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‘यूं’ तो ‘किसी’ को भी ‘नहीं’ मिलेगा ‘टिकट’?

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 ‘यूं’ तो ‘किसी’ को भी ‘नहीं’ मिलेगा ‘टिकट’? बस्ती। लखनउ से खबर आ रही है, भाजपा के नए अध्यक्ष पंकज चैधरी उन सासंदों और विधायकों के बारे में गहनता से छानबीन कर रहे हैं, जिन विधायकों ने सांसद को हरवाया और जिन सांसदों ने विधायकों को हरवाने में योगदान दिया। अगर खबर सही है, तो जिले से एक भी पूर्व और वर्तमान विधायक को टिकट नहीं मिलेगा, क्यों कि यहां पर तो सांसद और विधायक दोनों पर एक दूसरे को हरवाने का आरोप लग चुका और लग रहा। सिर्फ सांसद और विधायकों पर ही नहीं जिला पंचायत अध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों और प्रमुखों पर भी हरवाने का आरोप लग चुका है। इसी हरवाने के खेल ने जिले में भाजपा को कमजोर और विपक्ष को मजबूत कर दिया। कार्रवाई न होने से भीतरघातियों के हौसले बढ़े हुए है, और अगर इस बार भी कार्रवाई नहीं हुई तो 27 में भाजपा का क्या होगा, इसका अंदाजा लगाना मुस्किल। लेकिन एक बात तो तय हैं, जब तक भीतरघातियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक हरवाने का आरोप लगता रहेगा। यह बात नवागत प्रदेष अध्यक्ष जितनी जल्दी समझ ले पार्टी के लिए उतना ही फायदेमंद रहेगा। भीतरघातियों के चलते पार्टी को एक सांसद ...

क्यों ‘होल सेलर्स’ ने ‘कोडीन’ को सिर्फ ‘होल सेलर्स’ को ही ‘बेचा’?

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 क्यों ‘होल सेलर्स’ ने ‘कोडीन’ को सिर्फ ‘होल सेलर्स’ को ही ‘बेचा’? बस्ती। बार-बार सवाल उठ रहा है, कि नषे का कारोबार करने वाले होलसेलर्स ने कोडीन सीरप क्यों होलसेलर्स को ही बेचा? क्यों नहीं किसी रिटेलर्स को बेचा? जब कि होलसेलर्स को रिटेलर्स को बेचना चाहिए था, इससे किसी बड़ी साजिष का पता चलता है। एसआईटी को इस पर भी ध्यान देना चाहिए, अगर एसआईटी ने इस पर होमवर्क कर लिया तो एक ही झटके में उस सवाल पर से पर्दा उठ जाएगा, जिसमें बार-बार कहा जाता है, कि करोड़ों की खरीद फरोख्त सिर्फ और सिर्फ कागजों में ही हुई, कागजों में माल आया और कागजों में होलसेलर्स को माल बेच दिया। कोडीन सीरप न सिर्फ कगजों में बिका बल्कि उसकी जीएसटी भी जमा हुआ। सवाल उठ रहा है, कि जब माल कागजों में बिका तो होलसेलर्स को क्या लाभ हुआ, और यह लाभ किसने दिया? और कितना दिया? यह भी सही है, कि होलसेलर्स को माल टासंपोर्ट से आया, और इन्होंने जिस भी होलसेलर्स को बेचा उसका भुगतान बैंक से हुआ, लेकिन माल भी कागजों में आया और कागजों में माल भी बेचा गया। चर्चाओं पर अगर नजर डाले तो एक षीषी पर होलसेलर्स को कमीषन के रुप में 100 से 150 रुपया म...

नेताजी, ‘जाति’ की ‘आग’ में मत ‘झोंकिए’, नहीं ‘तो’ जल जाएगा ‘जिला’!

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 नेताजी, ‘जाति’ की ‘आग’ में मत ‘झोंकिए’, नहीं ‘तो’ जल जाएगा ‘जिला’! -पार्टिंयां दलीय निष्ठा और दलीय विचार के स्थान पर जातीय निष्ठा को बढ़ावा दे रही, जातीय आधार पर मदद की जा रही -अब नेता अपनी जाति की टीम बनाता है, जातीय नेता बनकर उभरना चाहते, पार्टियां उसी आधार पर टिकट भी देती -दयाषंकर मिश्र ने जब भाजपा छोड़ा और बसपा में षामिल हुए तो ब्राहृमण लोग उनके साथ में हो लिए, जिसके चलते हरीष द्विवेदी की हार हुई -पार्टियां नेता तराषने और गढ़ने के बजाए जातीय नेता खोज रही, अगर कोई जातीय नेता है, और उसके पास धन और बल दोनों हैं, तो पार्टियां ऐसे लोगों का षानदार वेलकम करती -वहीं पर अगर राजेंद्रनाथ तिवारी और राजमणि पांडेय जैसा कोई नेता है, तो उसे पार्टियां किनारे लगा देती, क्यों कि यह लोग अच्छा नेता तो बन सकते हैं, लेकिन अच्छा मैनेजर नहीं बन सकते -अगर आप जातीय अधार पर नेता और आप के पास धन और बल तो आइए टिकट ले जाइए, वरना दरी बिछाइए, पार्टियां नेता नहीं बल्कि एक ऐसा मैनेजर तलाषती है, जो धन कमवा सके और खुद कमा सके -उदाहरण के लिए गिल्लम चौधरी को लिया जा सकता है, इन्हें इस लिए कुर्सी पर नहीं बैठाया क्यों क...

