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‘गुरुजी’ पढ़ाना ‘छोड़िए’, ‘जाइए’ कुत्ता ‘पकड़िए’

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 ‘गुरुजी’ पढ़ाना ‘छोड़िए’, ‘जाइए’ कुत्ता ‘पकड़िए’ बस्ती। जिले के हजारों गुरुजी के लिए खुष करने वाली खबर कहें या अपमानित होने वाली। अब उन्हें बच्चों को पढ़ाना नहीं पड़ेगा, बल्कि कुत्ता पकड़ना होगा। गुरुजी बच्चों को पढ़ाने के बजाए अब कुत्ता पकड़ेगें। यह हम नहीं बल्कि सरकार कह रही है। अगर नहीं पकड़े तो निलंबन तक की कार्रवाई हो सकती है। सवाल उठ रहा है, बच्चों को पढ़ाना जरुरी है, कि कुत्ता पकड़ना। सरकार की निगाह में तो पढ़ाना उतना जरुरी नहीं जितना कुत्ता पकड़ना जरुरी। आखिर सरकार गुरुजी लोगों को समझती क्या? जो काम सफाई कर्मी और नगर निकाय का हैं, सरकार उस काम को षिक्षकों से करवाना चाहती है। सवाल उठ रहा है, कि क्यों सरकार गुरुजी लोगों को हीनभावना से ग्रसित करना चाहती? जिन गुरुजी को समाज सबसे अधिक सम्मान देता है। सरकार उन्हीं से कुत्ता पकड़वा रही। गुरुजी कुत्ता पकड़ने लगेंगे तो समाज में उनकी क्या इज्जत रह जाएगी? ऐसे में क्या बच्चे गुरुजी का पैर छुकर आर्षीवाद लेगें? समाज से सबसे अधिक गुरुजी लोगों की बदनामी होगी, परिवार के सामने अपमानित होना पड़ेगा, पत्नियां कभी नहीं चाहेगी कि समाज उनके पति को कुत्ता पकड़ने व...

24’ में भी ‘लूटा’, ‘25’ में भी ‘लूटा’, ‘26’ में भी ‘लूटेगें’!

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 ‘24’ में भी ‘लूटा’, ‘25’ में भी ‘लूटा’, ‘26’ में भी ‘लूटेगें’! बस्ती। पिछले कई सालों से भ्रष्टाचारियों के नाम रहता आ रहा साल। इन लोगों ने 24 में भी लूटा, 25 में भी लूटा और 26 में भी लूटेगें। जिले को लूटने की इन लोगों की आदत सी पड़ गई, जब तक यह लोग जिले को पूरी तरह लूट नहीं लेगें, तब तक इनका लूटने का सिलसिला जारी रहेगा। साल तो बदल जाते हैं, लेकिन जिले को लूटने वाले नहीं बदलते। पूरे साल सदन से लेकर सड़क तक, ग्राम पंचायत से लेकर जिला पंचायत तक और ब्लॉक से लेकर विकास भवन तक सिर्फ और सिर्फ भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों का ही बोलबाला रहा। यही स्थित बीडीए की भी रही, यहां पर तो पूरी तरह भ्रष्टाचारियों का कब्जा रहा। लूटने पाटने का जो सिलसिला आज से आठ साल पहले षुरु हुआ, वह आज भी हो रहा। यहां के चार-पांच मेट, प्रभारी एक्सईएन, एई और जेई मिलकर हजारों भवन स्वामियों को इतना लूटा कि वे कंगाल हो गए। भवन की लागत से अधिक उनका चढ़ावा में चला गया। नगर पंचायतों में तो मानो लूटने की खुली छूट रही हो। जो लोग अपने आप को ईमानदार कहते हुए नहीं थकते थे, उन्हीं लोगों ने सबसे अधिक लूटपाट किया। रही बात क्षेत्र पंचाय...

आयुक्त साहब’ जांच तो ‘करवाइए’, किसके ‘आदेश’ पर ‘दर्जनों’ सील ‘तोड़े’ गए!

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‘आयुक्त साहब’ जांच तो ‘करवाइए’, किसके ‘आदेश’ पर ‘दर्जनों’ सील ‘तोड़े’ गए! बस्ती। ईमानदार जेई अनिल कुमार त्यागी का तबादला क्या हुआ, जैसे बीडीए के भ्रष्ट लोगों की लाटरी लग गई। जैसे ही जेई ने जिला छोड़ा, उसके दूसरे दिन 20 से 25 सील, भवन को बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेष के तोड़ दिए गए, या फिर पैसा लेकर तोड़वा दिया गया। इतना ही नहीं पैसा लेकर अनगिनत अवैध निर्माण भी करवाए जा रहे है। जेई से एई बने और एक्सईएन का प्रभार लिए हरिओम गुप्ता पर भी वही आरोप लग रहे हैं, जो कभी पंकज पांडेय और संदीप कुमार पर लगा करते थे। इन्हीं के ही कार्यकाल में अवैध निर्माण भी हो रहा है, और सील किए भवन भी खोले जा रहे है। उक्त सभी अवैध निर्माण को जेई की रिपोर्ट पर सील किया गया था। ध्यान देने और जांच का विषय यह है, कि अभी भी कागजों में दर्जनों अवैध भवन सील है। जांच का विषय यह है, कि यह सील किसके आदेष पर तोड़े गए, मान लीजिए कि सील को भवन निर्माणकर्त्ता ने तोड़ा, तो फिर बीडीए ने सील तोड़ने के आरोप में अवैध निर्माण करने वाले भवन स्वामियों के खिलाफ मुकदमा क्यों नहीं दर्ज कराया? और क्यों नहीं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई? सबसे बड़...

