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संजय चैधरी’ को ‘इस’ लिए ‘टेन प्लस’ दिया, ताकि ‘परिवार’ न ‘टूटे’!

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‘संजय चैधरी’ को ‘इस’ लिए ‘टेन प्लस’ दिया, ताकि ‘परिवार’ न ‘टूटे’! बस्ती। भ्रष्टाचार के खिलाफ निरंतर लड़ाई लड़ने वाले सरदार कुलवेंद्र सिंह मजहबी से जब यह पूछा गया कि जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चैधरी के अब तक के कार्यकाल के लिए आप ने टेन प्लस नंबर क्यों दिया? कहने लगे कि अगर वह टेन प्लस नंबर नहीं देते तो उनका परिवार विघटित हो सकता, क्यों कि ‘संजय चैधरी’ हमारे बच्चों के ‘मामा’ है। बहुत कम लोगों को यह नहीं मालूम होगा कि पप्पू सरदार के बच्चे संजय चैधरी के मामा है। दो दिन पहले सोषल मीडिया पर जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चैधरी का तीन फोटो लगाकर लोगों से यह पूछा गया, कि अब तक अध्यक्ष के कार्यकाल के लिए 10 में से कितना नंबर देगें। इस पर किसी ने टेन प्लस तो किसी ने जीरो नंबर दिया। संजय चैधरी के लिए खास बात यह हैं कि अगर सौ लोगों ने अपनी राय दी होगी तो उसमें आधे से अधिक टेन प्लस नंबर दिया, यह अलग बात हैं, टेन प्लस देने वालों में अधिकांष लोग उन्हीं के ही बिरादरी के है। पहले हम आप लोगों को टेन प्लस से अधिक देने वालों के बारे में बताता हूं। सबसे अधिक सुन चैधरी ने एक लाख नंबर दिया। राम सुभावन वर्मा, पवन चैधर...

पहले ‘बीडीओ’ बन ‘लूटा’, अब ‘जेडीसी’ बन ‘बहादुरपुर’ को ‘लूट’ रहें!

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  पहले ‘बीडीओ’ बन ‘लूटा’, अब ‘जेडीसी’ बन ‘बहादुरपुर’ को ‘लूट’ रहें! बस्ती। अगर आप लोगों को याद नहीं तो हम आप को बता दंे कि 10 जुलाई 23 को जिले में जिला विकास अधिकारी के रुप में निर्मल द्विवेदी का आगमन हुआ। यह पहले ऐसी डीडीओ रहे, जिन्होंने जिले में कदम रखते ही ऐसा ईमानदारी का एचएमवी रिकार्ड पूरे जिले में बजाया कि जैसे इनके जैसा ईमानदार अधिकारी कोई पैदा ही नहीं हुआ। इनकी सारी ईमानदारी उस समय धरी की धरी रह गई, जब इन्होंने मात्र कुछ ही दिनों में 45 करोड़ का घोटाला कर डाला। इनकी ईमानदारी देख तत्कालीन डीएम प्रियंका निरंजन और सीडीओ जयदेव सीएस ने बहादुरपुर के भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए विषेष रुप से बहादुरपुर का प्रभारी बीडीओ बनाकर भेजा था। डीएम और सीडीओ सहित पूरे जिले के लोगों का भ्रम उस समय टूटा जब पता चला कि द्विवेदीजी ने बहादुरपुर जाते ही मनरेगा में 45 करोड़ की परियोजना की स्वीकृति 20 से 25 फीसद कमीषन लेकर अनियमित रुप से दे दी, खूब हंगामा हुआ, मीडियाबाजी भी हुई। जांच भी हुई, दोषी भी पाए गए, लेकिन अधिकारियों ने इनका कैरियर बर्बाद न हो इस लिए इन...

आदर्श नगर पंचायत’ और ‘15वां वित्त’ के ‘करोड़ों’ पर ‘भी’ हाथ ‘फेरा’!

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‘आदर्श नगर पंचायत’ और ‘15वां वित्त’ के ‘करोड़ों’ पर ‘भी’ हाथ ‘फेरा’! बस्ती। जिले के लोगों ने देखा कि किस तरह भाजपा के नेताओं ने नीजि लाभ के लिए ऐसे-ऐसे लोगों को जिला पंचायत अध्यक्ष़्ा, नगर पंचायत का चेयरमैन और ब्लाॅकों का प्रमुख बनाया, जिन्होंने पार्टी, सरकार और जनता तीनों को धोखा दिया। हालांकि इसका खामियाजा कुर्सी पर बैठाने वालों को और पार्टी दोनों को भी भुगतना पड़ा। ऐसा भी नहीं कि यह सबकुछ अंजाने में हुआ, बल्कि सोची समझी रणनीति के तहत हुआ। वरना नेताजी के चालक को चेयरमैन और चपरासी को ब्लाॅक प्रमुख न बनाते। जाहिर सी बात हैं, कि अगर कोई काम नीजि लाभ के लिए किया जाता है, तो उसका खामियाजा सभी को भुगतना पड़ता है। जिस तरह भाजपा के आकाओं ने पांच साल के लिए खानेपीने का इंतजाम किया, उसी का नतीजा है, कि आज सबसे अधिक भाजपा षासित जिला पंचायत, नगर पंचायतों और क्षेत्र पंचायतों में ही भ्रष्टाचार की गंगा बह रही है। अगर भाजपा के सांसद और विधायकों ने मिलकर जिला पंचायत अध्यक्ष न बनाया होता तो जिले में भ्रष्टाचार की नींव न पड़ती, और न तब किसी का चालक नगर पंचायत का चेयरमैन बन पाता और न कोई चपरासी ही प्रमुख की...

