फैजाबाद के षाखा प्रबंधक अभय प्रताप सिंह से मिलकर मेरे कूटरचित जाली हस्ताक्षर कर भारी लोन ले लिया गया, बड़े पैमाने पर लेन-देन भी किया जा रहा है। अनूप खरे के द्वारा मौखिक और लिखित में यह कहा गया कि उनका मेरे साथ कोई वित्तीय संबध नहीं है। किंतु हकीकत यह है, कि व्यवहारिक रुप से धोखाधड़ी निरंतर जारी है। संबधित बैंक खातों को त्वरित फ्रीज किया जाए ऋण डिस्बर्समेंट रोका जाए और दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाए। यह वही बैंक मैनेजर अभय प्रताप सिंह हैं, जो बस्ती में नियुक्ति के दौरान काफी चर्चित रहें। इन्होंने ही भाजपा नेता राजेंद्रनाथ तिवारी को एक-दो करोड़ का गांरटर बनाकर लोन दे दिया था, जब कि श्रीतिवारी को गांरटर होने की जानकारी ही नहीं, लेकिन जब उनके मोबाइल पर संदेष आने लगा तो वह बैंक मैनेजर के पास गए और कहा कि जो व्यक्ति बैंक का दीवार तक नहीं छुआ, उसे कैसे एक-दो करोड़ के लोन का गारंटर बना दिया, श्रीतिवारी ने कहा के तुम्हारी नौकरी खा जाउंगा। तब कुछ बाद बैंक मैनेजर ने श्रीतिवारीजी का नाम गांरटर से हटा दिया, इसी गांरटर के कारण श्रीतिवारीजी का सिविल खराब हो गया था। यही काम बैंक मैनेजर अभय प्रताप सिंह ने षिकायतकत्र्ता संकटा प्रसाद षुक्ल के साथ भी किया, जब इन्होंने इसकी षिकायत की तो बैंक मैनेजर ने आनन-फानन में गारंटर के रुप में श्रीषुक्लजी का नाम हटा दिया। बैंक के द्वारा गारंटर से नाम हटाने का ई-मेल भी किया गया। चूंकि अनूप खरे के परिवार का सिविल खराब हैं, और श्रीषुक्लजी का अच्छा है, इस लिए उन्हें फर्जी तरीके से गांरटर बनाया, जिसमें बैंक मैनेजर ने पूरा साथ दिया। षिकायत होने के बाद जब अनूप खरे को लगा कि वह तो फंस जाएगें, तो उन्होंने आनन-फानन में 21 नवंबर 25 को संकटा प्रसाद षुक्ल को पत्र लिखा, जिसमें चित्रांष भारती के मंत्री एवं दी सीएमएस विधालय के प्रबंधक अनूप खरे के द्वारा लिखा गया कि श्रीषुक्लजी जो पूर्व में मेरे विधालय के अध्यक्ष रहें हैं, उनका मेरे किसी भी निजी अथवा विधालय के किसी भी प्रकार के वित्तीय धन संबधी लेन-देन न तो पूर्व में और न वर्तमान में संबध रहा है। अब जरा अंदाजा लगाइए कि जो व्यक्ति 22 सितंबर 23 को अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुका होता है, और जिसका इस्तीफा स्वीकार भी हो जाता है, उसे 11 नवंबर 25 को हटाया जाता है। सवाल उठ रहा है, कि हटाने से पहले जिसने इस्तीफा दे दिया हो, उसे बाद में हटाने का क्या मतलब निकाला जाए। यह जांच का विषय है।
‘कैदी’ ने मांगी ‘रोटी’ तो ‘अंधा’ कर ‘दिया’