ईमानदार’ जेई को ‘चोटें’, ‘भ्रष्ट’ एक्सईएन को ‘नोटें’

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 ‘ईमानदार’ जेई को ‘चोटें’, ‘भ्रष्ट’ एक्सईएन को ‘नोटें’ बस्ती। बीडीए के तत्कालीन जेई अनिल कुमार त्यागी को जहां उनके ईमानदारी के लिए याद किया जाएगा, वहीं तत्कालीन एक्सईएन पंकज पांडेय को उनकी बेईमानी के लिए जाना जाएगा। एक ही विभाग के दो अधिकारी, एक ने ईमानदारी का मिसाल प्रस्तुत किया, तो दूसरे ने भ्रष्टाचार के नए मापदंड स्थापित किया। भ्रष्ट एक्सईएन को जहां नोटें मिली, वहीं ईमानदार जेई को चोटें। ईमानदार जेई जहां अपने साथ चोटों का जख्म लेकर गए, वहीं भ्रष्ट एक्सईएन नोटों के बंडल के साथ गए। ईमानदार जेई की कोई बिदाई नहीं हुई, और भ्रष्ट एक्सइएन को फूल माला पहनाकर बिदाई दी गई। यह है, बीडीए के भ्रष्ट एक्सईएन और ईमानदार जेई के बीच का अंतर। एक भी अवैध निर्माण करने वाले ने जेई की ईमानदारी को नहीं सराहा, वहीें भ्रष्ट एक्सईएन को न सिर्फ पल्कों पर बैठाया, बल्कि नोटों की गडडी से भी नवाजा। जेई को जहां उनकी ईमानदारी की सजा जांच के रुप में मिली, वहीं बेईमान एक्सईएन को प्रमोषन मिला। बीडीए के लोग ईमानदार जेई को नहीं बल्कि बेईमान एक्सइएन को बहुत याद करते। ईमानदार जेई चिल्लाता रहा कि उसके उपर तीन बार कार्या...

बेनकाब’ हो गया ‘बीडीए’ को ‘लूटने’ वाला ‘गैंग’!

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 ‘बेनकाब’ हो गया ‘बीडीए’ को ‘लूटने’ वाला ‘गैंग’! बस्ती। अगर बीडीए का सचिव ही भ्रष्टाचार करने वाले गैंग का लीडर बन जाएगें और उसके संरक्षक उपाध्यक्ष होगें तो बीडीए को भ्रष्टाचार से मुक्त और भवन स्वामियों को भ्रष्टाचारियों से कौन बचाएगा? बीडीए के इतिहास में लिखा जाएगा कि तत्कालीन बीडीए के सचिव एंव एडीएम कमलेष चंद्र, एक्सईएन पंकज पांडेय, एक्सईएन स्ंादीप कुमार, एई अरुण कुमार, जेई आरसी षुक्ल, मुख्य लिपिक महेंद्र सोलकी, कमलेष मिश्र एवं अवनीष सहित अन्य ने मिलकर एक ईमानदार जेई अनिल कुमार त्यागी को अपने रास्ते से हटाने के लिए साजिष रची, ताकि लूटपाट का सिलसिला चलता रहें। काली कमाई के रास्ते में रोड़ा बन चुके इस जेई को इन लोगों ने मिलकर इतना प्रताड़ित किया कि वीआरएस लेेने को मजबूर होना पड़ा। अनेकों बार मारपीट और हमले तक करवाए गए, काली कमाई का भेद न खुल जाए, इस लिए मारपीटकर मोबाइल तक छीन लिया। फर्जी आरोप लगाकर षासन से जांच तक करवा दिया, और यह सब कुछ इस लिए किया, ताकि गैंग को लूटने की खुली आजादी मिल सके। गैंग के लोगों ने कमाया तो करोड़ों, लेकिन यह सब मिलकर भी एक ईमानदार जेई अनिल त्यागी का कुछ नहीं ब...

मंत्री’ ने कहा कि ‘खाद’ की ‘कालाबाजारी’ हो रही, ‘सांसद’ ने कहा नहीं हो ‘रही’!

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 ‘मंत्री’ ने कहा कि ‘खाद’ की ‘कालाबाजारी’ हो रही, ‘सांसद’ ने कहा नहीं हो ‘रही’! बस्ती। जनप्रतिनिधियों को धान और खाद के घोटालेबाज इतना प्रिय होते हैं, कि सांसद से लेकर विधायक तक इनके पक्ष में खड़े नजर आते है। भले ही किसान चाहें जितना चिल्लाता और रोता रहे, लेकिन माननीयों के सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता, मानो इन्हें किसानों ने नहीं बल्कि घोटालेबाजों ने सांसद और विधायक बनाया हो। मंडल का किसान एक-एक बोरी खाद के लिए घंटों लाइन में लगा रहता, एक-एक बोरी के लिए रोता है, फिर भी उसे खाद नहीं मिलता, खाद की कालाबाजारी करने वाले खुले आम गोरखधंधा कर रहे हैं, लेकिन न जाने क्यों माननीयों को गांरखधंधा दिखाई नहीं देता, डेली हजारों बोरी खाद बार्डर पार होती है, लेकिन न तो सांसद और न विधायक ही बोलते नजर आते। यह लोग किसानों के प्रति इतना संवेदनहीन और खाद की कालाबाजारी करने वालों के संवेदनषील हो गए हैं, कि यह मंत्री तक को झूठा साबित करने में लगें रहते हैं। कृषि मंत्री कह रहे हैं, कि जनपद सिद्धार्थनगर में खाद की कालाबाजारी हो रही, खाद बार्डर पार नेपाल जा रहा हैं, लेकिन सांसदजी का बयान आता है, कि कोई कालाबाजार...