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क्यों ‘होम्योपैथ’ का ‘नामोनिषान’ मिटाना चाहते ‘सीएमओ’!

 क्यों ‘होम्योपैथ’ का ‘नामोनिशान’ मिटाना चाहते ‘सीएमओ’! बस्ती। ऐसा लगता है, मानो बस्ती के सीएमओ जिले से होम्योपैथ का नामोनिषान ही मिटा देना चाहते हैं। प्रदेष का बस्ती पहला ऐसा जिला जहां पर होम्योपैथ दवाओं के नाम पर हर साल भारी भरकम बजट सीएमओ को मिलता है, लेकिन दवाएं नहीं खरीदी जाती, जब भी पूछो तो जबाव मिलता है, कि इस सप्ताह दवा आ जाएगीं, यही जबाव पिछले चार साल से मिल रहा है। बजट तो भारी भरीकम मिलता लेकिन सीएमओ एक रुपया कि दवा नहीं खरीदते। सवाल उठ रहा है, कि जब दवा के नाम पर लाखों रुपया आ रहे हैं तो क्यों नहीं दवाएं खरीदी जा रही है? आखिर पैसे जा कहां रहे हैं,? जाहिर सी बात हैं, पैसे का बंदरबांट हो रहा है, अगर नहीं होता तो जिले के सरकारी अस्पतालों में दवांए उपलब्ध होती। मामला ‘दिषा’ का और जिले के प्रभारी मंत्री की बैठक में भी उठ चुका, लेकिन सीएमओ हर बार कोई न कोई बहाना बनाते आ रहंे हैं। इस मामले में न तो स्थानीय प्रषासन ने और न जनप्रतिनिधियों ने ही कोई प्रभावी कदम उठाया। स्थानीय प्रषासन ने भी इतने बड़े घोटाले पर पिछले चार सालों से चुप्पी साधे हुए है। न तो सपा के सांसद और न सपा के तीन ...

नियम-कानून’ जानिए, ‘ब्याज माफियों’ को जेल ‘भेजवाइए’

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 ‘नियम-कानून’ जानिए, ‘ब्याज माफियों’ को जेल ‘भेजवाइए’ बस्ती। कानून के जानकार अधिवक्ता अनिल कहते हैं, कि जिस दिन ब्याज पर कर्ज लेने वालों को नियम और कानून की जानकारी हो जाएगी, उस दिन ब्याज माफिया जेल में नजर आएगंे। कहते हैं, कि जानकारी के अभाव में ही आज ब्याज माफिया के चक्रव्यू में फंसकर अब तक न जाने कितने परिवार बर्बाद हो चुकें, और न जाने कितनों ने आत्म हत्या कर ली, उसके बाद भी अवैध कारोबार फलफूल रहा है। ब्याज के पैसे से लोग चुनाव लड़ने की तैयारी तक कर रहे है। इनमें सबसे बड़ा ब्याज माफिया का नाम भी षामिल है। कहते हैं, जिले के अंतिम मनी लैंडर का लाइसेंस 1980 तक कालीदीन चौधरी के पास रहा। उसके बाद किसी को भी मनी लैंडर यानि ब्याज पर कर्ज देने का लाइसेंस नहीं मिला। आरबीआई की गाइड लाइन के तहत एक फीसद भी अधिक ब्याज लाइसेंसधारक नहीं ले सकता। अगर सालाना 12-13 फीसद ब्याज दर है, तो 13-14 फीसद कोई नहीं ले सकता। लेकिन आज का ब्याज माफिया तो माह 13 और सालाना 133 फीसद ब्याज ले रहा है। किस व्यक्ति को कितने ब्याज पर कितना रुपया दिया, उसने साल भर में कितना लौटाया और कितना अवषेष रह गया का हिसाब-किताब रख...

बाप’ ने ‘बेटी’ से मांगा ‘दस’ फीसद ‘बखरा’