बस्ती। अपराधियों को मोबाइल की सेवा देने वाले बस्ती जेल अधीक्षक षिवप्रसाद मिश्र एवं त्रिलोकीनाथ, डिप्टी जेलर वंदना त्रिपाठी, रोषन आरा एवं सिपाही प्रदीप कुमार सहित लगभग 20 वर्दीधारी लोगों की हैवानियत सामने आया। इन लोगों ने मिलकर सूरज चैधरी नामक कैदी को इस लिए मार-मारकर अधमरा कर दिया और अंधा कर दिया। इन लोगों ने मिलकर कैदी को इतना मारा कि वह बेहोष हो गया, उसके बाद भी उसे लात घूसों और प्लास्टिक के बेंत से मारते रहें। आंख में मारा जिसके चलते दिखाई नहीं दे रहा। इस कैदी का सिर्फ इतना सा गुनाह था, कि साहब पेट नहीं भरा एक दो रोटी और दे दीजिए। इन लोगों की बर्बरता यही तक नहीं रुकी, यह लोग कैदी की पत्नी से इस लिए मिलने नहीं दे रहे हैं, क्यों कि भेद न खुल जाए। जेल में अगर किसी कैदी को इस लिए मारना-पीटा जाता है, कि वह रोटी मांगता है, तो फिर ऐसे लोगों को फांसी पर चढ़ा देने की मांग सोषल मीडिया पर लोग कर रहे है। इस घटना से यह पता चलता है, कि जेल वाले कैदियों के भोजन खा जाते है। इसी लिए अक्सर कैदियों के कमजोर होने या फिर भरपेट भोजन न मिलने के कारण जान भी चली जाती है। जब किसी कैदी को भरपेट भोजन नहीं मिलेगा तो वह मरेगा ही। कैदी की पत्नी अंजनी ने इसकी षिकायत डीएम से करते हुए सभी कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। पत्नी ने घायल पति का इलाज प्राइवेट अस्पताल में कराने की भी मांग की है।
इस घटना को लेकर सोषल मीडिया पर जेल वालों की खूब किरकीरी हो रही है, कोई कर रहा है, इन लोगों को भी तेंलगाना जैसे पुलिस वालों की तरह फंासी की सजा होनी चाहिए। सोनू चैधरी कहते हैं, कि बस्ती जेल की पुलिस जेलर और डिप्टी जेलर सब लोगों ने मिलकर कानून का मजाक उड़ाया है। कानून से बड़े भुवर जेल के लोग हो गएं है। अटल बिहारी पटेल लिखते हैं, कि हैवान जेल कर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। जेल के लोग कसाई हो गए है। अगर इन लोगों के साथ ऐसा तो तब इन लोगों को पता चलेगा कि हैवानियत क्या होती है।रिंषू सिंह लल्ला लिखते हैं, कि जेल प्रषासन की गुंडई किसी से छिपी नहीं है। यहां कैदी को केैदी की तरह नहीं आतंकवादी की तरह व्यवहार किया जाता। लिखते हैं, कि जिस तरह बिना मर्द के घर नहीं होता, बिना बड़े माफिया के जेल एक कोठे के समान है। यही हाल बस्ती कारोगार है। इंजी. अनिल कुमार लिखते हैं, कि पुलिस के अधिकतर अधिकारी तानाषाही रर्वैया अपना रहे है। दीपक कुमार यादव लिखते हैं, कि वर्दी की आढ़ में यह लोग गुंडई कर रहे है।इंजी. अमित कुमार चैधरी कहते हैं, कि इस भ्रष्ट सरकार में यही सब होगां। हीरालाल यादव हीरा यादव लिखते हैं, कि जिस जिले में विपक्ष का चार विधायक और एक सांसद हो, और उसके बाद भी सूरज चैधरी जैसे लोगों का षोषण हो तो, फिर इनके रहने से क्या लाभ। राकेष प्रजापति लिखते हैं, कि जिला कारागार जहां पर कैदियों को भरपेट भोजन न दिया जाता हो, अगर कोई सवाल करे, तो उसे बुरी तरह पीटा जाता है, उसे अंधा कर दिया जाता है।
‘ईओ’ साहब बडे़ ‘नालों’ की ‘सफाई’ कब ‘होगी’, 25 ‘साल’ हो ‘गए’!
