‘गुरुजी’ पढ़ाना ‘छोड़िए’, ‘जाइए’ कुत्ता ‘पकड़िए’
‘गुरुजी’ पढ़ाना ‘छोड़िए’, ‘जाइए’ कुत्ता ‘पकड़िए’ बस्ती। जिले के हजारों गुरुजी के लिए खुष करने वाली खबर कहें या अपमानित होने वाली। अब उन्हें बच्चों को पढ़ाना नहीं पड़ेगा, बल्कि कुत्ता पकड़ना होगा। गुरुजी बच्चों को पढ़ाने के बजाए अब कुत्ता पकड़ेगें। यह हम नहीं बल्कि सरकार कह रही है। अगर नहीं पकड़े तो निलंबन तक की कार्रवाई हो सकती है। सवाल उठ रहा है, बच्चों को पढ़ाना जरुरी है, कि कुत्ता पकड़ना। सरकार की निगाह में तो पढ़ाना उतना जरुरी नहीं जितना कुत्ता पकड़ना जरुरी। आखिर सरकार गुरुजी लोगों को समझती क्या? जो काम सफाई कर्मी और नगर निकाय का हैं, सरकार उस काम को षिक्षकों से करवाना चाहती है। सवाल उठ रहा है, कि क्यों सरकार गुरुजी लोगों को हीनभावना से ग्रसित करना चाहती? जिन गुरुजी को समाज सबसे अधिक सम्मान देता है। सरकार उन्हीं से कुत्ता पकड़वा रही। गुरुजी कुत्ता पकड़ने लगेंगे तो समाज में उनकी क्या इज्जत रह जाएगी? ऐसे में क्या बच्चे गुरुजी का पैर छुकर आर्षीवाद लेगें? समाज से सबसे अधिक गुरुजी लोगों की बदनामी होगी, परिवार के सामने अपमानित होना पड़ेगा, पत्नियां कभी नहीं चाहेगी कि समाज उनके पति को कुत्ता पकड़ने व...