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‘बाप’ ने ‘बेटी’ से मांगा ‘दस’ फीसद ‘बखरा’ बस्ती। योगीजी सुन और देख लीजिए, भ्रष्टाचार इतना बढ़ गया कि बाप अपने सगी बेटी से कमीषन मांग रहा है, कह रहा है, कि जब तक दस फीसद यानि 3.60 लाख कमीषन नहीं दोगी, तब तक पेंषन की फाइल नहीं भेजूंगा। बेटी, छह साल से पेंषन के लिए बाप/मैनेजर के पास दौड़ती रही, गरीबी का हवाला दिया, हाथ जोड़े, कई बार बाप के सामने रोई भी, लेकिन कलयुगी बाप का दिल अपनी बेटी के लिए नहीं पिघला, बखरा पर अड़ा रहा।। कहा कि चाहें जितना रोओ और चाहें जहां जाओ जब तक बखरा नहीं दोगी, तब तक पेंषन नहीं मिलेगा। थकहारकर बेटी हाईकोर्ट गई, वहां से मैनेजर को दो माह में पेंषन निस्तारण करने का आदेष हुआ। बेटी, कोर्ट का आदेष लेकर खुषी-खुषी यह सोचकर पिता के पास गई कि अब तो पेंषन की फाइल भेजवा देगें। लेकिन पिता ठहरे कलयुगी बाप, उन्होंने हाईकोर्ट का आदेष और बेटी का प्रत्यावेदन दोनों लेने से ही इंकार कर दिया, मजबूरी में बेटी को पंजीकृत डाक से भेजना पड़ा। क्या आप लोग ऐसे बेरहम पिता/मैनेजर देखा होगा, जिसने बेटी को छह साल तक पारिवारिक पेंषन के लिए इस लिए दौड़ाता रहा, क्यों कि बेटी बखरा नहीं दे रही थी। सवाल उठ...

‘अब्बा’ ने ‘बेटी’ से कहा ‘कमीशन’ दोगी तभी ‘पेंशन’ पाओगी!

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 ‘अब्बा’ ने ‘बेटी’ से कहा ‘कमीशन’ दोगी तभी ‘पेंशन’ पाओगी! बस्ती। योगीजी सुन और देख लीजिए, भ्रष्टाचार इतना बढ़ गया कि बाप अपने सगी बेटी से कमीषन मांग रहा है, कह रहा है, कि जब तक दस फीसद यानि 3.60 लाख कमीषन नहीं दोगी, तब तक पेंषन की फाइल नहीं भेजूंगा। बेटी, छह साल से पेंषन के लिए अब्बा/मैनेजर के पास दौड़ती रही, गरीबी का हवाला दिया, हाथ जोड़े, कई बार अब्बा के सामने रोई भी, लेकिन कलयुगी अब्बा का दिल अपनी बेटी के लिए नहीं पिघला। कहा कि चाहें जितना रोओ और चाहें जहां जाओ जब तक कमीषन नहीं दोगी, तब तक पेंषन नहीं मिलेगा। थकहारकर बेटी हाईकोर्ट गई, वहां से मैनेजर को दो माह में पेंषन निस्तारण करने का आदेष हुआ। बेटी, कोर्ट का आदेष लेकर खुषी-खुषी यह सोचकर गई कि अब तो अब्बाजान मान जाएगें, और पेंषन की फाइल भेजवा देगें। लेकिन अब्बा ठहरे कलयुगी अब्बा, उन्होंने हाईकोर्ट का आदेष और बेटी का प्रत्यावेदन दोनों लेने से ही इंकार कर दिया, मजबूरी में बेटी को पंजीकृत डाक से भेजना पड़ा। क्या आप लोग ऐसे बेरहमदिल पिता/मैनेजर देखा होगा, जिसने बेटी को छह साल तक पारिवारिक पेंषन के लिए इस लिए दौड़ाता रहा, क्यों कि बेटी कम...

अपमान ‘हरीश द्विवेदी’ का नहीं ‘संजय चौधरी’ का ‘हुआ’

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अपमान ‘हरीश द्विवेदी’ का नहीं ‘संजय चौधरी’ का ‘हुआ’ बस्ती। नवागत भाजपा प्रदेष अध्यक्ष का पहले गोरखपुर के प्रथम आगमन और दूसरा बनारस के प्रथम आगमन पर जो स्वागत हुआ, उसमंे भारी अंतर देखने को मिला। गोरखपुर और बनारस के स्वागत को देखकर कहा जा सकता कि बस्ती वालों ने बाजी मार ली। षानदार और जानदार स्वागत पूर्व सांसद हरीष द्विवेदी की अगुवाई में गोरखपुर में बस्ती के अंसख्य भाजपाईयों ने किया। जितना जिंदाबाद का नारा पंकज चौधरी का लगा, उतना ही हरीष द्विवेदी का भी लगा। पंकज चौधरी ने हरीष द्विवेदी को पूरा सम्मान भी दिया, यह कहना गलत हैं, कि पंकज ने हरीष का माला ठुकराकर उनका अपमान किया। जिस किसी ने भी वीडियो को ध्यान से देखा होगा, और कई बार देखा होगा, वह कभी नहीं कहेगें, कि हरीषजी का अपमान हुआ। जिंदाबाद का नारा लगाकर पंकजजी के वाहन के साथ भीड़ में जब हरीषजी पैदल चल रहे थे, तब पंकजजी ने बाउंसर को हरीषजी को वाहन में बुलाने का ईषारा किया, वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है, कि बाउंसर हरीषजी को पकड़कर उपर खींच रहे हैंे, लेकिन भीड़ इतनी अधिाक थी, कि चाहकर भी बांउसर हरीषजी को पंकजजी के पास नहीं ले जा पाए। माला भी इस ...