बस्ती। नगर वासियों को याद भी नहीं होगा, कि कब बड़े नालों की सफाई हुई होगी। हम आप को बताते हैं, कि कब हुई। 25 साल पहले यानि चेयरपर्सन रुपम श्रीवास्तव के कार्यकाल में अंतिम बार बड़े नालों की सफाई हुई थी, उसके बाद नहीं हुई? क्यों नहीं हुई, यह ईओ और चेयरपर्सन के लिए सवाल है। इन्हें षायद यह नहीं मालूम कि जब तक बड़े नालों की सफाई नहीं होगी, तब तक पानी आगे नहीं जाएगा, और जब पानी आगे नहीं जाएगा, तो सिल्ट जमा होगा, बीमारियां होगी। इस लिए छोटे नालों और नालियों की सफाई से अधिक बड़े नालों की सफाई ध्यान देना चाहिए, ताकि छोटे नालों का पानी बड़े नालों में जाया जा सकेगा। बड़े नालों की सफाई न करके अगर पालिका सिर्फ छोटे नालों और नालियों की सफाई करती है, तो जनता इसे धन का दुरुपयोग मानती। बड़े नालों की सफाई इस लिए आवष्यक मानी जा रही है, क्यों जितने भी बड़े नाले हैं, सबकी गहराई 10-12 फिट की है। यानि अगर 10-12 फिट के सिल्ट की सफाई हो जाती है, तो समझ लीजिए कि छोटे नालों का पानी का बहाव तेज हो जाएगा।
ईओ साहब को ध्यान देने वाली बात है, कि भुजैनिया पोखरे में बड़े नालों का पानी इसी पोखरे में जाता है। पुरानी बस्ती का बड़ा नाला भी इसी से ही जुड़ा है। नार्मल स्कूल के बगल गंदा नाला का पानी लौकिहवा होते हुए अमहट तक जाता है। पुरानी बस्ती और भुजैनिया पोखरा से जो नाला जाता है, वह रैपुरा होते हुए वाल्टरगंज होते हुए कुआनों चला जाता है। यह सही है, कि जो बड़े नाले 25 साल सफाई नहीं हुए, उसमें कितना सिल्ट जमा होगा, इसका अंदाजा लगाना कठिन होगा, लेकिन अगर पालिका बड़े नालों की सफाई करवाने में सफल होता तो बरसात में जलजमाव की समस्या समाप्त हो सकती है। छोटे नालों को जाम होने से बचाना है, तो ईओ साहब और मैडम चेयरपर्सन को बड़े नालों की सफाई का मामला बोर्ड की बैठक में लाना होगा, क्यों कि इसके लिए धन की भी आवष्यकता होगी।
‘कान्वेंट’ स्कूल ‘खोलिए’, ‘अभिभावकों’ को ‘लूटिए’
बस्ती। जिस तरह शिक्षा व्यवसाय बनता जा रहा हैं, और इससे जुड़े लोग कुछ ही सालों में करोड़पति बन जा रहे हैं, उससे षिक्षा का तो अपमान हो ही रहा है, षिक्षा का स्तर भी गिरता जा रहा। एक अमीर व्यक्ति तो कान्वेंट स्कूल के मार को तो झेल सकता है, लेकिन गरीब नहीं है। इसके लिए नेपाल जैसा फारमूला अपनाना चाहिए, ताकि सभी के बच्चे सरकारी स्कूलों में एक साथ और एक समान षिक्षा प्राप्त कर सके। नेपाल दुनिया का पीला ऐसा देष होगा, जिसने प्राइवेट स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया। नेपाल के पीएम के इस साहसिक निर्णय की पूरी दुनिया में सराहा जा रहा है। भारत जैसे गरीब देष में नेपाल जैसी षिक्षा की व्यवस्था अतिआवष्यक है। तभी षिक्षा का स्तर उंचा होगा, और गरीब बच्चें पढ़ सकगें।
