बंटू पांडेय’ को ‘चाचा-भतीजा’ ने किया ‘बर्बाद’!


‘बंटू पांडेय’ को ‘चाचा-भतीजा’ ने किया ‘बर्बाद’!

बस्ती। अगर चाचा-भतीजा किसी के बर्बादी का कारण बनते हैं, और जिनके चलते किसी को हार्ट अटैक होता है, तो समाज को चाचा-भतीजा के बारे में गहन अध्ययन करना चाहिए, ताकि फिर कोई चाचा-भतीजा के कारण बर्बाद न होने पाए और न हार्ट अटैक ही हो। केडीसी के सामने स्थित पषुपति मार्बल एंड बिल्डिगं मैटेरिएल के ‘बंटी पांडेय’ का कहना है, कि चाचा यानि ‘अनूप खरे’ भतीजा यानि ‘दिव्याषुं खरे’ के कारण उसका कारोबार एवं परिवार बर्बाद हो गया, बैंक का कर्ज तो पत्नी का जेवर बेचकर चुकता कर दिया, लेकिन अभी तक व्यापारियों का कर्ज नहीं चुकता कर पाया। जिसके चलते कारोबार प्रभावित हो रहा है। कहते है, कि जब हम और हम्हारी पत्नी बकाए का सात लाख मांगने अनूप खरे के स्कूल गए, तो उन लोगों ने पैसा तो नहीं दिया, अलबत्ता इतना अपमानित किया कि हार्ट अटैक आ गया। पहला अटैक था, इस लिए जान बच गई। इलाज के दौरान डाक्टरों ने कहा कि अगर दूसरा अटैक हुआ तो जान भी जा सकती है, इसी डर के नाते बकाए का पैसा मांगना छोड़ दिया, कि कहीं अगर दूसरी अटैक हुआ तो जान भी चली जाएगी। कहते हैं, कि पैसा मांगने से अच्छा केस को न्यायालय ले जाना ही बेहतर समझा। हालांकि न्यायालय में मुकदमा चेक पर हस्ताक्षर करने वाले अनूप खरे और दिप्ती खरे के नाम से चल रहा है। समन भी जारी हो चुका है। ध्यान देने वाली बात यह है, कि मुकदमा भतीजा यानि दिव्याषंु खरे के नाम से नहीं हैं, फिर भी इन्हें बर्बादी का कारण बताया जा रहा है। वह इस लिए क्यों कि जब भी कोई मामला होता भतीजा ही फ्रंट में आते। भले ही चाहें भतीजा का चेक पर हस्ताक्षर नहीं है, लेकिन सभी काम यही करते और देखते हैं।


न्यायालय में दायर मुकदमे में कहा गया कि 2023 में अनूप खरे के द्वारा साढ़े सात लाख का मार्बल एंव ग्रेनाइट उधार में खरीदा गया, सामान 2024 तक जाता रहा। 17 सितंबर और 20 दिसंबर के बीच पांच लाख और दो लाख का चेक अनूप खरे और दिप्ती खरे के नाम से एचडीएफसी बैंक का दिया गया। दोनों चेक डिस्आनर हो गया। मुकदमें के बाद जो दो चेक सात लाख का दिया, वह भी डिस्आनर हो गया। पहले वाले दोनों चेक के डिस्आनर को लेकर ही मुकदमा दायर किया गया। कहा कि जब चेक मिल गया तो न्यायालय जाना बंद कर दिया। दोनों चेक जब बाउंस हुआ तो बाताकाही हुई। तब दिव्याषुं खरे ने 40 हजार नकद दिया। बताया कि बैंक से जो लोन लिया था, सारी पूंजी ब्याज चुकता करने में चला गया। जेवर गहना बेचकर बैंक को 20 लाख चुकता किया। आर्थिक तंगी के कारण बच्चों का स्कूल में दाखिला नहीं करा पाया, बेटा नमोश्री पांडेय का दाखिला सीएमएस स्कूल में कक्षा दस में इस लिए करवा दिया, ताकि कर्ज की कुछ रकम फीस के रुप में वसूल हो सके। एक साल तक स्कूल ने फीस नहीं लिया। हालांकि सामान लगभग 12 लाख का गया, लेकिन भूलवष बिल सिर्फ सात लाख का ही बना। वह भी नहीं मिला। मात्र 40 हजार नकद मिला। कहते हैं, कि कारोबार में तो उधार और नकद तो चलता रहता है, लेकिन उसे नहीं मालूम था, कि उधार देकर वह चाचा-भतीजा के चक्कर में फंस जाएगें। दो बार चेक का बाउंस होना यह साबित करता है, कि देने वाले की नीयत में खोट है। कहते हैं, कि उन्हें और उनकी पत्नी को तब सबसे अधिक तकलीफ हुई, जब अनूप खरे ने स्कूल में अपमानित किया, उसी के चलते हार्ट अटैक हुआ, लखनउ में कर्ज लेकर इलाज करवाया, तब जाकर जान बची। दोस्तों और डाक्टरों की सलाह पर ‘जान हैं, तो जहान हैं’ के तर्ज पर बकाया मांगना बंद कर दिया। कहते हैं, कि एक समय इलाज के दौरान ऐसा लगा कि वह अब नहीं बचेगें, लेकिन डाक्टरों ने बचा लिया। इतने सालों के कारोबार में जो झटका चाचा और भतीजा ने दिया, उतना किसी ने भी नहीं दिया। दुखी मन से कहते हैं, कि भगवान न करे, जीवन में कभी चाचा और भतीजा जैसा ग्राहक दुबारा मिले।