गायघाट’ में ‘नेताजी’ के चालक ‘चेयरमैन’ ने बनाया ‘भ्रष्टाचार’ का ‘रिकार्ड’!

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‘गायघाट’ में ‘नेताजी’ के चालक ‘चेयरमैन’ ने बनाया ‘भ्रष्टाचार’ का ‘रिकार्ड’! बस्ती। जो भ्रष्टाचार का खेल बड़े-बड़े भ्रष्टाचारी नहीं खेल सके, उसे कल का चालक से गायघाट नगर पंचायत के चेयरमैन बने ने खेल डाला। इन्होंने षतरंज की ऐसी चाल चली कि अन्य बड़े-बड़े भ्रष्टाचारी चेयरमैन चारों खाने चित्त हो गए। ध्यान देने वाली यह है, कि अगर किसी नगर पंचायत या नगर पालिका में कोई भ्रष्टाचार होता है, तो उसके लिए ईओ और चेयरमैन को ही दोषी माना जाता है, क्यों कि भुगतान पर दोनों के हस्ताक्षर होते है। इन्हीं दोनों के हस्ताक्षर से प्रदेष के 200 नगर पालिका और 545 नगर पंचायतों को राज्य और 15वां वित्त आयोग से हर माह नौ अरब 95 करोड़ 41 लाख से अधिक मिले बजट का भुगतान होता है। इसमें बस्ती नगर पालिका को दो करोड़ 50 लाख 62 हजार और नगर पंचायत बभनान को 35.98 लाख, बनकटी को 46.21 लाख, हर्रैया को 44.34 लाख, भानपुर को सबसे अधिक 65.36 लाख, गायघाट को 49.02 लाख, रुधौली को 40.50 लाख, कप्तानगंज को 46.55 लाख, मुंडेरवा को 40.70 लाख, गनेषपुर को 47.63 लाख और नगर बाजार नगर पंचायत को 42.99 लाख सहित कुल सात करोड़ 90 लाख 90 हजार से अधिक हर माह ...

वनली’ थैंक्स टू ‘हरीष द्विवेदी’, ‘विवेकानंद मिश्र’ और ‘वरुण सिंह’ नाट टू ‘अजय सिंह’!

Ll ‘वनली’ थैंक्स टू ‘हरीष द्विवेदी’, ‘विवेकानंद मिश्र’ और ‘वरुण सिंह’ नाट टू ‘अजय सिंह’! बस्ती। अगर कोई कथित गांजा और स्मैक तस्कर सभासद मनोनीत होने पर पूर्व सांसद हरीष द्विवेदी, जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्र और वरुण सिंह का इस लिए आभार जताता है, कि इन लोगों के प्रयास से ही उसे सभासद बनाया गया, तो समझा जा सकता हैं, कि पार्टी के कत्र्ताधत्र्ता पार्टी को किस दिषा में ले जा रहे हंै। जिस स्थानीय विधायक अजय सिंह का आभार जताना चाहिए, उसे नजरंदाज करके यह साबित करने का प्रयास किया है, कि उनका मनोनयन स्थानीय विधायक के चलते नहीं बल्कि पूर्व सांसद हरीष द्विवेदी, जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्र और वरुण सिंह के चलते हुआ। स्थानीय विधायक अजय सिंह का आभार न जताना यह साबित करता हैं, कि गांजा और तस्कर के नाम पर विधायकजी ने विरोध जताया होगा, और इसी के चलते गांजा तस्कर स्थानीय विधायक को अपना विरोधी मानता हो। पूर्व सांसद और जिलाध्यक्ष का आभार जताना तो समझा जा सकता है, लेकिन वरुण सिंह का आभार जताना क्षेत्र के लोगों को समझ में नहीं आ रहा है। सवाल उठ रहा है, कि मनोनयन में इनकी क्या भूमिका हो सकती हैं? क्षेत्र के लोगों...

आज’ का ‘गांजा-‘स्मैक’ तस्कर, ‘कल’ का ‘सांसद’, ‘विधायक’ और ‘प्रमुख’!

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  ‘आज’ का ‘गांजा-‘स्मैक’ तस्कर, ‘कल’ का ‘सांसद’, ‘विधायक’ और ‘प्रमुख’! बस्ती। भाजपा के लोगों को गन्ना माफिया, गांजा और स्मैक के तस्करों को चेयरमैन एवं सभासद बनाने में कोई परहेज नहीं हैं, बस इनकी जेबें भरनी चाहिए। भाजपा के लोगों को तो छुटभैया और आयातित नेताओं के मनई, तनई, हरवाह, चरवाह, चालक और चपरासी को नगर पंचायतों का चेयरमैन और प्रमुख बनाने से भी परहेज नहीं हैं, इन्हें परहेज हैं, तो सिर्फ उन खाटी कार्यकत्र्ताओं से जिन्होंने अपनी जवानी को भाजपा के लिए दरी बिछाने और झंडा ढ़ोने में समर्पित कर दिया। कहा जाता है, कि जब तक भाजपा के स्थानीय संगठन के लोग अपने कार्यकत्र्ता और पार्टी के प्रति ईमानदार नहीं होगें, तब तक गन्ना माफिया, गांजा और स्मैक तस्करों को कुर्सी मिलती रहेगी। अगर भाजपा इनमें किसी को कल को सांसद, विधायक या फिर प्रमुख बना दे तो चैकिएगा मत। क्यों कि नेता ऐसे लोगों को ही टिकट देने की पैरवी करते हैं, या फिर उनका नाम भेजते हैं। इन्हें इस बात से कोई लेना-देना नहीं रहता कि पार्टी के कार्यकत्र्ता इससे कितने नाराज और हताष होगें, और पार्टी की छवि कितनी खराब होगी? वोटर क्या सोचेगें, तक...