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किसने ‘गांजा’ तस्कर ‘दीपक चैहान’ को ‘सभासद’ बनाया?

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किसने ‘गांजा’ तस्कर ‘दीपक चैहान’ को ‘सभासद’ बनाया? बस्ती। सवाल उठ रहा है, कि आखिर हिस्टीषीटर एवं गांजा तस्कर दीपक चैहान का नाम सभासद के लिए मनोनीत करने को किसने भेजा? क्या इसके लिए अकेले भाजपा जिलाध्यक्ष जिम्मेदार हैं? या फिर वह कोर कमेटी भी जिम्मेदार हैं, जिसने गांजा तस्कर के नाम पर मोहर लगाया? मीडिया में आने के बाद सवाल उठ रहा है, कि क्या जिलाध्यक्ष को इस्तीफा दे देना चाहिए, या फिर उस कोर कमेटी जिसमें वर्तमान/निर्वतमान जिलाध्यक्ष, हारे जीते एमपी एमएलए, जिला प्रभारी मंत्री, जिला पंचायत अध्यक्ष और जिला प्रभारी षामिल है, को इस्तीफा देना चाहिए। नैतिकता तो यही कहता है, कि इस मामले में पूरी कोर कमेटी को इस्तीफा देना चाहिए, क्यों कि इन सभी को गांजा तस्कर को सभासद मनोनीत करने के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है? यह अपनी-अपनी जिम्मेदारी से यह कर नहीं बच सकते हैं, कि जब तक अपराध साबित नहीं हो जाता, तब तक किसी को दोषी नहीं कहा जा सकता, यह कर एक तरह से जिलाध्यक्ष गांजा तस्कर का बचाव कर रहे हैं, और उसे क्लीन चिट दे रहे हैं, ऐसे कथित अपराधी को जिलाध्यक्ष क्लीन चिट देने का प्रयास कर रहे हैं, जिसके बारे...

डीएम’ ने ही दी ‘चर्च’ की ‘जमीन’ पर दुकान ‘निर्माण’ करने की ‘अनुमति’

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‘डीएम’ ने ही दी ‘चर्च’ की ‘जमीन’ पर दुकान ‘निर्माण’ करने की ‘अनुमति’ बस्ती। चर्च की जमीन पर दुकानों का निर्माण करने की अनुमति को लेकर जो सवाल उठ रहे थे, कि ‘क्या डीएम ने निर्माण करने की अनुमति दी? उसका जबाव मिल गया हैं, डीएम ने ही दुकानों के निर्माण करने की अनुमति दी थी। भले ही चाहें वर्तमान डीएम ने नहीं दिया, लेकिन तत्कालीन डीएम ‘नरेंद्र सिंह पटेल’ ने अवष्य दिया। डीएम ने यह अनुमति ‘लाल एसोसिएट’ के पार्टनर निवासी प्लाट नंबर एफ-6 प्लास्टिक काम्पलेक्स षषांक लाल के आवेदन पर आज से दस साल पहले यानि 26 दिसंबर 16 को दी। यह अनुमति ‘अरुण डीन’ के दो जून 16 के पत्र के आधार पर दी गई, जिसमें इस मामले में किसी अन्य कार्रवाही की आवष्यकता नहीं’ बताई गई। कहा गया कि वर्तमान में ‘सेंट जेम्स चर्च’ के परिसर में सड़क की तरफ से चर्च की भूमि की सुरक्षा की दृष्टि से दुकानों का निर्माण ‘लखनउ डायोसेषन टस्ट एसोसिएषन’ के द्वारा कराया जा रहा है। डीएम ने लिखा कि चर्च के परिसर में निर्माण करने तथा मरम्मत आदि करने के लिए टस्ट पर कोई प्रतिबंध नहीं है। यानि टस्ट अगर चाहें तो दुकानों का निर्माण करवा सकता है। लेकिन टस्ट के...

एक ‘डाक्टर’ फर्जी ‘रिपोर्ट’ देता, दूसरा ‘रिपोर्ट’ पर ‘हस्ताक्षर’ नहीं ‘करता’!

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एक ‘डाक्टर’ फर्जी ‘रिपोर्ट’ देता, दूसरा ‘रिपोर्ट’ पर ‘हस्ताक्षर’ नहीं ‘करता’! बस्ती। ‘ओझा डायग्नोसिस्ट सेंटर’ के ‘ओझाजी’ और ‘केयर डायग्नोसिस्ट सेंटर’ के डा. आरके पासवान दोनों एक ही नाव पर सवार हैं। पैसा कमाने के लिए दोनों मरीजों को धोखा दे रहे है। एक फर्जी रिपोर्ट देते हैं, तो दूसरा रिपोर्ट पर हस्ताक्षर नहीं करते। इसका मतलब दोनों गलत हैं, जबकि दोनों के पास रेडियोलाजिस्ट की डिग्री हैं। डा. पासवान के बारे में तो यह समझा जा सकता है, कि यह मेडिकल कालेज में नौकरी करते हैं, लेकिन ओझाजी क्यों नहीं रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करते, यह समझ से परें, जबकि सबसे अधिक मरीज इन्ही दोनों पर विष्वास करता है। डा. पासवान पर तो अधिवक्ता अषोक ओझा ने फर्जी रिपोर्ट देने तक का आरोप लगाया है, इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए एसपी को दरखास्त भी दे चुकें हैं। मामला उपभोक्ता फोरम तक पहुंच चुका है। वकील साहब कहते हैं, कि अगर ऐसा कोई अप्रषिक्षत करता तो एक बार सोचा भी जा सकता, लेकिन अगर कोई जाना-माना रेडियोलाजिस्ट ऐसा करता है, तो वह अक्षम है। कहते हैं, कि कोई मरीज डाक्टर के पास इस लिए जाता और सात-आठ सौ रुपया फीस देता है, ...