बिना ‘मां-बाप’ के ‘बन’ गए ‘1.33’ लाख ‘वोटर्स’

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बिना ‘मां-बाप’ के ‘बन’ गए ‘1.33’ लाख ‘वोटर्स’ बस्ती। चौकिएं मत! इसे आप लोग दुनिया का आठंवा अजूबा भी कह सकते हैं, कि जिले में एम लाख 33 हजार से अधिक ऐसे वोटर्स हैं, जिनके मां-बाप का पता ही नहीं, यानि यह सभी बिना मां-बाप के वोटर्स बन गए। हैं, न हैरान और चौकाने वाली बात। जो लोग एसआईआर का विरोध कर रहे हैं, और कर रहे थे, और जिनकी समझ में एसआईआर का मतलब नहीं आ रहा था, अब उन्हें समझ में आ गया होगा, कि यह एसआईआर किसी विषेष वर्ग या फिर विरोधी पार्टी के मतदाताओं का नाम काटने के लिए नहीें बल्कि फर्जी मतदाताओं की छटनी करने के लिए कितना जरुरी था। अगर एसआईआर नहीं हुआ होता तो बस्ती के लोगों को यह पता ही नहीं चलता कि उनके जिले में एक लाख 32 हजार 292 ऐसे मतदाता है, जिनके मां-बाप का पता ही नहीं, यानि यह सभी बिना मां-बाप के मतदाता बन गए, कैसे बन गए? और इनके माता-पिता कहां हैं? यह जानने और उन्हें बीएलओ के सामने प्रस्तुत करने के लिए मतदाताओं को नोटिस भेजी जा रही है, अगर इन लोगों ने अपने मां-बाप को प्रस्तुत नहीं किया तो सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सकता है। यह लोग एसआईआर से पहले तक वोट भी करते रहे। यह भी सही...

भ्रष्टाचार’ में ‘बहादुरपुर’ बना नंबर वन ‘ब्लॉक’

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 ‘भ्रष्टाचार’ में ‘बहादुरपुर’ बना नंबर वन ‘ब्लॉक’ बस्ती। जिस बहादुरपुर ब्लॉक को तीन-तीन नकली प्रमुख संचालन करेगें उस ब्लॉक को नंबर वन बनने से कौन रोक पाएगा? कभी नंबर वन का खिताब एक और नकली प्रमुख वाले ब्लॉक बनकटी के नाम रहा। इस ब्लॉक ने मनरेगा में 24-25 में 56 करोड़ से अधिक खर्च कर पूरे देष में एक नया रिकार्ड बनाया था, इस बार यह रिकार्ड नकली प्रमुखों से भरमार बहादुरपुर 25-26 में बनाने जा रहा है। 17 दिसंबर 25 तक यह ब्लॉक मनरेगा में 25.95 करोड़ खर्च कर चुका, इसमें 17.28 करोड़ अकुषल श्रमिकों पर, एक करोड़ 31 लाख कुषल श्रमिकों पर और छह करोड़ 55 लाख मटेरिएल पर खर्च किया। इस ब्लॉक में 24-25 में 41.43 करोड़ और 25-26 सहित कुल लगभग 68 करोड़ खर्च हो चुका, लेकिन जानकर हैरानी होगी कि एक भी ग्राम पंचायत माडल नहीं बना, यानि जो 68 करोड़ खर्च हुआ, अगर उसमें से 50 फीसद भी ग्राम पंचायतों के विकास पर खर्च कर दिया होता तो ब्लॉक के आधे से अधिक ग्राम पंचायतें माडल बन गई होती। जिन लोगों का मकसद ही भ्रष्टाचार कर अधिक से अधिक धन कमाने का रहता है, वह विकास और समाज के बारे में नहीं सोच सकता। यह ऐसे लोग जो सिर्फ किसी ...

संजयजी’ मत उड़िएः गिर ‘जाएगें’ तो, ‘उठ’ नहीं ‘पाइएगें’!

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‘संजयजी’ मत उड़िएः गिर ‘जाएगें’ तो, ‘उठ’ नहीं ‘पाएगें’! -पत्रकार सोहन सिंह के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज करवा इन्होंने अपने उड़ने का सबूत दे दिया, यह पहले भी झूठ बोलते हैं, और आज भी झूठ बोल रहें, खबर प्रकाषित होने से पहले और न बाद में पत्रकार की न तो इनसे और न ही इनके लोगों से न तो फोन से बात हुई और न कभी मुलाकातही हुई, तो कब पत्रकार ने संजय चौधरी के विरुद्व अपषब्द व गाली का प्रयोग किया और यह धमकी दिया कि मैं संजय चौधरी का राजनैतिक कैरियर बर्बाद कर दूंगा -जब अभी से यह प्रदेष अध्यक्ष के नाम का सहारा लेकर और फर्जी एफआईआर दर्ज करवा रहें, उससे इनकी छवि तो धूमिल नहीं होगी, अलबत्ता पंकज चौधरी की छवि अवष्य यह धूमिल कर देंगें, इसी लिए प्रदेष अध्यक्ष को यह सलाह दी जा रही है, कि जितनी जल्दी हो सके संजय चौधरी जैसे लोगों से पीछा छुड़ा ले -जो इन्होंने गलत बयानी करके पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाया, उसे लेकर पूरा मीडिया और जिले के लोग इनके कृत्य की निंदा कर रहे हैं, और कह रहे हैं, कि कौन नहीं संजय चौधरी और उनके कारोबार के बारे में जानता -पत्रकार का दावा और संजय चौधरी को खुली चुनौती है, कि अगर उन्होंने...