थोक’ में बिका ‘सीएमओ’ का ‘जमीर’ और ‘ईमान’

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 ‘थोक’ में बिका ‘सीएमओ’ का ‘जमीर’ और ‘ईमान’! बस्ती। डा. राजीव निगम प्रदेष के पहले ऐसे सीएमओ होगें, जिन्होंने अपने ही एमओआईसी के बच्चे की मौत का सौदा किया। पैसे के लिए सीएमओ ने अपनी जमीर और ईमान को ही नहीं बेचा, बल्कि जांच में षामिल डा. अषोक चौधरी, डा. रवीेंद्र वर्मा और डा. मौर्या ने भी ईमान, धर्म और जमीर तीनों का सौदा किया। इन लोगों ने अपने पेषे के गददारी तो किया ही साथ में कप्तानगंज सीएचसी के एमओआईसी डा. अनूप चौधरी और उनकी पत्नी का सीना भी छलनी किया। एमओआईसी यह चिल्लाते रह गए, कि अगर उसके बच्चे के मौत के जिम्मेदार पीएमसी के लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकते थे, तो कम से कम अस्पताल को एक दिन के लिए सीज तो कर दीजिए, कम से कम मुझे और मेरी पत्नी को इतना तो सकून मिलेगा, कि उसके विभाग के लोगों ने साथ दिया। लेकिन कार्रवाई करने के बजाए उल्टा एमओआईसी को ही सीएमओ धमकाने लगे कि अगर अधिक बोले तो तबादला कर दूंगा, किसी आरोप में फंसा कर कार्रवाई करवा दूंगा। डा. अनूप चौधरी की किसी ने भी नहीं, अलबत्ता धन उगाही करते रहें, अधिक धन उगाही के लिए खुद सीएमओ ने एमओआईसी से कहा कि आप एक रिपोर्ट बनाकर दी...

बीडीए’ के भ्रष्टाचारी ‘राजकिशोर सिंह’ को ‘भगवान’ मानते!

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 ‘बीडीए’ के भ्रष्टाचारी ‘राजकिशोर सिंह’ को ‘भगवान’ मानते! बस्ती। सुनने में अजीब लग रहा होगा, लेकिन यह सच हैं, कि ‘बीडीए’ के भ्रष्टाचारी ‘राजकिषोर सिंह’ को अपना भगवान ‘मानते’ है। इन लोगों का कहना और मानना है, कि पूर्व कैबिनेट मंत्री राजकिषोर सिंह हम लोगों के लिए भगवान से कम नहीं हैं, क्यों कि इन्हीें चलते हम लोगों को करोड़पति बननेे का मौका मिला। आप लोगों ने पहली बार सुना होगा कि बीडीए को लूटने वाले भ्रष्टाचारियों ने इसके लिए पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं भाजपा नेता राजकिषोर सिंह को नए साल की बधाई देते हुए यह कहा कि अगर यह न होते तो हम लोग न कभी मालामाल हो पाते और न कभी बीडीए को बर्बाद ही कर पाते। दुनिया का यह पहला नये साल की बधाई होगी, जहां पर भ्रष्टाचारी पूर्व कैबिनेट मंत्री राजकिषोर को इस लिए बधाई दे रहे हैं, क्यों कि इन्होंने भ्रष्टाचारियों को खुलकर लूटने का मौका दिया। बीडीए को बर्बाद करने वाले गलत नहीं कह रहे हैं, कि अगर राजकिषोर सिंह बीडीए को न बनवाते तो उनका खजाना न भर पाता, और न कभी जीवन में कभी नोटों से भरा ब्रीफकेष उनके पास ही होता। जब-जब बीडीए की बात चलेगी, तब-तब पूर्व कैबिनेट म...