देश में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। एक समय था जब शिक्षा को सेवा और समाज निर्माण का माध्यम माना जाता था, लेकिन अब कई जगहों पर यह एक बड़े व्यवसाय के रूप में उभरती दिख रही है। खासकर प्राइवेट स्कूलों की बढ़ती संख्या और उनकी मनमानी फीस ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। अभिभावकों का आरोप है कि निजी स्कूलों में एडमिशन के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है। इसके अलावा हर साल फीस में बढ़ोतरी, महंगी किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य शुल्क मिलाकर शिक्षा का खर्च आम परिवार की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। कई मामलों में स्कूल प्रबंधन द्वारा निर्धारित दुकानों से ही किताबें और ड्रेस खरीदने का दबाव भी बनाया जाता है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों का बौद्धिक और नैतिक विकास होना चाहिए, लेकिन जब यह पूरी तरह मुनाफे पर आधारित हो जाए, तो गुणवत्ता प्रभावित होती है। बाहरी सुविधाओं और दिखावे पर जोर देकर कई स्कूल वास्तविक शिक्षण गुणवत्ता से ध्यान भटका देते हैं। सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए विभिन्न नियम और कानून बनाए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका पालन अक्सर अधूरा नजर आता है। अभिभावकों की मांग है कि फीस नियंत्रण के नियमों को सख्ती से लागू किया जाए और स्कूलों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए। वहीं कुछ निजी स्कूल यह तर्क देते हैं कि बेहतर सुविधाएं और योग्य शिक्षकों को बनाए रखने के लिए खर्च बढ़ता है, इसलिए फीस भी उसी अनुसार तय की जाती है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या यह बढ़ोतरी उचित और पारदर्शी है? शिक्षा को व्यवसाय बनने से रोकना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है। जरूरत इस बात की है कि शिक्षा के क्षेत्र में संतुलन कायम किया जाए, ताकि हर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और सस्ती शिक्षा मिल सके।
‘हैनिमैन’ ने ‘होम्योपैथी चिकित्सा’ का ‘वरदान’ समूचे ‘विश्व’ को ‘दिया’ःडा.वर्मा
बस्ती। होम्योपैथी के जन्मदाता सैमुएल हैनिमैन की जयंती शुक्रवार को पटेल एस.एम.एच. हास्पिटल एण्ड आयुष पैरा मेडिकल कालेज गोटवा में विश्व होम्योपैथी दिवस के रूप में मनाया गया। प्रबंधक डा. वी.के. वर्मा, डाक्टर और छात्रों ने सैमुएल हैनिमैन के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन् किया। इसके बाद आयोजित कार्यक्रम में डा. वर्मा ने उपस्थित लोगोें को सैमुएल हैनिमैन और होम्यापैथी औषधियों के कारगर प्रयोग की विस्तार से जानकारी दिया। कहा कि होम्योपैथी अब भारत सहित पूरी दुनियां में मरीजों के साथ ही असाध्य रोगों का भी कारगर उपचार कर रही है। उनका योगदान सदैव याद किया जायेगा। कहा कि हृदय रोग, पथरी, डेगू, चिकनगुनिया आदि रोगांें में होम्योपैथी कारगर सिद्ध हो रही है।