‘कैडर’ ही ‘नहीं’, ‘पार्टी’ भी ‘गुम’ हो ‘रही’!

बस्ती। ‘कहां गुम हो गए, पार्टी को षून्य से षिखर तक पहुंचाने वाले कैडर’ की खबर को भाजपा के उपेक्षित कैडर वाले नेता रवींद्र गौतम ने फेसबुक पर पोस्ट क्या किया, मानो कोई भूचाल सा आ गया। इस खबर ने मानो कैडर के लोगों के पुराने जख्मों को हरा कर दिया। अनेक कैडर के लोगोें ने फोन करके कहा कि एैसा लगता है, कि मानो जिले में पार्टी को बुलडोजर से ध्वस्त करने का प्रयास ऐसे लोग कर रहे हैं, जिनके पास संगठन का कोई पद नहीं, लेकिन यह जताना और दिखाना चाह रहे हैं, कि जिले में वही होगा जो हम चाहेगें, ऐसा भी नहीं कि इन्होंने जो कहा वह करके नहीं दिखाया, तभी तो इनके साथ में एक भी केैडर वाला नहीं हैं, जो हेैं, उनमें अधिकांष आयातित है। बहरहाल, पार्टी का अगर कोई बड़ा नेता सोषल मीडिया के कमेंट पर ध्यान देगा तो उसे लगेगा कि वाकई पार्टी पर बुलडोजर चलाने की तैयारी हो रही है। मीडिया बार-बार यह कहती आ रही है, कि अगर किसी नेता को अपने बारे में जानना हो तो सोषल मीडिया पर पूछ लीजिए, कि उनका अब तक कार्यकाल कैसा रहा? यकीन मानिए, नेताजी को सिर पकड़कर बैठ जाना पड़ेगा। फिर भी उनके साथ में रहने और चलने वाले आयातित लोग इसे विरोधी की साजिष बताने में नहीं हिचकेगें।