‘नायब तहसीलदार’ को ‘अंग्रेजी’ ही नहीं ‘आती’!

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  ‘नायब तहसीलदार’ को ‘अंग्रेजी’ ही नहीं ‘आती’! बस्ती। सरकार को अब उर्दू अनुवादक की तरह अंग्रेजी अनुवादक की भी नियुक्ति करनी चाहिए, क्यों कि राजस्व के अधिकांष अधिकारियों को अग्रेंजी ही नहीं आती हैं, जिसके चलते साहब निर्णय नहीं ले पा रहे है। ऐसा ही एक मामला सदर तहसील का सामने आया हैं, अधिवक्ता प्रदीप चंद्र पांडेय जब नायब तहसीदार के सामने 1905 का अंग्रेजी में लिखा हुआ रजिस्टर्ड बैनामा ले गए, तो नायक साहब ने पहले दिन तो वकील साहब से कुछ नहीं कहा, दूसरे दिन भी कुछ नहीं कहा, लेकिन तीसरे दिन जब वकील साहब ने कहा कि नायब साहब कब आर्डर करेगें, तब हिचकिचाते हुए एनटी साहब ने वकील साहब से कहा कि बुरा न मानिएगा, आप का आर्डर इस लिए नहीं हो पा रहा है, क्यों कि यह अंग्रेजी में लिखा हुआ है, और हमको अंग्रेजी आती नहीं, अगर आप इसका हिंदी अनुवाद करवा कर दे दें तो निर्णय हो जाएगा, वरना ऐसे ही पड़ा रहेगा। मुवक्किल ने वकील साहब को मेहनताना तो दिया, लेकिन हिंदी अनुवाद करने का पैसा नहीं दिया, जिसके चलते साल भर हो गए, कोई निर्णय नहीं हो पाया। वकील साहब जितनी बार एनटी के पास जाते उतनी बार एनटी ही वकील साहब से प...

फर्जी ‘पादरी’ बन ‘करवाया’ सैकड़ों ‘विवाह’

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  फर्जी ‘पादरी’ बन ‘करवाया’ सैकड़ों ‘विवाह’! बस्ती। अभी तक आप लोगों ने फर्जी आईएएस, आईपीएस, डाक्टर, सीएम के पीए, इंकम टैक्स आफिसर बनकर अनेक लोगों को लूटते हुए सुना होगा, लेकिन यह कभी नहीं सुना होगा, कि कोई फर्जी पादरी बनकर विवाह भी करवाता होगा और जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र भी जारी करता होगा। देष में पहली बार फर्जी पादरी होने का खुलासा बस्ती के मीडिया ने किया। जिस कथित फर्जी पादरी का खुलासा हुआ, उसका नाम ‘संजय विंसंेट’ हैं, और यह पिछले लगभग 13 सालों से ‘सेंट जेम्स चर्च’ का पादरी बना हुआ। इसका खुलासा कभी न होता अगर मीडिया चर्च आफ इंडिया ‘सीआईपीबीसी’ और चर्च आफ नार्थ इंडिया ‘सीएनआई’ के असली और नकली को लेकर रिर्पोटिगं न करता। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है, कि जब सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में ही चर्च आफ नार्थ इंडिया ‘सीएनआई’ के गठन को असंवैधानिक मानकर यह निर्णय दे चुका हैं, कि चर्च आफ नार्थ इंडिया ‘सीएनआई’ नामक संस्था की बस्ती सहित पूरे हिंदुस्तान में कोई भी संपत्ति नहीं हैं, तो फिर कैसे इस कथित फर्जी चर्च का संचालन इसके कथित फर्जी प्रापर्टी इंचार्ज अनिल लाल कर रहें हैं, और दुकान बनवाकर बेच रहें ह...

‘बाबी विलिएम’ और ‘सोहन सिंह’ को मिली ‘धमकी

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‘बाबी विलिएम’ और ‘सोहन सिंह’ को मिली ‘धमकी’ बस्ती। चर्च आफ इंडिया ‘सीआईपीबीसी’ के प्रिंसिपल आफिसर एवं यूपी और उत्तराखंड के चर्च के अरबों रुपये की संपत्तियों की देखभाल करने वाले ‘बाबी बिलिएम’ और पत्रकार ‘सोहन सिंह’ को धमकी मिली है। यह धमकी मोबाइल नंबर 6387670066 जो कि किसी ‘टाइगर’ के नाम पंजीकृत हैं, के द्वारा दी गई, कहा गया कि बन रही दुकानों का विरोध करना और लिखना छोड़ दो, नहीं तो इसका अंजाम दोनों को भुगतना पड़ेगा। इसकी षिकायत ‘बाबी विलिएम’ के द्वारा आला अधिकारियों को दर्ज करवा दी गई है। धमकी देने का सीधा सा मतलब यह होता है, कि अवैध कब्जा हो रहा है। षिकायत पर प्रषासन ने निर्माण कार्य के लिए आवष्यक सामग्री को तो रुकवा दिया, लेकिन अंदर ही अंदर दुकान निर्माण की कार्रवाई हो रही है, इसका मतलब यह हुआ कि अवैध कब्जा करने वाले हर हाल में दुकान का निर्माण करना चाहते हैं, ताकि वह उन लोगों को हैंडओवर कर सके, जिनसे एक-एक दुकान के नाम पर लाखों रुपये लिए गए। हालांकि दो-तीन दिन से ठेकेदार के घर विवाह होने के कारण काम रुका हुआ है। धमकी देने वाले को यह नहीं मालूम होगा, कि वह जिस ‘बाबी विलिएम’ को धमकी दे र...