डा. वर्मा ने बताया कि सैमुएल हैनिमैन का जन्म 1755 में हुआ था। वह यूरोप देश के जर्मनी के निवासी थे वे एलोपैथी के चिकित्सक थे साथ में बहुत सारी यूरोपियन भाषाओं के ज्ञाता भी थे। उनके पिताजी एक पेंटर थे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। स्कूली शिक्षा के बाद एक मेडिकल की तैयारी करने के लिए कॉलेज गए इनकी पारिवारिक स्थिति कमजोर होने के कारण इन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा इनके कॉलेज के एक अध्यापक ने इनकी गरीबी को देखकर इनकी पढ़ाई में इनका सहयोग किया और पैसे की तंगी के बाद भी इनकी पढ़ाई लगातार चलती रही जब उन्होंने मेडिकल कंप्लीट किया तो इन्हें प्रेक्टिस करना था प्रेक्टिस करने के लिए ये गांव गांव में प्रैक्टिस करने लगे लेकिन प्रेक्टिस करने के दौरान उन्हें उस समय की चिकित्सा प्रणाली ठीक नहीं लगी क्योंकि उस समय आधुनिक तरह-तरह से चिकित्सा करने की प्रणालियों की कमी थी जिस वजह से उन्होंने अपनी प्रेक्टिस को बीच में ही छोड़ दिया और होम्योपैथी चिकित्सा का वरदान समूचे विश्व को दिया।
उपस्थित लोगों के प्रश्नों का उत्तर देते हुये डा. वर्मा ने बताया कि होम्योपैथी लक्षणों पर आधारित चिकित्सा पद्धति है और इसके द्वारा अनेक असाध्य रोगों को दूर किया जा सकता है। सैमुएल हैनिमैन की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य रूप से डा. आलोक रंजन वर्मा, चन्दा सिंह, डा. मनोज कुमार, डा. आर.एन. चैधरी, शिव प्रसाद, रितेश चैधरी, राजेश सिंह, लालजी, पवन गुप्ता, डा. गुलाब चन्द वर्मा, हिमांशी वर्मा, उमा दूबे, वीरेन्द्र वर्मा, विनोद कुमार, शालू, फूलपत्ती, शिप्रा, लक्ष्मी, गोल्डी के साथ ही छात्र शामिल रहे।
‘जनता’ से किए ‘वादे’ को ‘निभाया’ जा ‘रहा’ः नेहा वर्मा
बस्ती। नगरपालिका परिषद अध्यक्ष नेहा वर्मा ने शुक्रवार को नगर पालिका परिषद बस्ती के बेड़े में दो नए वाहन एक जे.सी.बी. और एक मिनी पोकलैंड का विधि विधान से पूजन कर उसे हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जनता से किए गए वादे को जनता के सहयोग से निभाया जा रहा है। कहा कि एक जे.सी.बी. और एक मिनी पोकलैंड मशीन के आ जाने से शहर को स्वच्छ रखने के साथ ही अन्य विकास कार्यो में सुविधा होगी। कहा कि नगर पालिका क्षेत्र के विकास के लिये निरन्तर चरणबद्ध अभियान जारी है। सड़क, पथ प्रकाश, शुद्ध पेयजल आपूर्ति के साथ ही वार्डो का विकास किया जा रहा है। नगरपालिका क्षेत्र के विकास के लिये अनेक लम्बित प्रस्तावों को स्वीकृति मिलते ही विकास कार्यो में और तेजी आयेगी।
अधिशासी अधिकारी अंगद गुप्ता ने कहा कि नगर पालिका क्षेत्र में नागरिक समस्याओं का प्राथमिकता से निस्तारण कराया जा रहा है। इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता अंकुर वर्मा, सभासद जगदीप श्रीवास्तव, जीवन चैधरी लारा कृष्ण कुमार पाण्डेय, परमेश्वर शुक्ल पप्पू, प्रफुल्ल श्रीवास्तव, दिनेश गुप्ता, इन्द्रावती देवी, अमरावती देवी, रवि पासवान, महेन्द्र सोनकर, मो. आमिर, रमेश गुप्ता, सुभाष श्रीवास्तव डब्लू, शोभी सोनकर, अश्विनी श्रीवास्तव, प्रमोद कन्नौजिया, अमरनाथ चैरसिया, मृदुला शुक्ला, अभिषेक चैधरी के साथ ही अर्पित निगम, अर्चना कुमारी, सफाई एवं खाद्य निरीक्षक अवधेश चन्द्र यादव, सदन लिपिक राजीव शंकर श्रीवास्तव, वाहन लिपिक शुभम शेखर यादव, अजय तिवारी, अभिषेक सिंह, अमित कुमार शुक्ला के साथ ही पूर्व सभासद सचिन शुक्ल, आशीष शुक्ल के साथ् ही नगरपालिका कर्मी, सभासद आदि उपस्थित रहे।





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