अगर सभी कमेंट को लिख दिया जाए तो अखबार भर जाएगा, इस लिए कुछ ही कमेंट बताए जा रहे है। यह उस तरह के कमेंट हैं, जिससे भाजपा के वर्तमान स्थित और जनता की सोच का पता चलता है। सिद्वार्थ श्रीवास्तवा लिखते हैं, कि गुम नहीं हो गए, एकांत में बैठकर मंथन कर रहे हैं, कि आयातित लोग कब गुलाटी मारकर दूसरी जगह जाए और संगठन आदेष दे कि पुराने झंडा ढ़ोने वाले आ जाए, नारा लगाने। राजनाथ श्रीवास्तव कहते हैं, कि अभी पार्टी को उनकी जरुरत नहीं हैं, पार्टी अभी दलबदलूओं के साथ मिलकर मलाई काटने में व्यस्त है। जब पार्टी 14 साल के बनवास में जाएगी तो ढ़ूढेगें। हरीष ओझा लिखते हैं, कि वो सिर्फ सत्ता दिलाने के लिए ही है, यूज एंड थ्रो वाली बीजेपी है, इन्हें कार्यकत्र्ता नहीं दलाल पसंद है। विजय द्विवेदी लिखते हैं, सबका साथ और सिर्फ अपना विकास, कार्यकत्र्ताओं का....। इस पर हरीष सिंह हसंते हुए 100 नंबर देते है। अवध न्यूज लाइव की ओर से लिखा गया कि अब षिखर से षून्य की तरफ....आगे भगवान जाने। प्रकाष चैधरी लिखते हैं, कि भाई साहब नमस्कार, काम करैय वाले कार्यकत्र्ता नहीं जीहजूरी वाले चाहीं। कमल किषोर षुक्ल लिखते हैं, कि सत्ता एक नषा है, इसी लिए चाणक्य जैसे हजारों ़ऋषी मुनी सत्ता से दूर रहकर राष्ट निर्माण में लगे रहें, सत्ता के कुछ स्वाभाविक गुणदोष होते हैं, जिस पर नियंत्रण नियंताओं को करना मूल कार्यकत्र्ता जीवन भर कार्यकत्र्ता रहता है, जबकि अन्य दलों से आए कार्यकत्र्ता वरिष्ठ नेता उसी दिन बन जाता है, और उसका सत्ता की मलाई पर स्वाभाविक रुप से अधिकार बन जाता है। कैडर के चतुरगुन राजभर का दर्द हैं, कि कथाकथित पार्टी के जिम्मेदार लोगों ने पार्टी की मजबूती के लिए काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि निष्ठावान समर्पित एवं लोकप्रिय कार्यकत्र्ताओं और नेताओं को कमजोर करने के लिए पूरी ताकत से काम कर रहे हैं। यह कारवां रुकने का नाम नहीं ले रहा है, कार्यकत्र्ताओं में अभी भी सही रुटीन पर जिम्मेदार लोगों से आषा कर रहा है, कि अच्छी षुरुआत करें, जिससे पार्टी को मजबूती मिले। देखना है, कि इसकी षुरुआत कब से होगी। सत्यब्रत सिंह लिखते हैं, कि कोई भी विषाल बृक्ष अपनी कमजोर दिखने वाली जड़ों से ही मजबूत होता है, यदि जड़ों की उपेक्षा की जाएगी तो उसकी स्थिरता पर प्रष्न चिन्हृ लगना स्वाभाविक है।

सबसे सही और सटीक कमेंट प्रमोद कुमार षुक्ल की ओर से आया, इन्होंने लिखा कि पहले भाजपा में अगर किसी कार्यक्रम में 100 लोगों को बुलाया जाता था, तो 20 आते थे, फिर 2013 में यह संख्या बढ़कर 30 हो गई, फिर जब केंद्र में भाजपा की सरकार बनी तो संख्या में तेजी से इजाफा हुआ, और 60-70 तक पहुंच गया। मगर जब 2017 में यूपी में भाजपा की सरकार बनी तो अचानक बिन बुलाए कार्यक्रमों में 100 की जगह 500 आने लगे, इस भीड़ में बेचारे षुरुआत वाले 20 अंतिम पक्ंित में पहुंच गए। यह जो 480 दिखते हैं, ऐसा लगता है, कि इनके बाप-दादा जनसंघ के समय संस्थापक सदस्य रहें हो, बेचारे 20 घर में जाकर बैठ जाते हैं, क्यों कि वो नए आयातित भाजपाईयों की तरह नौंटंकी नहीं कर सकते। सुमित षुक्ल लिखते हैं, कि भैया आज के युग में कार्यकत्र्ता नहीं बल्कि नेताओं को चापलूसी करने वाला चाहिए। संजय ओझा लिखते हैं, कि भाजपा में आने वाले लोग सिर्फ राजनीति करने वाले लोग नहीं है, वह राष्ट धर्म सर्वोपरि मानते हुए रुकते हैं, और लूटते भी है, दिक्कत उस टीम मैनेजमेंट से हैं, जिसमें संघ भाजपा समर्पित कैडर सेट नहीं हो पा रहा है, इसी लिए बिचैलिए नये नेता का तमगा हासिल कर चुके है। फेसबुक पर पोस्ट करने वाले भाजपा के रवींद्र गौतम के बारे में रामू गुप्त लिखते हैं, कि जब अपन जैसे कर्मठी ईमानदार लोगों को दरकिनार कर दिया गया तो अफर आपको भाजपा में रहने का कोई मतलब नहीं, भईया जब आप की बारी आई तब भी दरकिनार कर दिया गया, और जब तक आप की बारी नहीं आई थी, तब तक कहा गया कि इंतजार करो, कहते हैं, कि बुरा करने वालों के साथ भी बुरा होता है, यह जिले की जनता प्रत्यक्ष रुप से देख भी चुकी है, आप से ज्यादा गैरों पर भरोसा किया, जो विपक्ष से आए, उन्हें सबसे पहले प्राथमिकता दी गई। फिर दूसरे कमेंट में लिखते हैं, कि भाजपा को तो गुम होना ही था, गायघाट नगर पंचायत से टिकट आपको मिलना था, लेकिन वहां पर भी धोखा हुआ, ऐसे ही नगर पंचायत बनकटी का भी हाल है, बुरी तरह लोकसभा हारे, फिर उसी को जिलाध्यक्ष बना दिया जाता, पता नहीं कौन गुण देख बनाया। सर्वाजीत सिंह लिखते हैं, कि पार्टी में अब चरणवंदना और रुपया चल रहा हैं, 2027 में न हम रहेगें और न कोई भाजपा का विधायक ही रहेगा। राना प्रताप सिंह लिखते हैं, कि कैडर के गुम होने के बाद पार्टी गुम होने के रास्ते पर आ जाएगी। धमेंद्र जायसवाल कहते हैं, कि आप्रवासी नेता भाजपा में प्रवासी हो गएं है।, बस देखते जाइए, षून्य तक कौन रहता। सुनील पी यादव लिखते हैं, कि पहले वाली सरकार चोर थी, लेकिन अब की तो चंबल के डकैत। अविनाष सिंह लिखते हैं, कि षून्य से षिखर और फिर पतन की ओर।

‘जहर’ खा ‘लेना’ मगर ‘सूर्या’ हास्पिटल मत ‘जाना’

बस्ती। अगर कोई भुक्तभोगी मरीज सोषल मीडिया पर आकर लाइव में यह कहें, कि जहर खा लेना लेकिन सूर्या हास्पिटल मत जाना तो, समझ लेना चाहिए, यह अस्पताल क्यों पूरे प्रदेष में इतना बदनाम है? सूर्या अस्पताल से मरीजों को बचाने के लिए जिस तरह से कारोबारी हेंमत लोगों से यह अपील कर रहे हैं, कि मेरे वीडियो को खूब वायरल करो, ताकि किसी मरीज को सूर्या अस्पताल से बचाया जा सके। कहते हैं, कि सात दुष्मनों को भी इस अस्पताल में मत ले जाना, वरना मरीज कभी अपने पैरों पर नहीं चल सकेंगा। दुनिया में किसी भी आथर््ाि के सर्जन के पास चले जाना लेकिन सूर्या वाले के पास मत जाना। इस अस्पताल के बारे में अपना अनुभव बताते हुए कहते हैं, कि इस अस्पताल के डाक्टर भगवान नहीं राक्षस है। ठग नहीं महाठग है। कहते हैं, कि यह देष का पहला ऐसा डाक्टर होगा, जिसके पर्चे में पहले ही दवा लिखी रहती है, यह जेनरिक दवाओं को पेटेंड के दर में मरीजों को देता है। इस अस्पताल में मरीजों का जितना षोषण होता है, उतना षायद ही किसी अस्पताल में होता होगा, इसी लिए उपभोक्ता फोरम में सबसे अधिक मुकदमा इसी अस्पताल के डाक्टर्स पर चल रहे है। हर्जाना और जुर्माना भी सबसे अधिक इसी अस्पताल पर लगता है।


वायरल वीडियो में कह रहे हैं, इस अस्पताल वाले उनके पैर को ही छोटा कर दिया, मछली बाजार की तरह इस अस्पताल में मरीजों को लेटाया जाता है, डिल मषीन से छेद किया जाता है। कहते हैं, कि छह माह बाद पता चला कि उनके पैर की हडडी तो जोड़ी ही नहीं गई, फैजाबाद गया, वहां के डाक्टर बड़ी मुस्किल से इलाज और आपरेषन करने को तैयार हुए, यहां के डाक्टरों ने भी कहा कि उनके पास सूर्या अस्पताल के ही खराब किए मरीज आते है। हडडी तो जुड़ गई, लेकिन एक पैर छोटा हो गया, उसके बाद हमने अपने मैनेजर को बहुत समझाया लेकिन पिता का आपरेषन करवाने सूर्या में चला गया, पता चला कि पैर ही खराब कर दिया, अब उन्हें दो लोग पकड़कर ले जाते है। आपरेषन के बाद जिस मरीज को अपने पैर में चलना चाहिए, उनमें अधिकांष को बैसागी के सहारे चलना पड़ रहा है। सस्ता समझकर लोग इनके यहां आपरेषन कराने चले जाते हैं, लेकिन आपरेषन के बाद मरीज और उनके परिजन को पता चलता है, कि यह अस्पताल सस्ता है, या फिर मंहगा। इस अस्पताल में सबसे अधिक अजूबे होते हैं, किसी की हडडी का आपरेषन किसी और जगह कर दिया जाता है, आपरेषन के दौरान कैचीं और रुई रह जाना आम बात है। इस अस्पताल में सबसे अधिक लूटपाट होती है। यहां पर मरीजों को मरीज नहीं बल्कि सोने की अंडा देने वाली मुर्गी समझा जाता है। जबतक मरीज और परिजन कंगाल नहीं हो जाते हैं, तब तक यह डिस्चार्ज नहीं करते। चूंकि सबसे पुराने अस्पतालों में इसका नाम होता है, और जिला अस्पताल के पास है, इस लिए अंजाने में मरीज चले जाते हैं, और जो एक बार चला गया, समझो वह बाद में अपनी किस्मत पर रोएगा। इस अस्पताल में पैसे की बरसात होती है, फिर संवेदनषीलता और मानवता नाम की कोई चीज नहीं है। पहले पिता पर आरोप लगता था, और अब पुत्र पर लापरवाही और मरीजों का षोषण करने का आरोप मरीज और उनके परिजन लगा रहे है।

20 ‘हजार’ देने पर ही ‘ऋषभ सोनकर’ फोटो ‘खींचता’!

बस्ती। भ्रष्टाचार के मामले में चर्चित नगर पंचायत मुंडेरवा में प्रधानमन्त्री शहरी आवास योजना के लाभार्थियों का फोटो सीएलसीसी (अटैच नगर पंचायत मुण्डेरवा) ऋषभ सोनकर तभी खंीचते हैं, जब उन्हें लाभार्थी 20 हजार देता है। अगर एक फोटो खींचाई का 20 हजार रेट हैं, तो आवास का रेट कितना होगा, इसे आसानी से समझा जा सकता है। चूंकि इस 20 हजार में डूडा के पीओ से लेकर बाबू तक का हिस्सा रहता है, इस लिए कोई बोलता नही। पीएम आवास के नाम पर जिस तरह डूडा में लूट मची हुई हैं, उसकी षिकायत भारतीय जनता पार्टी बस्ती सदर विधानसभा क्षेत्र के मुण्डेरवा के मण्डल अध्यक्ष सर्वजीत भारती ने की है। षिकायता उस डूडा कार्यालय के परियोजना अधिकारी से की गई हैं, जो खुद हिस्सेदार हों। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है, कि क्यों पीएम आवास में भ्रष्टाचार नहीं रुक रहा है। षिकायत में प्रधानमन्त्री शहरी आवास योजना 2.0 में व्याप्त आर्थिक भ्रष्टाचार को रोकने और दोषियों के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही की मांग की गई है।

कहा है कि सांगठनिक कार्य हेतु नगर पंचायत मुण्डेरवा में भ्रमण के दौरान उन्हे बताया गया कि प्रधानमन्त्री आवास शहरी योजना 2.0 में पात्र लाभार्थियो से उनके द्वारा फोटो खीचने के नाम पर लगभग 20 हजार रुपये सीएलसीसी (अटैच नगर पंचायत मुण्डेरवा) ऋषभ सोनकर द्वारा लिया जा रहा है और जिन लाभार्थियो का पैसा नही मिल रहा है उनका अभी तक जिओ टैग नहीं खीचा गया और कहते है कि व्यवस्था के बिना जिओ टैग नही हो पायेगा। इस कर्मी के कृत्य से सरकार की मंशा व छवि धूमिल हो रही है इसलिये उक्त कर्मी की सम्बद्धता नगर पंचायत मुण्डेरवा से समाप्त करते हुए किसी दूसरे कर्मी की तैनाती की जाय जिससे सरकार की मंशानुरुप हर अन्तिम पात्र व्यक्ति तक लाभ पहुंच सके।

‘भ्रष्ट’ नेताओं और ‘पूंजीवादी’ नीति की ‘देन’ वाल्टरगंज ‘मिल’

बस्ती। भ्रष्ट नेताओं जनप्रतिनिधियों जिला प्रशासन व सरकार की पूंजीवादी नीति व उद्योगपतियों से सांठगांठ के चलते बस्ती के विकास पर ग्रहण लगा बस्ती के रुलिंग पार्टी के नेताओं ने परोक्ष अपरोक्ष रूप से नीजि लाभ स्वार्थ में सैकड़ों सैकड़ों कर्मचारियों के हितों और जिले के विकास को तिलांजलि दे दी। बस्ती जनपद के वाल्टरगंज चीनी मिल बिना किसी नोटिस सूचना के नियम विपरीत गैर कानूनी तरीके से बंद कर दी गई। हजारों हजारों किसान और लगभग 400-500 कर्मचारियों का रोजी रोजगार चला गया वर्ष 2018 से कर्मचारियों का बकाया भुगतान नहीं दिया जा रहा है मिल श्रमिकों का धरना जारी है और मांग निस्तारण होने तक जारी रहेगा। बड़े दुःख की बात है कि सत्ता के पदासीन धन लोभी विकास, रोजगार विरोधी तथाकथित नेता व प्रशासन में बैठे उद्योगपति पूंजीपति हितैषी बेरोजगार हुए कर्मचारियों के अंतिम निवाले को निगलने में लगे हैं। यह धमकी नहीं चेतावनी भी है यदि कोई नेता दलाल धरना हटाने व हटवाने को सपने में भी सोचा तो वह गंभीर परिणाम भुगतने को तैयार रहे। जायज मांगों को जायज तरीके से हल करो बकाया भुगतान करो मिल चलाओ।


चीनी मिल वाल्टरगंज के धरनारत मौसमी कर्मचारियों ने सरकार शासन प्रशासन की कटु निंदा करते हुए उद्योगपतियों पूंजीपतियों की दलाली करने वाले जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों को अगाह करते हुए कहा कि यदि किसी ने चीनी मिल कटवाने के लिए व बिना मौसमी कर्मचारियों के बकाया देयक सहित का हल निकले चीनी मिल की तरफ कदम बढ़ाया तो उनका पैर फिर कदम बढ़ाने लायक नहीं रहेगा।मनीष चैधरी मिल श्रमिक ने कहा है कि जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चैधरी मिल कटवा कर बेचवाने में लगे हैं ऐ अपने आदत से बाज नहीं आए तो इनको मकबूल जवाब दिया जाएगा। रोस्टर के हिसाब से आज धरने पर विकास सिंह, सुनील विष्णु राव, प्रदीप राव, संजय सिंह, मुकेश श्रीवास्तव, चंद्रिका प्रसाद यादव, ददन सिंह, योगेन्द्र यादव, सहित तमाम किसान, व्यापारी व चीनी मिल बचाओ मुक्ति मोर्चा के लोग धरना रत रहे।

2312 ‘बूथों’ पर ‘भाजपाईयों’ ने ‘अंबेडकर’ को दी ‘श्रद्वांजलि’

बस्ती। भारतीय जनता पार्टी की ओर से बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर जिले के सभी बूथों पर श्रद्धांजलि एवं विचार-गोष्ठी कार्यक्रम आयोजित किए गए। भाजपा जिला अध्यक्ष विवेकानंद मिश्र ने तिलकपुर बूथ पर और असम के प्रभारी व पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी ने कटया (रतासगड़) बूथ पर कार्यकर्ताओं के साथ बाबासाहेब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।


इसी क्रम में पूर्व विधायक दयाराम चैधरी, संजय जायसवाल, संजय चैधरी, नेहा वर्मा, नीलम सिंह, अभिषेक कुमार, पार्टी पदाधिकारी भानु प्रकाश मिश्र, अमृत वर्मा, अखंड सिंह, दिलीप पांडे, सुनील सिंह, विनय भारद्वाज, प्रदीप निषाद, अजय पाल सिंह सहित 2312 बूथ अध्यक्षों ने अपने-अपने बूथों पर कार्यकर्ताओं के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की। विभिन्न बूथों पर आयोजित कार्यक्रमों में बाबासाहेब के जीवन, संघर्ष और योगदान पर सारगर्भित चर्चा की गई। साथ ही कार्यकर्ताओं ने भारतीय संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ कर संविधान के मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। डॉ. अंबेडकर के विचारकृसमानता, न्याय, स्वतंत्रता और आत्मसम्मानकृआज भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं ने समाज में समरसता, सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने के संकल्प के साथ निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया।

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